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Thursday, September 29, 2022

बोस (सुभाष चन्द्र बोस), मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

रंगसंस्था ‘बारहमासा मैथिली नाटकक संग-संग हिन्दी नाटकक क्षेत्रमे सेहो समय-समय पर उपस्थिति दर्ज करबैत रहल अछि । गोल मार्केट, दिल्लीक नजदीक भाई वीर सिंह मार्ग स्थित ‘मुक्तधारा सभागार मे विश्वम्भर उपाध्याय लिखित नाटक ‘बोस (सुभाष चन्द्र बोस)’क मंचन बारहमासा द्वारा कएल गेल । महात्मा गाँधी सँ मत भिन्नताक पश्चात कांग्रेस अध्यक्ष पदक त्याग करैत, राजसी ठाठ मे पलल-बढ़ल सुभाष चन्द्र बोस जमीनी स्तर सँ संघर्ष करैत ब्रिटिश साम्राज्य सँ स्वतंत्रता प्राप्ति लेल सैन्य विद्रोहक जे रास्ता चुनलनि ताहिमे हुनक तीक्ष्ण बुद्धि, चातुर्य कौशल आ सांगठनिक क्षमताक जे किछु प्रमाण भेटैत अछि से देशक युवा, आम नागरिक आ राजनीतिक लोकनिक वास्ते अनुकरणीय आ बेस प्रेरक अछि । वीर सेनानी सुभाष चन्द्र बोस वास्तवमे नेताजी रहथि से उक्त नाटकक माध्यम सँ हुनक कृत्तित्व आ विराट व्यक्तित्त्वकें दर्शाओल गेल अछि ।

दिल्लीमे नाटकक मंचन निरन्तर होइत रहल अछि जाहिमे अधिकाधिक चयनक विषय सामाजिक असमानता, शोषण, गरीबी आदि रहैत अछि मुदा भारतीय स्वतंत्रता मे अपन सर्वस्व न्यौछावर केनिहार एहेन वीर सेनानी पर केन्द्रित ई नाटक वास्तवमे अपन राष्ट्रनायकक त्याग आ समर्पणक प्रति गौरवबोध करबैत अछि ।

मंच पर सुभाष चन्द्र बोसक भूमिका मे नवोदित मुदा अभिनयक क्षेत्रमे कम्मे समयमे परिपक्व होइत अभिनेता मनु कुमार झाक उपस्थिति दर्शक लोकनिक ध्यानाकर्षण करबामे बेस सफल रहल । सुप्रिया सत्यम (कैप्टन लक्ष्मी), नितीश कुमार झा (हिटलर), मनीषा मिश्रा (सूत्रधार आ लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), मायानन्द झा (उत्तमचंद आ सेठ किरोड़ीमल), अमन गुप्ता (मिर्जा आ शाहनिवाज), रोहित कुमार (महात्मा गाँधी आ कैप्टन मोहन सिंह), टेन्जीन बोध (जवाहर लाल नेहरु),निर्भय कर्त्तव्य (भगतराम आ ढिल्लन), रौशन सिंह (कर्नल हंट), राजेश कुमार बेनी (अफ़गान सिपाही), शुभम (सहगल), पूनम सिंह (लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), वन्दना (लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), रवित चावला (बालवीर) एवं सैनिक समूहमे तरुण झा, लालू कुमार, ऋत्विक राज, करन चौहान आदि लोकनिक उपस्थिति छल ।

मंचक पाँछा दीपक ठाकुर (संगीत), राहुल चौहान (प्रकाश), डालचन्द (वस्त्र विन्यास), पूनम सिंह आ मनीषा मिश्रा (वस्त्र सज्जा), नितीश कुमार एवं रोहित कुमार (रूप सज्जा), तरुण झा (प्रस्तुति प्रबंधन), राजेश बेनी (मंच प्रबंधन), अमन गुप्ता (पार्श्व ध्वनि) आ मनु कुमार झा (सह-निर्देशन) केर सहयोग सँ सफलतापूर्वक संपन्न एहि नाटकक निर्देशन केलनि मैथिली एवं हिन्दीक वरिष्ठ रंगकर्मी मुकेश झा ।

Saturday, July 30, 2022

रक्त-सम्बन्ध, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

संगीत नाटक अकादमीक सहयोग सँ अस्मिता आर्ट एंड कल्चरल फाउंडेशन द्वारा भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, दिल्लीक नरेज्यान स्टूडियो मे मैथिली नाटक 'रक्त सम्बन्ध'क मंचन कएल गेल।

श्याम दरिहरे लिखित 'रक्त सम्बन्ध' एक युवा आ युवतीक प्रेम सम्बन्ध पर आधारित अछि जे प्रेम एकतरफा सँ दूतरफा सहमति बनबैत एक-दोसराकेँ मिलबैत अछि। किछु समयक पछाति ओएह प्रेमी युवकक अभिन्न मित्र जकर नजरि युवती पर रहैक, युवककेँ दारूक लत लगा छल सँ ओहि युवतीकेँ अपना चंगुल मे फँसा लैत अछि। बहुतो केस, मोकदमा, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक व्यवस्था संग भावनात्मक सन्दर्भ आदिकेँ एक संग राखि एकर निराकरण पर केंद्रित अछि।

'रक्त सम्बन्ध'क परिकल्पना आ निर्देशन छल संतोष कुमारक जाहिमे मंच पर दीपक ठाकुर, ज्योति झा, संतोष कुमार, राजीव रंजन आदिक अभिनयक संग-संग पार्श्व सहयोग मे मुकेश झा, राजीव मिश्र, अमरजी राय, तरुण कुमार, अस्मिता कुमारी, राजेश बेनी, मायानन्द झा, नितीश कुमार आदि कलाकार लोकनिक सहयोग सँ नाटकक सफल मंचन भेल।
 

Saturday, July 23, 2022

मिथिला रंग महोत्सव, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मैलोरंग द्वारा आयोजित १६म मिथिला रंग महोत्सव जेकि दिनांक १३ जुलाइ,२०२२ (बुधदिन) क' राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक सम्मुख सभागार मे सुप्रसिद्ध नाटककार स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर केँ समर्पित छल। एहि अवसर पर हुनक कृतित्त्व एवं व्यक्तित्व केन्द्रित रचनावली (मैलोरंग प्रकाशन सँ प्रकाशित पोथी) केर लोकार्पण आ तकराबाद हिनक लिखित दू गोट एकांकी ' चन्दा' 'ग्रीनरूम' क्रमशः मैथिली आ हिन्दी मे मंचित भेल।

लोकार्पणक अवसर पर अतिथि मंत्रेश्वर झा (सेवानिवृत्त आईएएस), सी.एम झा (चान्सलर, सीएमजे यूनिवर्सिटी), शेफालिका वर्मा (साहित्यकार), देवशंकर नवीन (साहित्यकार), कुसुम ठाकुर (धर्मपत्नी स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर), ज्वाला प्रसाद (रजिस्ट्रार, एनएसडी) एवं मुकुन्द ठाकुर (आईएएस अधिकारी) आदि लोकनि मंचस्थ रहथि। पुस्तक लोकार्पण सत्रक संचालन केलनि अजित आजाद आ शेष सत्रक संचालन प्रकाश झा।

