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Friday, December 15, 2017

वर्तमान मैथिल समाज पर समाजिक संजालक प्रभाव


प्रगतिशील समाज केर विकासक परिप्रेक्ष्य मे देखल जाए त’ विश्वक अन्यान्य प्रबुद्ध समाज सदृश मैथिल समाज सेहो युगानुकूल प्रत्येक चुनौती कें स्वीकारबाक क्षमता रखैत छथि । चाहे संस्कृति संरक्षण कें बात होए,भाषा संवर्धन कें बात होए,उच्चतर शिक्षा कें बात होए, रोजगारपरक अवसर कें बात होए वा उच्च तकनीकी वस्तु प्रयोगक बात होए, प्रत्येक समाजक संग डेग सँ  डेग मिला चलबामे पूर्ण सक्षम छथि । ओना ई एक पैघ बिडम्बना रहल अछि जे समय-समय पर छद्म राजनीतिक महत्त्वाकांक्षी लोकनिक व्यक्तिगत लालसाक कारणें मूल अस्तित्व कें विभिन्न खड्यंत्रक अंतर्गत दबाओल वा मेटेबाक असफल प्रयास कएल जा रहल अछि. एहि कुकृत्य लेल कियो बाहरी व्यक्ति आयातित नहि भ’ रहल छथि वा ई कही जे अपनहि घरक लोक रहै छथि, अन्यथा अपन मूल वस्तुक पुनः प्राप्तार्थ आंदोलनक स्तर एत्तेक उग्र नहि होइत.

भौतिक सुख-सुविधाभोगी एहि अंधचलन प्रधान युग मे जाहि तरहें आवासीय पलायन, सांस्कृतिक ह्रास, भाषायी उदासीनता, विमुख होइत परम्परा सँ  किछु लोक भिज्ञ रहितो अनभिज्ञ बनबाक चेष्टा क’ रहलाह अछि हुनक मानसिकता बदलबामे सेहो सोशल नेटवर्क एक सकारात्मक भूमिका निमाहि रहल अछि. जिनका मे किछु करबाक ऊहि छनि वा छलनि मुदा समुचित वातावरण नहि भेटलाक कारणें अपनाकें कात रखबाक चेष्टा करैत रहलाह, मुदा समय एला पर हुनक समान सोचक व्यक्ति वा किनको कार्यशैली सँ  प्रभावित भ’ कतेको गोटे एक सार्थक ओ एकीकृत सोचक संग विभिन संगठन ओ समूहक निर्माण क’ तदनुकूल काज क’ रहलाह अछि. एहिमे कोनो दूमत नहि जे कोनो आन्दोलन वा मूल कार्य हेतु मेहनैत जमीन पर जा करय पड़ैत छैक आ आवश्यकतो ओत्तहि छै मुदा रणनीतिकें सफल बनेबा लेल प्रचार-प्रसार ओ माध्यमक रूपमे ई स्थान सभसँ बेसी प्रभावी ओ उपयुक्त अछि. प्रसंगवश युवा मैथिल छात्रक संगठन मिथिला स्टूडेन्ट यूनियन केर नाम एहि संदर्भ मे लेब आवश्यक अछि. रोजगारक घोर समस्याक कारणें पलायन आजुक समय मे सभसँ बेसी चिंताजनक स्थिति मे अछि मुदा राजनैतिक उदासीनताक कारणें अपन घरहिमे अपन अधिकार लेबा लेल आन्दोलनक सहारा लेब बाध्यकारी भेल अछि. आजुक समयमे सामाजिक संजालक सहज उपलब्धि ओ विस्तारक कारणें प्रत्येक व्यक्ति अपनाआपमे एक स्वतंत्र मीडियाक भूमिकामे देखना जाइछ . विगत किछुए बर्खमे मैथिली मीडियाक क्षेत्रमे क्रांति अनबाक श्रेय ई-समाद, मिथिमीडिया, मिथिला-दैनिक, मिथिला दर्शन,मैथिली जिन्दाबाद,मिथिला मेल आदिकें जाइत अछि ओत्तहि लोक अभिरुचिक अनुसार वेब पोर्टलक संगहि वीडियो पत्रकारिता सँ  निस्सन उपस्थिति बनबैत मिथिला मिरर जाहि प्रकारक अभिनव प्रयोग केलक अछि निश्चितरूप सँ  सराहनीय योगदानक रूपमे गानल जाएत. विश्वक विभिन्न क्षेत्रमे यत्र-तत्र पसरल मैथिलकें एक मंच पर अनबाक प्रयास हेतु मिथिला मीडिया नामक एक स्वतंत्र एप्लीकेशन (एप्प) गूगल प्ले स्टोर सँ  सेहो लॉन्च कएल गेल अछि जे एहि उद्देश्यकें आगाँ बढ़ेबा लेल दृढ़संकल्पित बुझना जा रहल अछि.  

