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Monday, October 20, 2014

अभिनेता आलोक सिंह

खगड़िया जिलाक बेलदौर थानान्तर्गत बलैठा गामक निवासी श्री आलोक सिंह जेकि अपन अभिनय जीवनकें शुरुआत ग्रामीण स्तरकें नाटक स’ केलनि आ वर्तमानमे मुंबई फिल्म उद्योग जगतमे कएक टा टीवी सीरियल आ बड़का पर्दाकें फिल्म धरि अपन अभिनय क्षमता स’ प्रतिष्ठित बैनर केर प्रोडक्शन सभमे नीक काज क’ रहलाह अछि । कोनो हिन्दी सीरियल निर्माणक क्रममे दिल्ली आएल रहथि हुनका संग संपर्क भेल बातचीत भेल आ मैथिलीमे हुनक बाजब आ भाषा प्रति अनुराग देखि रहल नञि गेल हुनक अभिनय यात्रा केर संदर्भमे किछु गूढ़-गूढ़ गपसप स’ अवगत भेलौं । दिल्लीमे हुनका संग भेल भेंटवार्ताक किछु अंश :

नमस्कार आलोक जी ! भेंट-घाँटक क्रममे अपनेंक स्वागत अछि ।

नमस्कार मनीष जी ! बहुत बहुत धन्यवाद ।

आलोक जीहमरा लोकनि अपनेंक शैक्षिक आ अभिनय पृष्ठभूमि स’ अवगत होमय चाहै छी ।

हमर पढ़ाई-लिखाई खगड़ियाक पी.डब्ल्यू. हाई स्कूल स’ मैट्रिक आ तकरा बाद कोशी कॉलेज स’ बी.ए. (इतिहास प्रतिष्ठा) तक भेल अछि । पढ़ाई करिते रही तही समयमे गामक नाटक सभमे भाग लैत छलौं । ब्लॉक स्तर पर हमरा गामक दुर्गापूजा बड्ड प्रसिद्ध रहै जाहिमे दू राति नाटक होइत छलैक । शुरुआतमे त’ हमरा सहयोगी कलाकारक भूमिका भेटै मुदा ओ मुख्य नायक स’ बेसी प्रभावी भ’ जाइ तखन पूरा गौंआ निर्णय ल’ हमरा मुख्य नायकक भूमिका लेल प्रस्ताव रखलनि आ तकर निर्वाह हम संभवतः केलियनि । ओही क्रममे कएल गेल किछु ऐतिहासिक  नाटक स्मरण अछि जेनाकि- सिकन्दर पोरसजालियाँवाला बागमे जनरल डायररावणवधमे रामचन्द्रजयद्रथवधमे अभिमन्युपृथ्वीराज चौहानअमरसिंह राठौरनादिरशाह आदि । ई क्रम बरख १९९८ धरि चलल आ गामक नाटकमे जखन खूब प्रशंसा होमय लागल त’ मनोबल बढ़’ लागल आ एकटा प्रोफेशनल कलाकार बनबाक इच्छा तीव्र होमय लागल आ बरख १९९९मे पटना दूरदर्शन स’ जुड़बाक अवसर भेटल ।

पटना दूरदर्शनक कोन-कोन कार्यक्रममे आ केहेन-केहेन पात्रक भूमिका सभ भेटैत छल ?

शुरुआतमे त’ छोट-छोट रोल सभ भेटैत छल जेनाकि ३१ दिसम्बरनव वर्षहोलीवैसाखीदिवाली आदिकें अवसर पर आयोजित स्पेशल एपिसोडमे कार्यक्रमक प्रस्तोता वा कोनो सीनमे कॉमेडी करबाक अवसर भेट जाइत छल । बरख २००१मे एकटा सीरियल कब तक सहेंगे हम” जाहिमे किछु नामी कलाकारक संग अभिनय के मौका भेटल ओहिमे मुख्य नायक इंस्पेक्टर आदेश सिन्हा के रोल भेटल छल आ सहयोगी कलाकारमे जेठ भाइकें भूमिकामे छलाह ऋषभ शुक्ला (महाभारतक शान्तनु)भाभी के भूमिकामे कंचन जी (सहायक अभिनेत्री,सनम बेवफ़ा)गीत लिखने रहथि प्रसिद्ध गीतकार विनय बिहारी (वर्तमानमे सम्प्रति-कला आ संस्कृति मंत्री,बिहार सरकार) पार्श्व स्वर देने रहथि महेन्द्र कपूर ।

प्रायः अपना सभ दिसक लोकके संग एकटा आर समस्या रहल अछि (ओना वर्तमानमे एहि मानसिकतामे किछु परिवर्तन जरूर भेलैइयै) जे अभिभावक एहि कर्ममे उतरबाक वास्ते स्वीकृति नञि देइत छलाहअपनेंक केहेन अनुभव रहल अछि ?