मैथिली मे मंचित 'चन्दा' जाहिमे सामाजिक वा धार्मिक अनुष्ठानक नाम पर चन्दा उगाहीक विभिन्न तरीका केँ दर्शाओल गेल अछि एतावता जे पोलहा क', प्रसंशा क' ' आ अन्त मे बलपूर्वक देबा लेब बाध्य करबा सन परिस्थिति केँ सेहो देखाओल गेल अछि। हास्य-व्यंग्य-विनोद मिश्रित एहि नाटकक विषय खाहे तत्कालीन समयक परिवेशक बोध करबैत हो मुदा वर्तमानक परिस्थिति मे सेहो जहिनाक तहिना इंगित करैत अछि। मंच पर राजीव रंजन, ज्योति झा, साक्षी, सुरभि, कंचन, स्नेहा, हर्ष राज, ऋत्विक राज, आयुष्मान, अनिमेष, हर्ष मनु, आर्यन पंत, नीरव निशांत, अभिनाश, प्रदीप मंडेल, हर्ष सागर आदिक उपस्थिति आ अभिनय बेस मनोरंजक रहल।

हिन्दी मे मंचित नाटक 'ग्रीन रूम' जेकि कोनो नाटकक पूर्वाभ्यास सँ ल' ' मंचित हेबा धरिक विभिन्न घटनाक्रम केँ बेस रोचक ढ़ंग सँ प्रस्तुत कएल गेल अछि। एक नाटकक निर्देशक केँ अपना-अपना धुन मे मस्त कलाकार लोकनिक संग सामंजस बैसाएब आ इच्छाक प्रतिकूल पात्रक चयन करबा सन परिस्थिति मे नाटकक मंचन करब कतेक चुनौतीक काज थिक तकरा हास्य रूपे प्रस्तुत करबामे अनिमेष, सुरभि, साक्षी, अभिनाश, प्रदीप, नीरव, दिव्यांशी, अभय, संस्कृति, भुवनेश, हर्ष, आर्यन आदि कलाकारक तालमेल उपस्थित प्रेक्षककेँ आदि सँ अन्त धरि गुदगुदबै मे सफल रहल।

मंचक पार्श्व मे अनिल मिश्रा (संगीत), दीपक यात्री (फोटोग्राफी) पिंटू झा प्रेम, हर्ष राज, साक्षी, सुरभि, धर्मवीर, कनुप्रिया आ मार्गदर्शकक रूप मे प्रकाश झा, राजीव रंजन, अंजू अहलूवालिया, रमण कुमार, ज्योति झा आदि। 

Monday, July 11, 2022

एक टुकड़ा पाप, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

रंगकर्मक प्रसिद्ध संस्था 'बारहमासा' द्वारा मैथिली नाटक 'एक टुकड़ा' पाप केर मंचन नरेज्यान स्टूडियो, भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, पूर्वी दिल्ली मे भेल।

मैथिलीक सुप्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक 'एक टुकड़ा पाप' बाल मनोविज्ञान पर आधारित अछि। प्रौढ़ होइत बच्चाक संवेदनशीलता , स्वाधीनता , चंचलता आ निःश्च्छलता पर अभिभावक द्वारा जे अनावश्यक दबाव बनाओल जाइत अछि , तथाकथित अनुशासनक नाम पर जे भयाक्रांत माहौल मे राखल जाइत अछि तकरहि दुष्परिणाम केँ नाटकक माध्यम सँ देखाओल गेल अछि। समाजक प्रबुद्ध लोक सेहो सीमित अधिकारक संग अभिभावक केँ बुझेबाक प्रयास करैत छथि, मुदा स्वभाववश कठोर एहेन अभिभावकक मानसिक सोच मे कोनो खास परिवर्तन नहि होइत छैक। परिणाम ई होइत अछि जे माता-पिता द्वारा प्रताड़ित हेबाक डर सँ चरेबा लेल ल' गेल पारी केँ रेल दुर्घटना सँ बँचबैत स्वयं दुर्घटनाक शिकार भ' जाइछ आ अल्प वयसहि मे काल कवलित भ' जाइछ।

समाजक पढल-लिखल लोक जिनका संग ओ अपन हरेक सुख-दुख केँ साझा करैत छल अपन वेदना व्यक्त करैत रहैत छल। माता-पिताक स्वभाव सँ तंग आबि हुनका लोकनिक आँखि सँ दूर कतौ जा श्रमक बले आत्मनिर्भर बनि अपन मनोनुकूल जीवन जीबय चाहैत छल जाहि मे हुनक सहयोग चाही छल, मुदा एहि निर्णयक सम्बन्ध मे हठात स्वीकृति देबा मे मौन रहलाह। एहि अनापेक्षित दुर्घटनाक बाद हुनका सँ अनजाने मे भेल मौन प्रतिक्रिया एक पाप समान छल जकर प्रायश्चित करबाक लेल आब किछु नहि बाँचल छल आ यैह 'एक टुकड़ा पाप' छल जे हुनका लेल आजीवन कचोटक विषय बनि गेल।

बारहमासा द्वारा मंचित एहि नाटकमे पात्रक संख्या सीमित अछि (एकटा स्त्री पात्र आ चारिटा पुरुष पात्र) मुदा से प्रत्येक पात्र अपनाआपमे महत्वपूर्ण अछि।

मैथिली रंगमंच मे नियमित उपस्थिति देनिहार संतोष कुमार एक एहेन अनुभवी अभिनेता छथि जिनकर संवाद प्रस्तुति, भाव-भंगिमा आ प्रतिक्रियाक समय देखि दर्शक चकित रहि जाइ छथि। हिनक अभिनयक सीमा अवधि न्यून हो वा अधिक हो, दर्शककेँ अपना पात्र संगे आदि सँ अन्त धरि बान्हि रखबामे सक्षम अभिनेता छथि। नाटक मे पिताक भूमिका मे उत्तम प्रस्तुति देलनि अछि। मनीषा मिश्र जे एकमात्र महिला पात्र छथि मायक भूमिका मे उत्कृष्ट काज केलनि अछि। मैथिली रंगमंच मे एहि नवोदित अभिनेत्रीक प्रवेश कम समय मे दर्शकक ध्यान आकृष्ट करबा मे बेस सफल रहल अछि। आउ गप्प करी हरफनमौला रंगकर्मी मायानंद झाक जे कोनो पात्रकेँ मंच पर उतारबा सँ पहिने स्वयं केँ ओहि रूप मे तैयार करैत छथि आ तैं उत्कृष्ट प्रस्तुति देबा मे सक्षम देखल जाइ छथि। प्रबुद्ध आ जागरूक व्यक्तिक भूमिका मे आन नाटक जेकाँ एहि बेर सेहो अपन अभिनय सँ दर्शक केँ प्रभावित कयलनि अछि।

नाटकक केन्द्रीय पात्रक भूमिका केँ मनु कुमार झा पूर्ण इमानदारी सँ निमाहलनि अछि। मनुक अभिनयक विशेषता ई छल जे मंच पर उत्तम प्रस्तुति देबा लेल ओहेन सभटा अनुशासनक पालन करैत देखल गेलाह जेकि एकटा नवोदित कलाकार वास्ते सभसँ आवश्यक तत्व अछि । एहि नाटकमे मनु झाक उपस्थिति अनेक दृष्टिएँ एकटा आवश्यक अभिनेताक रूप मे देखल गेल। मनु झाक रंगमंचक प्रति अनुराग आ लगन देखि ई आश्वस्त भेल जा सकैए जे भविष्यक एक नीक अभिनेता छथि। अभिषेक आयुष जे कि सहायक पात्र एक सेवकक रूप मे देखल गेलाह नीक अभिनय केलनि तथापि एक अभिनेताक रूप मे आर बेसी संभावना छनि जकरा दर्शकक सोझा राखब आवश्यक बुझना जाइछ।

