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Saturday, July 23, 2022

मिथिला रंग महोत्सव, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मैलोरंग द्वारा आयोजित १६म मिथिला रंग महोत्सव जेकि दिनांक १३ जुलाइ,२०२२ (बुधदिन) क' राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक सम्मुख सभागार मे सुप्रसिद्ध नाटककार स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर केँ समर्पित छल। एहि अवसर पर हुनक कृतित्त्व एवं व्यक्तित्व केन्द्रित रचनावली (मैलोरंग प्रकाशन सँ प्रकाशित पोथी) केर लोकार्पण आ तकराबाद हिनक लिखित दू गोट एकांकी ' चन्दा' आ 'ग्रीनरूम' क्रमशः मैथिली आ हिन्दी मे मंचित भेल।

लोकार्पणक अवसर पर अतिथि मंत्रेश्वर झा (सेवानिवृत्त आईएएस), सी.एम झा (चान्सलर, सीएमजे यूनिवर्सिटी), शेफालिका वर्मा (साहित्यकार), देवशंकर नवीन (साहित्यकार), कुसुम ठाकुर (धर्मपत्नी स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर), ज्वाला प्रसाद (रजिस्ट्रार, एनएसडी) एवं मुकुन्द ठाकुर (आईएएस अधिकारी) आदि लोकनि मंचस्थ रहथि। पुस्तक लोकार्पण सत्रक संचालन केलनि अजित आजाद आ शेष सत्रक संचालन प्रकाश झा।

मैथिली मे मंचित 'चन्दा' जाहिमे सामाजिक वा धार्मिक अनुष्ठानक नाम पर चन्दा उगाहीक विभिन्न तरीका केँ दर्शाओल गेल अछि एतावता जे पोलहा क', प्रसंशा क' क' आ अन्त मे बलपूर्वक देबा लेब बाध्य करबा सन परिस्थिति केँ सेहो देखाओल गेल अछि। हास्य-व्यंग्य-विनोद मिश्रित एहि नाटकक विषय खाहे तत्कालीन समयक परिवेशक बोध करबैत हो मुदा वर्तमानक परिस्थिति मे सेहो जहिनाक तहिना इंगित करैत अछि। मंच पर राजीव रंजन, ज्योति झा, साक्षी, सुरभि, कंचन, स्नेहा, हर्ष राज, ऋत्विक राज, आयुष्मान, अनिमेष, हर्ष मनु, आर्यन पंत, नीरव निशांत, अभिनाश, प्रदीप मंडेल, हर्ष सागर आदिक उपस्थिति आ अभिनय बेस मनोरंजक रहल।

हिन्दी मे मंचित नाटक 'ग्रीन रूम' जेकि कोनो नाटकक पूर्वाभ्यास सँ ल' क' मंचित हेबा धरिक विभिन्न घटनाक्रम केँ बेस रोचक ढ़ंग सँ प्रस्तुत कएल गेल अछि। एक नाटकक निर्देशक केँ अपना-अपना धुन मे मस्त कलाकार लोकनिक संग सामंजस बैसाएब आ इच्छाक प्रतिकूल पात्रक चयन करबा सन परिस्थिति मे नाटकक मंचन करब कतेक चुनौतीक काज थिक तकरा हास्य रूपे प्रस्तुत करबामे अनिमेष, सुरभि, साक्षी, अभिनाश, प्रदीप, नीरव, दिव्यांशी, अभय, संस्कृति, भुवनेश, हर्ष, आर्यन आदि कलाकारक तालमेल उपस्थित प्रेक्षककेँ आदि सँ अन्त धरि गुदगुदबै मे सफल रहल।

मंचक पार्श्व मे अनिल मिश्रा (संगीत), दीपक यात्री (फोटोग्राफी) पिंटू झा प्रेम, हर्ष राज, साक्षी, सुरभि, धर्मवीर, कनुप्रिया आ मार्गदर्शकक रूप मे प्रकाश झा, राजीव रंजन, अंजू अहलूवालिया, रमण कुमार, ज्योति झा आदि। 

Tuesday, March 08, 2022

सीता बनबास, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मैथिली रंगमंच मे नव-नव संधान हेतु चर्चित रंगमंडल ‘मैलोरंग’ द्वारा उर्दू एवं हिंदीक प्रसिद्ध लेखक ‘आगा हश्र कश्मीरी’ रचित पारसी नाटक 'सीता बनबास'क मंचन लक्ष्मीनगर,दिल्ली मे ‘ब्लैक पर्ल आर्ट्स रूफ थियेटर’ मे भेल. आगा हश्र रचित ‘सीता बनबास’ नाटक अपना समयक सभसँ बेसी लोकप्रिय पारसी नाटक मे सँ एक महत्त्वपूर्ण नाटक रहल अछि. नाटकक प्रसंग बाल्मीकि रामायण सँ लेल गेल अछि जकरा लेखक नाट्य शैली अंदाज मे प्रस्तुत केलनि अछि. नाट्य प्रस्तुति हिंदी मे छल आ एकर निर्देशन केलनि अछि श्याम कुमार सहनी.

नाटक मे राम और सीताक एक दोसराक प्रति कर्त्तव्य, प्रेम, मर्यादा, विश्वास आ श्रद्धाक जाहि स्वरूपकेँ दर्शाओल गेल अछि से नहि मात्र भारतीय संस्कृतिक आत्मा अछि अपितु पीढ़ी-दर-पीढ़ी एकरा शिक्षा ओ प्रेरणाक रूपमे आत्मसात कएल जा सकैत अछि. राम जाहि तरहे राजधर्म पालन हेतु अपन समस्त सांसारिक सुखक परित्याग करैत चल गेला एतावता सीता सन धर्मपारायण स्त्री धरिक परित्याग कय देलनि ताहि सीताक स्त्रीत्व हुनक मर्यादा निर्वहन मे सहगामिनी बनि अपन करुणा आ आदर्शक परिचय देलनि.

मुक्ताकाश मंच पर कोनो नाटकक प्रस्तुति सँ पूर्व मंच, प्रकाश, ध्वनि आदि परिकल्पना हेतु बेस तामझामक आवश्यकता होइछ मुदा मैलोरंग अपन कलाकार केँ नहि मात्र अभिनय प्रशिक्षण धरि सीमित रखने अछि एते धरि जे मंचक पार्श्व मे विभिन्न तरहक प्रक्रिया नियंत्रण हेतु सेहो सक्षम बनबैत अछि आ ओएह सक्षमता एहि ठाम प्रत्यक्षतः देखल गेल.        