एहि मामिलामे हम बहुत खुशनसीब छी जे हमर माता-पिताभाई-बहिनगौंआ-समाजकर-कुटुम सभ कियो बहुत प्रोत्साहित करैत रहलाह अछि । हमर पिताजी स्वयं रंगमंचक बहुत नीक अभिनेता रहल छथि तैं ओ एहि वास्तविकता स’ नीक जेंकाँ परिचित छलाह आ ततेबा नहि हम प्रारम्भमे कएकटा सीरियलमे निर्माता सेहो रहल छी जाहिमे आर्थिक सहयोग घरे स’ भेटल रहय । ओना हमरा घरमे फिल्मी कलियाँफिल्मी दुनियाँमायाइंडिया टूडे आदि पत्रिका नियमित रूप स’ लेल जाइत रहैक आ हम सभ छोटे स’ कलाकार सभक जीवनी पढ़ियै जे कियो कंडक्टर रहैकियो मजदूर रहैकियो ड्राइवर रहैकियो स्पोर्ट्स ब्वॉय रहै आ संघर्ष करैत-करैत आइ बॉलीवुड के प्रतिष्ठित कलाकारमे गानल जाइत छथि तैं हमरा घरमे सभ गोटे एहि सच्चाई स’ अवगत रहथि । अढ़ाइ बरख धरि काजक वास्ते बौआइत बौआइत हम स्वयं विचलित भ’ गेलौं मुदा घरक लोक तहियो मनोबल बढ़बैत रहल तैं एहि स’ नीक अनुभव आर की भ’ सकइयै हमरा वास्ते ।

पटना स’ मुंबई धरिक यात्राक सम्बन्धमे किछु कहल जाउ आ ओत’ स्थापित हेबामे किनक सहयोगकें स्मरण राख’ चाहब ?

सीरियल कब तक सहेंगे हम” हमरा वास्ते संजीवनी बूटीकें काज केलक कारण अही बहन्ने नीक नीक कलाकार लोकनि स’ सम्पर्क बढैत चल गेल आ फेर दोसर सीरियल पायलट” केर पार्श्व गायन लेल हमरा लोकनि महेन्द्र कपूर जी लग गेलौं जकर रेकॉर्डिंग जुहू चपाटी स्थित नेपोलियन स्टूडियोमे भेल छल आ लगातार मुंबईकें आवागमनकें क्रममे बरख २००३मे महेन्द्र कपूरजीक बालक रोहन कपूर जी स’ परिचय भेल । रोहन कपूर जी बहुतो सूत्र सभ देलनि मुदा अपन किस्मत कहियौ वा संघर्षक दिन कहियौ कोनो तेहेन काज सभ नञि भेटैत छल बादमे ओहो बेसी काल विदेशेमे रहैत छलाह आ तै ल’ ’ सम्पर्को कम होमय लागल । किछु आर लोक सभ जिनका संग भेंट-घाँट रहय पुनः मिल’ गेलियनि त’ पता चलल जे ओहिमे स’ किनको ऑफिस शिफ्ट भ’ गेलनि त’ केयो कमरा बदैल लेलनि आ ओहि समयमे मोबाइलक सेहो एते चला-चलती नञि रहै केयो-केयो पेजर नं. देने रहथि मुदा तै स’ तालमेल नञि बैस पाबय । ओही दरम्यान धीरे-धीरे पूरा फिल्म इन्डस्ट्री के चक्कर लगेलौं आ तकरीबन अढ़ाइ बरख धरि कैमरा फेस करैके मौका तक नञि भेटल मुदा हमहूँ ठनने रही जे खाली हाथ आब घर नञि जाएब । ओहि ठाम टिकबा वास्ते पाइ सेहो आवश्यक छल तैं रतुका शिफ्टमे नौकरी करी मुदा रतुका जगरना के बाद दिनमे हिम्मत काज नञि करै आ दिल बेर बेर एतबे कचोटय जे कलाकार बन’ आयल रही आ ई कोन नोकरी कर’ लगलौं । गाम-घरक वा जान- पहचानक किछु लोक सभ रहबो करथि मुदा हुनका लोकनिकें कला क्षेत्रमे नञि त’ कोनो सम्पर्क रहनि आ नें कोनो अभिरुचि ।

एहेन समयमे विचलित नञि भ’ ’ संघर्षकें जारी रखबाक पाँछा कोन एहेन अपेक्षा छल ?

