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Saturday, November 18, 2017

द्वितीय मलंगिया महोत्सव-२०१७

मैथिली केर बहुचर्चित नाटककार महेन्द्र मलंगिया पर केन्द्रित दू-दिवसीय मलंगिया महोत्सवक आयोजन क्रमशः ११ एवं १२ नवम्बर,२०१७ क' मेघदूत परिसर,रविन्द्र भवन,मंडी हाउसमे सफलतापूर्वक संपन्न भेल. मलंगिया फाउंडेशन,दिल्ली द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मैथिली साहित्य एवं सांस्कृतिक उत्सव मे भारत समेत नेपालक प्रसिद्ध रंगकर्मी ओ साहित्यकार लोकनिक सहभागिता रहल. दू दिना ई महोत्सव कुल आठ सत्र मे विभाजित छल.

११ नवम्बर,२०१७ क' पहिल सत्र मे मिथिलाक लोक साहित्य एवं लोक संस्कृतिविषय पर संगोष्ठी केर आयोजन कएल गेल जाहिमे पूर्वांचल विश्वविद्यालय,काठमांडू,नेपाल केर पूर्व उप-कुलपति डॉ. रामावतार यादव एवं प्रसिद्ध मानवशास्त्री ओ ब्रेनकोठी संस्था केर अध्यक्ष डॉ. कैलाश कुमार मिश्र अपन महत्त्वपूर्ण वक्तव्य देलनि. पहिल सत्रक एहि संगोष्ठी केर अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शेफालिका वर्मा एवं समन्वयन केलनि जे.एन.यू केर प्रोफेसर डॉ. देवशंकर नवीन.

दोसर सत्र मे नेपाल-भारत सांस्कृतिक सम्बन्ध आ मलंगियाविषय पर संगोष्ठी मे काठमाण्डू,नेपाल सँ आयल वरिष्ठ साहित्यकार,गीतकार एवं रेडियो संचारकर्मी धीरेन्द्र प्रेमर्षि, शिक्षा निदेशालय,दिल्ली सरकार मे कार्यरत डॉ. अजय कुमार झा, जनकपुर,नेपाल सँ वरिष्ठ रंगकर्मी,संगीतकार एवं गायक सुनील मल्लिक एवं सूचना मंत्रालय,भारत सरकारक योजना पत्रिका केर संपादक रितेश पाठक अपन महत्त्वपूर्ण वक्तव्य देलनि. दोसर सत्रक संगोष्ठीक अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गंगेश गुँजन एवं समन्वयन केलनि वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अतुल कुमार ठाकुर.

तेसर सत्र मे बारहमासा,दिल्ली केर प्रस्तुति एवं महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक देह पर कोठी खसा दियकेर मंचन कएल गेल, निर्देशन केलनि मुकेश झा.

पहिल दिनक चारिम आ अंतिम सत्र मे मलंगिया फाउन्डेशन,दिल्ली केर प्रस्तुति एवं महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक ओ खाली मुँह देखै छैकेर मंचन कएल गेल, निर्देशन केलनि मलंगिया फाउंडेशन केर अध्यक्ष ऋषि कुमार झा मलंगिया’.

महोत्सवक दोसर आ अंतिम दिन १२ नवम्बर क' पहिल सत्र मे महेन्द्र मलंगियाक नाट्यभाषाविषय पर संगोष्ठी केर मुख्य वक्ता छलाह पटना सँ आयल रजिस्ट्रार गोपेश चौधरी, सहरसा सँ वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक किसलय कृष्ण एवं दिल्ली सँ युवा कवि लेखक डॉ. अरुणाभ सौरभ. पहिल सत्रक एहि संगोष्ठीक अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीरेन्द्र मल्लिक एवं समन्वयन केलनि वरिष्ठ रंगकर्मी काश्यप कमल.

दोसर सत्र मे महेन्द्र मलंगिया नाटकक निर्देशन क्षेत्रविषय पर संगोष्ठी के मुख्य वक्ता छलाह दिल्ली सँ वरिष्ठ अध्येतावृत्ति एवं मैलोरंग संस्था के निदेशक डॉ. प्रकाश चन्द्र झा एवं पटना सँ आयल वरिष्ठ रंगकर्मी किशोर केशव. दोसर सत्रक एहि संगोष्ठीक अध्यक्षता संगीत नाटक अकादमी के उप-सचिव सुमन कुमार एवं समन्वयन केलनि फोर्ड फाउंडेशन सँ फेलोशिप रंगकर्मी अभिषेक देव नारायण.

तेसर सत्र मे अछिन्जल,मधुबनी केर प्रस्तुति एवं महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक हाय रे हमर घरवालीकेर मंचन कएल गेल, निर्देशन केलनि अभिषेक देव नारायण.

चारिम आ अंतिम सत्र मे भंगिमा,पटना केर प्रस्तुति एवं महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक काठक लोककेर मंचन कएल गेल, निर्देशन केलनि कुमार गगन.

नाटक एवं संगोष्ठी केर विभिन्न सत्रक मंच सञ्चालन केलनि कुमकुम झा, किशोर केशव,मुकेश झा, ऋषि मलंगिया एवं मनीष झा बौआभाइ’. प्रसिद्ध गायक सुनील मल्लिक द्वारा गाओल विद्यापति रचित गीत "बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे" केर संग महोत्सवक विधिवत समापन भेल।


संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार एवं बीपी कोइराला फाउंडेशन,भारत नेपाल प्रतिष्ठान केर सौजन्य सँ आयोजित एहि महोत्सवक सहयोगी संस्थाक रूप मे मलंगिया आर्ट्स,संगीत नाटक अकादमी,दिल्ली एवं अछिन्जल,मधुबनी केर महत्त्वपूर्ण योगदान रहल.

