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Thursday, November 10, 2022

अमृता झा, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मधुबनी जिलान्तर्गत बसैठ चानपुरा निवासी अमृता झा केर रूचि नान्हिए टा सँ मिथिला पेन्टिंगक प्रति रहलनि अछि । आरके कॉलेज मधुबनी सँ बीएससी शिक्षा प्राप्त केला बाद अपन एहि रुचिकें व्यावसायिक रूप देबा लेल माया झा केर संरक्षण मे वर्ष २००६ मे मिथिला पेन्टिंगक विधिवत शिक्षा लेलनि । विवाहक उपरान्त दिल्ली प्रवास मे एला उत्तर एहि मे तन्मयतापूर्वक लागि गेलीह आ विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्था आदि सँ आबद्ध भ’ एकरा विस्तार देबा मे लागि गेलीह । हिनक पहिल जुड़ाव एक गोट गैर-सरकारी संस्था “अपना कोना” सँ भेल जाहि कारणे स्थानीय लोकक बीच हिनक पेन्टिंग बेस पसीन कएल जा लागल । निरन्तरता देबाक क्रममे सरकार द्वारा कला-संस्कृतिक प्रोत्साहन हेतु “दीनदयाल अन्त्योदय योजना”क अन्तर्गत दक्षिण दिल्ली जिला मे स्थानीय जिलाधिकारीक संरक्षण मे संचालित “फ्लैगशिप योजना” सँ जुड़लीह जकर लाभ विभिन्न रूपमे भेट रहलनि अछि, जेनाकि उचित पारिश्रमिक आ दिल्ली एवं लगीचक क्षेत्र मे पैघ सँ पैघ मॉल होइ वा सामूहिक मेला आदि मे निःशुल्क स्टॉलक उपलब्धता आदि ।

मिथिला पेन्टिंगकें विभिन्न वस्तु ओ विभिन्न आकृति देबाक क्रममे सूती कपड़ा, सिल्क, जूट, कैनवास, लकड़ी, देबाल, डायरी, धोती, साड़ी, पाग, डोपटा, शॉल, चादर, सूट, बंडी, कोट कुर्ता, मास्क, तोरण, विवाह-उपनयन आदि मे प्रयुक्त होमय बला वस्तु सभ पर जेनाकि कोहबर, अहिबातक पातिल आदि, रास, सीता स्वयंवर, विभिन्न देवी-देवता आदिक संग-संग आधुनिक उपकरण जेनाकि लैपटॉप बैग, की-चेन, ज्वेलरी बॉक्स, बुक मार्क्स, ईयर रिंग, कुशन कवर, बैग आदि पर चित्रित करबामे दक्ष छथि ।     

यूट्यूब पर “माई मधुबनी कल्चर (My Madhubani Culture)” नाम सँ संचालित चैनल पर वीडियो सभ सेहो अपलोड करैत रहैत छथि । अपन एहि कला कौशल कें विस्तार देबा लेल सक्रिय रूप सँ अन्यान्य सोशल नेटवर्क जेनाकि फेसबुक, इन्स्टाग्राम आदिक सेहो भरपूर उपयोग कय रहलीह अछि । एहि ठाम हिनक बनाओल पेन्टिंगकें सेहो बेस पसीन कएल जाइत अछि जकर कारण हिनका लेल ई व्यावसायिक प्लेटफॉर्म विक्रयक हेतु सुलभ भ’ जाइत छनि ।

मिथिला पेन्टिंग कला मे निपुण अमृता झा प्रोत्साहन ओ समर्थन हेतु अपन पति प्रफुलचन्द्र झाक विशेष आभार दैत छथि कारण हुनक सहयोगक बले स्वतंत्र निर्णय लैत आगाँ बढैत रहबाक स्वप्न साकार क’ रहल छथि । नारी सशक्तिकरण केर पक्षमे हिनक स्पष्ट मत छनि जे जखन आधुनिक समाजमे पुरुष आओर स्त्रीकें समान रूप सँ आगाँ बढबाक अवसर भेट रहल छनि तँ जे महिला जाहि कोनो विधा मे कुशल छथि सएह ल’ आत्मविश्वासक संग सोझा आबथि आ अधिकारपूर्वक अपन सपना साकार करथि ।