उम्मीद कहियौ वा संजोग कहियौ बरख २००६मे एक गोट भोजपुरी फिल्म देवरजीमे अभिनेता कृष्णा अभिषेक आ संगीता तिवारी जीकें संग काज करबाक अवसर भेटल आ ओही दरम्यान एहि फिल्मक चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर अब्बास स’ मुलाकात भेल जेकि नदीम रिज्वीक  फिल्म अभिनेता राजपाल यादव के संग अंडरट्रायल” बनबैत रहथि ओहिमे एकटा सहयोगी कलाकारकें रोल देलनि जाहिमे हमर आठ-नौ टा सीन रहय । किस्मत एहेन जे जखन काज भेटब शुरू भेल त’ पता चलल जे हमर छोट भाईकें ब्रेन ट्यूमर भ’ गेलनि तुरंत बोरिया-बिस्तर समेटि घर चल गेलौं आ हुनक इलाज वास्ते दिल्लीमुंबईहरिद्वारवैद्यनीम-हकीम लोक जत्त’ कहय से संभवतः सभ ठाम ल’ गेलियनि आ करीब एक बरखक इलाजकें बाद जखन ओ सुधारावस्थामे एला त’ पुनः २००८के अंतमे मुंबई आबि शून्य स्तर स’ काज ताकब शुरू केलौं । एकटा प्रोडक्शन हाउसमे नोकरी पकड़लौं आ जखन धीरे-धीरे कास्ट डायरेक्शनकें अनुभव होमय लागल तखन आब अपन स्वतंत्र काज सेहो कर’ लगलौं जाहि क्रममे ढेरी विज्ञापन सभ भेट’ लागल । २००९मे एकटा बहुत पैघ प्रोडक्शन हाउस सिनेविस्टाकें कास्टिंग डायरेक्टर स’ परिचय भेल हुनका सभ बात कहलियनि ओ हमरा बी.ए.जी. फिल्म्स के ऑफिस (वर्तमानमे एकता कपूर के बालाजी टेलीफिल्म्स) ऑडिशन लेल पठेला संजोगवश हमर चयन भेल शाहवाज खान अभिनीत सीरियल मितवा” आ ओ शूटिंगक चारि दिनक बाद स्टार प्लस पर प्रसारित भेल । ज’ देखल जाए त’ ई सीरियल हमरा लेल बड्ड लक्की छल कारण जे तकरा बाद लगातार काज भेट’ लागल आ ओत्तहि स’ हमर उम्मीद जागब शुरू भेल ।

जखन फेर श्रीगणेश भेल त’ कोन-कोन चैनल वा प्रोडक्शन कम्पनी सभ लेल काज करबाक अवसर भेटल ’ स्मरण होए त’ किछु सीरियल आ फिल्मक नाओं सेहो जनाओल जाउ ।

सिनेविस्टा कम्पनीकें कास्टिंग डायरेक्टर जेकि हमरा ऑडिशन लेल पठौने छलाह मितवामे अभिनय देखि ओ सेहो अपन सीरियल अजनबी” लेल ऑफर केलनि जेकि स्टार वन (आब लाइफ ओके) पर प्रसारित भेल छल । बरख २०१०कें सितम्बर महिनामे स्टार प्लस के एकटा बहुत बढियाँ सीरियल कालीमे आशुतोष राणाजीक संग बहुत रास एपिसोडमे अभिनय करबाक अवसर भेटल तकरा बाद त’ सोनीस्टार प्लसदूरदर्शनलाइफ ओकेकलर्सजी टीवीसब टीवीएम टीवीएनडीटीवी इमेजिनन्यूज चैनल आदिकें माध्यम स’ सीरियलकें लाइन लागि गेल जाहिमे लागी तुझसे लगन”, “बड़े अच्छे लगते हैं”, “गीता”, “भाग्य विधाता”, “अफसर बिटिया” “धर्मपत्नी”, “पापड़पोल”, “आर.के. लक्ष्मण की दुनियाँ”, “सी. आई. डी.”, “सावधान इंडिया”, “क्राइम पेट्रोल”, “हिटलर दीदी”, “ये रिश्ता क्या कहलाता है”, “साथिया साथ निभाना”, “ये हैं मोहब्बतें”, “पुनर्विवाह”, “हंटेड नाईट”, “महाराणा प्रताप”, “झाँसी की रानी”, “फीयर फाइल”, “पवित्र बंधन”, “मर्यादा”, “प्रतिज्ञा”, “अर्जुन”, “सरवीन दुग्गल”, “दी बॉडी प्रोजेक्ट”, “लव दोस्ती डांस”, “प्रधानमंत्री”, “वन्दे मातरम्”, “एक बूँद इश्क”, “शपथ”, “कैसा ये रिस्क हैअजब सा इश्क है”, “पुलिस फाइल”, “शैतान”, “जुगनी चली जलंधर” आदि तकरीबन ५०टा स’ बेसी सीरियलमे काज करबाक अवसर भेटल आ वर्तमानमे बहुतमे क’ रहल छी । बड़का पर्दाकें फिल्ममे हिन्दी अंडरट्रायलमे राजपाल यादवकें संग, “सिंघम रिटर्न्समे अमोल गुप्तेकें संग भोजपुरी देवरजीमे कृष्णा अभिषेककें संग, “सैंया के साथ मड़इया में” पवन सिंहकें संग, “ससुरारी जिन्दाबाद” रविकिशनकें संग, “भोजपुरिया डॉन” मनोज तिवारीकें संग, “एलाने जंग” “नेहिया लगवली सैंया से” आदि करीब एक दर्जन स’ बेसी । मैथिलीमे नवीन मिश्राजीक फिल्म दीवाना अहाँक प्यार में” खलनायक मंटू झाक संग अभिनय करबाक अवसर सेहो भेटल अछि । विज्ञापनमे अशोक त्रेहानकें संग टी वी एस मोटरसाइकिल”, महक जैनकें संग फेयर एंड लवली”, “एक्सिस बैंक”, “साईकिल छाप अगरबत्ती” सन-सन करीब दर्जन भरि स’ बेसी ब्रांडकें विज्ञापन ।