Sunday, November 05, 2017

अछिञ्जल : विलुप्त होइत लोककलाकें पुनर्स्थापित करबाक एक पवित्र संकल्प

वर्तमान मे लोककला एवं संस्कृतिक प्रति चिंता ओ चिंतन सबेसी एहि पर क्रियान्वयन केर आवश्यकता छैक. ग्रामीण परिवेश जतई बाँचि सकैत अछि ठीक ओत्तहि एकर विपरीत बाहरी अपसांस्कृतिक बसात सपरिवेश दिनानुदिन दूषित भरहल अछि. सोशल नेटवर्कक माध्यम सविकृत होइत संस्कृतिकें सहजहि अकानल जा सकैत अछि. मनोरंजन कें रूपमे अधिकाधिक गाममे कोनो पूजा वा अवसर विशेष पर एखन ऑर्केस्ट्रा (भोजपुरी,हिन्दी गीत पर अश्लील नाच प्रदर्शन)साधनकें प्राथमिकताक संग स्वीकार्यता भेटि रहल छै, जे सांस्कृतिक कैंसर कें रूपमे तीव्रता सअपन विस्तार करहल अछि. ओ समय छल जहिया ऑर्केस्ट्राक मंच सबेसी-स’-बेसी गायक द्वारा गीत गाबिकसुनाओल जाइत छल, मुदा एखन जाहि प्रकारक रंग रूपकें ऑर्केस्ट्रा कहिकप्रचारित कएल जा रहल अछि ताहि स्थितिकें कहियो थियेटर कें रूप मे जानल जाइत छल. थियेटरक एहि दुष्प्रभाव सवंचित रखबा लेल साकांक्ष अभिभावक अपन धिया-पुताकें दूर रखबाक प्रयास करैत छलाह. थियेटरक अस्सल परिचय तहिया भेटल जहिया दिल्लीमे संगीत नाटक अकादमी (एन.एस.डी.) केर विभिन्न कार्यक्रम मे अबरजात बढ़ल.

लोककला एवं संस्कृति संरक्षण हेतु बहरबैया लोक किछु बेसिए साकांक्ष देखल जाइ छथि. कला एवं संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा लोककला संरक्षण हेतु विभिन्न योजनान्तर्गत एकर बढ़ाबा देल जाइत रहल अछि. सामाजिक-संस्कृतिक संस्था अछिञ्जलएवं मधुबनी जिलाक नीलमणि सांस्कृतिक परिषद मुक्ताकाश मंच, महादेव मठ, भटसिमरिकेर संयुक्त प्रयास ओ भारत सरकारक संस्कृति मंत्रालयक सहयोग सभटसिमरि,मधुबनी   मे तीन दिनक  राष्ट्रीय लोक उत्सवक आयोजन 27-29 मार्च 2017 धरि कएल गेल . एहि उत्सव मे छ: टा राज्यक 27 टा प्रस्तुति दल, लगभग 360 कलाकार, देश भरिक 52 टा लोककलाक प्रस्तुति भेल. तीन दिनक अहि आयोजन मे लगभग 48 घंटाक प्रस्तुति भेल. एहि ऐतिहासिक आयोजनमे समाजक विभिन्न महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वक उपस्थिति रहल. प्रथम दिवसीय कार्यक्रमक प्रारम्भ हेबा सपूर्व बिहार सरकार मे पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत द्वारा एकर विधिवत उद्घाटन कएल गेल. मुख्य अतिथिक रूप मे मैथिलीक सुप्रसिद्ध नाटककार एवं लोककला मर्मज्ञ महेन्द्र मलंगियाक संग विशिष्ट अतिथिक रूपमे बिहार सरकारक पूर्व मंत्री रामलखन राम रमण केर गरिमामय उपस्थिति रहल.

पहिल दिन २७ सितम्बर,२०१७ (बुधदिन) कार्यक्रमक विधिवत उद्घाटनक पश्चात निम्न कार्यक्रमक प्रस्तुति भेल :
o वेद मंत्रोच्चारण
o आवाहन संगीत-रसनचौकी वादन, अछिञ्जल, मधुबनी
o पारम्परिक गीत नाद, गोबिन्द मिश्रा एवं समूह, मधुबनी
o छऊ नृत्य, झारखंड 
o डाक बचन, अजित झा एवं समूह, दिल्ली
o महाबली, लेखक सह निर्देशक -नरेंद्र बहादुर सिंह, अंगराग, मध्य प्रदेश
o कबीरा गायन, अरुण सागर, सदगुरु आरोग्य निदान संस्थान, बरहारा,मधुबनी    
o मैथिली लोक व विद्यापति संगीत, विजय मिश्रा एवं समूह, दिल्ली
o सलहेस नाच, जय कुमार यादव एवं समूह, बाबूबरही,मधुबनी 

दोसर दिन २८ सितम्बर,२०१७ (वृहस्पतिदिन) निम्न कार्यक्रमक प्रस्तुति भेल :
o रसनचौकी वादन, महेन्द्र पासवान एवं समूह,मधुबनी
o कबीरपंथी गायन, पुण्यदेव पासवान एवं समूह, रतिकर, राजनगर,मधुबनी 
o सलहेस गाथा गायन, रामनारायण राम, मधुबनी
o विद्यापति संगीत परम्परा, राधा मोहन मिश्रा एवं समूह, मधुबनी
o जादू का खेल, जादूगर विनोद, हाजीपुर 
o ललका पाग मैथिली एकल नाट्य प्रस्तुति, ज्योति झा, जय जोहार फाउण्डेशन, पश्चिम बंगाल
तेसर आ अंतिम दिन २९ सितम्बर,२०१७ (शुक्रदिन) निम्न कार्यक्रमक प्रस्तुति कएल भेल :

o मैथिली एकल अभिनय भोट”, काश्यप कमल, भटसिमरि,मधुबनी
o हिन्दी नाटक महाभारत एक्सटेंशन, निर्देशक-इंद्रभूषण रमण,इप्टा, मधुबनी  
o लोक नृत्य जट जटिन, झिझिया, डोमकछ नृत्य संरचना-प्रभात कुमार,मधुबनी   
o लोक नाट्य चन्दनुआ, इंद्रवती नाट्य समिति, सीधी, मध्य प्रदेश