Thursday, September 29, 2022

बोस (सुभाष चन्द्र बोस), मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

रंगसंस्था ‘बारहमासा मैथिली नाटकक संग-संग हिन्दी नाटकक क्षेत्रमे सेहो समय-समय पर उपस्थिति दर्ज करबैत रहल अछि । गोल मार्केट, दिल्लीक नजदीक भाई वीर सिंह मार्ग स्थित ‘मुक्तधारा सभागार मे विश्वम्भर उपाध्याय लिखित नाटक ‘बोस (सुभाष चन्द्र बोस)’क मंचन बारहमासा द्वारा कएल गेल । महात्मा गाँधी सँ मत भिन्नताक पश्चात कांग्रेस अध्यक्ष पदक त्याग करैत, राजसी ठाठ मे पलल-बढ़ल सुभाष चन्द्र बोस जमीनी स्तर सँ संघर्ष करैत ब्रिटिश साम्राज्य सँ स्वतंत्रता प्राप्ति लेल सैन्य विद्रोहक जे रास्ता चुनलनि ताहिमे हुनक तीक्ष्ण बुद्धि, चातुर्य कौशल आ सांगठनिक क्षमताक जे किछु प्रमाण भेटैत अछि से देशक युवा, आम नागरिक आ राजनीतिक लोकनिक वास्ते अनुकरणीय आ बेस प्रेरक अछि । वीर सेनानी सुभाष चन्द्र बोस वास्तवमे नेताजी रहथि से उक्त नाटकक माध्यम सँ हुनक कृत्तित्व आ विराट व्यक्तित्त्वकें दर्शाओल गेल अछि ।

दिल्लीमे नाटकक मंचन निरन्तर होइत रहल अछि जाहिमे अधिकाधिक चयनक विषय सामाजिक असमानता, शोषण, गरीबी आदि रहैत अछि मुदा भारतीय स्वतंत्रता मे अपन सर्वस्व न्यौछावर केनिहार एहेन वीर सेनानी पर केन्द्रित ई नाटक वास्तवमे अपन राष्ट्रनायकक त्याग आ समर्पणक प्रति गौरवबोध करबैत अछि ।

मंच पर सुभाष चन्द्र बोसक भूमिका मे नवोदित मुदा अभिनयक क्षेत्रमे कम्मे समयमे परिपक्व होइत अभिनेता मनु कुमार झाक उपस्थिति दर्शक लोकनिक ध्यानाकर्षण करबामे बेस सफल रहल । सुप्रिया सत्यम (कैप्टन लक्ष्मी), नितीश कुमार झा (हिटलर), मनीषा मिश्रा (सूत्रधार आ लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), मायानन्द झा (उत्तमचंद आ सेठ किरोड़ीमल), अमन गुप्ता (मिर्जा आ शाहनिवाज), रोहित कुमार (महात्मा गाँधी आ कैप्टन मोहन सिंह), टेन्जीन बोध (जवाहर लाल नेहरु),निर्भय कर्त्तव्य (भगतराम आ ढिल्लन), रौशन सिंह (कर्नल हंट), राजेश कुमार बेनी (अफ़गान सिपाही), शुभम (सहगल), पूनम सिंह (लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), वन्दना (लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), रवित चावला (बालवीर) एवं सैनिक समूहमे तरुण झा, लालू कुमार, ऋत्विक राज, करन चौहान आदि लोकनिक उपस्थिति छल ।

मंचक पाँछा दीपक ठाकुर (संगीत), राहुल चौहान (प्रकाश), डालचन्द (वस्त्र विन्यास), पूनम सिंह आ मनीषा मिश्रा (वस्त्र सज्जा), नितीश कुमार एवं रोहित कुमार (रूप सज्जा), तरुण झा (प्रस्तुति प्रबंधन), राजेश बेनी (मंच प्रबंधन), अमन गुप्ता (पार्श्व ध्वनि) आ मनु कुमार झा (सह-निर्देशन) केर सहयोग सँ सफलतापूर्वक संपन्न एहि नाटकक निर्देशन केलनि मैथिली एवं हिन्दीक वरिष्ठ रंगकर्मी मुकेश झा ।

Wednesday, September 07, 2022

मैथिली कथा गोष्ठी, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (आयोजन उपरान्त समाद)

मैथिली साहित्य महासभा द्वारा विगत रवि'क साँस नव दिल्ली स्थित संस्कार भारती सभागार मे मैथिली कथा गोष्ठीक आयोजन संपन्न भेल,जे मूलतः कथा पाठक आयोजन छल आ एहि मे नव प्रवेशीक अधिकांश सहभागिता रहल, जे मैसाम द्वारा पहिनहिं सँ सुनिश्चित छल । राष्ट्रीय