एत्तेक रास फिल्मसीरियल आ विज्ञापन स’ जाहिर होइत अछि जे अपनें अभिनयमे खूब नीक मँजा गेल छी । एखन धरि सहयोगी कलाकारक रूपमे विभिन्न सीरियलमे देखलौं अछि मुदा नियमित रूप स’ नञि । दर्शक स’ नियमित रूपे जुड़बा लेल कोनो तेहेन सीरियल केलौं अछि त’ कहल जाउ ।

कोनो भी क्षेत्रमे संघर्ष जीवन भरि संग रहै छै खासक’ कला सनक कैरियर बला क्षेत्रमे किछु बेसिए । हँ’ एतबा त’ जरूर अछि जे जीविकोपार्जनमे कोनो दिक्कत नञि होइत अछि आ संपर्क व्यावसायिक लोक सभ स’ बेसी अछि तैं काज सेहो लगातार भेट रहल अछिमुदा एखन धरि कोनो तेहेन सीरियल नञि आएल अछि जाहिमे नियमित रूप स’ उपस्थित होइत रही मने दू-चारि वा दस टा एपिसोडमे काज भेटल फेर दोसर सीरियल के तलाश जारी । हमरा आइ धरि अहू बात लेल मोन मलीन नञि भेल जे लीड रोल नञि भेटिक’ सहयोगी कलाकारक रोल भेटैत कारण हमरा जे रोल भेटैत अछि ओकरे समर्पित भाव स’ निर्वहन करै छी आ संतुष्ट रहै छी आ लीड रोल तक पहुँचबा लेल प्रयास जारी अछि । ओना एपिक” नामक चैनल पर शीघ्र प्रसारित होमय बला सीरियल टाइम मशीनमे पुलिस इंस्पेक्टरकें रूपमे श्रृंखलाबद्ध काज करबाक अवसर भेटल अछि । किछु आर नीक-नीक चैनल दिस स’ सेहो ऑफर अछि जकर शूटिंग एखन शुरू नञि भेल अछि जकर जानकारी सेहो अबिलम्ब देब । आशा अछि जे अही बहन्ने दर्शक लोकनिक सोझा नियमित रूप स’ अबैत रहब आ हुनका लोकनिक नेहसिनेह आ दुलार पबैत रहब । 

अपनेंके त’ आब टेलीविजन स’ ’ ’ बड़का पर्दा धरिक कैमरा फेस करबाक बेस अनुभव अछि । एहि दुन्नू ठाम अपना आपकें प्रस्तुत करबामे कोन बात सभक ध्यान राख’ परैइयै ?

निश्चितरूपे ई दुन्नू जगह अपना आपमे एकटा महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत अछि मुदा दुनुमे अंतर ई छैक जे कैमराकें सोजहा अहाँ कोन रूपे प्रस्तुत होइत छी । बड़का पर्दाकें फिल्मक शूटिंग वास्ते जे कैमराकें फ्रेम होइ छै तैमे अभिनय करबा लेल शारीरिक स्वतंत्रता रहै छै जे हाथ पैर कने बेसियो फरकि गेल त’ ओकर गुंजाइश भ’ जाइ छै आ ततेबा नञि कोनो गलती भ’ गेला पर बेर-बेर री-टेक वास्ते मौका सेहो भेटै छै आ समय पर्याप्त रहै छैएकर ठीक विपरीत सीरियलकें शूटिंग वास्ते कैमराकें फ्रेम सीमित दायरा तक निर्धारित रहैत छैक तैं ओतबेमे अपना आपकें सेट क’ ’ लाइन बाइ लाइन डायलॉग आ एक्स्प्रेशन दुन्नूकें धियानमे राखि अभिनय कर’ परै छै जत’ बहुत बेर री-टेककें अवसर नञि भेटै छै कारण आधा घंटाकें सीरियलक टेलीकास्टमे साढ़े सात मिनटकें विज्ञापन आ साढ़े बाइस मिनटकें कहानी मात्र देखाओल जाइत छैक । प्रायः शूटिंग टटके रहै छै मने रनिंग बला सीरियलकें बेसी स’ बेसी एक सप्ताह पहिलुक शूटिंग आ कत्तेककें मात्र दूइए-तीन दिन पहिलेक शूटिंग रहै छै त’ स्वाभाविक छै जे अपना आपकें नीक जेंकाँ प्रस्तुत करबा लेल कम समयमे सभ बातक धियान राखब आवश्यक होइत छैक । 

अपनें १९९८-९९ स’ व्यावसायिक रूपें अभिनय क्षेत्रमे आबि चुकल छी । राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न चैनलकें माध्यम स’ प्रसारित धारावाहिकमे नियमित रूप स’ अवसर सेहो भेट रहल अछि मुदा मैथिली वा भोजपुरी फिल्ममे सक्रिय रूप स’ नञि भेटबाक की कारण ?