दोसर दिन २८ सितम्बर,२०१७ (वृहस्पतिदिन) रुद्रपुर,मधुबनी मे सेहो समानांतर उत्सवक रूपमे निम्न कार्यक्रमक प्रस्तुति भेल :
o रसनचौकी वादन, महेन्द्र पासवान एवं समूह,मधुबनी
o कबीरपंथी गायन, पुण्यदेव पासवान एवं समूह, रतिकर, राजनगर,मधुबनी 
o सलहेस गाथा गायन, रामनारायण राम, मधुबनी
o विद्यापति संगीत परम्परा, राधा मोहन मिश्रा एवं समूह, मधुबनी
o जादू का खेल, जादूगर विनोद, हाजीपुर 
o ललका पाग मैथिली एकल नाट्य प्रस्तुति, ज्योति झा, जय जोहार फाउण्डेशन, पश्चिम बंगाल
o मैथिली एकल अभिनय भोट”, काश्यप कमल, भटसिमरि,मधुबनी
o हिन्दी नाटक महाभारत एक्सटेंशन, निर्देशक-इंद्रभूषण रमण,इप्टा, मधुबनी  
o लोक नृत्य जट जटिन, झिझिया, डोमकछ नृत्य संरचना-प्रभात कुमार,मधुबनी   
o लोक नाट्य चन्दनुआ, इंद्रवती नाट्य समिति, सीधी, मध्य प्रदेश

उपरोक्त त्रिदिवसीय उत्सवक सफलताक सभसपहिल श्रेय जाइत अछि ओहि स्थानीय समाजकें जे वर्तमानमे गाम-गाम प्रदूषित होइत वातावरणक मध्य एहि प्रकारक आयोजनकें स्वीकार्यता प्रदान केलनि. इतिहास साक्ष्य रहल अछि जे समाजक किछु छद्म तत्त्व द्वारा राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाक सिद्धि हेतु समाजमे वैमनस्यता ओ फूटक जड़िमे हिन्दू-मुस्लिम, बाभन-सोल्हकन, दलित-सवर्ण आदिक बीया बौग कसमय-समय पर ओकरा विभिन्न साम्प्रदायिक ओ प्रान्तीय रंग दैत पटौनीकें काज करैत अछि. कार्यक्रमक रूप रेखा पर जध्यान देल जाए तदेखल जा सकैत अछि जे सभ वर्गक अभिरुचिक ध्यान रखैत विभिन्न प्रस्तुति आयोजित कएल गेल छल.

o कारुख महाराय, ललित दास एवं समूह, खजौली,मधुबनी 
o महाराय/ओढनी गायन, बौकू मलिक,मधुबनी  
o मिथिरंग तरंग, मैथिल नारीक उमंग, निर्देशन-अभिषेक देवनारायण, नीलमणि सांस्कृतिक परिषद, भटसिमरि,मधुबनी  
o लोक नृत्य झिझिया, लोक कला कुम्भ, मधुबनी
o लोक नृत्य डांडिया, विक्रांत कुमार, मधुबनी 
o कबीरा गायन, कबीर सेवा संस्थान, भटसिमरि, मधुबनी  
o आल्हा गाथा गायन, राम नारायण यादव,मधुबनी 
o मैथिली लोक गीत, सोनी झा एवं समूह, दिल्ली  
o नाटक एकलव्य, निर्देशक-नीरज कुन्देर, इंद्रवती नाट्य समिति, सीधी, मध्य प्रदेश
o आधुनिक मैथिली लोक गीत, लाल मिश्रा, दरभंगा
o बिदेसिया  लोक नाट्य, प्रस्तुति भिखारी ठाकुर रंगमण्डल प्रशिक्षण एवं शोध केन्द्र, आरा

समाजक एकहक व्यक्तिकें जहिया ई आत्मबोध भजेतैक जे हमर की कर्तव्य आ अधिकार अछि, विकृतता तसमूल नष्ट हेब्बे करतै संगहि भाषा ओ संस्कृति सेहो यथोचित उर्ध्वमुखी होइत रहतैक.
   
एहि कार्यक्रमक रूप रेखा आ क्रियान्वयन मे उक्त दुहू संस्था एवं समूहक जे योगदान अछि ओ निश्चितरूप सस्तुत्य अछि आ ई कहबामे कनेको असोकर्ज नहि होइछ जे जलोककला प्रस्तुतिक जे विभिन्न रूप (वेरायटी) अछि ताहि पर लोक अभिरुचिक अनुसारे जसंस्कृतिकर्मी लोकनि गंभीर भकाज करथि तएक अंतिम उमेद एखनौं बाँचल अछि अन्यथा निकट भविष्यमे अन्यान्य भाषा जेंका विलुप्त हेबा सकेओ रोकि नहि सकत. समाजक जे वर्तमान मानसिक स्थिति अछि ओहिमे कोनो संस्कृतिकर्मी हेतु ई बड्ड पैघ चुनौती अछि आ एहने सन चुनौतीकें स्वीकारैत एहि तरहक कार्यक्रमक परिकल्पना हेतु रंगकर्मी काश्यप कमल, अभिषेक देवनारायण,बजरंग मंडल,डॉ. भारती मेहता,नबोनाथ झा,यदुवीर यादव,अजीत झा एवं हिनक समूहक एकहक सदस्य साधुवादक पात्र छथि.


प्रकाशित मिथिला मिरर/अंक- दिसम्बर-२०१७

Sunday, October 15, 2017

नव आस, नव विश्वास नेने आबि रहल अछि फिल्म 'प्रेमक बसात'

मैथिली फिल्म उद्योग एखन धरि प्रयोग मात्र करैत रहल अछि. बेर आबि गेल अछि जे एकरा व्यावसायिक मान्यता भेटै आ एहि उद्योग सप्रत्यक्ष रूपे जूड़ल कलाकार ओ तकनीकी टीम कें रोजगारक अवसर प्राप्त होइन. मैथिली फिल्म ओ रंगमंचक अभिनेता अनिल मिश्रा एहि संदर्भ मे कएक टा मंच सबाजल छथि जे मैथिली फिल्म उद्योग कें भाइ-भतीजावाद समुक्त रखबाक बेगरता छैक आ तखने जा कई व्यावसायिक रूपे स्थापित हएत. हुनक ई अपील एखन शूटिंग भरहल फिल्म प्रेमक बसातपर लागू होइत नजरि आबि रहल अछि.