मैलोरंगक एहि प्रस्तुति मे अधिकाधिक नव प्रशिक्षु कलाकार देखल गेलाह जाहिमे मंच पर उपस्थित पात्र राम (हर्ष मनु), सीता (साक्षी झा), पृथ्वी/उर्मिला (अनुराधा झा), लव (सुरभि झा), कुश (कनुप्रिया झा), रजकी (स्वेता आर्या), दुर्मुख (पिंटू झा प्रेम), बाल्मीकि (आयुष्मान झा), वशिष्ठ (अविनाश कुमार), मांडवी (रितु राज), लक्ष्मण (उत्कर्ष रंजन), भरत (भुवनेश चौहान), शत्रुघ्न (आर्यन पंत), हनुमान (हर्ष सागर), रजक (प्रदीप कुमार), विभीषण (लवीश जिंदल), अंगद (उज्जवल वत्स), सुग्रीव (उत्सव वत्स) आदि प्रत्येक कलाकार अपन श्रेष्ठ प्रदर्शन देबाक प्रयत्न करैत दर्शक दिसिसँ प्रोत्साहनक थोपड़ी बजबेबामे सफल रहलाह.  

पार्श्व मंच पर संजीव बिट्टू (प्रकाश परिकल्पना), विकास जय (संगीत), पिंटू झा प्रेम (मंच प्रबंधन), आयुष्मान झा (ध्वनि व्यवस्था) आदि कलाकार लोकनिक सहयोग सँ डॉ. प्रकाश झाक समुचित मार्गदर्शन मे उक्त नाटक सफलतापूर्वक संपन्न भेल. 

Thursday, June 14, 2018

मिथिला रंग महोत्सव-२०१८ मे ज्योतिरीश्वर रंगशीर्ष ओ श्रीकान्त मंडल सम्मान

१० जून २०१८ (रविदिन) क’ मैथिली लोक रंग (मैलोरंग) द्वारा दीनदयाल उपाध्याय मार्ग दिल्ली स्थित राजेन्द्र भवन मे एक दिवसीय मिथिला रंग महोत्सवक आयोजन कुल चारि सत्र मे संपन्न भेल . पहिल सत्रक प्रारम्भ मैलोरंगक निदेशक डॉ. प्रकाश झाक स्वागत संभाषण आ रंग संगीत नामक कार्यक्रम सँ भेल. रंग संगीतक प्रस्तुति मे मुख्य गायन छल राजीव रंजन झा केर जाहिमे कोरसक रूपमे रंगकर्मी मुकेश झा, ज्योति, सोनी, मनीषा, विवेक,नितीश,अपर्णा,सुदीप,मनीष,अक्षय रंजन,अंकित,विकास,प्रशान्त,प्रसून नारायण,स्वाभिमान आदि लोकनिक महत्त्वपूर्ण भूमिका छल. एकर निर्देशन केलनि दीपक ठाकुर. संगीत मे मजगूत पकड़ रखनिहार दीपक ठाकुर मूलतः सीतामढ़ी जिलाक सुरसंड गामक निवासी छथि, इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय सँ नाट्यकला मे एम.ए. संगहि गीत एवं नाटक प्रभाग, भारत सरकार सँ अनुबंधित संस्था नगीना आर्ट्स कें संस्थापक छथि. रंग संगीत मे मैलोरंग द्वारा पूर्वमे मंचित नाटक मणिमंजरी,धूर्तसमागम,काठक लोक,आबि मानि जाउ,चान चकोर,जल डमरू बाजय आदि नाटक मध्य प्रयोग भेल मुख्य-मुख्य गीतक प्रस्तुति भेल. २० मिनट धरि चलल रंग संगीत अपन उत्तम प्रस्तुति सँ लोककें मुग्ध करैत अंत धरि बान्हि रखबामे सफल रहल.

दोसर सत्र सम्मान ओ पुरस्कारक छल. ध्यातव्य अछि जे मैलोरंग द्वारा रंगकर्मक क्षेत्र मे विशिष्ट योगदान देनिहार व्यक्तित्वकें वर्ष २०१० सँ नियमित रूप सँ ज्योतिरीश्वर रंगशीर्ष सम्मान एवं वर्ष २०११ सँ रंगकर्मक क्षेत्र मे सक्रिय ओ समर्पित एक युवा रंगकर्मीक चयनक आधार पर श्रीकांत मंडल सम्मान सँ सम्मानित कएल जाइत अछि. उक्त दुन्नू सम्मान हेतु ५,१००/- केर राशि, पुष्पगुच्छ आ स्मृति चिन्ह प्रदान कएल जाइत अछि. वर्ष-२०१८ केर ज्योतिरीश्वर रंगशीर्ष सम्मान सँ सम्मानित लालगंज,मधुबनीक निवासी मन्त्रेश्वर झा सेवानिवृत आइ.ए.एस. अधिकारी छथि, वरिष्ठ नाटककार,रंगचिन्तक, अरिपन नामक संस्थाक संस्थापक अध्यक्ष, पोथी ‘कतेक डारि पर’ हेतु साहित्य अकादेमी सम्मान सँ सम्मानित आ नाटक,एकांकी,कविता संग्रह,व्यंग्य आदि विधा पर मैथिलीक संग-संग हिन्दी आ अंग्रेजी मे सेहो समान हस्तक्षेप रखै छथि. रंगकर्मी लोकनिक जीवन संघर्ष सँ प्रभावित मन्त्रेश्वर झाक उदारवादी स्वभाव तखन सार्वजनिक रूपे सोझा आएल जखन ओ मैलोरंगक रंगकर्मी लोकनिक प्रोत्साहन हेतु ५१,०००/- राशिक चेक मैलोरंग निदेशक डॉ. प्रकाश झाकें तत्क्षण हस्तगत केलनि.

दोसर सम्मान कोलकाता मे मैथिली रंगमंच स्थापित केनिहार श्रीकान्त मंडलक नाम सँ श्रीकान्त मंडल सम्मान-२०१८ मोकरमपुर,मधुबनी निवासी रविभूषण मुकुल कें देल गेल. इप्टा,मधुबनी सँ रंगकर्मक शुरुआत केनिहार अनेको नाटकमे अभिनय-निर्देशन केलनि आ वर्तमान मे बाल रंगमंच सँ जुड़ल निर्देशक आ प्रशिक्षक छथि आ किलकारी, पटना सँ आबद्ध छथि. हिनक प्रशिक्षित बाल कलाकार ज़ी टीवी केर प्रसिद्ध रिएलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज’, हिन्दी फ़िल्म ‘माँझी द’ माउन्टेन मैन’ , ‘कपिल शर्मा शो’ आदि कें बाद वर्तमानमे ऋतिक रोशन अभिनीत फ़िल्म ‘सुपर-३०’ संस्थापक आनन्द कुमार पर बनि रहल फ़िल्ममे १५ गोट प्रशिक्षित बाल कलाकार कें ल’ शूटिंग क’ रहलाह अछि. सम्मान आ पुरस्कार वितरण सत्रक आमंत्रित अतिथि छलाह एन.एस.डी. केर पूर्व निदेशक डॉ. देवेन्द्र राज अंकुर, आईटीबीपी महानिदेशालय केर महानिदेशक राकेश कुमार मिश्र आ मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकारक उपाध्यक्ष नीरज पाठक. मंच सञ्चालन केलनि प्रो. देवशंकर नवीन.