कोनो प्रकारक क्रियाकलाप छनहि मे विश्वक विभिन्न कोन धरि पहुँच जाइत अछि. एक सँ  एक अद्भुत प्रतिभाकें सोझा आएब एकर स्वतः प्रमाण थिक. हमरा सभक बीच एतेक कम उमेरमे राष्ट्रीय शीर्ष पर ठाढ़ स्वर साधिका मैथिली ठाकुर सँ  पैघ उदहारण की भ’ सकैछ. जातीय,प्रान्तीय,नस्लीय ओ सामाजिक रूढ़िवादिताक भेदन करैत लोकक बीच अनेको सहानुभूतिक उदाहरण देखबामे अबैत अछि. एकर स्पष्ट परिचय देखबा लए नैन्सी हत्याकांड, प्रद्युम्न हत्याकांड आदिक आलोकमे सगर देशक एकजुटता देखल जा सकैत अछि.

कहियो ओ समय छल जहिया लोकक प्रतिभा साधनक अभाव मे कुंठित रहि जाइत छल, जहिया लोक अपन अधिकार पेबा लए विभिन्न चक्रव्यूहक शिकार होइत छल, शोषित होइत छल मुदा आवाज उठेबा लेल उपयुक्त स्थान नहि ताकि पबैत छल. आजुक समयमे कम सँ  कम अपन मोनक बात रखबा लए ओ प्रतिभा प्रदर्शन हेतु सोशल नेटवर्कक विभिन्न प्लेटफॉर्म सक्रिय अछि.

जीविकोपार्जन हेतु लोकक संघर्ष आ पलायनक असरि एहेन दुष्प्रभावी होइत चल गेल जे लोक अपन भाषा ओ संस्कृति सँ  कटैत चल गेलाह. आइ जखन अन्यान्य क्षेत्रक भाषा-भाषी लोकनि अपन भाषा ओ संस्कृतिकें प्रस्तुत करबामे बढ़ि-चढ़ि क’ सोझा आबि रहल छथि त’ स्वाभाविक अछि जे हमरा लोकनिक त’ अपन इतिहास आ भूगोल स्वयं मे गौरवबोधक अछि, मुदा ई गौरवबोध कहबा मात्रक विषय नहि अपितु संरक्षित ओ संवर्धित करबाक विषय अछि. मैथिलीक एहनो सपूत सभ भेलाह अछि जे अपन भाषा-संस्कृतिकें बीस सिद्ध करबामे सफल भेल छथि. मैलोरंग नामक रंगमंडल ओही गौरवक एक महत्त्वपूर्ण अंग अछि जे राष्ट्रक राजधानी दिल्लीमे राष्ट्रीय स्तरक मान्यता प्राप्त सभसँ पैघ नाटकक महोत्सव भारत रंग महोत्सव (भारंगम) केर अठारहम बर्खक आयोजनमे मैथिली नाटकक प्रस्तुति देइत हमरा लोकनिकें गौरवान्वित केलक अछि. कला-संस्कृति संवर्धन हेतु एहेन सक्रियता ओ क्रान्ति आनब आह्लादक विषय थिक.
प्रवासक जीवन मे स्वयं कें स्थिर करब ककरो वास्ते बड्ड पैघ चुनौती होइत अछि कारण सभसँ पहिने ओहिठामक स्थानीय समाजकें अपना विश्वास मे लेबा लेल अनेकों मान-अपमानक सामना करय पड़ैत छैक. मैथिल एहेन बुद्धिजीवी होइ छथि जे प्रत्येक चुनौतीकें सहजतापूर्वक स्वीकारैत कोनो समाजक मध्य प्रतिष्ठापूर्वक अपन स्थान सुरक्षित रखबामे योग्य ओ निपुण होइ छथि. कृतज्ञ मैथिल समाज द्वारा विभिन्न महानगर मे बाबा विद्यापतिक नाओं सँ  स्मृति पर्व मनेबाक परम्परा 

एखन जोर पकड़ने अछि जेकि लोक जुटेबाक एक नीक प्रयास कहल जा सकैत अछि. ओना ई एक पैघ बिडम्बना अछि जे अधिकाधिक आयोजनमे नहि त’ हुनक व्यक्तित्त्वक चर्च होइ छनि आ नें हुनक अमर कृतित्त्वक.

भाषा साहित्यक प्रति सेहो चिंताजनक स्थिति कें दूर करबा लेल एवं बाबा यात्रीक आह्वान नवतुरिया आबओ आँगा कें सफलीभूत करबा लेल बिना कोनो आडम्बर ओ औपचारिकताकें जगह-जगह मैथिल युवा साहित्यानुरागी लोकनि द्वारा अकासतर बैसकी,साहित्यिक चौपाड़ि,साँझक चौपाड़ि,काव्य बैसार,कथा गोष्ठी,कीर्ति कुंभ आदि विभिन्न नाम सँ पल्लवित-पुष्पित भ’ रहल अछि. नवतूरक एक सँ एक आँखिगर साहित्यसेवी लोकनि आगाँ आबि रहल छथि. साहित्यांगन,झंझारपुर द्वारा प्रत्येक मास मिथिलाक विभिन्न विभूति जिनक जन्मदिवस वा पुण्यतिथि होइन्ह हुनका प्रति कृतज्ञता व्यक्त करैत, हुनक व्यक्तित्वक चर्च करैत नियमित साहित्यिक आयोजन भ’ रहल अछि. मैथिली साहित्य महासभा,दिल्ली द्वारा वर्ष मे तीन गोट महत्त्वपूर्ण आयोजन कएल जाइत रहल अछि. मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति, मधुबनी द्वारा वार्षिक आयोजन वृहत स्तर पर कएल जाइत अछि.