राजधानी मे एक दशक बाद कोनहूँ गैर-सरकारी संस्था द्वारा आयोजित एहि गोष्ठी मे कुल सत्रह कथाकार कथा पाठ कयलनि । एहि गोष्ठी अध्यक्षता कयलनि सुपरिचित साहित्यकार डॉ. आभा झा आ विशिष्ट अतिथिक रूप मे मैसामक पूर्व सचिव संतोष राठौड़ उपस्थित छलाह । गोष्ठीक कुशल संचालन युवा कवि मनीष झा “बौआभाइ' कयलनि ।

एहि मैथिली कथा गोष्ठी मे शैलेन्द्र झा 'आत्मसम्मान', मनोज कर्ण मुन्नाजी 'बॉस' 'ठेकनगर', हेमन्‍त झा 'अपन-अपन सोच''महत्वाकांक्षा', भावना मिश्रा “ककर दोख', मुन्नी कामत 'तरसैत आँखि' 'भ्रष्टाचार', रेणु दास “बुद्धो पीसी', निशा झा 'विडम्बना', कुन्दन कर्ण 'रेबाज' आ “गरूड़-पुराण' शीर्षक, चित्रलेखा अंशु “बूझब', अमरेश चौधरी '"प्रेमक स्मृति आ आस', अमन आकाश “प्रेमक सिंगरहार', जगदानन्द झा मनु 'हारि' 'एसगर' शीर्षक, मुकेश दत्त 'सुग्गा सन बोल', कुमार मनोज कश्यप 'वेदना' आ “आकाश कुसुम', नीरज कर्ण “रिटायर्ड” आ “छुच्छे', शिव कुमार सिंह 'दहेजक दानव' आ सुभाष कामत “मातृभाषा''मैथिली' शीर्षक कथा , लघुकथा, बिहनि कथा आदिक पाठ कयलन्हि ।

कार्यक्रमक अध्यक्षता करैत साहित्यकार डॉ. आभा झा कहलनि जे मैथिली साहित्य महासभा द्वारा एहि कथा-गोष्ठीक आयोजन सँ हम अभिभूत छी । अत्यंत अनुशासित आ व्यवस्थित गोष्ठी संपन्न भेल । कथाकारक सभक कथा सुंदर आ विचारशील छल । एहि कथा गोष्ठीमे स्त्रीमन, दिव्यांग संग अपेक्षित मानवीय व्यवहार, गाम-शहर पर केन्द्रित, आत्मविश्वास आ मातृभाषाकें प्रतिष्ठित करए बला कथा सभक पाठ प्रस्तुत भेल । गोष्ठी मे स्त्री-पुरुष कथाकारक सहभागिता उल्लेखनीय रहल । 

सोशल मिडियाक फेसबुक पर हम सभ मैथिल छी समूह पर उक्त कथागोष्ठी'क लाइव प्रसारण देखि साहित्यकार शैलेन्द्र शैली कहलन्हि जे मैसाम द्वारा उठाओल ई डेग सकारात्मक अछि, मुदा पठित कथा सभ पर समुचित समीक्षाक व्यवस्था रहने गोष्ठी मे सम्मिलित कथाकार सभ लेल मार्गदर्शनक काज क' सकितैक । शैली कहलन्हि जे गोष्ठी मे पठित अधिकांश कथा कथ्य, शिल्प आ भाषाक स्तर पर झुझुआन सन लागल । मैथिली कथा जाहि उचास धरिक यात्रा तय क' चुकल अछि, से नवागंतुक रचनाकार के बुझल रहबाक चाही आओर एहि लेल बेसी पढ़बाक बेगरता अछि । ओ कहलन्हि जे मैसाम के भविष्य मे एहेन आर आयोजन करैत एखटा कार्यशालाक रूप देबाक चाही । 

विशिष्ट अतिथि संतोष राठौड़ अपन वक्‍तव्यमे मैसाम द्वारा कथा-गोष्ठी आयोजन के महत्वपूर्ण बतौलनि । ओ कहलनि जे मैसामक नियमित गतिविधि मे एकटा आओर नव कार्यक्रमक बढोतरी मैथिली साहित्य कें प्रगतिशील बनाएत । 

Saturday, September 03, 2022

मैथिली कथा गोष्ठी, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (आयोजन पूर्व समाद)