नाटकक बीचमे प्रयोग सांकेतिक अभिनय मुकेश झाक प्रयोगधर्मी निर्देशन पक्षकेँ उजागर करैत अछि। निश्चित रूपसँ नाटकक सफल सम्पादनक श्रेय एहि नाटकक निर्देशक मुकेश झाक संग बरहमासाक सगर टीमकेँ जाइत अछि।

मंचक पाछाँक सहयोगी दीपक ठाकुर (गीत), प्रसून नारायण श्रीवास्तव (संगीत), मुकेश झा (प्रकाश), पुष्पा झा (मेकअप), पूनम सिंह (वेशभूषा), तरुण कुमार (मंच व्यवस्था), राजेश कुमार बेनी (प्रस्तुति नियंत्रण), दीपक यात्री (छायाचित्र) आदि लोकनिक समवेत प्रयासक परिणाम थिक नाटकक सफल मंचन।

प्रायः 'बकलेल' 'लोंगिया मिरचाइ' नाटक सँ जन-जनकेँ लोकप्रिय नाटककार लल्लन प्रसाद ठाकुर पर केन्द्रित आ समर्पित १६म मिथिला रंग महोत्सवक आयोजन कय मैलोरंग पुनः एक बेर साबित केलक अछि जे मैथिली रंगमंच मे योगदान देनिहार प्रत्येक कलाकार ओ नाटककारक प्रति ई समाज कृतज्ञ अछि आ रहत। 

Sunday, May 22, 2022

अपराजिता द्वारा आयोजित तीनदिवसीय नाट्य महोत्सव 'रंगनायिका'

पछिला दू दशक सँ दिल्ली रंगमंचक अधिकाधिक आयोजन मे रंग प्रशंसकक रूप मे सक्रियता बनल अछि आ तहिना रंगकर्मक क्षेत्र मे मैथिलीक बहुतो रास इतिहास सेहो बनैत देखल अछि आ ताहि इतिहासक उदाहरण केर रूप मे भारत रंग महोत्सव सन महत्त्वपूर्ण आयोजन मे भारतक अन्यान्य भाषाक समकक्ष मैथिली कें यथोचित स्थान भेटब आ देखब प्रायः प्रत्येक रंगप्रेमी हेतु गौरवक विषय रहल अछि.

दिल्लीक रंगमंच सँ मात्र अभिनेते टा नहि बुझू जे दर्शक केँ सेहो ततबे अनुशासन सिखबाक अवसर भेटलनि अछि आ इएह कारण अछि कार्यक्रम मे बरू कनेक बिलम्बे सही दर्शक अपन स्थान छेकि प्रारम्भ हेबाक उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करैत देखल जाइत छथि. ई कहब अतिशयोक्ति नहि हएत जे दिल्ली वा लगीचक क्षेत्र मे मैथिली साहित्यक जतेक पाठक तैयार नहि भ' सकल ताहि सँ कएक गुना बेसी रंगप्रेक्षक तैयार भेल आ से प्रेक्षक तैयार करबा मे नाट्यकर्मी आ नाट्यदलक विभिन्न संस्थाक समेकित प्रयास सँ सम्भव भेल अछि. कोनो सभागार मे बैसि नाटकक आनंद कोना लेल जाय, कतेक धैर्यसँ आ शान्तिपूर्वक ढ़ंगे लेल जाय ई ओही प्रयासक परिणाम थिक. किछु दर्शकक एहेन वर्ग तैयार छथि जे दिल्लीक चाहे जाहि कोनो कोन मे आयोजन हो हुनक सहभागिता सुनिश्चित अछि आ इएह नियमित दर्शक मैथिली रंगमंचक मूल सफलता आ उपलब्धि थिक.

अस्तु ! आब अबै छी अल्प समय मे शीघ्रता सँ उदित भेल संस्था 'अपराजिता' जकर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय लोक नाट्य महोत्सव 'रंगनायिका' सन परिकल्पनाकें सेहो ऐतिहासिक रूप मे देखल जा सकैत अछि. प्रायः दू दिन मे सात गोट नाटकक मंचन आ सातो नाटक मे एकल अभिनय सेहो मात्र और मात्र स्त्री पात्र द्वारा प्रस्तुत करब रंगकर्मक क्षेत्र मे मंच पर स्त्रीक नगण्यता सन मिथककें नकारबाक उदाहरण थिक. हालांकि जेना अंतर्राष्ट्रीय लोक नाट्य उत्सवक परिकल्पना छल एहेन मे कम सँ कम नेपालीय मिथिला दिसि सँ एको गोट संस्था वा कलाकारक सहभागिता अपेक्षित छल तथापि दिल्ली, पटना, मधुबनी, पूर्णियाँ, दरभंगा आ मुम्बइ सँ आएल समूह आ कलाकारक सहभागिता सँ आयोजन मे प्रायः भिन्न-भिन्न विषयक प्रस्तुति एक तरहे आयोजनकें पूर्णता देलक .

उक्त आयोजनक तीनदिवसीय महोत्सव 'रंगनायिका' क्रमशः १४,१५ आ १६ मइ २०२२ क' राष्ट्रीय राजधानी दिल्लीक ‘मुक्तधारा प्रेक्षागृह, गोल मार्केट’ मे अपराजिता समूहक संस्थापिका सोनी नीलू झाक संयोजनमे आयोजित कएल गेल जाहिमे पहिल दू दिन एकल नाटकक मंचन आ अंतिम तेसर दिन विमर्श सत्र आ पुरस्कार एवं सम्मान समारोहक आयोजन कएल गेल.

कार्यक्रमक विधिवत उद्घाटन मंत्रेश्वर झा, विभा रानी, ललिता झा, राधा माधव भारद्वाज, प्रदीप बिहारी, भैरव लाल दास, विभा झा आदि लोकनि दीप प्रज्वलित क' कएलनि. कार्यक्रमक प्रारम्भ सोनी चौधरी द्वारा गोसाओनिक गीत, सुष्मिता झा द्वारा शारदा स्तुति, आकृति झा द्वारा स्वागत गान, अशिति झा द्वारा गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुति आ अतिथि सम्मान सँ प्रारम्भ भेल. मंच सञ्चालनक क्रममे पूनम भारद्वाजक सारगर्भित शब्दक चयन आ प्रस्तुति सेहो बेस आकर्षक रहल.

पहिल दिनक पहिल नाटक ‘बारहमासा, दिल्ली’क प्रस्तुति ‘श्याम दरिहरे’क कथा ‘फाटल बियहुती नुआ’क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह मनीषा मिश्रा आ निर्देशन केलनि मुकेश झा. रंगमंच पर उपस्थितिक हिसाबे मनीषा नव अभिनेत्री छथि मुदा हिनक लगन आ आत्मविश्वासक संग प्रस्तुत हएब दर्शकक ध्यान केन्द्रित करबामे सफल रहल. दोसर नाटक ‘भंगिमा, पटना’क प्रस्तुति ‘कुणाल ’ लिखित ‘बुलबुल आ रखबार’क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह प्रतिभा मिश्रा आ निर्देशन केलनि निखिल रंजन. कीर्तनियाँ शैलीक एहि नाटक मे मंच पर उपस्थित संगीत समूह मे श्यामा झाक पार्श्व गायन सेहो प्रस्तुतिक एक मजगूत पक्ष रहल. तेसर आ अन्तिम नाटक 'सुधांशु 'शेखर चौधरी'क लिखल 'लेटाइत आंचर' आयोजक संस्था ‘अपराजिता, दिल्ली’क प्रस्तुति छल जाहि मे संस्थाक संस्थापिका सोनी नीलू झा स्वयं अभिनय आ निर्देशन केलनि.