पोथीक सहज उपलब्धि हेतु पटनामे रहि रहल किछु समर्पित युवा लोकनि दुर्लभ सँ  दुर्लभ पोथी जुटा ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल “सैप्पी मार्ट” केर माध्यम सँ  होम डिलेवरी धरिक सुविधा उपलब्ध करबा रहल छथि. इन्टरनेट पर साहित्य पढ़ेबाक चस्का लगेबामे निश्चित रूप सँ  विदेह (ई-पत्रिका) केर प्रयास सराहनीय अछि. पीडीएफ फॉर्मेट मे एखनहु मैथिलीक तीन सए सँ  बेसी पोथी उपलब्ध अछि. कला प्रतिभा ल’ क्षेत्रीय सँ  राष्ट्रीय स्तर धरिक कलाकारक योगदानकें संग्रह मैथिली सिनेमा डॉट कॉम पर देखल जा सकैछ आ ओतय सँ  ज्ञात होइत अछि जे कतेको नामी-गिरामी कलाकार जे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय शिखर पर नाम केने छथि ओ हमरा लोकनिक घर-परिवारक सदस्य छथि.  

भाषा ओ संस्कृतिक प्रति लोकक जागरूकताक साक्ष्य अछि अखिल भारतीय मिथिला संघक स्वर्ण जयन्ती समारोह मे तालकटोरा स्टेडियम ओ मैथिल समन्वय समिति द्वारा आयोजित वर-वधू परिचय सम्मलेनक उपलक्ष्यमे सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम सन विशाल जनसमूहक क्षमता बला सभागार मे मैथिलजनक उपस्थिति.

सोशल नेटवर्कक किछु नकारात्मकताक सँ  लोक सेहो प्रभावित भ’ रहल अछि जाहिमे व्यक्तिगत द्वेष, आपसी वैमनस्यता, कटुवादिता, अनावश्यक विषय-वस्तुक प्रचार-प्रसार, भ्रामक परिवेश बनाएब, एक-दोसराक प्रति छिद्रान्वेषण, गुटबाजी आदि हमरा लोकनिक कमजोर पक्षकें सार्वजनिक रूपे उजागर करैत अछि. एहि सभ पर ज’ नियंत्रण क’ लेल जाय त’ हमरा लोकनिक अद्वितीय भाषा,क्षेत्र,साहित्य,रोजगार,कला,संस्कृति,परम्परा आदिक निर्वहन करैत ओकरा संवर्धित कएल जा सकैत अछि. जाहि तरहें लोकक मानसिकता बदलि रहल अछि, परिवेश बदलि रहल अछि ताहिमे किछु हद धरि सामाजिक संजाल (सोशल नेटवर्क) केर भूमिका सेहो महत्त्वपूर्ण कहल जा सकैछ. देखादेखी नीक अधलाह काजक अनुकरण अदौ सँ  आबि रहल एक परम्परा अछि आ इहो कोनो व्यक्ति ओ हुनक परिवार एवं समाजक देल संस्कार पर निर्भर करैत अछि, तहिना सोशल नेटवर्कक सदुपयोग वा दुरूपयोग हुनक ओहने मानसिकता पर निर्भर करैत छनि.

एहि आलेखक क्रममे संभव अछि जे बहुतो एहेन व्यक्ति वा संस्थाक नामक उल्लेख नहि भेल हो वा सांकेतिक हो तथापि जे कियो सोशल नेटवर्कक सदुपयोग करैत अपन मूल वस्तु कें राष्ट्रीय पटल पर आत्मविश्वासक संग परसि रहल छथि हुनक प्रयासक सेहो सराहना करैत छी. वास्तविक रूप सँ  अपन मांटि-पानि सँ जूड़ल भाषा-संस्कृति प्रेमी ओ चाहे गाम मे बसथि वा परदेस मे सोशल नेटवर्कक समुचित उपयोग करैत एकरा प्रचार-प्रसारक माध्यम बनाय उद्देश्यपूर्ति मे लागल छथि.

(अखिल भारतीय मिथिला संघ,दिल्लीक स्वर्ण जयन्ती समारोह-२०१७ स्मारिकामे प्रकाशित )

Sunday, January 08, 2017

वर्तमान मैथिली गीत-संगीत हमरा नजरिसँ


साहित्यमे अन्यान्य विधा जेंका गीत-संगीतक सेहो अपन वैशिष्ट्यता अछि. विदेह संपादन समूह द्वारा मैथिली गीत-संगीत केन्द्रित विषय पर आलेख हेतु विशेषांक निर्धारित करब एहि विधाक प्रति गंभीरताक द्योतक अछि. उक्त विषय पर विस्तृत आलेख शोधक विषय-वस्तु थिक, तैं एहि सभस’ फराक अपन व्यक्तिगत अनुभव स’ किछु लिखबाक चेष्टा मात्र क’ रहल छी.