मैलोरंगक सक्षमता आब एहि बातक द्योतक अछि जे वैश्विक रंगमंचक सोझा मैथिली मे नित नवीन प्रयोग सँ दर्शक कें अचंभित करैत रहल अछि. एहि प्रयोगक उपयोग करैत एहि बेर नेशनल माइम इंस्टिट्यूट सँ मूक अभिनय मे प्रशिक्षित विवेक कुमार साह जेकि मूलतः तेहवारा, मुजफ्फरपुरक निवासी छथि द्वारा रचित,निर्देशित आ अभिनीत मूकाभिनय ‘खाली झोड़ा’ १२ मिनट धरि दर्शककें आकर्षित करबामे बेस सफल रहल. विशेष प्रतिभाक धनी विवेक नाट्यकर्म मे गहन प्रशिक्षण हेतु मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय मे सेहो चयनित भेलाह अछि.

महोत्सवक अंतिम आ महत्त्वपूर्ण सत्र छल ‘जानकी परिणय (कथा संकीर्तन)’. जानकी परिणय प्रसिद्ध व्यास स्व. राममिलन ठाकुर केर पावन स्मृति मे राखल गेल छल जेकि व्यास जी द्वारा दिल्ली मे किछु वर्ष पूर्व दस दिनक प्रवास मे रहि मैलोरंगक कलाकार लोकनिकें प्रशिक्षित कएल गेल छल आ ताहि महत्त्वपूर्ण उपलब्धिक प्रति मैलोरंग द्वारा कृतज्ञता ज्ञापनक ई एक सुअवसर छल. ज्ञात हो कि वर्ष २०१६ मे भारत रंग महोत्सव मे मैलोरंगक पहिल प्रवेश लोक कला प्रस्तुतिक रूपमे जानकी परिणय सँ भेल छल. कथा संकीर्तनक परिकल्पक,गायक आ निर्देशक छलाह राजीव रंजन झा. गायन, निर्देशन आ अभिनय मे निपुण एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार सँ मैथिली लोकगीत वास्ते स्कॉलरशिप प्राप्त राजीव मूलतः बरगाँव,सहरसाक निवासी छथि. वर्तमान मे मैलोरंगक अधिकाधिक नाटकक संगीत आ गायनक जिम्मा दीपक ठाकुर वा राजीव रंजन झा नीक जेंका सम्हारैत रहलाह अछि तैं हिनका लोकनि सँ दर्शकक अपेक्षा बढ़ब स्वाभाविक, मुदा एहि बेर जेनाकि प्रथम आ अंतिम सत्र संगीत आधारित छल आ मुख्य गायनक स्वर राजीव रंजनक छलनि ताहि हिसाबे बीच-बीच मे असंतुलित गायन शैलीमे किछु सुधारक गुँजाइश स्पष्ट देखल गेल .  कथा संकीर्तन मे हिनक मुख्य स्वर आ कोरस उपर्युक्त रंग संगीत समूहक कलाकार लोकनिक छल. प्रोफेशनल कोरियोग्राफर आ रंग अभिनेता रमण कुमार एहि बेर सखी (नटुआ) कें रूप मे प्रस्तुत भेलाह. रमण विभिन्न नाटक मे अभिनेता वा सूत्रधारक रूपमे देखल जाइत रहलाह अछि मुदा हिनक एहि नटुआ रूपक बेस प्रशंसा होइत रहल आ हिनक सखीक रूपमे ज्योति, मनीषा, अपर्णा, सोनी आदिक सेहो नीक योगदान रहल. जानकी परिणय मे रामक स्वरुप मे संजीव कुमार, सीताक स्वरुप मे मनीष कुमार आ लक्ष्मणक स्वरुप मे आदित्य राज प्रस्तुत भेलथि. ४० मिनटक कथा संकीर्तन मे गायन समूह ऊर्जा निरंतर बना रखलनि आ संगहि दर्शककें मनोरंजन करैत रहबामे सफल रहलाह.

आयोजन मध्य एक विशेष आकर्षण छल जे मन्त्रेश्वर झा केर आजुक दिन वैवाहिक वर्षगाँठ आ एहि उपलक्ष्यमे कलाकार द्वारा हिनका दुन्नू बेकतीकें मंच पर बजा राम-जानकी परिणयक संग-संग हिनको लोकनिक जयमाल करओलनि. आश्चर्यचकित करयबला एहि विलक्षण उपहार सँ दुन्नू गोटे बेस भावुक होइत कलाकार लोकनिक प्रति आभार व्यक्त केलनि.

मिथिला रंग महोत्सवक परिकल्पक डॉ. प्रकाश झा, संयोजक दीपक ठाकुर, आयोजन प्रमुख मैलोरंग चीफ मुकेश झा, प्रचार-प्रसार हेतु उत्कृष्ट ब्रोशर डिजाइनिंग एवं प्रोजेक्टर संचालनमे दक्ष संजीव कुमार ‘बिट्टू’ आ सहयोगी संस्थाक रूपमे बारहमासा, ग्रामज्योति, पूरा परफॉर्मिंग आर्ट्स, रंगकोसी, कलरव्हील, संजीवनी, जयजोहार, मलंगिया फाउंडेशन, नगीना आर्ट्स, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, मैथिली भोजपुरी अकादेमी दिल्ली सरकार एवं कला,संस्कृति एवं भाषा विभाग दिल्ली सरकारक भूमिका सेहो सराहनीय रहल.

मैलोरंग संस्था आ संस्था द्वारा वर्ष २०१८ मे आयोजित एक दिवसीय महोत्सवक सफलताक कारण नवसंधान, तकनीकी रूप सँ गंभीर, कुशल नेतृत्व, समुचित मार्गदर्शन, रंगकर्मी लोकनिक उत्साह, लगन, समर्पण, अनुशासन आ ताहू सभ सँ पैघ बात जे नियमित प्रेक्षकक विश्वास सँ मैथिली रंगजगतक एहि प्रतिष्ठित संस्थाकें समुचित सहयोग आ समर्थन भेटैत रहल अछि. मैलोरंग आ मैलोरंगक प्रत्येक सदस्यकें हार्दिक बधाइ ओ उत्तरोत्तर उन्नतिक शुभकामना ! 