ई बात त’ निश्चित छै जे केयो एहेन कलाकार नञि हेताह जे अपन मातृभाषा वा क्षेत्रीय फिल्ममे काज करबाक इच्छुक नञि होइथ कारण जे अपन माटिक ऋण केयो नञि बिसरैत अछि । हमरा जे एखन तक अनुभव भेल अछि क्षेत्रीय फिल्म निर्माणमे पहिल समस्या छै भाई-भतीजावादकें आ दोसर बजटकें । भोजपुरी फिल्मकें एक स’ एक दिग्गज निर्माता सभ काज क’ रहल छथिन हुनका सभ लग मुख्य अभिनेताकें देबा लेलआइटम सॉग बाली हिरोइनकें देबाक लेल पाइ छनि मुदा सहयोगी कलाकारकें देबा लेल बजटकें अभाव भ’ जाइ छनि जखन कि सहयोगी कलाकार सेहो एकटा महत्त्वपूर्ण अंग होइत छैक । किछु निर्माता एहेन छथि जिनकर एकटा टीम तैयार छनि बस ओतबे कलाकारकें संग बेर-बेर फिल्म बना रहल छथि त’ एहेन सन परिस्थितिमे आर कलाकारकें अवसर कोना भेटतनि । हम त’ नामक उल्लेख नञि कर’ चाहै छीबहुत एहेन नामी गिरामी कलाकार सभ ओत’ पहुँचै छथि जेकि मैथिली आ भोजपुरी फिल्ममे स्थापित छथि आ हिन्दी सीरियलमे एक्को-दू टा सीन करबा लेल तैयार रहै छथि मुदा आव-भाव आ अभिनयमे परफेक्शननैं हेबाक कारणें ऑडिशन तकमे पास नञि भ’ पाबै छथि । हम किनको प्रतिभा पर प्रश्नचिन्ह नञि लगा रहल छियनि बस हम एतबे कह’ चाहै छियनि ज’ अभिनय क्षेत्रमे आब’ चाहै छी त’ किछु तैयारी आवश्यक छै आ महत्त्व ई नञि रखै छै जे रोल लीड अछि वा सपोर्टिंग अछि महत्त्व रखै छै एक्सप्रेशन आ प्रेजेंटेशन । निर्माता लोकनि स’ सेहो आग्रह जे अहाँ जखन व्यावसायिक रूपे फिल्म निर्माण क्षेत्रमे आएल छियै त’ फेर व्यावसायिक लोक सभकें संग काज करियौ आ ओकर रोजी रोटी स’ जूड़ल समस्याकें सेहो ध्यान रखैत काज करियौ । हिन्दीक पैघ-पैघ प्रोडक्शनमे काज भेटब कने मोसकिल जरूर छै मुदा काज भेट गेलाक बाद कम स’ कम रोजी रोटीक समस्या त’ नञि छै कारण ओकर पेमेन्ट ऐसोसिएशन द्वारा निर्धारित छै आ सेहो निश्चित समयांतरालमे । नीक विषय वस्तु पर आधारित कहानी वास्ते ज’ कोनो फिल्मक प्रस्ताव आओत आ दमदार रोल भेटत त’ सहर्ष काज करबा लेल तैयार छी ।

आगाँ फिल्म निर्माण वा निर्देशनमे एबाक कोनो एहेन योजना ?

फिलहाल एखन त’ नञि कारण जे शुरुआतमे पटना दूरदर्शन स’ निर्माताकें रूपमे जूड़ल रही और बड्ड बेसी खराब अनुभव रहल । घरक पैसा स’ ’ ’ अपनों जे किछु कमेने रही सभटा गमेलौं । भविष्यमे निर्माण क्षेत्रमे उतरबाक संभावना अछि । निर्देशनमे हमर कोनो खास अभिरुचि नञि अछि मुदा समय एला पर सेहो विचार कएल जेतै ।

मुंबईमे नवआगन्तुक कलाकरकें अपनें कोन रूपें सहयोग क’ सकै छियनि आ हुनका कैरियर बनेबा संबंधी की मार्गदर्शन वा सनेश देब’ चाहबनि ?

हम की मार्गदर्शन आ सनेश देबनि कारण हम त’ स्वयं संघर्षशील छी मुदा एहि स्तर पर हमरा स’ यथासंभव प्रयास भ’ सकैत अछि मदैत करै छियनि । अपना सभ दिसका बहुत लोक एलथि परिचय भेल पता चलल जे कियो खगड़िया स’ छथिकियो पटना स’ छथिकियो दरभंगा स’ छथिकियो भागलपुर स’ छथि हुनका लोकनिकें कास्टिंग डायरेक्टर सभक पता द’ ’ पठा दै छियनि जिनका अन्दर प्रतिभा छनि ओ टिकि जाइ छथि अन्यथा ट्रेन पकड़ि वापिस चलि जाइ छथि । धैर्य त’ चाहबे करी कारण बहुत जल्दी नेम फेम ओकरे लेल संभव छै जकरा अन्दर स्वयंकें प्रतिभा होइन आ कियो गॉडफादर मदैत केनहार बैसल होइन अन्यथा अपना आपकें स्थापित करबा लेल शून्य स’ आरम्भ कर’ परतनि ।

ई एकटा सुखद क्षण छल अपनें संग भेंट-घाँटकें । अपनें जे किछु समय देल हमरा वास्ते ताहि लेल धन्यवादक संग अपनेक उज्जवल भविष्यक कामना करैत छी ।