वर्तमान समयमे पारम्परिक गीतक अपेक्षा आधुनिक लोकगीत बेस प्रचलनमे अछि. कारण स्पष्ट अछि व्यावसायिक दृष्टिकोण. नव तूरक लोककें लटक झटक बेस रुचै छन्हि आ तदनुरूप गवैया ओ गीतकार सेहो ओहिमे रमबाक प्रयासमे वा कही जे फरमाइशकें यथासंभव पूर करबाक चेष्टा करैत छथि. पारम्परिक गीतक श्रोता वा कही जे खाँटी संस्कृति प्रेमी छथि त’ मुदा सीमित संख्यामे. आधुनिकतामे रमल नव पीढ़ीक नहि त’ गवैया लोकगीत कें गंभीरता स’ लैत छथि आ नें श्रोता. मैथिली गीत-संगीतक क्षेत्र वर्तमानमे कत्तेको कलाकारकें जीविकोपार्जन केर साधन बनल अछि. संगीत चाहे पारंपरिक होउ वा शास्त्रीय होउ वा आधुनिक होउ मैथिलीक सेवा क’ अर्थोपार्जन क’ जीवनयापन करब जतबे आह्लादक विषय अछि ततबे साहसिक डेग सेहो. साहसिक डेग स’ अभिप्राय ई जे वर्तमान जुगक अवधारणा अछि जे अहाँकें जाहि कोनो प्रतिभामे आत्मविश्वास अछि ओकरा आगाँ ल’ व्यावसायिक बनाउ आ अपन अभिरुचिक अनुसारे ओहिमे समर्पण भाव स’ योगदान देल जाउ, मुदा मैथिली गीत-संगीतक प्रति एकर विपरीत अवधारणा अछि जकर मुख्य कारण अछि अर्थोपार्जनमे अनिश्चितता. पूर्वक पीढ़ीमे अपवादस्वरूप किछुए लोक मुदा वर्तमान समयक बेसी-स-बेसी युवा एहि मिथककें तोड़बाक प्रयास केलनि अछि आ अपन जीविकोपार्जन केर साधन बनौलनि अछि.

आलेख हेतु देल गेल विषयमे किछु महत्त्वपूर्ण बिन्दु सभ पर अनुभव साझा करबाक प्रयास मात्र क’ रहल छी. गीत-संगीतक भाव पक्ष केर संदर्भमे एतबा जरूर देखल जाइछ जे, गीतकार जे कोनो गीत लिखैत छथि ओ सर्वबोधगम्य हेबाक चाही, जिनक शब्द लेखन आम जनक बोलचाल वा दैनिकीय भाषा मे नियमित प्रयोग मे अबैत होइक आ जकरा संगीतकार लोकनि कर्णप्रिय बना सुन्दर गवैयाक माध्यम स’ जन-जन धरि पहुँचेबाक प्रयास करथि. गीतमे क्लिष्ठता ओ साहित्यिक शब्दक चयन एक वर्ग विशेष धरि सीमित रहैत अछि जे अमूमन एक सामान्य श्रोता द्वारा स्वीकार्य नहि होइत अछि. मूलतः देखल जाए त’ संगीतक प्रारंभिक रूप गीतक शब्द होइछ तैं गीतकारकें शब्द चयन हेतु विभिन्न अभिरुचिक श्रोताकें ध्यान मे राखि मर्यादित गीत लिखक चाहियनि.

वर्तमान मे मैथिली गीत संगीत मे देखौंसक प्रक्रिया बेस हाबी भ’ रहल स्थिति मे विकृतता आएब स्वाभाविक अछि. संगीत जहिना मनोरंजन हेतु आवश्यक विधा अछि तहिना भाषा-संस्कृति केर रूपमे वाहकक श्रेणीमे सेहो अबैछ तैं गीतकार-संगीतकार आ गायक लोकनिकें एहि बातक समुचित धेआन रखबाक चाही. तकनीकी पक्षक जत’ तक प्रश्न अछि गीतक शब्दक अनुरूपे संगीत वा संगीतक अनुरूपे गीतक शब्दक तालमेल परम आवश्यक होइछ, कोन गायकक कंठ मे कोन गीत बेसी रोचक लगैछ एहि सभ विषय पर सेहो ध्यान देल जाए त’ गीत आर बेसी अपन सुन्नर रूपमे निखरि क’ सोझा आबि सकैत अछि. प्रस्तुतिक दू गोट रूप वा त’ मंच वा स्टूडियो रेकॉर्डिंग जाहिमे वाद्य-वादन सेहो गीतकें तकनीकी रूप स’ मजगूती प्रदान करैत अछि.