लगभग 10 वर्ष बाद दिल्ली मे भ' रहल अछि मैथिली कथा गोष्ठीक आयोजन 

एकटा पैघ अन्तरालक उपरान्त राष्ट्रीय राजधानी नव दिल्ली मे मैथिली कथा पाठ सँ सम्बन्धित कार्यक्रम कथा गोष्ठी केर आयोजन कयल जा रहल अछि । एहि सँ पूर्व मैलोरंग द्वारा करीब दस वर्ष पूर्व “सगर राति दीप जरय” श्रृंखला केर वृहद कथा गोष्ठी'क स्मरणीय आयोजन भेल छल, जाहि मे भारत-नेपाल'क अनेको मैथिली स्रष्टा अपन सहभागिता दर्ज करौने रहथि ।

आब एकटा पैघ अन्तरालक उपरान्त मैथिली साहित्य महासभा द्वारा काल्हि ४ सितम्बर २०२२ कें कथा गोष्ठीक आयोजन कयल जा रहल अछि । आइटीओ'क दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर अवस्थित संस्कार भारती'क सभागार मे ई आयोजन साँझ'क ४ बजे सँ ७ बजे धरि चलत ।

हालक वर्ष मे मैथिली साहित्यक परिदृश्य मे सक्रिय भेल कवयित्री आ लेखिका डा. आभा झा एहि गोष्ठीक अध्यक्षता करतीह, तँ संचालन करताह युवा कवि मनीष झा बौआभाइ । सोशल एक्टिविस्ट संतोष राठौड़'क विशिष्ट आतिथ्य मे प्रसिद्ध कथाकार शैलेन्द्र कुमार झा सहित मनोज कर्ण आ दर्जनो नवोदित कथाकार अपन कथाक पाठ करताह । मैथिली कथाक विकास मे कथा गोष्ठी (सगर राति दीप जरय)क महत्वपूर्ण भूमिका रहल अछि ।

एक प्लेटफार्म पर सभ पीढ़ीक कथाकार आ आलोचकक जुटान होइत रहल अछि आ कथा पर त्वरित प्रतिक्रिया संग तकर शल्यचिकित्सा कतेको समृद्ध कथाकार प्रदान कयलक अछि मैथिली साहित्य कें । एहि तर्ज पर मैसाम द्वारा आयोजित कथा गोष्ठीक डेग स्वागतेय अछि ।

उमेद अछि जे गोष्ठी मे उत्कृष्ट कथा सभ प्रस्तुत हयबे करत , संगहि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र मे मैथिली कथाधारा आ समीक्षाक अनेको वरिष्ठ आ अनुभवी व्यक्तित्व' उपस्थिति समीक्षकीय दिशा निर्देश प्रदान करै जेताह । निश्चित रूप सँ मैसाम अध्यक्ष सुनित ठाकुर, संजीव सिन्हा, हेमन्‍त झा, कन्त शरण आदि द्वारा उठाओल गेल ई सकारात्मक डेग थिक ।

Monday, August 29, 2022

नीलेश दीपक, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मधुबनी जिलान्तर्गत मौआही गामक निवासी नीलेश कुमार दीपक छात्र जीवनहि सँ रंगमंचक प्रति आकर्षित रहलाह अछि । रंगप्रेमी हेबाक कारणे हिनक अभिरुचि अभिनय आ निर्देशन मे प्रारम्भहि सँ रहल आ इएह कारण छल जे जीवनयात्राक क्रममे गाम होय वा दिल्ली सभ ठाम मात्र और मात्र अही विधाकें अपन कैरियरक प्राथमिकता मे रखलनि । मधुबनी स्थित जगदीश नन्दन महाविद्यालय मे आयोजित एकल अभिनय प्रतियोगिता मे ‘संवदियाक चरित्र निर्वहन सं दर्शक कें अचम्भित करैत ई युवा अपन कला-कौशलक विस्तार हेतु विधिवत शिक्षा प्राप्ति उपरान्त राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आबि गेलाह ।

नीलेश दीपक केर रंगकर्मक प्रारब्ध भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), मधुबनी सँ भेल आ से शनैः-शनैः निरन्तर गतिए देशक जानल-मानल रंगसंस्था, प्रसिद्ध निर्देशक, प्रसिद्ध अभिनेता आदि लोकनिक सान्निध्य मे रंग प्रशिक्षण आ तकरा बाद कतेको मैथिली एवं हिन्दी नाटकक संगे फ़िल्म एवं धारावाहिक आदि मे हिनक सक्रिय भूमिका दर्शक लोकनिकें देखबा लेल भेटल ।