मनीष जी ! ई मात्र अहीं लेल नैं हमरो लेल सुखद क्षण अछि जे अहाँ लोकनि सन समर्पित मिथिलापूतक संग बैसि अपन अभिनय यात्राक संदर्भमे नीक-अधलाह अनुभव साझा करबाक अवसर भेटल । हृदय स’ धन्यवाद देइत छी आ अपनहुँकें उज्जवल भविष्यक कामना करैत छी ।

Thursday, June 12, 2014

रमानाथ झा (निर्माता-निर्देशक)


मधुबनी जिलान्तर्गत हरिपुर गौरीदास टोल के रहनिहार श्री रमानाथ झा छात्र जीवनमे मैथिली आ हिन्दीकें रंगमंच पर कतेको नाटकमे अपन अभिनय स' चर्चित रहला अछि। अध्ययनकें क्रममे दिल्ली आबि अर्थशास्त्र स' स्नातक केलाक उपरान्त एक्सपोर्ट मैनेजमेंट के कोर्स क' स्वतंत्र व्यवसायमे संलग्न भ' गेला मुदा अभिनय आ भाखाक प्रति प्रेम मैथिली फिल्म निर्माणमे डेग बढ़ेबा लेल बाध्य कय देलकनि।बहुचर्चित निर्माणाधीन मैथिली फिल्म "हाफ मर्डर" केर निर्माता-निर्देशक रमानाथ जीक संग दिल्लीमे भेल हमर भेंटवार्ताक किछु अंश :

अपनेंके फिल्म निर्माणक क्षेत्रमे प्रवेशकें संजोग बुझल जाए वा पूर्वे स' नियार-भास केने छलौं ?
अभिनयकें त' पहिले स' अनुभव छल आ ३-४ साल धरि पटना में रंगमंच स' जुडल सेहो छलौं मुदा ओहि समयमे बहुत ज्यादा प्लेटफार्म और कमाइकें कोनो तेहेन निश्चितता नँइ छलै । हमरा लोकनि चंदा क'' नाटक करैत छलौ और सब कलाकार सब अपने स' टिकट बेचैत छलौ ताहि ल'' भविष्यकें चिंता स्वाभाविक छल। किछु दिनक पश्चात दिल्ली एलौं,अर्थशास्त्र स' ऑनर्स केलौं आ तकरा बाद नौकरी करैत कंप्यूटर के कोर्स केलौं। भोरमे कम्प्यूटर आ सँझुका समयमे एक्सपोर्ट मैनेजमेंट के कोर्स करैत दिनमे नौकरी सेहो करैत छलौं। १३ वर्ष धरि नौकरी केलाक बाद हम अप्पन एक्सपोर्ट के व्यवसाय शुरू केलौ जखन किछु आर्थिक स्थिति ठीक भेल त' तकरा बाद फिल्म निर्माण दिस झुकाव भेल कियैक त' मोनक कोनो कोनमे अधूरा सपना घर केने छल लगैत छल जे किछु अपन समयमे नँइ क' सकलौ से आब कएल जा सकैत अछि। एहि फिल्म स' पूर्व एक-दूटा प्रोजेक्टकें प्रस्ताव आयल मुदा पसंद नँइ भेल।पिछला साल २०१२कें सितम्बर में नवीन विषय वस्तु पर आधारित ई प्रोजेक्ट भेटल और हमरा कथानक और घटनाक्रम नीक लागल और माँ जानकीकें कृपा स' आगू बढ़ैत गेल आ बहुत जल्दी दर्शक के सोझा आबय बला अछि।

अपनेक प्रदर्शित होमय बला मैथिली फिल्म "हाफ मर्डर" बेस चर्चामे अछि, निर्माता के रूपमे अपनेकें केहेन अनुभव रहल अछि ?
एकर किछु कारण एना अछि-घटना नवीन छैक , कथानक सेहो समाजिक अछि आ समाजक बीच के अछि , कलाकार सब मैथिलीभाषी छथि , शूटिंग बेसी स' बेसी हमसब मिथिला क्षेत्र में केने छी आदि।

फिल्मक कथा कोन घटना पर आधारित अछि आ मनोरंजन के दृष्टिकोणे एहिमे की सब फेंटफांट कएल गेल अछि सेसंक्षेपमे जनतब देल जाउ ?
"हाफ मर्डर" के २-३ टा बात मुख्य अछि जाहि विषयवस्तु के ल'' हमसब ई फिल्म निर्माण केलौ जेनाकि-
१. अपरिपक़्व उमेरमे प्रेम आ ओकर दुष्परिणाम
२. समाज शिक्षित रहितो मिथ्यावादिता के शिकार
३. समाज के किछु ख़राब मानसिकताक लोक द्वारा अपन स्वार्थ के लेल समाज के सूली पर चढ़ा देनाइ आदि।
सबटाकें जोरिक' एकटा नीक फिल्मकें निर्माण भेल अछि जाहि में एक्शन छै, रोमांस छैक , ट्रेजेडी छैक, सुन्नर गीत-संगीत छैक जे दर्शककें भरपूर मनोरंजन करेतनि।