आइ-काल्हि स्टूडियो रेकॉर्डिंग के नवका चलन आएल अछि डी-टोन केर. डी-टोन कोनो आवाजक टोन कें अपना स्तर स’ बदलि देइत अछि जकर प्रभाव मे गायकक मौलिक स्वर केर अंदाज करब सेहो मोसकिल अछि. सुर स’ भटकैत गवइया लोकनि एखन एकर प्रयोग बेसी स’ बेसी करैत देखल जाइ छथि आ ई प्रथा हरियाणवी आ भोजपुरी संगीत स’ बेस प्रभावित अछि. यत्र-तत्र कम स’ कम लागत मे दिनानुदिन पसरि रहल स्टूडियो,कैसेट कंपनी आदि स’ मैथिली संगीतक कमजोर गुणवत्ता त’ देखबामे अबैत अछि मुदा नव-नव कम्पनी के खुजला स’ नव प्रतिभावान कलाकार लोकनिक वास्ते एकटा नीक माध्यम बनि सोझा अबैत अछि. मार्केटिंग पक्षक दृष्टिकोण ज’ देखल जाए त’ मैथिली गीत-संगीतकें व्यावसायिक रूप प्रदान करबा लेल मार्केट एखनो धरि व्यापक स्तर पर सक्रिय नहि भेल अछि.

आन-आन भाषा के तुलना मे मैथिली गीत-संगीतक बाजार एखनो बड्ड छोट आ सीमित अछि. कीनिक’ सुन’ बला मनोवृति एखनो धरि नहि जागल अछि. एकर दुन्नू कारण भ’ सकैइयै, पहिल जे लोककें मनमोताबिक संगीतक उपलब्धता नहि होइ छनि वा दोसर जे विधा स’ जूड़ल लोक द्वारा फ़ोकट मे बंटबा बला प्रवृति जकर स्थिति कमोवेश साहित्ये बला अछि. हालांकि डिजिटल व्यवस्था भेला स’ उपलब्धता सहूलियत स’ भ’ रहल अछि आ कलाकार लोकनिकें मंच, एलबम,सिनेमा आदिमे लिखबाक,गेबाक ओ धुन बनेबाक अवसर भेटैत छनि जेकि कएक टा मायनेमे महत्त्व रखैत अछि. एहि डिजिटल जुगमे दर्शक/श्रोताक पसीनकें धेआनमे रखैत प्रायः अधिकाधिक कम्पनी वीडियो बना बजार मे वितरण करै छथि वा सोशल नेटवर्कक विभिन्न श्रोत स’ जन-जन धरि पहुँचेबाक प्रयास करै छथि. अधिकाधिक संख्या मे देखल जाए त’ विडियो शूटिंगमे गीतक केन्द्रित विषय स’ आंशिको रूप स’ तालमेल नैं खाइत अछि, मने गीतक विषय किछु आर मुदा अभिनय द्वारा किछु आर दर्शाओल जाइत अछि.एहि पक्ष पर गंभीरता लाएब सेहो ओतबे आवश्यक अछि.   

मैथिली गीत-संगीत मे नैं गीतकारक अभाव छै आ नैं गौनिहार कें अभाव छैक मुदा सभस’ बेसी अभाव संगीतकारक देखबामे अबैछ. बनल-बनाएल धुन (ओ चाहे हिन्दी फिल्म संगीतक तर्ज पर होए वा आन-आन क्षेत्रीय भाषा केर तर्ज पर होए) आखर फिट क’ गीतकार द्वारा लिखब आ तदनुरूप गायक द्वारा ओकरा गाएल जेबाक प्रथा बेस जोर पकड़ने अछि. ओना संगीत विधा स’ जूड़ल प्रत्येक व्यक्ति के चाहियनि जे अपन-अपन अभिरुचिक क्षेत्रमे प्रशिक्षित होथु मुदा ताहूमे सभस’ बेसी खगता धुन बनेनिहारक अछि जेकि वर्तमान समयमे गीतकार ओ गायकक संख्याक तुलनामे बड्ड कम वा कहल जाए जे मात्र गिनल-चुनल लोक छथि. ओना एहि विधामे सभ दिने स’ गीतकार-संगीतकारक तुलनामे गायकक प्रसिद्धि बेसी रहल अछि, कारण गायक लोकनि अपन एक विशेष प्रकारक स्वरक बले समाजमे चिन्हल जाइ छथि संगहि मंचक सोझा स’ श्रोता/दर्शक स’ प्रत्यक्ष संवाद हेतु समय-समय पर उपलब्ध होइत रहैत छथि, एहेन सन स्थितिमे गायक लोकनिक एक इमानदार प्रयास अपेक्षित रहैत अछि जे ओ मंच पर वा कोनो साक्षात्कार मे गीत प्रस्तुति स’ पूर्व संगीतकार ओ गीतकारक नाओं केर उल्लेख करथि, कारण हुनकर प्रसिद्धिक पाँछा हिनका लोकनिक जोगदानकें नकारल नैं जा सकैत अछि. मैथिली गीत-संगीतमे कतबो विकृति आबि गेल छैक मुदा आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखबा लेल संख्या मे बढ़ोत्तरी अपेक्षित अछि. आलोचना वा तुलना ओत’ प्रभावी होइत अछि जत’ संख्या केर उपलब्धता अधिकाधिक होइछ. मैथिली गीत-संगीतकें अपन कर्मक्षेत्र बना गुजर-बसर केनिहार एक-एक कलाकारकें साधुवाद जे चाहे जाहि कोनो तरहें मुदा अपन मातृभाषाकें सेवैत अर्थोपार्जन क’ रहल छथि, बहुत हिम्मत के काज छैक. निवेदन जे भाषा संरक्षणक संग-संग संस्कृति संरक्षण पर सेहो ध्यान केन्द्रित करैत एहि क्षेत्रमे आगाँ बढैत छथि त’ से आर बेसी आह्लादक गप्प हएत.