दोसर दिनक पहिल नाटक 'द स्पॉटलाइट थियेटर, दरभंगा’क प्रस्तुति ‘यात्री जी सहित अन्यान्य कवि/कवयित्री' रचित विभिन्न कविताक समावेश सँ तैयार कएल नाटक 'निन्नक उत्तरार्द्ध आ स्वप्नक पूर्वार्द्ध'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह पल्लवी कुमारी आ निर्देशन केलनि सागर सिंह. दोसर नाटक 'इप्टा, मधुबनी’क प्रस्तुति प्रसिद्ध लोककथा 'साम-चक'क नाट्य रूपांतरण ‘अविनाश चन्द्र मिश्र'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह पूजा कुमारी आ निर्देशन केलनि रंजीत राय. तेसर नाटक 'भरत नाट्य कला केन्द्र, पूर्णियाँ’क प्रस्तुति 'स्त्री उपेक्षिता'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह रंजना शर्मा आ निर्देशन केलनि मिथिलेश राय . ‘उमेश आदित्य'क आलेखक मैथिली नाट्य रूपांतरण सेहो मिथिलेश रायक छलनि आ अभिनेत्री भोजपुरी भाषी रहितो मैथिली नाटक प्रस्तुत करबामे बेस सफल रहलीह. चारिम आ अन्तिम नाटक 'अवितोको, मुम्बइ'क प्रस्तुति एवं ‘विभा रानी' लिखित, निर्देशित आ अभिनीत नाटक 'साध रोए के'क मंचन कएक दृष्टिकोण सँ एकल नाटकक एहि महोत्सवकेँ महत्त्वपूर्ण बनौलक.

विभा रानी द्वारा प्रस्तुतिक क्रममे नहि मात्र अभिनय दक्षता देखबा लेल भेटैत अछि अपितु प्रेक्षककेँ मंच सँ निरन्तर ध्यानाकृष्ट क' रखबाक अद्भुत कला सँ परिचय भेटैछ. ई जतबे नवागन्तुक कलाकार लोकनिक वास्ते प्रेरणा छथि ततबे मैथिली रंगमंचकें चिरजीवी हेबाक स्वप्नद्रष्टाक रूपमे समाज कें प्रेरित केनिहारि रंगकर्मी सेहो. मैथिली रंगकर्मक क्षेत्र मे मंचन, प्रेक्षक आ कलाकारक निरन्तर वृद्धि सँ भविष्यक प्रति आश्वस्त होइत एकर नियमित प्रदर्शन आ विस्तार वास्ते एक स्थायी भवनक निर्माण हेतु आँचर पसारि स्वैच्छिक सेवादान लेल प्रेरित करैत धनराशि जुटेबाक हिनक शैली उपस्थित दर्शकक बीच सेहो चर्चाक विषय रहल.

विगत दू दिन मे सात गोट मंचनक संग दू-दिवसीय एकल नाटकक बाद तेसर दिन मने अन्तिम दिन विमर्श सत्र, सम्मान आ प्रोत्साहन पुरस्कारक आयोजन परिवर्तित स्थान 'राजा राममोहन राय मेमोरियल'क सभागारमे आयोजित छल. विमर्श सत्र मे विभा रानी, प्रकाश बंधु, संतोषी कुमार, अरुणाभ सौरभ, नीलेश दीपक, अमित आनन्द आदि विमर्शकर्ता लोकनिक सहभागिता रहल आ एहि सत्रक सफल संचालन केलनि ऋषि बशिष्ठ.

रंगकर्मक क्षेत्र मे विशेष योगदान देनिहार उत्कृष्ट कलाकारकें प्रत्येक वर्ष दू गोट पुरस्कार क्रमशः ‘डॉ. ललिता झा रंग प्रोत्साहन पुरस्कार' आ 'रुद्र नारायण ठाकुर स्मृति रंग पुरस्कार' देल जेबाक घोषणा भेल अछि जाहिमे एकावन सए टाका आ प्रशस्ति-पत्र प्रदान कएल जाएत. वर्ष २०२२ हेतु 'डॉ. ललिता झा रंग प्रोत्साहन पुरस्कार' मनीषा मिश्राकें आ 'रुद्र नारायण ठाकुर स्मृति रंग पुरस्कार' विभा रानीकें प्रदान कएल गेलनि. एहि तरहे तीन दिवसीय ई आयोजन अनेकानेक दृष्टिए सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल. आयोजन समिति 'अपराजिता' समूहक प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप सँ जूड़ल प्रत्येक सदस्य सहित सोनी नीलू झाकें बधाइ आ मैथिली रंगमंचक इतिहासमे नव-नव कीर्ति स्थापित करबाक सुमंगलकामना.

Friday, March 11, 2022

अनन्तसामर्थ्यसम्पन्ना, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (समाद)

स्त्री दिवसक उपलक्ष्य मे ‘अपराजिता' नामक संस्था द्वारा 'अनन्तसामर्थ्यसम्पन्ना' कार्यक्रममे

दिल्लीक दत्तोपंत ठेंगरी भवन मे बहुतायत संख्या मे महिलाक उपस्थिति देखल गेल । विभिन्न सत्र मे विभाजित ई कार्यक्रम दीपप्रज्ज्वलन आ गोसाउनिक गीत संग प्रारंभ भेल । स्मिता झा लिखित एवं अभिनीत एकल नाटक ' दहेज प्रथा' प्रस्तुत कएल गेल जकर निर्देशन केलनि सोनी नीलू झा । विमर्श सत्र मे क्रमशः ‘मैथिली रंगमंच मे स्त्री’ पर पूनम श्री, दीपा मिश्रा, पुष्पा झा, प्रियदर्शिनी पूजा आदि लोकनि अपन विचार रखलनि ।

‘मैथिली सहित्य मे स्त्री’ पर डॉ. ललिता झाक अध्यक्षता मे कुमकुम झा, आभा झा, जयंती झा, छाया झा आदि लोकनि अपन विचार रखलनि ।

‘नारी सशक्तिकरण आ समाज’ पर रत्न आभा झा चौधरी, अणुशक्ति सिंह, विजयालक्ष्मी झा आदि लोकनि अपन विचार रखलनि । नृत्य संसार मे तेजी सँ उभरि रहल ललना अशिति झा ‘जय जय भैरवि’ पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत केलनि । बंदना झा हास्य प्रस्तुति देलनि । सोनी नीलू रचित 'औनी पथारी' काव्य संग्रह आ दीपा मिश्र द्वारा संपादित एक सय एकाबन कवयित्रीक काव्य संग्रहक पोथी 'मैथिली'क विमोचन सेहो भेल । 