Sunday, December 10, 2017

मिथिला रंग महोत्सव-२०१७



मैथिली लोक रंग (मैलोरंग) द्वारा दिल्ली एन.एस.डी. केर सम्मुख सभागार मे दू दिवसीय मिथिला रंग महोत्सवक आयोजन कएल गेल. पहिल दिनक आयोजनमे ०४ दिसम्बर,२०१७ क’ संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष एक वरिष्ठ रंगकर्मी ओ एक युवा रंगकर्मी कें रंगकर्मक क्षेत्र मे विशिष्ट योगदान हेतु क्रमशः ज्योतिरीश्वर सम्मान एवं श्रीकांत मंडल सम्मान स’सम्मानित कएल जाइत अछि. एहि बर्खक ज्योतिरीश्वर सम्मान-२०१७ वरिष्ठ रंगकर्मी उमाकान्त झा(भंगिमा,पटना) एवं श्रीकान्त मंडल सम्मान-२०१७ रंजीत कुमार झा (मिथिला कल्याण परिषद,रिसड़ा,कोलकाता) कें देल गेल.

आजुक आमंत्रित अतिथि छलाह एन.एस.डी. केर वर्तमान निदेशक प्रो. वामन केन्द्रे एवं एवं मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय,भोपाल केर निदेशक संजय उपाध्याय. अतिथिक सम्मान केलनि क्रमशः प्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया एवं वरिष्ठ लेखक गंगेश गुँजन तदुपरांत दुन्नू अतिथिक हाथे दुन्नू चयनित रंगकर्मी कें सम्मानित कएल गेल. मंच सञ्चालन केलनि प्रो. देवशंकर नवीन.

सम्मान सत्रोपरान्त कवि शेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुर रचित धूर्तसमागम केर मंचन कएल गेल. प्रस्तुति आलेख एवं निर्देशन छल डॉ. प्रकाश झा केर एवं सहायक निर्देशन छल श्याम कुमार सहनी केर. सभागारक प्रवेश द्वार पर सभसँ मुख्य आकर्षण छल श्याम सहनी द्वारा थर्मोकोल स’ बनाओल गेल महाकवि विद्यापतिक प्रतिमा. महिला रंगकर्मी द्वारा बनाओल गेल अरिपन,सामा-चकेबा, गामक परिकल्पना मे टांगल सूप,चंगेरा आ मिथिलाक विभिन्न ऐतिहासिक स्थलक फोटो एवं मैलोरंग प्रकाशन स’ प्रकाशित विभिन्न मैथिली पुस्तकक स्टॉल सेहो नाटक देखय आएल प्रेक्षककें आकर्षित करैत रहल.

दोसर दिन मने ०५ दिसम्बर,२०१७ क’प्रथम सत्र मे श्याम सहनी निर्देशित हिन्दी नाटक ‘रिफंड’ केर सफल मंचन भेल. संध्याकालीन सत्रमे मैथिलीक वरिष्ठ रंगकर्मी ओ लेखक डॉ. कमल मोहन चुन्नू केर नाट्यालोचनाक पोथी निनाद केर लोकार्पण भेल. उक्त अवसर पर पोथिक विषय-वस्तु ओ आलेख पर समीक्षा केलनि प्रो. देवशंकर नवीन संगहि एहि पोथिक सार्थक उपयोगिता पर तार्किक ओ महत्त्वपूर्ण विचार रखलनि मैथिलीक प्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया. पोथी लोकार्पणक पश्चात बारहमासाक नाट्य प्रस्तुति एकादशीक मंचन भेल . प्रो. हरिमोहन झा केर कथा संग्रह एकादशी केर तीन गोट मुख्य कथा क्रमशः घर-जमाय, तिरहुताम आ ग्रेजुएट पुतोहु केर नाट्यांतरण आ नाट्य निर्देशन केलनि मुकेश झा.

Thursday, July 20, 2017

मैलोरंगक मंचन जट-जटिन ओ ललका पाग


१९ जुलाइ २०१७ क’ मैथिलो लोक रंग (मैलोरंग),दिल्ली द्वारा क्रमशः दू गोट नाटक “जट-जटिन” ओ “ललका पाग”क सफलतापूर्वक नाट्य मंचन भेल. मैलोरंग पहिल बेर युवा निर्देशक रमण कुमार ओ ज्योति झाकें निर्देशनक जिम्मा दैत ई नव प्रयोग केने छल जे सफल रहल. सफलताक प्रत्यक्षदर्शी मंडी हाउस दिल्लीक श्रीराम सेंटरमे कामकाजी दिन (वर्किंग डे) होइतो प्रेक्षक स’ भरल प्रेक्षागृह थोपड़ीक निरंतर गरगारहैट स’ स्वयं प्रमाणित करैत रहल.

जट-जटिन/रमण कुमार
जट-जटिन मिथिलाक लोक परम्परा आधारित एक एहेन मान्यता अछि जाहिमे बर्खा नहि हेबा सन विकराल परिस्थितिमे अन्न-पानि बिना हाक्रोश करैत स्थानीय समाजक किछु वर्ग विशेषक महिला द्वारा जट-जटिन खेलाएल जाइछ. एहि क्रममे इन्द्रदेवक आह्वान, जट-जटिनक प्रेम ओ बेंग मारबाक प्रसंग आदिक प्रस्तुति होइछ. 

ऋतुराज कर्ण लिखित नाटक प्रारम्भ भेल बालक्रीड़ाक संग जकर नायक जटाधर (जट-राज नारायण साह) ओ नायिका जितिया (जटिन-निशा झा) जे संगहि खेलैत-कूदैत,टोना-मानी करैत रूसबा ओ बौंसबाक प्रक्रम निमाहैत बच्चा स’ सियान भ’ जाइछ. दुन्नूक मनमे प्रेमांकुरित होइत समय एला पर पल्लवित ओ पुष्पित भ’ जाइछ. मान-प्रतिष्ठाक दंभ रखनिहार जटाधरक पिता ठाकुर (जमींदार-रमण कुमार) अपन बेटी (रानी-सृष्टि कुमारी)क प्रेम-प्रसंग पर अंकुश लगबैत ओकर प्राण तक हरि लैत अछि आ ठाकुरक एहेन कठोर निर्णय स’ समूचा समाज भयभीत रहैछ. एहेन मे जटाधर (ऋतुराज) अपन प्रेमक बात गुप्त राखि जितिया (प्रियदर्शिनी पूजा) स’ विवाह क’ कोनो आन गाममे जा बैस जाइछ. एम्हर गाममे अकाल पड़ि जाइछ, लोक सभ सभटा टोना-टापर क’ थाकि जाइछ मुदा स्थिति आर विकराले होइत जा रहल अछि. गाममे एक ज्योतिषीक (संजीव कुमार बिट्टू) आगमन होइछ जे अन्य भाषी रहैत छथि मुदा अनुवादक (मनोज पाण्डे) स्थानीय लोक धरि मैथिलीमे संप्रेषित करैत छथि. ज्योतिषीक कहब छलनि जे एहि गाममे कोनो एहेन कुकर्म भेल अछि जकर प्रकोप अछि. जितिया स’ जबरदस्ती विवाहक इच्छुक मुदा असफल युवक बबन (दीप आनंद) अही अवसरक खोजमे छल आ जटाधरक आन जातिक जितियाक संग विवाह करबकें कुकर्म कहि समाजक ध्यानाकर्षण कएल. छल स’ ठाकुर द्वारा बबनकें पठा ओकरा दुन्नू बेकतीकें बजबाय आ अंतमे अपन फुसियाही स्वाभिमानक रक्षार्थ जटाधरक हत्या करबा देल जाइत छैक. जितियाक पति वियोग ओ विलाप तत्क्षण हृदयविदारक परिस्थिति उत्पन्न क’ दैछ आ समाजक आडम्बरी लोकक प्रति एक दीर्घ ओ अनुत्तरित प्रश्न ठाढ़ क’ जाइत अछि. प्रियदर्शिनी पूजा (जितिया)क अभिनय प्रेक्षागृहमे बैसल एकहक प्रेक्षककें भावुक हेबा लेल बाध्य क’ देने छल.