फिल्मक सफलतामे परदाक सोझा आ पाँछाक एक-एक पात्रक/कलाकारक महत्त्वपूर्ण योगदान होइछ एहि सभ बातकें धेआनमे रखैत फिल्म के व्यावसायिक रूपे प्रस्तुत करबा लेल केहेन-केहेन पात्रक/कलाकारक चयन केने छी आ हुनका लोेकनि स' केहेन उम्मीद रखने छी ?
मिथिलामे कलाकारकें आ प्रतिभाक कमी नँइ छैक आ हुनका सब पर पूरा विश्वास करैत एहि फिल्मकें निर्माण भेल अछि। सबगोटे अपन-अपन क्षेत्र आ विधामे पूरा मेहनतस' काज केलनि अछि, चाहे ओ प्री-प्रोडक्शन हो वा पोस्ट प्रोडक्शन सबगोटा अपन अपन १००% देलखिन अछि। फिल्म के अभिनेता कृष्णा मिश्रा जहिना मासूम आ मेहनती छथि तहिना हीरोइन स्वेता वर्मा बहुत आकर्षक आ कमाल के अभिनेत्री छथि, खलनायक नवीन चौधरी बहुत नीक कलाकार छथि, सतेंद्र झा बहुत अनुभवी कलाकार छथि, सागर जी सीनियर कलाकार छथि, सावित्री देवी ,गगन चौधरी, शशिमोहन, मंगलानन्द, सुधा झा, फैज़ल , मनीष, किरण शाह , गणेश, निशा, सुरेश, मनोज सब मैथिल कलाकार छथि आ सब गोटे अपन-अपन जिम्मेदारीक निर्वाह नीक जेंकाँ केने छथि, फिल्म के डायरेक्टर अरमान हैदर, सह-निर्माता श्री आदित्यनाथ मिश्रा जीकें सेहो भरपूर सहयोग भेटल।

एहि फिल्ममे कोनो तेहेन प्रयोगात्मक मसल्ला देलौं अछि जेकि मैथिलीक आन-आन फिल्म स' भिन्न हो ?
देखियौ मनीष जी ! मैथिलि समाजकें संस्कार आ संस्कृतिकें ध्यानमे रखैत हमसब सिनेमामे नवीनता देबाक प्रयास केलौं अछि।फिल्मांकन आ प्रस्तुति बिलकुल न'व अछि।फिल्म के शुरुआत में नयापन अछि , कैमरामैन सब जेनाकि अब्बास जी आ डीके राजू बहुत अनुभवी छथि बहुत रास प्रयोग केलनि अछि तहिना पंकज जीकें कमालकें एडिटिंग, वी एफ एक्स , ग्राफिक्स , डी आई आदि, यसुदास जीकें बैकग्राउंड म्यूजिक आ ५:१ के मिक्सिंग सब सेहो बेजोड़ अछि आ ई समूचा प्रयोग सिनेमा देखलाक बाद पता चलत। हँ! हम एतेक विश्वास दैत छी जे दर्शककें भरपूर मनोरंजन हेतैन आ पूरा फिल्मक नीक आनंद उठेता।

"हाफ-मर्डर"मे निर्माता के अलावा अपने सेहो कोनो चरित्र निर्वहन के भार लेने छी? जँ' हँ' ' केहेन भूमिका अछि ?
जी हँ! हमर एकटा सकारात्मक भूमिका अछि जेकि समाजक हितकें धेआनमे रखैत काज करैत अछि।

कलात्मक अभिरुचि पहिने स' छल वा एहि फिल्मक आवश्यकता अनुरूप निर्वाह कएल।
जेनाकि हम पहिने कहलौँ अछि हम जखन पटनामे ग्रेजुएशन करैत रही ताहि समयमे कलाकें क्षेत्रमे बहुत नीक-नीक संस्था सभक संग काज केलौ जाहिमे "इप्टा" संगे पूरा बिहारमे घूमि-घूमि क' बहुत नुक्कड़ नाटक सब केलौ। कतेको मैथिलि संस्था सबस' जुरलौ आ हमसब अपने एकटा संस्था सेहो बनेलौ "कला समिति" केर नाम स' । हमरा लोकनिक संस्था अंतर्राष्ट्रीय मैथिली नाट्य समारोह में हैट्रिक विजेता रहल मने १२ में स' ७ टा पुरस्कार हमर सभक संस्था के भेटल छल जखन कि नीक-नीक नाट्य संस्था सब स' प्रतिश्पर्धा छल जेनाकि "अरिपन" , "भंगिमा" नेपाल के किछु नाट्य संस्था आ करीब ८-१० टा आर संस्था छल। फिल्म हाफ मर्डर हम मात्र निर्माता रहए चाहैत छलौं कियैक त' हमर एक छोट-छिन व्यवसाय अछि आ बेसी व्यस्तता सेहो एक कारण छल। फिल्मक शूटिंगकें दौरान जखन हम कोनो-कोनो दृश्य स' सम्बन्धित राय -विचार आदि दियनि त' टीमक सदस्य लोकनि प्रभावित होमय लगला आ हमर अभिनय सम्बन्धी अनुभव स' ज्ञात होइत सब गोटे कहला जे अहूँ एकटा किरदार बनू, जखन एकटा दृश्य शूट केलौं त' सबके बहुत नीक लगलनि आ बहुत तारीफ केलनि आ फेर हमरा ओहि चरित्र निर्वहन वास्ते स्वीकृति देमय परल आ स्वयं बहुत ख़ुशी भेल जे सबटा पुरनका गप फेर स' 'व भ' गेल। हम अपना दिसस' पूरा कोशिश केलौ अछि नीक अभिनय करबाक आशा अछि जे दर्शक के पसीन परतनि।