सभसँ अंतिम सत्र 'काव्य पाठ'क छल । डॉ. आभा झाक अध्यक्षता एवं अनुराधा झाक संचालन मे कवयित्री आभा झा, मुन्नी कामत, निवेदिता झा, पूनम झा सुधा, सांत्वना मिश्रा, ज्योति झा, रीना झा शर्मा, स्वाति साकम्भरी, आरती प्रिया, छाया झा, स्वाती झा, मधुलता मिश्रा सहित दर्जनाधिक कवयित्री लोकनि अपन प्रस्तुति सँ उपस्थित श्रोताकें मुग्ध केलनि ।

Tuesday, March 08, 2022

सीता बनबास, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मैथिली रंगमंच मे नव-नव संधान हेतु चर्चित रंगमंडल ‘मैलोरंग’ द्वारा उर्दू एवं हिंदीक प्रसिद्ध लेखक ‘आगा हश्र कश्मीरी’ रचित पारसी नाटक 'सीता बनबास'क मंचन लक्ष्मीनगर,दिल्ली मे ‘ब्लैक पर्ल आर्ट्स रूफ थियेटर’ मे भेल. आगा हश्र रचित ‘सीता बनबास’ नाटक अपना समयक सभसँ बेसी लोकप्रिय पारसी नाटक मे सँ एक महत्त्वपूर्ण नाटक रहल अछि. नाटकक प्रसंग बाल्मीकि रामायण सँ लेल गेल अछि जकरा लेखक नाट्य शैली अंदाज मे प्रस्तुत केलनि अछि. नाट्य प्रस्तुति हिंदी मे छल आ एकर निर्देशन केलनि अछि श्याम कुमार सहनी.

नाटक मे राम और सीताक एक दोसराक प्रति कर्त्तव्य, प्रेम, मर्यादा, विश्वास आ श्रद्धाक जाहि स्वरूपकेँ दर्शाओल गेल अछि से नहि मात्र भारतीय संस्कृतिक आत्मा अछि अपितु पीढ़ी-दर-पीढ़ी एकरा शिक्षा ओ प्रेरणाक रूपमे आत्मसात कएल जा सकैत अछि. राम जाहि तरहे राजधर्म पालन हेतु अपन समस्त सांसारिक सुखक परित्याग करैत चल गेला एतावता सीता सन धर्मपारायण स्त्री धरिक परित्याग कय देलनि ताहि सीताक स्त्रीत्व हुनक मर्यादा निर्वहन मे सहगामिनी बनि अपन करुणा आ आदर्शक परिचय देलनि.

मुक्ताकाश मंच पर कोनो नाटकक प्रस्तुति सँ पूर्व मंच, प्रकाश, ध्वनि आदि परिकल्पना हेतु बेस तामझामक आवश्यकता होइछ मुदा मैलोरंग अपन कलाकार केँ नहि मात्र अभिनय प्रशिक्षण धरि सीमित रखने अछि एते धरि जे मंचक पार्श्व मे विभिन्न तरहक प्रक्रिया नियंत्रण हेतु सेहो सक्षम बनबैत अछि आ ओएह सक्षमता एहि ठाम प्रत्यक्षतः देखल गेल.        

मैलोरंगक एहि प्रस्तुति मे अधिकाधिक नव प्रशिक्षु कलाकार देखल गेलाह जाहिमे मंच पर उपस्थित पात्र राम (हर्ष मनु), सीता (साक्षी झा), पृथ्वी/उर्मिला (अनुराधा झा), लव (सुरभि झा), कुश (कनुप्रिया झा), रजकी (स्वेता आर्या), दुर्मुख (पिंटू झा प्रेम), बाल्मीकि (आयुष्मान झा), वशिष्ठ (अविनाश कुमार), मांडवी (रितु राज), लक्ष्मण (उत्कर्ष रंजन), भरत (भुवनेश चौहान), शत्रुघ्न (आर्यन पंत), हनुमान (हर्ष सागर), रजक (प्रदीप कुमार), विभीषण (लवीश जिंदल), अंगद (उज्जवल वत्स), सुग्रीव (उत्सव वत्स) आदि प्रत्येक कलाकार अपन श्रेष्ठ प्रदर्शन देबाक प्रयत्न करैत दर्शक दिसिसँ प्रोत्साहनक थोपड़ी बजबेबामे सफल रहलाह.  

पार्श्व मंच पर संजीव बिट्टू (प्रकाश परिकल्पना), विकास जय (संगीत), पिंटू झा प्रेम (मंच प्रबंधन), आयुष्मान झा (ध्वनि व्यवस्था) आदि कलाकार लोकनिक सहयोग सँ डॉ. प्रकाश झाक समुचित मार्गदर्शन मे उक्त नाटक सफलतापूर्वक संपन्न भेल. 

Tuesday, July 20, 2021

साहित्यकार श्याम दरिहरेक स्मृतिमे नाट्यसंस्था 'बारहमासा' द्वारा दिल्लीमे शोकसभा आयोजित

दिवंगत साहित्यकार श्याम दरिहरेक स्मृतिमे नाट्यसंस्था 'बारहमासा' द्वारा दिनांक  १८ जुलाइ, २०२१ क' (रविदिन) शोकसभा आयोजित कएल गेल । पूर्वी दिल्ली स्थित नरेन्ज्यान स्टूडियो,भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, निर्माण विहार मे उक्त सभाक आयोजन भेल । कोविड संक्रमणक संभावित तेसर लहरिक संदेह ओ सरकारी निर्देशक अनुपालन करैत व्यवस्था तदनुकूल कएल गेल छल । उपस्थिति अपेक्षानुकूल सेहो कम्मे कहक चाही । सभा आयोजनक रूपरेखा किछु एहि तरहे छल : दरिहरे जीक साहित्यिक ओ सामाजिक जीवनक परिचय, श्रद्धादीपक रूपमे दीप प्रज्ज्वलन , श्रद्धा सुमनक रूपमे पुष्पांजलि, स्मृतिक रूपमे भावांजलि, व्यक्तित्वक रूपमे स्मरणांजलि ओ कृतित्वक रूपमे काव्यांजलि सह नाट्यांजलि ।

निर्धारित समय सँ आयोजनक शुरुआत बारहमासाक संस्थापक रंगकर्मी मुकेश झा कएलनि आ तदुपरान्त विधिवत सञ्चालन केर जिम्मा मनीष झाकेँ सोंपि देल गेल । उपस्थित जनमानस हेतु ई जानब आवश्यक होइछ जे जाहि व्यक्तिक स्मृति मे ई आयोजन कएल गेल अछि हुनक व्यक्तित्व ओ कृतित्वक विस्तार कतेक अछि, प्रभाव कतेक अछि । एहने सन जिज्ञासा संग उपस्थित लोकक बीच हुनक व्यक्तित्व ओ कृतित्वक परिचय आलेख पाठ कएल गेल । दरिहरे जीकेँ बहुत लगीच सँ जननिहार डॉ. कमल मोहन चुन्नूक एक गोट परिचयात्मक आलेख जेकि दरिहरे जीक देहवसानक किछुए दिनक उपरान्त हिन्दीक एक गोट चर्चित समाचार ब्लॉग पर प्रस्तुत कएल गेल छल तकरहि मैथिली मे त्वरित अनुवाद करैत संचालक द्वारा मंच सँ प्रस्तुत कएल गेल । एहि आलेख मे हिनक जीवनक मूल-मूल बिंदु पर चर्च कएल गेल अछि जेकि प्रेरकताक संग-संग अनुकरणीय सेहो अछि ।