नाटकक मूल प्रसंग स’ हटि कने मंच दिस चली, ज्योतिष शास्त्रक ज्ञान रखनिहार ज्ञाताकें “ज्योतिषी जी” कहल जाइछ मुदा प्रत्येक  पात्र द्वारा “ज्योतिष जी” कहि संबोधित करबकें भविष्यमे सुधारल जा सकैछ. प्रसंगकें रोचक बनेबा लेल ज्योतिषी जी द्वारा सांकेतिक (अन्य) भाषाक प्रयोग आ तदनुसार ओकर अनुवाद क’ प्रस्तुत करबाक जे शैली छल से अद्भुत छल आ एहि चरित्रमे दुन्नू अभिनेता (संजीव बिट्टू आ मनोज पाण्डे) बेस प्रशंसा हथोड़िक’ ल’ जेबामे सफल रहलाह. ठाकुरक भूमिकामे स्वयं रमण कुमार वस्त्र,मेकअप,भाव-भंगिमाक दृष्टिकोण स’ उपयुक्त छलाह मुदा सम्वाद अदायगीमे एहि खन मोन पड़ैत रहलाह “एक छल राजा”क मुकेश झा ओ “अमली”क अमरजी राय. नाटकक मंचन पूर्ण सफल रहल आ नव-निर्देशक रमण कुमार बधाइ केर पात्र छथि.

एहि नाटकमे जे सभ महत्त्वपूर्ण भूमिकामे छलाह/छलीह ताहिमे उपरोक्त पात्रक संग  पाँच गोट लुच्चा प्रवृतिक लड़का सभमे निखिल राज,पुष्कर शर्मा,मनीष गुप्ता,रोशन यादव आ मणिशंकर गुप्ता, तहिना स्त्रीक भूमिकामे ज्योति झा आ सुधा झा, ग्रामीण शिव स्वरुप,ऋषि राज आ सोनू पिलानिया, नोकर प्रभात रंजन ओ बटोहिक भूमिकामे राजीव रंजन झा आ नितीश कुमार झा सेहो अपन-अपन चरित्रक हिसाबे फिट भेलाह. मंच,प्रकाश,ध्वनि,वस्त्र आदि सेहो व्यवस्थित छल मुदा एहि नाटकक पार्श्व गायन ओ संगीत किछु निराश केलक. मंच पर कलाकार लोकनिक गाएब स्पष्ट सूनल गेल जेकि गायनक मौलिक रूपकें प्रस्तुत करैत छल, मुदा जखन जट-जटिन शब्द लोकक कानमे पड़ैत अछि त’ पहिल कल्पना ओहि गीतक सुन्दरते पर जाइत अछि “घ्यूरा फड़लौ गे जटिनियाँ, झुमनी फड़लौ गे”  आ ताहि गीतक संग ज’ उपयुक्त वाद्ययंत्रक प्रयोग नहि हो त’ कने झुझुआन लागब स्वाभाविक. मैलोरंग स’ ई अपेक्षा करब उचित अछि कारण राजीव रंजन आ दीपक ठाकुर संगीत पर बेस मेहनैत करैत रहलाह अछि आ क’ सकैत छथि. बेजाए कहब अनुचित हएत कारण अपन जीवनोपार्जनमे व्यस्त रहैत एकटा नाटककें तैयार क’क’ प्रस्तुत करबामे कत्तेक परेशानी होइत छैक से बूझल जा सकैत अछि मुदा प्रेक्षक कतहु नें कतहु शुभचिंतक होइ छथि त’ हुनक अपेक्षा स्वाभाविक अछि .

ललका पाग/ज्योति झा
स्व. राजकमल चौधरी रचित “ललका पाग”क कथा/नाट्य मंचन स्त्री-विमर्श पर आधारित अछि. स्व. राजकमल चौधरीक लेखन प्रतिभा स’ मैथिली ओ हिन्दी (दुन्नू भाषी) समाज कृतज्ञ अछि. हिनक लेखनक केन्द्रमे सिसकैत,हिचकैत ओ शोषित नारीक दुर्दशाकें सहजहि अकानल जा सकैत अछि. ललका पाग कथाक नायिका तीरू (प्रियदर्शिनी पूजा) सेहो एहने सन एक मैथिल नारी छथि जिनका स्वभावमे लड़िक’ अधिकार लेब नहि अपितु सिसकैत-कुहरैत अपन अधिकार स’ वंचित रहबकें नारी धर्म बुझैत छथि. मात्र चौदह बर्खक उमेरमे सासुर आएल तीरू अपन बालमन पर काबू नहि राखि पेली आ सासुकें गामक पोखरिमे नहेबाक इच्छा व्यक्त कय देलनि. हुनक एहि निर्विकार मनक चंचलता सगरो गाम काने-कान पसरि गेल आ बात हुनक स्वामी राधाकान्त (जितेन्द्र कुमार “जीतू”) धरि पहुँच गेल. एहि छोट सन बात पर राधाकान्त हुनक तिरस्कार करब शुरू कय देलनि आ कलकत्ता कॉलेजक महिला संगी कामाख्या (निशा झा)क रूप ओ गुणक स्मरण क’ हुनका संग परिणय हेतु निश्चय क’ लेलनि. तीरू ओहि गप्पक लेल तिरस्कृत आ अवहेलित भेली जे गप ओ मात्र बाजिक’ इच्छा व्यक्त केने छली नहि कि ओ पोखरिमे नहाए गेल छलीह. किछु दिनक बात राधाकान्त गाम अबैत छथि आ अपन दोसर विवाहक निर्णय सुनबै छथि तीरूकें. तीरूकें त’ एक क्षण लेल बज्रपात भेलनि मुदा अंतर्वेदनाकें कंठ मोंकि स्वीकृति दय देलनि. विवाहक दिन तय भेल राधाकान्त आइ बहुत प्रसन्न छलाह आ इंतजाम पातीमे व्यस्त छलाह आ हुनक एहि इंतजाम-पातीमे संग द’ रहल छलीह तीरू. कलकत्ता स’ संगी सभ आएल छलथिन राधाकान्तकें मूँह पर एक अलग उत्साह. साँझ भेलै राधाकान्त सजि-धजि विदा भेला आ तीरू दिस बिनु तकनहि चल गेला दरबज्जा दिस. तीरू समाद पठौलनि आँगन अबै वास्ते. राधाकान्त आँगन जा जखन तीरूक घर दिस गेला त’ तीरू पेटी उधेसने किछु ताकि रहल छलीह आ अन्ततः ओ वस्तु भेटि गेलनि. ओ अनुपम वस्तु छल ललका पाग. ललका पाग देखितहि एक क्षणक वास्ते राधाकान्त स्तब्ध भ’ गेला आ क्षुब्ध रहि गेला तीरूक निःश्छ्लता पर. बकार बन्न भ’ गेलनि राधाकान्तकें आ बीच अँगनामे बैसि पश्चातापक कुहेस फटैत तेना दहोबहो नोर बहब’ लगलनि जेना तीन बर्खक बच्चा होथि. उक्त कथा/नाटक पुरुष वर्ग पर कतेको प्रश्न ठाढ़ करैत अछि आ कमोबेश स्थिति एखनो पूर्ववत अछि.