वर्ष २००१ मे पटना मे केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित ‘युवा रंगकर्मी नाट्य कार्यशाला एवं वर्ष २००६ मे संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजनाक अन्तर्गत रंगमंच हेतु प्रशिक्षित छथि । देशक प्रतिष्ठित रंगनिर्देशक मोहन महर्षि, कीर्ति जैन, के.एस.राजेन्द्रन, संजय उपाध्याय, सुमन कुमार आदि लोकनिक संग रंगकार्यक नीक अनुभव छनि ।

रंगमंच पर ‘जल डमरू बाजे’, ‘ललका पाग, ‘महुआ चरित’, ‘औरंगज़ेब’, ‘सूर्य की अंतिम किरण से पहली किरण तक’ आदि नाटक मे अभिनय, टीवी एवं पर्दा पर उपस्थितिक क्रममे सौभाग्य मिथिला द्वारा प्रसारित मैथिली धारावाहिक ‘जंगला-मंगला’, दूरदर्शन टीवीक चर्चित धारावाहिक ‘पाहुन’, मैथिली फ़िल्म ‘घोघ मे चान’, ‘हमर सौतिन’, ‘छूटत नहि प्रेमक रंग’ आदि मे अभिनयक संग-संग अविनाश दास निर्देशित हिन्दी फ़िल्म ‘अनारकली ऑफ आरा’ मे सेहो अभिनय केलनि ।  

अभिनयक संग-संग निर्देशन मे सेहो हिनक हस्तक्षेप समान रूपे होमय लागल । हिनक सफल निर्देशन मे दर्जनाधिक मैथिली एवं हिन्दीक प्रस्तुत नाटक मे ‘बिजुलिया भौजी, ‘मलाह टोली (एक चित्र)’, ‘शवयात्रा के बाद देहशुद्धि, ‘निर्मोही बालम, ‘भूख आग है’, ‘शिवाले का प्रेत, ‘केंचुली’ लेखक अरुणाभ सौरभक चर्चित नमहर कविता ‘आद्य-नायिका’क रंगमचीय प्रस्तुति आदि प्रमुख अछि । बाल रंगमंचक अनुभव संगे ‘संवदिया’, ‘अन्धेर नगरी, ‘हम बच्चे हैं चाँद सा, ‘सदाचार का ताबीज़, ‘रसप्रिया, ‘आज़ाद बकरियाँ’, ‘रंग-अबीर, ‘काबुलीवाला आदि नाटकक निर्देशन सेहो केलनि अछि ।    

रंगमंच मे विशिष्ट योगदान हेतु साहित्य कला परिषद्, दिल्ली सरकार सँ ‘युवा नाट्य निर्देशक सम्मान’, सी.आर.डी, पटना सँ ‘भिखारी ठाकुर रंग सम्मान एवं मैलोरंग,दिल्ली सँ ‘श्रीकान्त मंडल रंग सम्मान सँ सम्मानित छथि । वर्तमान मे दिल्लीक बाल भारती स्कूल मे नाट्य शिक्षकक पद पर कार्यरत नीलेश दीपक रंगमंच, धारावाहिक, सिनेमा आदि मे समान रूप सँ सक्रिय छथि ।

Saturday, July 30, 2022

रक्त-सम्बन्ध, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

संगीत नाटक अकादमीक सहयोग सँ अस्मिता आर्ट एंड कल्चरल फाउंडेशन द्वारा भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, दिल्लीक नरेज्यान स्टूडियो मे मैथिली नाटक 'रक्त सम्बन्ध'क मंचन कएल गेल।

श्याम दरिहरे लिखित 'रक्त सम्बन्ध' एक युवा आ युवतीक प्रेम सम्बन्ध पर आधारित अछि जे प्रेम एकतरफा सँ दूतरफा सहमति बनबैत एक-दोसराकेँ मिलबैत अछि। किछु समयक पछाति ओएह प्रेमी युवकक अभिन्न मित्र जकर नजरि युवती पर रहैक, युवककेँ दारूक लत लगा छल सँ ओहि युवतीकेँ अपना चंगुल मे फँसा लैत अछि। बहुतो केस, मोकदमा, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक व्यवस्था संग भावनात्मक सन्दर्भ आदिकेँ एक संग राखि एकर निराकरण पर केंद्रित अछि।

'रक्त सम्बन्ध'क परिकल्पना आ निर्देशन छल संतोष कुमारक जाहिमे मंच पर दीपक ठाकुर, ज्योति झा, संतोष कुमार, राजीव रंजन आदिक अभिनयक संग-संग पार्श्व सहयोग मे मुकेश झा, राजीव मिश्र, अमरजी राय, तरुण कुमार, अस्मिता कुमारी, राजेश बेनी, मायानन्द झा, नितीश कुमार आदि कलाकार लोकनिक सहयोग सँ नाटकक सफल मंचन भेल।
 