परिचय प्रस्तुतिक पश्चात हुनक छायाचित्रक सोझा दीप जराओल गेल आ उपस्थित एकहक व्यक्ति द्वारा पुष्य अर्पित कएल गेल । बहुत कम समयमे लोकक संग घनिष्ठता बढ़ाएब सन जे हुनक समावेशी गुण छल से शनैः-शनैः प्रत्येक वक्ताक अनुभव सँ गप सोझा अबैत गेल । अनुभव साझा करबाक क्रममे अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्ष विजय चन्द्र झा, अरुण कुमार मिश्र, संस्कृति मिश्र, मायानन्द झा, मनोज श्रीपति, कश्यप कमल आ मुकेश झाक स्मृति वक्तव्यमे  हुनक अनुशासित ओ समर्पित जीवनक प्रत्येक गुणकेँ लगीच सँ चिन्हल-जानल सन आभास करबैत  छल   

स्मृति वक्तव्यक उपरान्त दरिहरे जी रचित एक गोट चर्चित 'फाटल बिहौती नूआ' कथाक पाठ (संवाद आधारित नाट्यांजलि) आ दू गोट कविता क्रमशः 'बेटी-१' एवं 'आत्मबोध' (संगीतबद्ध काव्यांजलि) प्रस्तुत कएल गेल । सहभागी कलाकार मे मुकेश झा, पूनम सिंह, मनीषा मिश्रा, संतोष कुमार, मनु झा, संगीत संयोजन दीपक ठाकुर, वादन- प्रसून नारायण, गायन-संतोष कुमार, मुकेश झा, मनु झा, पूनम सिंह, मनीषा मिश्रा,दीपक ठाकुर, प्रसून नारायण एवं राजेश कुमार आदि लोकनिक छल । सहयोगी संस्थाक रूपमे अछिञ्जल, अस्मिता आर्ट एंड कल्चरल फाउंडेशनक संग-संग उपस्थित दर्शक लोकनि द्वारा स्व. श्याम दरिहरे केँ कृतज्ञ श्रद्धांजलि अर्पित कएल गेल ।  

Tuesday, January 15, 2019

मैथिली फिल्म 'लव यू दुल्हिन' केर ट्रेलर रिलीज

१५ जनवरी,२०१९ क' अवसर छल श्री राम जानकी फिल्म्स द्वारा निर्मित आ कुसहा त्रासदी पर आधारित फिल्म 'लव यू दुल्हिन' केर टीजर आ ट्रेलर रिलीज करबाक। दिल्लीक द्वारका (महिला पार्क)मे आयोजित उक्त कार्यक्रमक अवसर पर विशाल संख्या मे भाषाप्रेमी लोकनिक उपस्थिति देखल गेल। टीजर वा ट्रेलर मे फिल्मक संकेत मात्र द्रष्टव्य होइत अछि सएह देखल गेल। मनोरंजनक दृष्टिए फिल्मक ट्रेलर, टीजर वा गीतक जे किछु अंश देखाओल गेल से बेस आकर्षक छल। फिल्मक बहुतो दृश्य एहेन देखल गेल जे भोजपुरी फिल्मक समकक्ष ल' जेबाक प्रयास हेतु सेहो प्रयोग कएल गेल अछि।
फिल्मक जे सभसँ मजगूत पक्ष अछि से अछि सर्वहारा वर्गक मैथिली। भाषाक क्षेत्रीय सीमाकरण केँ तोड़ैत व्यापक रूप देबाक जे प्रयास कएल गेल अछि से सराहनीय अछि। एहि फिल्ममे अभिनय केनिहार बहुतो कलाकार केँ विभिन्न माध्यम सँ अभिनय करैत देखलियनि अछि मुदा एहि बेरुक हुनक उपस्थिति देखि एतबा पूर्ण विश्वासक संग कहल जा सकैछ जे ताहि मामिलामे मनोज श्रीपति केर निर्देशकीय पक्ष काबिल-ए-तारीफ अछि कारण कोन कलाकारक गुण केँ कोन रूपे प्रयोग कएल जाय सएह निकालब वास्तवमे निर्देशकीय गुण होइछ।
विकाश झा बतौर गायकक रूपमे जतबे प्रसिद्धि प्राप्त केलनि अछि आगामी भविष्य मे तेहने चर्चित अभिनेताक रूप मे अपनाकेँ उतारबा लेल मेहनति क' रहलाह अछि से एक बेर सम्पूर्ण फिल्म देखलाक बाद सेहो स्पष्ट भ' जायत। सुर संग्राम फेम प्रसिद्ध गायक आलोक कुमारक भूमिका पूरा स्पष्ट नै भ' पाएल मुदा कम्महि मे हुनक भाव-भंगिमा खासक' नृत्य बेस प्रभावित केलक। निःसंदेह शुभनारायण जी एक अलग मिजाज मे देखना गेलाह। अमिय कश्यप खलनायकक भूमिका मे बेस इमानदारी सँ प्रस्तुत भेलाह अछि।
फिल्मक संगीत पक्ष बेस दमदार अछि। सुधीर झाक गीत लेखन सँ साइते केओ मैथिली संगीतानुरागी अपरिचित हेताह से सुधीर झा फिल्मक माँगक हिसाब सँ गीत लेखन मे सफल भेलाह अछि। एकटा हिन्दी (मुजरा) गीत जे कल्पना पटवारीक गाओल भलेही मैथिली फिल्मक दृश्यक हिसाब सँ उपयोग कएल अछि मुदा सुधीर झाक प्रतिभाकेँ हिन्दी फिल्ममे प्रयोग हेतु दस्तक द' रहल अछि। विकाश झाक स्वर होइन्ह वा देवानन्द केर सुमधुर  स्वर होइन्ह वा पारंपरिक गीत हेतु प्रयोग कएल स्वर मे कविता, मधुलता, मोनी आदि होथि निःसंदेह धनञ्जय मिश्रा सन सूक्ष्म आ पारखी संगीतकारकेँ बेगरता छल एहि फिल्मक संगीत हेतु।
प्रसंगवश किसलय कृष्णक ओ वक्तव्य मोन पड़ि रहल अछि जे सही मायने मे देखल जाय त' "मैथिली फ़िल्म एखन संक्रमण काल सँ गुजरि रहल अछि"। वास्तव मे फिल्मक गुणवत्ताक चर्च तखन करब उचित हएत जखन संख्यात्मक वृद्धि होइक। एहेन संक्रमण काल मे जँ कोनो निर्माता एतबा बजट संग मैथिली फिल्म बनेबाक हिम्मत करै छथि त' निःसंदेह साधुवाद आ प्रशंसाक पात्र छथि। विष्णु पाठक आ रजनीकान्त पाठक सन हिम्मती लोक जा धरि एहेन-एहेन काज नै टेकता मैथिली फिल्मकेँ स्थापित हएब त' दूर निर्माणक कल्पनो करब असंभव अछि।

फिल्मक सम्पूर्ण टीमकेँ फिल्मक सफलताक अग्रिम शुभकामना!