नाटकक आरम्भ सूत्रधार (संतोष कुमार आ निशा झा) स’ होइत अछि. संतोष कुमार रंगमंचक एक एहेन हस्ताक्षर छथि जिनका मंच पर पदार्पण करिते प्रेक्षकक मूँह पर हँसी आ हुनक पात्र संबंधी जिज्ञासा बढ़ि जाइत छनि. निशा झाक अभिनय आ हुनक मैथिली बजबाक टोन भविष्यक नीक सम्भावना दिस इंगित क’ रहल अछि. नटुआ नाच ल’ मंच पर प्रस्तुत होइत रमण कुमार आ संजीव बिट्टूकें गतिविधि देखि प्रेक्षक लोकनिकें गुदगुदी हएब स्वाभाविक छल. राधाकान्तक पात्रमे जीतू केर पूर्वक नाटक “जल डमरू बाजे” ओ “धूर्तसमागम” मे देखल अभिनयक हिसाब स’ एहि बेर किछु हल्लुक सन अभिनय लागल ओना एहिमे कोनो संदेह नहि जे ओ नीक कलाकार छथि आ आगाँ फेरो तहिना भेटता से आश्वस्त छी. तीरूक माइअक भूमिका कम मुदा तइयो अपन प्रभाव बनौने रहली ज्योति झा. चननपुरवालीक भूमिकामे सुधा झाक अभिनय ओ किसनीमायक भूमिकामे सृष्टि आनंद सेहो फिट छलीह. मुंशी पटोरीलालक भूमिकामे मनोज पाण्डे सेहो उपयुक्त छलाह. तीरूक भाइअक भूमिकामे बहुत कम्मे कालक वास्ते मुदा आन नाटकक संबंधमे एतबा जरूर कहल जा सकैत अछि जे देखिते दिनमे अपन अभिनयमे नितीश सेहो निखरल जा रहल छथि. रामसागर आ ज्योतिषीक भूमिकामे सोझा आएल संजीव कुमारमे आर सुन्दर अभिनयक गुँजाइश छनि. एहि नाटकक पार्श्वमे संगीत ओ गायन बेस आकर्षक छल ताहिमे राजीव रंजन पूरा इमानदारी स’ प्रस्तुत भेलाह. अमरजी राय केर वस्त्र विन्यास सहजहि आकर्षित करैछ आ श्याम सहनीक प्रकाश परिकल्पना सभ दिने स’ नीक रहल अछि.

मंच सञ्चालन केलनि मैलोरंगक निदेशक प्रकाश झा. आजुक निर्देशक ज्योति झाकें पुष्पगुच्छ दय सम्मानित केलनि जेएनयू केर प्रोफेसर डॉ. देवशंकर नवीन आ रमण कुमारकें मैलोरंग रेपर्टरी प्रमुख मुकेश झा.

धन्यवाद ज्ञापनमे रमण कुमार दर्शक आ मैलोरंगक प्रति अपन उद्गार व्यक्त केलनि ओत्तहि ज्योति झा एहेन सुअवसर हेतु दर्शक,रेपर्टरी,वरिष्ठ रंगकर्मीक संग-संग प्रकाश झाक प्रति सेहो अपन कृतज्ञता प्रकट केलनि.

उपरोक्त दुन्नू नाटक देखला उत्तर प्रेक्षागृह स’ ल’ क’ सोशल नेटवर्क धरि लोकक मूँह स’ वाह निकलब नाटकक सफलताकें सद्यः प्रमाण अछि. संभवतः बहुत गूढ़ विषय दिस हमर ध्यान केन्द्रित नहि भ’ पाएल होएअ से संभव अछि आ स्व-विवेक स’ लिखल ई रिपोर्ट सूचनार्थ अपनें धरि पहुंचाएब अपन कर्त्तव्य बुझै छी. जयतु मैथिली.