Saturday, July 23, 2022

मिथिला रंग महोत्सव, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मैलोरंग द्वारा आयोजित १६म मिथिला रंग महोत्सव जेकि दिनांक १३ जुलाइ,२०२२ (बुधदिन) क' राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक सम्मुख सभागार मे सुप्रसिद्ध नाटककार स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर केँ समर्पित छल। एहि अवसर पर हुनक कृतित्त्व एवं व्यक्तित्व केन्द्रित रचनावली (मैलोरंग प्रकाशन सँ प्रकाशित पोथी) केर लोकार्पण आ तकराबाद हिनक लिखित दू गोट एकांकी ' चन्दा' 'ग्रीनरूम' क्रमशः मैथिली आ हिन्दी मे मंचित भेल।

लोकार्पणक अवसर पर अतिथि मंत्रेश्वर झा (सेवानिवृत्त आईएएस), सी.एम झा (चान्सलर, सीएमजे यूनिवर्सिटी), शेफालिका वर्मा (साहित्यकार), देवशंकर नवीन (साहित्यकार), कुसुम ठाकुर (धर्मपत्नी स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर), ज्वाला प्रसाद (रजिस्ट्रार, एनएसडी) एवं मुकुन्द ठाकुर (आईएएस अधिकारी) आदि लोकनि मंचस्थ रहथि। पुस्तक लोकार्पण सत्रक संचालन केलनि अजित आजाद आ शेष सत्रक संचालन प्रकाश झा।

मैथिली मे मंचित 'चन्दा' जाहिमे सामाजिक वा धार्मिक अनुष्ठानक नाम पर चन्दा उगाहीक विभिन्न तरीका केँ दर्शाओल गेल अछि एतावता जे पोलहा क', प्रसंशा क' ' आ अन्त मे बलपूर्वक देबा लेब बाध्य करबा सन परिस्थिति केँ सेहो देखाओल गेल अछि। हास्य-व्यंग्य-विनोद मिश्रित एहि नाटकक विषय खाहे तत्कालीन समयक परिवेशक बोध करबैत हो मुदा वर्तमानक परिस्थिति मे सेहो जहिनाक तहिना इंगित करैत अछि। मंच पर राजीव रंजन, ज्योति झा, साक्षी, सुरभि, कंचन, स्नेहा, हर्ष राज, ऋत्विक राज, आयुष्मान, अनिमेष, हर्ष मनु, आर्यन पंत, नीरव निशांत, अभिनाश, प्रदीप मंडेल, हर्ष सागर आदिक उपस्थिति आ अभिनय बेस मनोरंजक रहल।

हिन्दी मे मंचित नाटक 'ग्रीन रूम' जेकि कोनो नाटकक पूर्वाभ्यास सँ ल' ' मंचित हेबा धरिक विभिन्न घटनाक्रम केँ बेस रोचक ढ़ंग सँ प्रस्तुत कएल गेल अछि। एक नाटकक निर्देशक केँ अपना-अपना धुन मे मस्त कलाकार लोकनिक संग सामंजस बैसाएब आ इच्छाक प्रतिकूल पात्रक चयन करबा सन परिस्थिति मे नाटकक मंचन करब कतेक चुनौतीक काज थिक तकरा हास्य रूपे प्रस्तुत करबामे अनिमेष, सुरभि, साक्षी, अभिनाश, प्रदीप, नीरव, दिव्यांशी, अभय, संस्कृति, भुवनेश, हर्ष, आर्यन आदि कलाकारक तालमेल उपस्थित प्रेक्षककेँ आदि सँ अन्त धरि गुदगुदबै मे सफल रहल।

मंचक पार्श्व मे अनिल मिश्रा (संगीत), दीपक यात्री (फोटोग्राफी) पिंटू झा प्रेम, हर्ष राज, साक्षी, सुरभि, धर्मवीर, कनुप्रिया आ मार्गदर्शकक रूप मे प्रकाश झा, राजीव रंजन, अंजू अहलूवालिया, रमण कुमार, ज्योति झा आदि। 

Monday, July 11, 2022

एक टुकड़ा पाप, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

रंगकर्मक प्रसिद्ध संस्था 'बारहमासा' द्वारा मैथिली नाटक 'एक टुकड़ा' पाप केर मंचन नरेज्यान स्टूडियो, भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, पूर्वी दिल्ली मे भेल।