फिल्मक निर्माता कुणाल ठाकुर सप्राप्त जानकारी अनुसार एहि फिल्मक यूनिट मे कलाकार सतकनीकी टीम पूर्ण व्यावसायिक अछि आ मैथिली फिल्म उद्योगकें स्थापित करबामे एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निमाहत से आश्वस्त छी. दर्शक मध्य जे मैथिली फिल्मक प्रति उदासीनता अछि ओहि तमाम आवश्यकताकें पूर करबाक प्रयास कएल जा रहल अछि.    

फिल्म प्रेमक बसातकेर निर्माता-वेदान्त झा एवं कुणाल ठाकुर, कथा-पटकथा-संवाद-लेखक एवं निर्देशक-रूपक शरर,अभिनय-पियूष कर्ण,रैना बनर्जी,गोविन्द पाठक,मोना रे,एस.सी.मिश्रा,राकेश,प्रज्ञा झा,शैल झा,कल्पना मिश्रा,संजना,आशुतोष सागर,आकाशदीप,राजीव झा,प्रेम झा,शरद सोनू,नेहा,राकेश त्रिपाठी आदि, संगीत-प्रवेश मल्लिक एवं सरोज सुमन, नृत्य निर्देशन-केदार सुब्बा, कला निर्देशन-प्रेम जी, कैमरा-नरेन्द्र पटेल, निर्माण नियंत्रक-अजीत सिंह, निर्माण प्रबंधन-सिंटू झा, प्रवीण पाठक एवं नवीन झा, मेकअप-पंकज झा एवं आइटम गीत पर नृत्य प्रशिक्षण दरहल छथि गौलौरी महन्था.

एहि फिल्मक निर्माणक विशेषता अछि जे तकनीकी टीमक अधिकाधिक सदस्य हिन्दी फिल्म उद्योगक प्रतिष्ठित नाम छथि आ तहिना हिनका लोकनि द्वारा आधुनिक तकनीकी यंत्रक प्रयोग सेहो कएल जा रहल अछि. तहिना मैथिल कलाकार लोकनि सेहो अपन-अपन विधाक प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व छथि. एहि फिल्मक शूटिंगक लोकेशन समस्तीपुर जिलाक करियन एवं ओकर लग-लगीचकक गाम सभ मे भेल अछि.

Friday, September 01, 2017

धूमकेतु रचित चर्चित कथा “अगुरवान”क नाट्य मंचन श्रीराम सेन्टर,मंडी हाउस,दिल्लीमे


३०अगस्त २०१७ (बुधदिन) श्रीराम सेन्टर,मंडी हाउस,दिल्लीमे धूमकेतुनामक रंगमंचीय संस्था केर प्रस्तुति एवं मैथिलीक सुपरिचित कथाकार धूमकेतु रचित कथा संग्रह उदयास्तकेर एक गोट चर्चित कथा अगुरवानक सफलतापूर्वक नाट्य मंचन कएल गेल. एहि कथाक नाट्य रूपांतरण केलनि अछि रंगकर्मी जितेन्द्र कुमार झा ओ निर्देशन केलनि अछि  राजीव कुमार मिश्र. राजीव कुमार मिश्र पेशा सं साउंड इंजीनियरक संग-संग एक रंगकर्मी छथि, मिथिला पेंटिंगक नीक जानकार ओ शोधार्थी छथि (स्कोलरशिप प्राप्त) आ एहि सं पूर्व मैथिली फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंगकेर सह-निर्माता एवं डीडी बिहार पर पूर्व-प्रसारित चर्चित मैथिली धारावाहिक पाहुनमे सह-निर्देशक सेहो रहि चुकल छथि.