Monday, June 26, 2017

मैलोरंग द्वारा धूर्तसमागम केर मंचन, ज्योतिरीश्वर ओ श्रीकान्त मंडल सम्मान


२५ जून २०१७ (रविदिन) दिल्लीक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालयक सम्मुख सभागारमे संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित एवं मैलोरंग रेपर्टरी द्वारा प्रस्तुत नाटक धूर्तसमागम सफलतापूर्वक संपन्न भेल. तेरहम शताब्दीमे लिखल गेल एहि नाटक (प्रहसन) केर मूल रचनाकार कवि शेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुर छलाह जे तत्कालीन मिथिलाक कर्नाटवंशीय राजा हरदेव सिंहक शासनकालमे एहि नाटकक रचना केने छलाह . भारतीय साहित्यक इतिहासमे ई पहिल एहेन नाटक अछि जे लिखित साक्ष्यकें रूपमे प्राप्त होइत अछि . एहि तरहें गद्य विधाक प्रथम सर्जकक रूपमे कवि ज्योतिरीश्वरक मैथिल हएब हमरा लोकनिकें गर्वानुभूति करबैछ. एहि नाटकक कथावस्तुक केन्द्रमे एहेन विषय राखल गेल अछि जकर मंचन देखला उत्तर आजुक वर्तमान परिस्थितिमे सेहो समसामयिकताक बोध करबैछ. धूर्तक प्रवेश समाजमे सभदिना व्याप्त रहल अछि आ ओएह प्रसंगकें एहि नाटकक माध्यमें देखाओल गेल अछि. कामपिपासु ओ पाखंडी गुरु-शिष्यक कामवासनाकें उजागर करैत एहि कथामे एक वेश्याक प्रति हिनका लोकनिक कामान्धता ओ ओकर प्राप्ति हेतु गुरु-शिष्य मध्य भेल कलह केर निपटारा हेतु न्याय केनिहार न्यायाधीश द्वारा स्वयं धूर्तइ क’ हिनका लोकनि स’ छीनि ओतय स’ बैलाए देल जाइ छनि. एहि तरहें सभस’ पैघ धूर्त न्याय देनिहारे साबित होइत अछि. एहिमे डेग-डेग पर समाजक धूर्त लोकक प्रभावक चर्चा ओ प्रसंग अछि आ इएह मूल कारण अछि जे एकर नाम धूर्तसमागम अछि.

पाँच गोट कोरस एवं सहयोगी अभिनेता (नितीश कुमार झा,निखिल कुमार,विवेक कुमार,केशव कुमार,रौशन कुमार) क प्रवेशक संग प्रारम्भ भेल नाटकमे हिनका लोकनिक मूक एवं सांकेतिक अभिनय समाजक धूर्त वर्ग आ ओकर छल-छलावा बला स्वभावकें उद्घाटित करैत अछि. नाटकक सूत्रधार नट (रमण कुमार) एवं नटी (पूजा प्रियदर्शनी) द्वारा नाटकक रचनाकार,रचनाकाल,प्रदर्शनकाल ओ समाजक तत्कालीन स्थितिक चरित्र चित्रण कें रेखांकित करबाक क्रममे एक दोसराक संग तालमेल बैसेबामे फिट छलाह आ ई दुन्नू गोटे अपना-अपना चरित्र संग न्याय करैत बूझि परलाह. मंचनक प्रारम्भ ओ मध्यमे गीत-नृत्यक सेहो अद्भुत सामंजस देखबामे आएल. संवाद प्रस्तुतिमे  बाबा विश्वनाथ (मुकेश झा) ओ हुनक शिष्य बंगट लाल (जितेन्द्र कुमार) प्रेक्षककें कखनो पेट पकड़ि क’ त’ कखनो ठहक्का लगा-लगा हँसबा लेल निरंतर बाध्य करैत रहलाह आ नाटकक पूर्ण रोचकता बना रखलनि.

जितेन्द्र कुमार एहि सं पूर्व मैलोरंग द्वारा आयोजित नाटक “जल डमरू बाजय”मे भुखला के चरित्रमे अपन दमदार अभिनय स’ प्रेक्षक लोकनिक पसीनक अभिनेता बनि गेल रहथि मुदा वर्तमानमे मुम्बई प्रवासक कारणें दीर्घ अन्तरालक पश्चात दिल्ली ओ मैलोरंगक एहि मंच पर एक बेर फेर स’ आर बेसी निस्सन अभिनयक संग प्रस्तुत भेलाह अछि. मुकेश झा (मैलोरंग रंगमंडल प्रमुख) विभिन्न नाटकमे मुख्य अभिनेताकें रूपमे निरंतर सोझा अबैत रहलाह अछि तैं स्वाभाविक अछि जे हिनका स’ आब बेसीक अपेक्षा कएल जाइत अछि. अमली,देह पर कोठी खसा दिय’,एकादशी आदि नाटकक माध्यमें एक मांजल निर्देशकक रूपमे सेहो सफल रहलाह अछि मुदा एक अभिनेता केर रूपमे महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक “ओरिजनल काम” मे कम्पनी केर चरित्र अभिनयक बहुत दिनक बाद हिनक मूल अभिनय प्रतिभा एहि नाटकक माध्यमे सोझा आएल जाहिमे ई पूर्ण समर्पित नजरि एलाह कारण हिनक जे चरित्र छल से एक कामुक ओ पाखंडीक छल आ से चरित्र समूचा नाटकमे परिलक्षित होइत रहल. एक कंजूस धन्नासेठ ठाकुर (संतोष कुमार) हिनको एक धूर्तक रूपमे देखाओल गेल जे नाना प्रकारक बहन्नाबाजी क’ एको आना खर्च हेबा स’ कन्नी कटैत रहैत छथि. साधु-सन्यासी होथि वा दास-सेवक कोनो दान पुण्य स’ अपनाकें बंचेबाक जोगारमे लागल रहैत छथि. संतोष कुमार अपन अभिनय वैशिष्ट्यता हेतु जानल जाइत छथि. एक छोटे सन भूमिका रहितो अपन भाव-भंगिमा ओ संवाद अदायगी स’ प्रेक्षकक प्रसंशा बटोरबामे अहू बेर सफल रहला.

एहि नाटकमे दू गोट महिलाक मुख्य भूमिका अछि जाहिमे सुरतप्रिया (मनीषा झा) मास-मास भरिक व्रत रखैत ब्राह्मण भोजन करा जतय पुण्य अर्जित करय चाहैत छथि ओत्तहि हुनक कामातुर पिपासा कामदेवक आलिंगन हेतु आतुर सेहो देखल जाइत अछि. एहि ठाम रचनाकारक एक साहस त’ स्पष्ट रूप स’ देखल जा सकैत अछि जे सुरतप्रिया जाहि प्रकारे कामातुर छथि ओ धर्मक अढमे पाखंडकें सेहो उजागर करैत अछि. मनीषाक संवाद ओ मुद्रा मध्य कने आर सामंजस बैसेबाक गुँजाइश देखना जाइत छल, तथापि अपन चरित्रमे उतरबाक सफल प्रयास केली. दोसर महिला पात्रक रूपमे अनंगसेना (सोनिया झा) अपन रूप सौन्दर्य स’ कामसम्मोहित पुरुष वर्गक उपभोगक वस्तु बनल नगर भरि चर्चित छथि. सोनिया अपन चरित्र संग न्याय केली हिनक भाव-भंगिमा ओ नृत्य नीक छल मुदा संवाद प्रस्तुतिमे कने आर आत्मविश्वासक आवश्यकता बुझना जाइत छल. प्रसंग छल असज्जाति मिश्रक शिष्य बन्धुवंचक द्वारा जोर-जबर्दस्तीक क्रममे ओकरा झटकबाक संग जे प्रतिक्रिया छल से ताहि ठाम हुनक ओ क्रोध एवं संवादक प्रवाह खुलिक’ सोझा एबामे असमर्थ रहल. सोनिया आब मैथिली रंगमंच,धारावाहिक ओ सिनेमाक एक सक्रिय महिला रंगकर्मी छथि तैं हुनका स’ एतबा अपेक्षित.