प्रकाशित : विदेहक २१७म अंक ०१ जनवरी २०१७

Monday, October 13, 2014

जनजागरूकता आ एकजुटता केर बेगरता

मिथिलाक सपूत लोकनि आब फाँढ़ बान्हिक’ मैथिली फिल्म निर्माणक क्षेत्रमे कूदि पड़लाह अछि, बेगरता छैक त’ मात्र जनजागरूकता आ एकजुटता केर । नीक लगैत अछि जखन सोशल मिडिया वा मित्र वर्गादि के माध्यमे ज्ञात होइत अछि जे फल्लाँ फिल्मक मुहुर्त फल्लाँ तिथिमे भेल वा भ’ रहल अछि, फल्लाँ फिल्मक निर्माण प्रारम्भिक वा अंतिम चरणमे अछि सुनिते जेना मोन आह्लादित भ’ जाइत अछि ।

हमरा बुझने फिल्मक गुणवत्ता पर तुलनात्मक चर्चाक प्रयोजन वर्तमानमे नञि हेबाक चाही आ नें कोनो प्रकारक अंतर्कलह के गुंजाइश हेबाक चाही कारण एखन जेनाकि फिल्म निर्माण जोर पकड़ने अछि ओहि आधार पर बेसी-स’-बेसी संख्यामे फिल्म निर्माण आ प्रोत्साहन केर बेगरता छैक आ जखन संख्या बेस रहतै त’ स्वाभाविक छैक जे आलोचना सेहो हेतैक, तुलना सेहो हेतैक, समीक्षा सेहो हेतैक आ एहि सभक पाँछा एकटा सार्थक उद्देश्य रहतैक जे फिल्मक प्रस्तुतिकरणकें स्तरमे दिनानुदिन सुधारात्मक प्रयास होए । हमरा लोकनिक वास्ते जे वर्तमानमे सबस’ बेसी  चिंताजनक विषय अछि ओ अछि सिनेमा हॉल केर अनुपलब्धता कारण बहुतो निर्मित फिल्मकें सिनेमा हॉल धरि पहुँचबामे बहुत रास दिक्कत छैक मुदा ज’ निर्मित छैक त’ आइ नें काल्हि पहुँचबे करतै जाहि पर फिल्मक निर्माण समूह केर प्रत्येक सदस्य,निर्माता-निर्देशकक संग-संग मिथिला-मैथिलीक भाखाप्रेमी आ आन्दोलनकारीकें एकमत भ’ विचार करब आवश्यक अछि ।

सिनेमा हॉल मालिकक दूनेती पर सेहो एक प्रश्नचिन्ह लगैछ जे कोन एहेन कारण अछि जे मैथिली फिल्मकें मिथिला क्षेत्रमे स्वीकृति नञि देल जाइत अछि आ भोजपुरी एवं हिन्दी फिल्मकें प्राथमिकता देल जाइत अछि । ज’ हमरा लोकनिकें भोजपुरी आ हिन्दी पर आपत्ति नञि अछि आ मैथिली फिल्मक दर्शक ललायित छथि अप्पन भाखामे निर्मित फिल्म देखबा लेल त’ हुनका एहि स’ वंचित रखबाक अधिकार सिनेमा हॉल मालिक के नञि छनि । ज’ दर्शक अपन मातृभाषामे बनल फिल्म स’ वंचित रहता त’ ओ दिन दूर नञि जे फेर भोजपुरी आ हिन्दीकें सेहो तिरस्कार कएल जाएत जकर छोटछिन उदाहरण ग्रामीण स्तर पर बन्न हॉलक स्थिति स’ अंदाज लगाओल जा सकैत अछि । ग्रामीण दर्शकक सोझा ज’ विकल्पकें रूपमे मैथिली फिल्मक निरंतरता रहितैक त’ हॉल मालिककें एहेन दुर्दिन नञि देख’ परितनि । रहल बात शहरी क्षेत्रक हॉलकें त’ ई बात निर्विवाद अछि जे जेना आजुक तिथिमे मिथिला-मैथिलीक प्रति युवा अपन भाखा वास्ते समर्पित छथि हुनका लोकनिकें बाध्य भ’ आन्दोलन कर’ परतनि ।

समस्त बुद्धिजीवी मैथिल आ मीडियाकर्मी मित्र लोकनि स’ निवेदन जे जतेक बेसी समय हमरा लोकनि टंगघिच्चा-घिच्चीमे व्यतीत करै छी ओतबा समय सहयोगमे लगाओल जाए त’ किछु सार्थक आ सकारात्मक परिणाम सोझा आओत आ मैथिली फिल्म उद्योग जगत स्थापित भेला स’ कत्तेकोकें रोजगार केर अवसर प्राप्त हएत ।     

Wednesday, April 17, 2013

एहनो कतउ भेलइए ?