मैथिलीक सुप्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक 'एक टुकड़ा पाप' बाल मनोविज्ञान पर आधारित अछि। प्रौढ़ होइत बच्चाक संवेदनशीलता , स्वाधीनता , चंचलता आ निःश्च्छलता पर अभिभावक द्वारा जे अनावश्यक दबाव बनाओल जाइत अछि , तथाकथित अनुशासनक नाम पर जे भयाक्रांत माहौल मे राखल जाइत अछि तकरहि दुष्परिणाम केँ नाटकक माध्यम सँ देखाओल गेल अछि। समाजक प्रबुद्ध लोक सेहो सीमित अधिकारक संग अभिभावक केँ बुझेबाक प्रयास करैत छथि, मुदा स्वभाववश कठोर एहेन अभिभावकक मानसिक सोच मे कोनो खास परिवर्तन नहि होइत छैक। परिणाम ई होइत अछि जे माता-पिता द्वारा प्रताड़ित हेबाक डर सँ चरेबा लेल ल' गेल पारी केँ रेल दुर्घटना सँ बँचबैत स्वयं दुर्घटनाक शिकार भ' जाइछ आ अल्प वयसहि मे काल कवलित भ' जाइछ।

समाजक पढल-लिखल लोक जिनका संग ओ अपन हरेक सुख-दुख केँ साझा करैत छल अपन वेदना व्यक्त करैत रहैत छल। माता-पिताक स्वभाव सँ तंग आबि हुनका लोकनिक आँखि सँ दूर कतौ जा श्रमक बले आत्मनिर्भर बनि अपन मनोनुकूल जीवन जीबय चाहैत छल जाहि मे हुनक सहयोग चाही छल, मुदा एहि निर्णयक सम्बन्ध मे हठात स्वीकृति देबा मे मौन रहलाह। एहि अनापेक्षित दुर्घटनाक बाद हुनका सँ अनजाने मे भेल मौन प्रतिक्रिया एक पाप समान छल जकर प्रायश्चित करबाक लेल आब किछु नहि बाँचल छल आ यैह 'एक टुकड़ा पाप' छल जे हुनका लेल आजीवन कचोटक विषय बनि गेल।

बारहमासा द्वारा मंचित एहि नाटकमे पात्रक संख्या सीमित अछि (एकटा स्त्री पात्र आ चारिटा पुरुष पात्र) मुदा से प्रत्येक पात्र अपनाआपमे महत्वपूर्ण अछि।

मैथिली रंगमंच मे नियमित उपस्थिति देनिहार संतोष कुमार एक एहेन अनुभवी अभिनेता छथि जिनकर संवाद प्रस्तुति, भाव-भंगिमा आ प्रतिक्रियाक समय देखि दर्शक चकित रहि जाइ छथि। हिनक अभिनयक सीमा अवधि न्यून हो वा अधिक हो, दर्शककेँ अपना पात्र संगे आदि सँ अन्त धरि बान्हि रखबामे सक्षम अभिनेता छथि। नाटक मे पिताक भूमिका मे उत्तम प्रस्तुति देलनि अछि। मनीषा मिश्र जे एकमात्र महिला पात्र छथि मायक भूमिका मे उत्कृष्ट काज केलनि अछि। मैथिली रंगमंच मे एहि नवोदित अभिनेत्रीक प्रवेश कम समय मे दर्शकक ध्यान आकृष्ट करबा मे बेस सफल रहल अछि। आउ गप्प करी हरफनमौला रंगकर्मी मायानंद झाक जे कोनो पात्रकेँ मंच पर उतारबा सँ पहिने स्वयं केँ ओहि रूप मे तैयार करैत छथि आ तैं उत्कृष्ट प्रस्तुति देबा मे सक्षम देखल जाइ छथि। प्रबुद्ध आ जागरूक व्यक्तिक भूमिका मे आन नाटक जेकाँ एहि बेर सेहो अपन अभिनय सँ दर्शक केँ प्रभावित कयलनि अछि।

नाटकक केन्द्रीय पात्रक भूमिका केँ मनु कुमार झा पूर्ण इमानदारी सँ निमाहलनि अछि। मनुक अभिनयक विशेषता ई छल जे मंच पर उत्तम प्रस्तुति देबा लेल ओहेन सभटा अनुशासनक पालन करैत देखल गेलाह जेकि एकटा नवोदित कलाकार वास्ते सभसँ आवश्यक तत्व अछि । एहि नाटकमे मनु झाक उपस्थिति अनेक दृष्टिएँ एकटा आवश्यक अभिनेताक रूप मे देखल गेल। मनु झाक रंगमंचक प्रति अनुराग आ लगन देखि ई आश्वस्त भेल जा सकैए जे भविष्यक एक नीक अभिनेता छथि। अभिषेक आयुष जे कि सहायक पात्र एक सेवकक रूप मे देखल गेलाह नीक अभिनय केलनि तथापि एक अभिनेताक रूप मे आर बेसी संभावना छनि जकरा दर्शकक सोझा राखब आवश्यक बुझना जाइछ।