अगुरवान कथा एक एहेन युवक (बंगट मिश्र-अमरजी राय) पर आधारित अछि जे आत्मसम्मानक संग जीवन जीबाक अभिलाषी अछि, स्वभाव सं निःश्छल मुदा अपन कुलक मर्यादा आ प्रतिष्ठा हेतु सदिखन साकांक्ष रहैत अछि. माइअक मृत्यु उपरान्त अध-वयसू पिता कल्लर मिश्र (रमानाथ झा) द्वारा एक एहेन नवयौवना कें सतमाय (श्रृष्टि आनंद) बना आनल जाइछ जे लगभग बंगटक सम-वयसू रहैछ. द्वितीय विवाहक एक्कहि-डेढ़ मासक भीतर बंगटक पिता शरीर सलोथ भअसमर्थ भजाइत छैक. पैरुख नहि रहलाक कारणें कोनो प्रकारे अर्थोपार्जन हेतु विवशताक जिनगी जीबैत अछि. बंगट बेरोजगार भेल घुमैत-फिरैत आ लुच्चा-लफंगा सभक संगतिमे रहि चोरि तक करैत अछि. चोरि कअपन आ अपन परिवारक निमेरा करब ओकरा ओत्तेक आत्म-ग्लानि नहि करबैछ जत्तेक कि ओकर सतमायकें जमींदार पाठक (राजीव रंजन)क हवेली पर जाएब अखरैत छैक. हालांकि पाठकक कुकर्मी प्रवृतिक अनुचर दू गोट ग्रामीण (अजीत झा आ संजीव कुमार) द्वारा गाम भरिमे सतमाय आ बंगटक बीच अनैतिक संबंध सनक मनगढ़ंत अफवाह पसारबामे कोनो कोताही नहि कएल गेल छैक मुदा माए-बेटाक संबंध दुन्नू दिस सपवित्र छैक. बंगट अपन सभटा सुख-दुःखक बात साझा कमोन हल्लुक करबाक माध्यम गामक मास्टर साहेब (संतोष कुमार)कें बनौने अछि. बंगटक परिवार दीनताक अंतिम पराकाष्ठा पर पहुँच गेल अछि आ एहेन स्थितिमे घरमे पिता-पुत्र, पति-पत्नी ओ माए-बेटा मध्य बेर-बेर कलह हएब स्वाभाविक सन भगेल अछि. मास्टर साहेबक आज्ञानुसार बंगट शहर जाय किछु रोजगार मे संलग्न हेबाक चेष्टा करैत अछि मुदा मोन नहि लगबाक कारणें एक्कहि-डेढ़ मासमे आपिस आबि जाइत अछि. एम्हर घरक स्थिति अत्यधिक दयनीय हेबाक कारणें अन्न-पानि धरि आफद भजाइत छैक आ से अवसरक लाभ उठबैत जमींदार द्वारा कल्लर मिश्रकें विभिन्न प्रकारक प्रलोभन देइत ओकर पत्नीकें हवेलीमे आबि दुन्नू साँझक भानस बनेबा लए आग्रह करैत छैक. बंगटक सतमायकें ओहि जमींदारक बहिकिरनी हेबाक संग-संग अनैतिक सम्बन्धक सेहो पालन करब अनिवार्य सन भगेल छैक आ परिणामस्वरूप ओकर सतमाय गर्भवती भजाइछ. एक-डेढ़ मास पर घर आपसी भेला उत्तर जखन ओकर सतमाय द्वारा स्वयं गर्भवती हेबाक बात स्वीकारल जाइछ तबंगट आक्रोशित भकोदारि सदू-खण्ड करैत ओकर हत्या कदैत अछि . बंगटक मानसिक स्थिति पर शोध करबा लेल मनोविज्ञान केर प्रोफेसर कमलेश चौधरी (जितेन्द्र कुमार झा) मास्टर साहेब ससम्पर्क करै छथि आ उपरोक्त सभ घटना मास्टर साहेब द्वारा हुनका अक्षरशः सुनाओल जाइत अछि.

एहि नाटकक माध्यम सएक ब्राह्मण परिवारक दीनताकें देखाओल गेल अछि, बेमेल विवाह ओ शोषित नारीक दबल आवाज, छद्म पुरुषार्थक दंभ पर प्रहार, ओ तत्कालीन समाजक बीच एकटा नहि कएकटा राम-रहीमक पाखण्डकें उजागर करैत लेखकक दूरदर्शिताक अनुमान लगाओल जा सकैत अछि.

नटराज स्तुतिक संग प्रारम्भ भेल नाटक अंत धरि प्रेक्षककें मंच दिस टकटकी लगौने रहबा लेल बाध्य करैत रहल. नाटकक विभिन्न पक्ष पर विश्लेषण केर आवश्यकता छैक जेकि रंगमंच ओ नाटक विशेषज्ञ करथि से उपयुक्त हैत मुदा प्रेक्षकीय दृष्टिए नाटकक प्रस्तुति सफल रहल. दिल्लीक विभिन्न संस्था मध्य वर्तमानमे युवा रंगकर्मीक रूपमे दर्शकक पहिल पसीन अमरजी राय फेर सहृदय जितबामे सफल रहलाह. रमानाथ झा द्वारा चरित्रकें जीवंत करैत जे इमानदारी सअभिनय कएल गेल अछि से निश्चित रूप समंच पर हुनक सक्रिय उपस्थिति मंगैत अछि. एकमात्र महिला पात्र सृष्टि आनंदक संवाद सीमित छल मुदा ततबेमे जे दम देखबामे आएल से भविष्यमे मैथिली रंगमंच वास्ते एक नीक अभिनेत्रीक सम्भावना जगबैत अछि. राजीव रंजन मैथिली मंच पर विभिन्न चरित्र निमाहबा लै तैयार छथि आ निरंतर प्रगतिक पर छथि. संतोष कुमार मैथिली मंचक आब वरिष्ठ श्रेणीमे (वर्तमानक युवाक तुलनामे) प्रवेश कगेल छथि से स्वीकारबामे कोनो हर्ज नहि. जितेन्द्र झा, संजीव कुमार, अजीत झा आ पाठकक दू गोट सेवकक भूमिकामे अंकित ओ राहुलक उपस्थिति कथाक पूरक मात्र कहक चाही. पार्श्व संगीत सांकेतिक मात्र छल जाहिमे किसलय कृष्णक लिखल गीतकें सुमधुर स्वर देने छलाह देवानन्द झा एवं राजीव रंजन जकरा संगीतबद्ध केलनि दीपक ठाकुर. नाटकक पार्श्व संगीत राजीव रंजनक छल. प्रकाश व्यवस्था छलनि संतोष राणा केर. प्रकाश व्यवस्थाकें आर बढियाँ करबाक गुँजाइश छल. समूचा नाटकमे रतुके दृश्यक आभास होइत रहल जखनकि मास्टर साहेब आ प्रोफेसर साहेबक मध्यक वार्तालापक बीच-बीचमे (फ़्लैश बैकमे चलैत) कहानीक अधिकांश भाग दिनक छल. वस्त्र-सज्जा हेतु उपयुक्त सामग्रीक चयन अमरजी राय द्वारा कएल गेल छल. रूप-सज्जा दीपक ठाकुरक छल. प्रोडक्शन तरूण झा, एसोसिएट निर्देशन संतोष कुमार, सहायक निर्देशन अजय शर्मा आ बैनर-पोस्टर एवं ब्रोशर डिजाइन कएल छल संजीव कुमार बिट्टू केर. राजीव कुमार मिश्रक निर्देशन मे मंचित पहिल नाटक अनेकानेक दृष्टिकोण ससफल रहल.