Thursday, December 27, 2018

मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’

प्रेमक बसात फिल्मक सन्दर्भमे कोनो टिप्पणी करबासँ पूर्व फिल्म निर्माणक समूचा टीमक संग जे सभसँ पहिल वाह निकलैत अछि ओ निकलैत अछि फिल्मक निर्देशक सह लेखक रूपक शरर आ निर्माता वेदान्त झा केर प्रति जिनक दृढ़संकल्पता, समर्पणता आ लगनशीलता फिल्मकेँ कतेक हिट करौलक ताहिसँ बेसी महत्त्वपूर्ण अछि जे कतेक लोककेँ जोड़लनि, जगौलनि आ एकटा अभियानक रूपमे एकरा विस्तार देलनि । फिल्म पसीन करब नै करब, दर्शक द्वारा हॉल धरि पहुँचब नै पहुँचब दर्शकक मानसिकता आ समय पर निर्भर करैत छनि मुदा मैथिली फिल्मक प्रचार-प्रसार केर सन्दर्भमे जे कोनो मिथ्याडम्बर पसरल छल तकर ई लोकनि खंडन जरूर केलनि । सामाजिक सञ्जाल होइक वा जमीनी स्तर पर उतरि घरे-घर जाक’ लोककेँ जागरूक करबाक परिणाम थिक जे गामसँ ल’ क’ परदेश धरि आइ मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’ सभक ठोर पर चढ़ल अछि आ मैथिली फिल्मक इतिहास मे एक महत्त्वपूर्ण कड़ी जोड़बा लेल तैयार अछि।

२५ दिसम्बर,२०१८ क’ जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू),दिल्ली केर ‘कला एवं सौंदर्यशास्त्र संस्थान सभागारमे 'जे एम के एंटरटेनमेंट'क बैनरमे बनल मैथिलीक बहुचर्चित फिल्म ‘प्रेमक बसात’ केर स्क्रीनिंग कएल गेल । ज्ञात हो कि एहिसँ पूर्व दिल्ली-एनसीआरक विभिन्न क्षेत्रमे एकर प्रदर्शन सेहो कएल गेल आ तहिना दर्शक दिससँ सेहो फिल्मकेँ नीक रिस्पॉन्स भेटल । जेनाकि अन्यान्य भाषा-भाषी क्षेत्रमे फिल्म निर्माण निरंतरताक संग आगाँ बढि रहल अछि तेहेन सन स्थितिमे स्वाभाविक अछि ओहिसँ सम्बद्ध लोकक वास्ते सुनिश्चित रोजगारक रूपमे एक विकल्प फूजल अछि । मैथिली फिल्म निर्माणक प्रति उदासीनता विभिन्न प्रकारक अवधारणाकेँ जन्म दैत अछि आ तैयो पर ज’ कोनो व्यक्ति एहेन सन दुःसाहस करै छथि त’ हमरा लोकनिकेँ चाही कि ओकरा प्रोत्साहित कएल जाय ।

फिल्मक संदर्भमे किछु महत्त्वपूर्ण बात कहब आवश्यक अछि जेनाकि फिल्मक कथा आ ओकर ताना-बाना बेस प्रभावित केलक । कोनो जाति वा समुदाय विशेष मध्य विभेदीकरणक राजनैतिक दुष्प्रभाव चाहे कतबो होइक मुदा कला आ साहित्य सभदिना एकटा सौहार्द्रपूर्ण वातावरणक निर्माण करैत आबि रहल अछि आ तैं कला आ साहित्यकेँ समाजक दर्पण केर रूपमे सांकेतित कएल जाइत रहल अछि । सामाजिक स्तर पर अस्वीकार्य हिन्नू-मुस्लिम प्रेमक केन्द्रमे नायक-नायिकाकेँ उतारब एकटा चुनौती अछि मुदा से सत्योद्घाटन करैत विषय-वस्तुकेँ सोझा रखैत लेखकक बुधियारी स्पष्ट रूपसँ दृष्टिगोचर होइत अछि ।

रूपक शरर पहिने एक सशक्त अभिनेता छथि तखन लेखक वा निर्देशक तैं कोन कलाकारसँ केहेन काज लेल जेबाक चाही से नीक जेंका जनैत छथि आ एकटा निर्देशकक रूपमे सफल भेल छथि । एकटा लेखकक रूपमे मारिते रास त्रुटि सभ सोझा अबैत अछि मुदा नीक गप्प ई जे ताहिसँ फिल्मक प्रस्तुतिमे कतौ बाधा नै अबैत अछि अपितु आगाँ हिनकासँ असीम संभावनाक प्रति आश्वस्त होइत छी । हिनक शालीनता आ कर्मठताक सभसँ पैघ उदाहरण जे ई प्रत्येक बातकेँ स्वीकारबाक क्षमता रखैत छथि आ भविष्य मे कोनो सुधार हेतु साकांक्ष देखल जाइत छथि तैं एहने सकारात्मक व्यक्तिसँ आशा आ अपेक्षा सेहो कएल जा सकैछ ।

फिल्मक लोकेशन, कैमरा, कोरियोग्राफी, गीत, संगीत, गायन, सम्पादन, वस्त्र विन्यास, साज-सज्जा आ अन्य तकनीकी पक्ष पर सेहो खूब काज कएल गेल अछि । मुख्य अभिनेताक रूपमे पीयूष कर्णक अभिनय सराहनीय अछि ख़ासक’ हिनक दोसर बेरुक उपस्थिति डॉक्टर सलीम केर किरदारमे भाव-भंगिमा बेस प्रभावित केलक । अभिनेत्री रैना बनर्जी (माहिरा) शुरूसँ अंत धरि अपन टोन कायम रखबामे सफल भेलीह अछि । महिरा केर शौहर रहमान केर रूपमे जीतू सम्राट समूचा फिल्ममे एक फराक छविक निर्माण करैत छथि । शरत सोनू माहिरा केर भाइ तस्लीमक किरदारमे एकटा सशक्त,अनुभवी आ परिपक्व अभिनेताक रूपमे देखल गेलाह । तस्लीमक पत्नीक किरदारमे मरियम (आरती शंकर मिश्रा) सेहो कतौ ओवरटोन नै भेल छथि । गोविन्द पाठक (भगत जी)क उपस्थिति मात्र फिल्मक रोचकता बना रखबामे सफल भेल अछि । नायकक तीन गोट लंगोटिया संगी सेहो एक-दोसरा संग ट्यून बनेबामे सफल भेल छथि । आशुतोष सागर कम दृश्यमे नीक काज केने छथि । निःसंदेह सहयोगी मुदा महत्त्वपूर्ण कलाकारक रूपमे मोना रे, एस सी मिश्रा,कल्पना मिश्रा, राजेन्द्र कर्ण, प्रज्ञा झा, शैल झा, प्रेम नाथ झा, राकेश त्रिपाठी , राजीव झा, आकाश दीप, अनुराग कपूर, कुणाल ठाकुर, भारतीश झा, मनीष झा, सुशोभित झा आदिक अभिनय सराहनीय अछि ।

 

फिल्मक संगीत पक्ष बेस मजगूत अछि जकर आनन्द डॉल्बी डिजिटल हॉलमे बैसिक’ लेल जा सकैछ । जेनाकि तोची रैना केर स्वरमे गाओल गीत “आस पुरा दिय’ मौला” आ आदित्य नारायण केर गाओल गीत “अहाँ जे एलौं त” मैथिली फ़िल्ममे पहिल बेर प्रयोग कएल गेल अछि त’ एतबा गप आत्मविश्वासक संग कहल जा सकैछ जे सावनी मुद्गल केर स्वरमे “नयन अटकल अहींक नयनमे”, प्रवेश मल्लिक आ नेहा प्रियदर्शिनी केर स्वरमे “ललमुनियाँ के ताड़ी”, सुनील मल्लिकक स्वरमे “ई झूठक दुनियाँ” सेहो ओहि गीत सभसँ कतौ उन्नैस नै भेल अछि । निःसंदेह गीतकेँ कर्णप्रिय बनेबामे सरोज सुमन, प्रवेश मल्लिक आ एस कुमार केर संगीत संग सरल,सहज आ सुन्दर शब्दक प्रयोग करैत सारिका कुमार, अयोध्यानाथ चौधरी, शेखर अस्तित्व, प्रवेश मल्लिक आदिक गीत लेखन सेहो ततबे प्रशंसनीय अछि ।    