नाटकक बीचमे प्रयोग सांकेतिक अभिनय मुकेश झाक प्रयोगधर्मी निर्देशन पक्षकेँ उजागर करैत अछि। निश्चित रूपसँ नाटकक सफल सम्पादनक श्रेय एहि नाटकक निर्देशक मुकेश झाक संग बरहमासाक सगर टीमकेँ जाइत अछि।

मंचक पाछाँक सहयोगी दीपक ठाकुर (गीत), प्रसून नारायण श्रीवास्तव (संगीत), मुकेश झा (प्रकाश), पुष्पा झा (मेकअप), पूनम सिंह (वेशभूषा), तरुण कुमार (मंच व्यवस्था), राजेश कुमार बेनी (प्रस्तुति नियंत्रण), दीपक यात्री (छायाचित्र) आदि लोकनिक समवेत प्रयासक परिणाम थिक नाटकक सफल मंचन।

प्रायः 'बकलेल' 'लोंगिया मिरचाइ' नाटक सँ जन-जनकेँ लोकप्रिय नाटककार लल्लन प्रसाद ठाकुर पर केन्द्रित आ समर्पित १६म मिथिला रंग महोत्सवक आयोजन कय मैलोरंग पुनः एक बेर साबित केलक अछि जे मैथिली रंगमंच मे योगदान देनिहार प्रत्येक कलाकार ओ नाटककारक प्रति ई समाज कृतज्ञ अछि आ रहत। 

Friday, March 11, 2022

अनन्तसामर्थ्यसम्पन्ना, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (समाद)

स्त्री दिवसक उपलक्ष्य मे ‘अपराजिता' नामक संस्था द्वारा 'अनन्तसामर्थ्यसम्पन्ना' कार्यक्रममे

दिल्लीक दत्तोपंत ठेंगरी भवन मे बहुतायत संख्या मे महिलाक उपस्थिति देखल गेल । विभिन्न सत्र मे विभाजित ई कार्यक्रम दीपप्रज्ज्वलन आ गोसाउनिक गीत संग प्रारंभ भेल । स्मिता झा लिखित एवं अभिनीत एकल नाटक ' दहेज प्रथा' प्रस्तुत कएल गेल जकर निर्देशन केलनि सोनी नीलू झा । विमर्श सत्र मे क्रमशः ‘मैथिली रंगमंच मे स्त्री’ पर पूनम श्री, दीपा मिश्रा, पुष्पा झा, प्रियदर्शिनी पूजा आदि लोकनि अपन विचार रखलनि ।

‘मैथिली सहित्य मे स्त्री’ पर डॉ. ललिता झाक अध्यक्षता मे कुमकुम झा, आभा झा, जयंती झा, छाया झा आदि लोकनि अपन विचार रखलनि ।

‘नारी सशक्तिकरण आ समाज’ पर रत्न आभा झा चौधरी, अणुशक्ति सिंह, विजयालक्ष्मी झा आदि लोकनि अपन विचार रखलनि । नृत्य संसार मे तेजी सँ उभरि रहल ललना अशिति झा ‘जय जय भैरवि’ पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत केलनि । बंदना झा हास्य प्रस्तुति देलनि । सोनी नीलू रचित 'औनी पथारी' काव्य संग्रह आ दीपा मिश्र द्वारा संपादित एक सय एकाबन कवयित्रीक काव्य संग्रहक पोथी 'मैथिली'क विमोचन सेहो भेल । 

सभसँ अंतिम सत्र 'काव्य पाठ'क छल । डॉ. आभा झाक अध्यक्षता एवं अनुराधा झाक संचालन मे कवयित्री आभा झा, मुन्नी कामत, निवेदिता झा, पूनम झा सुधा, सांत्वना मिश्रा, ज्योति झा, रीना झा शर्मा, स्वाति साकम्भरी, आरती प्रिया, छाया झा, स्वाती झा, मधुलता मिश्रा सहित दर्जनाधिक कवयित्री लोकनि अपन प्रस्तुति सँ उपस्थित श्रोताकें मुग्ध केलनि ।