अगुरवान नाटक मंचन सपूर्व नीलम कला केन्द्र द्वारा एक सम्मान समारोहक सेहो आयोजन कएल गेल छल (पृथक रिपोर्ट) जाहिमे बॉलीवुडक स्थापित अभिनेता ओ मैथिल सपूत नरेन्द्र झा, विराटनगर सआएल सक्रिय ओ समर्पित मिथिला अभियानी प्रवीण नारायण चौधरी, मधुबनी सआएल धूमकेतुक लेखक सुपुत्र अंशुमान सत्यकेतु, नीलम कैसेट केर संस्थापक कृष्ण कुमार चौधरी एवं नीलम चौधरी, मुम्बइ फिल्म उद्योग जगतमे एड फिल्म्स फ्रीलान्सर ओ मैथिल सेनानी कुणाल ठाकुर, पटना सआएल डीडी बिहारक निदेशक पी.एन.सिंह आदिक गरिमामय उपस्थिति ओ प्रशंसा सेहो नाटकक सफलताकें चिन्हित केलक.      

कामकाजी दिवसमे भेल एहि आयोजनक सफलताक अंदाज अही बात सलगाओल जा सकैत अछि जे श्रीराम सेंटरक दूतल्ला प्रेक्षागृह प्रेक्षक सखचाखच भरल छल. किछु लोककें एखनहु नाटकक प्रेक्षक बनब सीखय पड़तनि जेनाकि मोबाइलक स्विच ऑफ वा थरथरी मुद्रा (वाइव्रेशन मोड) मे राखथि, घाना पसारै बला छोट बेदराकें संग नहि आनथि वा जआनथि तशांत भंग होइत स्थितिमे हॉल सबाहर लघुमा देथुन, थोपड़ी बजबथु (प्रसंग देखि) मुदा पिहकारी (सीटी) सपरहेज राखथु आदि किछु तथ्य सभ छैक जेकि हॉल ओ नाटकक मर्यादा छैक आ आनन्दो तखने भेटैत छैक जखन एकर पालन हम सभ मीलि करैत छी.

कला,साहित्य,संस्कृति,भाषा संरक्षण ओ संवर्धनक अनेकानेक गतिविधि मध्य वर्तमानमे मैथिली नाटक सेहो बेस सराहनीय जोगदान दरहल अछि. भारतक राजधानी दिल्लीमे विभिन्न रंगमंचीय संस्था द्वारा समय-समय पर मैथिली नाटकक मंचन होइत रहला सं मैथिली भाषी लोकनिक निरंतर जागरूकता बनल रहब स्वाभाविक अछि. दिल्लीमे कला मंडीक रूपमे प्रसिद्ध केन्द्र मंडी हाउस सेहो आब अन्यान्य भाषा मध्य मैथिलीक विभिन्न नाटकक प्रदर्शन, भारत रंग महोत्सवमे मैथिली नाटकक मंचन सन किछु श्रेयस्कर काज एक ऐतिहासिक साक्ष्यक रूपमे सोझा ठाढ़ अछि जकर श्रेय निःसंदेह मैलोरंग,प्रकाश झा आ हुनक टीमकें जाइत छनि. बाट बनि गेल छैक आवश्यकता छैक दृष्टिवान पथिककें.

Thursday, July 20, 2017

मैलोरंगक मंचन जट-जटिन ओ ललका पाग


१९ जुलाइ २०१७ कमैथिलो लोक रंग (मैलोरंग),दिल्ली द्वारा क्रमशः दू गोट नाटक जट-जटिनललका पागक सफलतापूर्वक नाट्य मंचन भेल. मैलोरंग पहिल बेर युवा निर्देशक रमण कुमार ओ ज्योति झाकें निर्देशनक जिम्मा दैत ई नव प्रयोग केने छल जे सफल रहल. सफलताक प्रत्यक्षदर्शी मंडी हाउस दिल्लीक श्रीराम सेंटरमे कामकाजी दिन (वर्किंग डे) होइतो प्रेक्षक सभरल प्रेक्षागृह थोपड़ीक निरंतर गरगारहैट सस्वयं प्रमाणित करैत रहल.

जट-जटिन/रमण कुमार
जट-जटिन मिथिलाक लोक परम्परा आधारित एक एहेन मान्यता अछि जाहिमे बर्खा नहि हेबा सन विकराल परिस्थितिमे अन्न-पानि बिना हाक्रोश करैत स्थानीय समाजक किछु वर्ग विशेषक महिला द्वारा जट-जटिन खेलाएल जाइछ. एहि क्रममे इन्द्रदेवक आह्वान, जट-जटिनक प्रेम ओ बेंग मारबाक प्रसंग आदिक प्रस्तुति होइछ. 

ऋतुराज कर्ण लिखित नाटक प्रारम्भ भेल बालक्रीड़ाक संग जकर नायक जटाधर (जट-राज नारायण साह) ओ नायिका जितिया (जटिन-निशा झा) जे संगहि खेलैत-कूदैत,टोना-मानी करैत रूसबा ओ बौंसबाक प्रक्रम निमाहैत बच्चा ससियान भजाइछ. दुन्नूक मनमे प्रेमांकुरित होइत समय एला पर पल्लवित ओ पुष्पित भजाइछ. मान-प्रतिष्ठाक दंभ रखनिहार जटाधरक पिता ठाकुर (जमींदार-रमण कुमार) अपन बेटी (रानी-सृष्टि कुमारी)क प्रेम-प्रसंग पर अंकुश लगबैत ओकर प्राण तक हरि लैत अछि आ ठाकुरक एहेन कठोर निर्णय ससमूचा समाज भयभीत रहैछ. एहेन मे जटाधर (ऋतुराज) अपन प्रेमक बात गुप्त राखि जितिया (प्रियदर्शिनी पूजा) सविवाह ककोनो आन गाममे जा बैस जाइछ. एम्हर गाममे अकाल पड़ि जाइछ, लोक सभ सभटा टोना-टापर कथाकि जाइछ मुदा स्थिति आर विकराले होइत जा रहल अछि. गाममे एक ज्योतिषीक (संजीव कुमार बिट्टू) आगमन होइछ जे अन्य भाषी रहैत छथि मुदा अनुवादक (मनोज पाण्डे) स्थानीय लोक धरि मैथिलीमे संप्रेषित करैत छथि. ज्योतिषीक कहब छलनि जे एहि गाममे कोनो एहेन कुकर्म भेल अछि जकर प्रकोप अछि. जितिया सजबरदस्ती विवाहक इच्छुक मुदा असफल युवक बबन (दीप आनंद) अही अवसरक खोजमे छल आ जटाधरक आन जातिक जितियाक संग विवाह करबकें कुकर्म कहि समाजक ध्यानाकर्षण कएल. छल सठाकुर द्वारा बबनकें पठा ओकरा दुन्नू बेकतीकें बजबाय आ अंतमे अपन फुसियाही स्वाभिमानक रक्षार्थ जटाधरक हत्या करबा देल जाइत छैक. जितियाक पति वियोग ओ विलाप तत्क्षण हृदयविदारक परिस्थिति उत्पन्न कदैछ आ समाजक आडम्बरी लोकक प्रति एक दीर्घ ओ अनुत्तरित प्रश्न ठाढ़ कजाइत अछि. प्रियदर्शिनी पूजा (जितिया)क अभिनय प्रेक्षागृहमे बैसल एकहक प्रेक्षककें भावुक हेबा लेल बाध्य कदेने छल.