परुकाँ  साल ३१ मई क'  भोरे भोर जतेक समाचार सुनबा में आबय सबटा अचम्भिते करै बला I टेलीविजन चालू करिते देखै छी जे सगरो दिल्ली आ देश के आन आन भाग में यत्र-तत्र बाट जाम के खबरि,यातायात के सुविधा बाधित,कारण की ? कारण ई जे, पेट्रोल के मूल्य में असामान्य वृद्धि के विरुद्ध जनमोर्चा, आ ताहि  जनमोर्चा में अपसियांत लोक में सभ वर्ग स' मिश्रित आम आदमी जिनक प्रतिनिधित्व करैत किछु नवोदित, किछु परिपक्व आ किछु वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्ति लोकनि I ओना हिनका लोकनिक हस्तक्षेप भेनाइ सेहो परमावाश्यके , कारण जे हमरा लोकनिक बीच एहेन जनधारणा अछि जे विपक्षी लोकनि अगुएता तखने सत्ताधारी के आंखि फुजतन्हि, भले ही ओ स्वयं सत्ता में एलाक बाद जे करथि,आ जं' से नहि होईतै त' आइ ई दिन कियै देख' परैइयै I महंगाई के विरोध त' आदि काल स' होइत आयल अछि, अंतर एतबे छै जे पहिले सामान्य वृद्धि होइत छल आ आब असामान्य वृद्धि (अनिश्चित अनुपात में) होइत अछि, आओर इएह अनिश्चितता हमरा लोकनिके बाट पर ठाढ़ करबा लेल बाध्य क' दैत अछि I आब एकर नतीज़ा संध्या कालक समाचार में  देखल जे पूर्ण हास्यास्पदे अर्थात असामान्य वृद्धि के विरोध में हो-हल्ला भेलाक बाद सामान्य कमी, कियैक त' सरकार के ई आभास त' रहिते छैक जे हो-हल्ला हेबे करतै त' चलू कनेक उसास क' देल जेतै आ ठीक तहिना दोसर दिन स' सब किछु पूर्ववते अर्थात सरकार महगाई बढब' में एक बेर फेर सफल I

हड़ताल रहितहु लोक अपन अपन गंतव्य तक जेना तेना पहुँच रहल छलाह, तकर एकटा भुक्तभोगी हमहूँ रही I बSस में बैसल बैसल मोन अकच्छ भ' गेल रहय कान में ठप्पी लगाय एफ.एम सुनय लगलहुं, आहि रे बा ! ई की ? शाहरुख खान के दम्मा कहिया भ' गेलन्हि ,कहियो नै समाचार में आयल छल, ने अखबार में छपल छल I ई चैनल आ पेपर बला सब त' बड दाबा करै छथिन्ह जे हम सबस' बेसी तेज, सबस' पहिने, सबस' आगाँ, मुदा एहि में त' सब गोटे पछुआ गेलाह  I ई मीडियाकर्मी लोकनि त' एहेन-एहेन चर्चित लोकक छींको के ब्रेकिंग न्यूज़ बना दै छथिन्ह आ एतेक बड़का बीमारी के जानकारी स' वंचित कोना रहि गेलाह ? मुदा औ बाबू ! वंचित ई सब नै  रहि गेलाह, वंचित त' हम स्वयं रहि गेलहुं एहि एफ. एम. बला नकलची लोकक भाषा सँ' Iसंयोगवश ओहि दिन तमाकुल निषेध दिवस छल आ एहि अवसर पर शाहरुख़ खान के शुभचिंतक लोकनि हुनका धुम्रपान स' सम्बंधित विषय वस्तु पर अपन अपन नसीहत द' रहल छलथिन्ह आ ताहि क्रम कियो हुनके आवाज़ में नक़ल करैत एकटा संवाद के दम्मा बला अंदाज़ में सुना रहल छलाह I एहि तरहें हड़ताल आ  तमाकुलक सिट्ठी सँ कन्छिआइत-कन्छिआइत अपन गंतव्य धरि पहुँचलहूँ I भरि दिन काज धंधा क' क' संध्या काल जखन अपन मरैया में एलहुं आ फेर समाचार देख' लगलहुं जे, कतौ हमरो युवावस्थाक फोटो आबि जाय, मुदा से व्यर्थ सोचल कारण फोटो त' नहिये ऐल आ उलटे युवावस्था पर पूर्ण विराम लागि चुकल छल I