एकटा सामान्य दर्शकक रूपमे ई फिल्म बेस पसीन पड़ल । जे कोनो कमजोर पक्ष सोझा आएल अछि ताहि लेल आगाँ सुधारात्मक प्रयास कएल जा सकैछ मुदा फिल्म प्रभावित नै भेल अछि आ निर्माणक प्रसंशा मुक्त कंठसँ कएल जा सकैछ । समीक्षक लोकनिक विचार फराक भ’ सकैत छनि । मैथिली फिल्मक गुणवत्ता वा तुलनात्मक दृष्टिकोण आएब आवश्यक मुदा एखन से बेर नै आएल अछि कारण जा धरि संख्यात्मक वृद्धि नै हएत तुलना करब मोसकिल हएत । फिल्मक गुणवत्ता हेतु सभसँ आवश्यक आ महत्त्वपूर्ण अछि प्रोफेशनल कलाकारक चयन , तकनीकी टीम, संगीत, लेखन, निर्देशन आदि जेकि गानल-गूथल फिल्म मात्रमे देखल जा सकैछ अन्यथा यू-ट्यूब हिट करेबा लेल मारिते रास फिल्म उपलब्ध अछि जकर स्तरहीनता केर आधार पर मैथिली फिल्म उद्योग स्थापित करबाक सपना साकार हएब असम्भव अछि । ई फिल्म ओहि तमाम अवधारणा केँ खंडित करैत ताहि सभसँ कएक डेग आगाँ बढि प्रोफेशनल ढ़ंगसँ काज करबामे सफल भेल अछि आ मैथिली फिल्मक दशा-दिशा निर्धारण मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निमाहत ततबा आश्वस्त छी ।

Wednesday, December 05, 2018

दिल्लीमे बहत प्रेमक बसात


मैथिली फिल्म 'प्रेमक बसात' केर प्रोमोशन आ प्रदर्शन हेतु फिल्मक लेखक सह निर्देशक श्री रूपक शरर किछु दिन सँ एखन दिल्ली प्रवास मे छथि। कोनो निर्देशक मे एहि प्रकारक जुनून विरले देखल जाइत अछि। भारत होअए वा नेपालीय मिथिला क्षेत्र, दुन्नू ठाम किछु हॉलक उपलब्धता अनुसार फिल्मक यथासंभव प्रदर्शन सेहो भेल। ई लोकनि एत्तेक जल्दी नहि त' हारि मानता आ ने हड़बड़ा क' नोकसानक कोनो रोदन करताह। तखन करताह की? करताह ओएह जे हमरा लोकनि देखि रहल छी आ से थिक हिनका लोकनिक सद्प्रयास। प्रयास की क' रहलाह अछि से सामाजिक सञ्जाल पर सभक सोझा अछि। महानगर मे बसल मैथिल लोकनि धरि फिल्म कोना पहुँचय एखन ताहि लेल मुम्बई आ दिल्ली मे सकारात्मक डेग बढ़ा चुकलाह अछि। रूपक भाइ, वेदांत भाइ आ फिल्मक समस्त टीम अहाँ लोकनिक समर्पणता सँ मैथिली फिल्मक भविष्य एक ने एक दिन अवश्य निर्धारित हेतैक, कारण मेहनति बेकार नै जाइत छैक। सम्भव छैक जे अहाँक मेहनतिक लाभ आगाँ जा क' दोसर लोककेँ भेटनि।

जे मूल बात कहबाक छल अबै छी ताहि पर मने फिल्म प्रदर्शन सम्बन्धी विषय पर। दिनांक ०८ आ ०९ दिसम्बर,२०१८ क' संध्या ०६:०० सँ ०९:०० बजे निम्नलिखित स्थान पर एकर प्रदर्शन हएब सुनिश्चित भेल अछि। जेनाकि दिल्लीमे ई पहिल प्रदर्शन अछि ताहि हिसाबे बेसी सँ बेसी दर्शककेँ एकत्रित हएब आवश्यक अछि। मुख्य उद्देश्य मैथिली फिल्म देखबा लेल लोककेँ जागरूक करबाक अछि। जागरूकताक क्रममे रूपक भाइ दिल्लीक विभिन्न क्षेत्र मे जा-जाक' जन-जन सँ जुड़बाक जे प्रयास क रहलाह अछि से कतौ ने कतौ एकटा सार्थक उमेद सन बुझना जा रहल अछि।

ओना दिल्ली मे एखन मैथिलीक विभिन्न कार्यक्रमक सीजन चरम परम अछि आ अहू दू दिन दिल्ली आ लगीचक किछु क्षेत्र मे विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक आयोजन संग-संग दू-दिवसीय विशुद्ध साहित्यिक/सांस्कृतिक कार्यक्रम मलंगिया महोत्सव केर आयोजन सुनिश्चित अछि, तैं सम्भव अछि जे हम व्यक्तिगत स्तर पर शो देखबा सँ वंचित रहब। ओना निर्देशक साहेब गछलनि अछि जे ई दू दिन जँ नीक सहयोग/उपस्थिति रहल त' पुनः शीघ्रहि आर अधिक शो केर प्रदर्शन हएत कारण हमर लक्ष्य अछि जे प्रवासी मैथिल लोकनि उपलब्धताक एहि अवसरक लाभ उठाबथि ताकि हमरो लोकनि आगाँ फेर सँ सिनेमा बनेबाक साहस क' पाबी।

हमर मानब अछि जे बहुतो एहेन लोक छथि जिनका वास्ते उक्त आयोजन सँ बेसी महत्त्वपूर्ण सिनेमा देखब होइत अछि आ सम्भवतः बेसी गोटे सपरिवार कोनो हिन्दी-अंग्रेजी सिनेमा देखबा लेल जाइते रहैत छथि, खासक' हुनका लेल जे एहि बेर अपने सपरिवार निम्नलिखित स्थान आ समय पर पहुँची आ एकटा दर्शकक रूपमे अपन सम्पर्कक लोककेँ सेहो प्रेरित करी। फिल्म निर्माणक बाद दर्शकक रूपमे हमरा लोकनिक सेहो किछु जिम्मेवारी बनैत अछि तकर निर्वहन करी आ तदनुकूल सहयोग करी।

सिनेमा-प्रेमक बसात
राजा राममोहन रॉय मेमोरियल हॉल
(गंधर्व महाविद्यालय केर ठीक सोझा)
विष्णु दिगम्बर मार्ग, आई टी ओ (मेट्रो गेट संख्या-२)

नोट : अग्रिम बुकिंग करेबा लेल अपने लोकनि अभि आनन्द/विपिन झा सँ 8447883467 वा 7532871208 पर संपर्क सेहो क' सकैत छी वा सहूलियतक अनुसार काउंटर पर लेल जा सकैत अछि।