गुरु-शिष्य दुन्नूक मध्य फसाद अनंगसेनाक प्राप्तिक लेल होइत अछि आ मामिला ओझराइत देखि स्वयं अनंगसेनाक सलाह पर असज्जाति मिश्र (ऋतुराज) ओ हुनक शिष्य बन्धुवंचक (मनोज पाण्डेय) केर सोझा न्याय हेतु प्रस्तुत होइत छथि. एहि ठाम गुरु-शिष्य दुन्नू पर न्यायदाता ओ हुनक शिष्यक धूर्तइ भारी पड़ि जाइत अछि आ अनंगसेना पर कब्जा क’ हिनका लोकनिकें ओतय स’ बैला देल जाइत छनि. मनोज पाण्डेय अपन चरित्र निमाहमाक एक नीक प्रयास केलनि आ पूर्वक अभिनय स’ बड्ड बेसी सुधार देखबामे आएल अछि. ऋतुराजक अभिनयमे आर सुधारक गुँजाइश जेनाकि प्रेक्षक संग कने तालमेल बैसेबाक प्रयास कएल जा सकैत छल. प्रेक्षक संग तालमेल बैसेबामे मुकेश झा,जितेन्द्र कुमार,संतोष कुमार,सोनिया झा आ मनोज पाण्डेयक भूमिका नीक रहल जकर अनुसरण ऋतुराज द्वारा कएल जा सकैत छल,तथापि देल गेल भूमिकाक निर्वाह नीक स’ कएलनि. ओना मैलोरंगमे प्रवेश केनिहार नव कलाकार लोकनिकें एहि सम्बन्धमे कतेको बेर टोकलियनि अछि आ से अपेक्षानुसार आगाँ सुधार देखबामे आएल अछि मुदा इएह अपेक्षा प्रदर्शित होमय बला नाटकक मुख्य निर्देशक ओ सहायक निर्देशक लोकनि स’ सेहो अछि.       

उक्त नाटकक जतबा चरित्रक चयन ओ प्रस्तुति छल से उपयुक्त छल जेकि प्रकाश झाक निर्देशन ओ श्याम सहनीक सहायक निर्देशनकें स्वप्रमाणित करैत छल. मूल सम्वादमे प्रयुक्त क्लिष्ट शब्दकें वर्तमान प्रेक्षकक अनुसारे किछु हल्लुक शब्दमे परिवर्तित क’ ओकरा बोधगम्य बनेबाक प्रयास सेहो नाटकक एक रोचक बिन्दु छल. आलेख प्रस्तुति एवं निर्देशन हेतु बधाइ केर पात्र छथि मैलोरंगक निदेशक ओ वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. प्रकाश झा. संगीत परिकल्पना ओ वाद्य-वादनमे राजेश पाठक,अनिल मिश्रा ओ दीपक ठाकुर उपयोगी सिद्ध भेलाह. मैलोरंग प्रस्तुत अन्यान्य नाटकक गायनमे राजीव रंजन (रॉकस्टार) केर सुनैत रहला स’ हुनक रंगमंचीय पार्श्व गायनक सुगंध पुनः ओहिना भेटल जे अपेक्षित छल. एहि बेर मैलोरंगक मंच स’ एक अद्भुत गायकी प्रतिभाकें लगीच स’ देखबाक ओ चिन्हबाक अवसर भेटल,पहिने त’ विश्वास करब मोसकिल छल जे ई स्वर लाइव गायकीक अछि,मुदा हुनका जखन मंच पर परिचय हेतु आमंत्रित कएल गेल त’ अवाक रहि गेल रही. गायनमे पूर्ण शास्त्रीय पुट ओ मृदु स्वरक मलिकाइन सुष्मिता झा केर पार्श्व गायकी स’ समस्त प्रेक्षक मुग्ध भ’ गेल रहथि. मैलोरंगे केर बहन्ने सही मैथिली मंच पर अपनेंक स्वागत अछि सुष्मिता जी. एहिठाम एक बात स्पष्ट करब आवश्यक अछि जे मैथिली कला- संगीतमे स्वर साधना वा अभिनय साधना स’ मंच पर मैथिलानी केर भूमिका सभ दिने स’ पुरुषक अपेक्षामे कम रहल अछि आ ताहि मिथककें तोड़बाक प्रयास करैत मैलोरंग एत्तेक महिला रंगकर्मीकें सक्रिय क’ लेने अछि जे रंगमंच वास्ते सदति अपन समर्पणताक परिचय देइत रहलीह अछि आ एहिमे स’ आब त’ किछु निर्देशन केर जिम्मा सेहो सम्हारबा लए सोझा एलीह अछि. वस्त्र विन्यास,ध्वनि,साज-सज्जा,प्रकाश,मंच परिकल्पना आदि सेहो ततबे सुन्नर. द्विदिवसीय आयोजनक क्रमशः चारि शोमे उपस्थित प्रेक्षक ओ रंगप्रसंशकक प्रमाण इएह छल जे बहुत गोटेकें ठाढ़ भ’ क’ वा निच्चामे बैसि देखबा लेल बाध्य होमय पड़लनि. अनेकानेक दृष्टिकोण स’ ऐतिहासिक महत्त्वक एहि नाटकक मंचन सफल रहल. मंचक प्रारंभिक सञ्चालन ओ समापनक घोषणा दीपक यात्री केलनि.

मैलोरंग द्वारा रंगकर्ममे सक्रिय युवा रंगकर्मीकें प्रोत्साहन हेतु श्रीकान्त मंडल पुरस्कार आ वरिष्ठ साहित्य-संस्कृतिकर्मी कें जीवन भरिक उपलब्धि हेतु ज्योतिरीश्वर सम्मान स’ सम्मानित कएल जाइत रहल अछि. बर्ख २०१६ केर श्रीकान्त मंडल पुरस्कार प्रसिद्ध युवा रंगकर्मी अमरजीत रायकें प्रदान कएल गेल आ ज्योतिरीश्वर सम्मान हेतु पं. गोविन्द झाक नामक घोषणा कएल गेल अछि. पं. गोविन्द झा ९६ बरखक उमेरमे लेखनीमे सक्रिय छथि मुदा अतिवृद्ध हेबाक कारणें पटना स’ एबामे शारीरिक रूपे असमर्थ छथि आ मैलोरंगक समूह ई निर्णय लेलक अछि जे एक शिष्ट मंडल द्वारा हुनका ई सम्मान हुनक पटना आवास पर जाय हस्तगत कएल जाएत. ज्योतिरीश्वर कृत धूर्तसमागम ओ ज्योतिरीश्वर सम्मान-२०१६ केर घोषणाक संग कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न भेल.