युवा मित्र लोकनिक लेल ई ३१ मई २०१२ अविस्मरणीय दिवस छल, कियैक त' सरकार आइ खुलि क' घोषणा क' देलक जे - जे व्यक्ति १६ स' ३० बरखक अवस्था के छथि, हुनके टा युवा वर्ग के श्रेणी में राखल जेतन्हि I आजुक दिन हड़ताल झेलब आ की तमाकुल झेलब ओतेक भारी नै छल जतेक की ई वृद्धावस्था झेलब (सरकारक अनुसारे) मोस्किल छल I नै जानि आइ कियैक बाजपेयी जीक बड्ड याद अबै छल, एहि दुआरे की कम स' कम अपना के एखन धरि युवा त' बुझै छलहुँ कियैकी हुनक युवा उमेर निर्धारण सीमा छल १३ स' ३५ बरख धरि छल Iमोने मोने ई सोचि बैसल रही जे एखन विवाहक वैधता पांच बरख धरि आरो अछि,  मुदा ई की ? ई त' एकाएक राताराती वैधता समाप्त I

आब कल्पना कर' लगलहुं जे, काल्हि स' जे घटक एताह त' हुनका आंगुर पर गानि-गानि क' जन्म तिथि , मैट्रिक, इंटर, बी.ए. पास के इसवी कहबन्हि आ ताहि गणना में ज' कतहु चूक भेल त' बुझू जे ई कलिजुग बिना गृहस्थाश्रमें के समाज सेवा में बीति जायत I मोनेमोन फेर भोला  बाबा  के गोहराबय लगलहुं जे- हे बाबा ! एहेन अनर्थ कियैक केलहुं ? कम स' कम हमर विवाह जवानी में त' होमय दैतौं I बड़ बेस! राति में सूतल रही, की देखै छी स्वप्न में साक्षात् त्रिलोकीनाथ, गर्दैन में फुफकारैत जुआयल गहुंमन सांप, हाथ में त्रिशूल आ डमरू, बाघक चाम के ठेहुन धरि गमछा बना नुरियेने, सौंसे  देह में शमसान के छाउर हसोथने, हमरा सिरमा लग आबि ठाढ़ भ' गेलाह आ कहय लगलाह-हौ बौआ! हम भरि दिन तोहर बात सुनै छलहु, मुदा ओतेक लोकक बीच में कोना भेंट करितौं तैं एखन एकांत में कहै छियह! तोहर मोन एतेक छोट कियैक छह ? कहलियैंह-मोन छोट कोना नै हैत बाबा ? ई सरकार दुखी क' देने अछि I कहू त?चीज़ वस्तु के दाम बढ़ा क' आकाश ठेका देने छै आ मनुक्खक  युवा उमेर निर्धारण सीमा में दिन स' दिन कोताहिये केने जाइ छै I देखियौ त' बाजपेयी जी कतेक बढ़िया केने रहथिन्ह,  उमेर सीमा निर्धारण I

बाबा हमरा हतोत्साहित देखि कहलाह-सुनह पढ़ल लिखल छह बात बुझबाक चेष्टा करह I हौ ! बाजपेयी के समय में प्रधानमंत्री स' ल' राष्ट्रपति तक केकरो देखलहक जे सोंगर पर ठाढ़ छल ? कियैक त' बेसी अवस्था के रहितहु सभ स्वयं के जवान बुझैत छल I तैं ओ सीमा नमहर छलैक I ओनहियो ई सरकार संतुलन बनब' लेल महगी बढ़ा क' उमेर घटा रहल अछि, कियैक त' बूझल छैक जे एहेन महगाई में लोकक गुज़र बसर केनाइ आ जियब कतेक मोसकिल छै I तैं मनुक्ख जतबा दिन जीत तही में अवस्था के वर्गीकरण तालिका बनाओल जाय I मोन छोट नहि करह आ चिंता छोड़ह आ हमरा ई वचन दै जे काल्हि स' तों अपन समय के अनाप सुनाप में एक्कहु क्षण व्यर्थ नहि करबह, आ जतबा दिनक ओरदा छ'ह ओतबे दिन में गृहस्थ जीवन के संग संग सामाजिक दायित्व के निर्वाह में ततेक बेसी समर्पित भ' जाह जे दिनानुदिन तोहर कीर्ति स' ई समाज, देश, कर-कुटुम, परिवार सब तोरा पर गर्व कर' लाग' I एकटा बात आर मोन रखिह'  जे, जे व्यक्ति कर्मठ अछि ओ सतत जुआने रहैत अछि कियैक त' ओ अपन लक्ष्य के पाबय लेल दृढसंकल्पित रहैत अछि जकरा लक्ष्य के आगाँ वृद्धावस्था सेहो युवावस्था सदृश्य लगैत छैक I अंत में शुभानि सन्तु !! कहि क' अन्तर्ध्यान भ' गेलाह I जखन स' निन्न फूजल तखन स' अपना के एकदम स' हट्ठा-कट्ठा जवान प्रतीत होमय लागल आ भोला बाबा के ध्यान में रखैत अपन कर्म में लागि गेलहु I

प्रकाशित:मैथिली दर्पण (मासिक पत्रिका)
मास-अप्रैल, बरख-2013 (प्रवेशांक)