नाटकक मूल प्रसंग सहटि कने मंच दिस चली, ज्योतिष शास्त्रक ज्ञान रखनिहार ज्ञाताकें ज्योतिषी जीकहल जाइछ मुदा प्रत्येक  पात्र द्वारा ज्योतिष जीकहि संबोधित करबकें भविष्यमे सुधारल जा सकैछ. प्रसंगकें रोचक बनेबा लेल ज्योतिषी जी द्वारा सांकेतिक (अन्य) भाषाक प्रयोग आ तदनुसार ओकर अनुवाद कप्रस्तुत करबाक जे शैली छल से अद्भुत छल आ एहि चरित्रमे दुन्नू अभिनेता (संजीव बिट्टू आ मनोज पाण्डे) बेस प्रशंसा हथोड़िकजेबामे सफल रहलाह. ठाकुरक भूमिकामे स्वयं रमण कुमार वस्त्र,मेकअप,भाव-भंगिमाक दृष्टिकोण सउपयुक्त छलाह मुदा सम्वाद अदायगीमे एहि खन मोन पड़ैत रहलाह एक छल राजाक मुकेश झा ओ अमलीक अमरजी राय. नाटकक मंचन पूर्ण सफल रहल आ नव-निर्देशक रमण कुमार बधाइ केर पात्र छथि.

एहि नाटकमे जे सभ महत्त्वपूर्ण भूमिकामे छलाह/छलीह ताहिमे उपरोक्त पात्रक संग  पाँच गोट लुच्चा प्रवृतिक लड़का सभमे निखिल राज,पुष्कर शर्मा,मनीष गुप्ता,रोशन यादव आ मणिशंकर गुप्ता, तहिना स्त्रीक भूमिकामे ज्योति झा आ सुधा झा, ग्रामीण शिव स्वरुप,ऋषि राज आ सोनू पिलानिया, नोकर प्रभात रंजन ओ बटोहिक भूमिकामे राजीव रंजन झा आ नितीश कुमार झा सेहो अपन-अपन चरित्रक हिसाबे फिट भेलाह. मंच,प्रकाश,ध्वनि,वस्त्र आदि सेहो व्यवस्थित छल मुदा एहि नाटकक पार्श्व गायन ओ संगीत किछु निराश केलक. मंच पर कलाकार लोकनिक गाएब स्पष्ट सूनल गेल जेकि गायनक मौलिक रूपकें प्रस्तुत करैत छल, मुदा जखन जट-जटिन शब्द लोकक कानमे पड़ैत अछि तपहिल कल्पना ओहि गीतक सुन्दरते पर जाइत अछि घ्यूरा फड़लौ गे जटिनियाँ, झुमनी फड़लौ गे  आ ताहि गीतक संग जउपयुक्त वाद्ययंत्रक प्रयोग नहि हो तकने झुझुआन लागब स्वाभाविक. मैलोरंग सई अपेक्षा करब उचित अछि कारण राजीव रंजन आ दीपक ठाकुर संगीत पर बेस मेहनैत करैत रहलाह अछि आ कसकैत छथि. बेजाए कहब अनुचित हएत कारण अपन जीवनोपार्जनमे व्यस्त रहैत एकटा नाटककें तैयार कप्रस्तुत करबामे कत्तेक परेशानी होइत छैक से बूझल जा सकैत अछि मुदा प्रेक्षक कतहु नें कतहु शुभचिंतक होइ छथि तहुनक अपेक्षा स्वाभाविक अछि .

ललका पाग/ज्योति झा
स्व. राजकमल चौधरी रचित ललका पागक कथा/नाट्य मंचन स्त्री-विमर्श पर आधारित अछि. स्व. राजकमल चौधरीक लेखन प्रतिभा समैथिली ओ हिन्दी (दुन्नू भाषी) समाज कृतज्ञ अछि. हिनक लेखनक केन्द्रमे सिसकैत,हिचकैत ओ शोषित नारीक दुर्दशाकें सहजहि अकानल जा सकैत अछि. ललका पाग कथाक नायिका तीरू (प्रियदर्शिनी पूजा) सेहो एहने सन एक मैथिल नारी छथि जिनका स्वभावमे लड़िकअधिकार लेब नहि अपितु सिसकैत-कुहरैत अपन अधिकार सवंचित रहबकें नारी धर्म बुझैत छथि. मात्र चौदह बर्खक उमेरमे सासुर आएल तीरू अपन बालमन पर काबू नहि राखि पेली आ सासुकें गामक पोखरिमे नहेबाक इच्छा व्यक्त कय देलनि. हुनक एहि निर्विकार मनक चंचलता सगरो गाम काने-कान पसरि गेल आ बात हुनक स्वामी राधाकान्त (जितेन्द्र कुमार जीतू”) धरि पहुँच गेल. एहि छोट सन बात पर राधाकान्त हुनक तिरस्कार करब शुरू कय देलनि आ कलकत्ता कॉलेजक महिला संगी कामाख्या (निशा झा)क रूप ओ गुणक स्मरण कहुनका संग परिणय हेतु निश्चय कलेलनि. तीरू ओहि गप्पक लेल तिरस्कृत आ अवहेलित भेली जे गप ओ मात्र बाजिकइच्छा व्यक्त केने छली नहि कि ओ पोखरिमे नहाए गेल छलीह. किछु दिनक बात राधाकान्त गाम अबैत छथि आ अपन दोसर विवाहक निर्णय सुनबै छथि तीरूकें. तीरूकें तएक क्षण लेल बज्रपात भेलनि मुदा अंतर्वेदनाकें कंठ मोंकि स्वीकृति दय देलनि. विवाहक दिन तय भेल राधाकान्त आइ बहुत प्रसन्न छलाह आ इंतजाम पातीमे व्यस्त छलाह आ हुनक एहि इंतजाम-पातीमे संग दरहल छलीह तीरू. कलकत्ता ससंगी सभ आएल छलथिन राधाकान्तकें मूँह पर एक अलग उत्साह. साँझ भेलै राधाकान्त सजि-धजि विदा भेला आ तीरू दिस बिनु तकनहि चल गेला दरबज्जा दिस. तीरू समाद पठौलनि आँगन अबै वास्ते. राधाकान्त आँगन जा जखन तीरूक घर दिस गेला ततीरू पेटी उधेसने किछु ताकि रहल छलीह आ अन्ततः ओ वस्तु भेटि गेलनि. ओ अनुपम वस्तु छल ललका पाग. ललका पाग देखितहि एक क्षणक वास्ते राधाकान्त स्तब्ध भगेला आ क्षुब्ध रहि गेला तीरूक निःश्छ्लता पर. बकार बन्न भगेलनि राधाकान्तकें आ बीच अँगनामे बैसि पश्चातापक कुहेस फटैत तेना दहोबहो नोर बहबलगलनि जेना तीन बर्खक बच्चा होथि. उक्त कथा/नाटक पुरुष वर्ग पर कतेको प्रश्न ठाढ़ करैत अछि आ कमोबेश स्थिति एखनो पूर्ववत अछि.

नाटकक आरम्भ सूत्रधार (संतोष कुमार आ निशा झा) सहोइत अछि. संतोष कुमार रंगमंचक एक एहेन हस्ताक्षर छथि जिनका मंच पर पदार्पण करिते प्रेक्षकक मूँह पर हँसी आ हुनक पात्र संबंधी जिज्ञासा बढ़ि जाइत छनि. निशा झाक अभिनय आ हुनक मैथिली बजबाक टोन भविष्यक नीक सम्भावना दिस इंगित करहल अछि. नटुआ नाच लमंच पर प्रस्तुत होइत रमण कुमार आ संजीव बिट्टूकें गतिविधि देखि प्रेक्षक लोकनिकें गुदगुदी हएब स्वाभाविक छल. राधाकान्तक पात्रमे जीतू केर पूर्वक नाटक जल डमरू बाजेधूर्तसमागममे देखल अभिनयक हिसाब सएहि बेर किछु हल्लुक सन अभिनय लागल ओना एहिमे कोनो संदेह नहि जे ओ नीक कलाकार छथि आ आगाँ फेरो तहिना भेटता से आश्वस्त छी. तीरूक माइअक भूमिका कम मुदा तइयो अपन प्रभाव बनौने रहली ज्योति झा. चननपुरवालीक भूमिकामे सुधा झाक अभिनय ओ किसनीमायक भूमिकामे सृष्टि आनंद सेहो फिट छलीह. मुंशी पटोरीलालक भूमिकामे मनोज पाण्डे सेहो उपयुक्त छलाह. तीरूक भाइअक भूमिकामे बहुत कम्मे कालक वास्ते मुदा आन नाटकक संबंधमे एतबा जरूर कहल जा सकैत अछि जे देखिते दिनमे अपन अभिनयमे नितीश सेहो निखरल जा रहल छथि. रामसागर आ ज्योतिषीक भूमिकामे सोझा आएल संजीव कुमारमे आर सुन्दर अभिनयक गुँजाइश छनि. एहि नाटकक पार्श्वमे संगीत ओ गायन बेस आकर्षक छल ताहिमे राजीव रंजन पूरा इमानदारी सप्रस्तुत भेलाह. अमरजी राय केर वस्त्र विन्यास सहजहि आकर्षित करैछ आ श्याम सहनीक प्रकाश परिकल्पना सभ दिने सनीक रहल अछि.

मंच सञ्चालन केलनि मैलोरंगक निदेशक प्रकाश झा. आजुक निर्देशक ज्योति झाकें पुष्पगुच्छ दय सम्मानित केलनि जेएनयू केर प्रोफेसर डॉ. देवशंकर नवीन आ रमण कुमारकें मैलोरंग रेपर्टरी प्रमुख मुकेश झा.

धन्यवाद ज्ञापनमे रमण कुमार दर्शक आ मैलोरंगक प्रति अपन उद्गार व्यक्त केलनि ओत्तहि ज्योति झा एहेन सुअवसर हेतु दर्शक,रेपर्टरी,वरिष्ठ रंगकर्मीक संग-संग प्रकाश झाक प्रति सेहो अपन कृतज्ञता प्रकट केलनि.

उपरोक्त दुन्नू नाटक देखला उत्तर प्रेक्षागृह ससोशल नेटवर्क धरि लोकक मूँह सवाह निकलब नाटकक सफलताकें सद्यः प्रमाण अछि. संभवतः बहुत गूढ़ विषय दिस हमर ध्यान केन्द्रित नहि भपाएल होएअ से संभव अछि आ स्व-विवेक सलिखल ई रिपोर्ट सूचनार्थ अपनें धरि पहुंचाएब अपन कर्त्तव्य बुझै छी. जयतु मैथिली.