आधुनिक जुगक दर्शक लोकनिक सबस' बेसी झुकाव संगीत दिस होइ छनि मने संगीत हिट त' फेर फिल्मक कथा जँ' कनिको जानदार अछि त' बुझू पूरा फिल्म हिट । संगीत पक्षकें मजगूत बनेबा लेल की नवप्रयोग केलौं अछि ?
हमर व्यक्तिगत अनुभव अछि जे गिनल चुनल मैथिली सिनेमा के छोरि बेसी सिनेमा में संगीत पर ध्यान नँइ देल जाइत अछि एकरा पाँछाँ की कारण छै से त' नँइ कहि सकैत छी मुदा जहाँ तक "हाफ मर्डर"के बात अछि हम अपनहु संगीतक प्रेमी छी और पूरा प्रयास केलहुँ अछि जे श्रोता सबकें गीत-संगीत पसीन परनि जाहि के लेल सबटा ट्रैक लाइव बजबेने छी और वाद्य-यंत्र बजब' बला कलाकार सब सेहो बेस अनुभवी छथि, गीत वास्ते प्रसिद्ध गीतकार सब जेनाकि डॉ चंद्रमणि जी , श्री सरस जी सन-सन वरिष्ठ गीतकार लोकनि सब गीत देलनि अछि। गायनमे अपन सुन्दर स्वर देलनि अछि श्री रविन्द्र जैन, श्री उदित नारायण झा, सुश्री कविता कृष्णामूर्ति , मोहम्द अज़ीज़ , श्री कुमार शानू , श्री शान आ मैथिली के जानल मानल प्रसिद्ध कलाकार जेनाकि- श्री ज्ञानेश्वर दुबे, श्री सुनील पवन, श्री विकास झा , सुश्री राधा पाण्डेय, श्री शैलेश आदि। नृत्य निर्देशन ऋतुराज जी के छनि।

मैथिली फिल्म उद्योगमे समर्पित बहुतो एहेन प्रतिभावान कलाकार छथि जे अपन प्रतिभाकें बल पर मिथिला-मैथिली के उत्तरोत्तर विकासमे सहायक भेलाह अछि, हुनक प्राथमिकता नँइ देइत अमैथिल कलाकारकेँ प्राथमिकताएक प्रश्नचिन्ह लगबैछ या त' हुनक प्रतिभामे कमी छनि वा "बाड़िक पटुआ तीत" कहावतकें चरितार्थ करैछ । अहाँ एक सक्षम निर्माता केर रूपमे अपन पक्ष राखल जाउ ।
अहाँक एहि बात स' हम सहमत नँइ छी आ जिनकर किनको ई आरोप छनि बिलकुल गलत छनि।देखियौ! मैथिलि फिल्म उद्योगकें बढ़ाब' के लेल हम ९०% शूटिंग मिथिलांचल में केलौ अछि जेनाकि- दरभंगा, सीतामढ़ी, सकरी, जयनगर इत्यादि जगह सभ पर।सिनेमामे जतेक कलाकार छथि सबगोटे मैथिल छथि, हँ' किछु टेक्नीशियन बाहरी छलाह जेनाकि- निर्देशक, कैमरामैन आदि जकर अपन मिथिलांचल में अभाव अछि। दोसर बात जहाँ तक संगीतकें छै हमर व्यक्तिगत अनुभव आ सोच अछि जे संगीत कोनो भी सिनेमा के रीढ़ होइत छैक और पुरान अनुभव के आधार पर देखल जाय त' २-३ टा सिनेमा के छोरि दियौ त' बेसी सिनेमा के गीत सब लोकप्रिय नँइ भेल अछि,आब एकर कारण की छल से त' श्रोता सब कहि सकैत छथि। आजुक तिथिमे सिनेमा बहुत रास बनल आ कतेको निर्माणाधीन अछि। श्रोता सबके मनोबल जे टूटल छनि आ दर्शक सबके जे मैथिली सिनेमा स' बहुत ज्यादा लगाव नहीं छनि इहो एकटा कारण छल हमरा प्रसिद्ध आ राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गायक सबके चयन करय पड़ल आ ततेबा नँइ संगहि किछु मैथिल गायक सबकें सेहो मौका देल गेलनि अछि तँए ई मात्र आरोप अछि। फिल्मक संगीत निर्देशक सेहो मैथिले छथि।एतेक बात हम जरूर कहब जे संगीत के छेत्र में अपना सबके मेहनत करय पड़त किएक त' संगीत एकटा शिक्षा और साधना के विषय छैक और एहिके लेल कठिन पढाइ और तपस्या के जरुरत छैक ठीक तहिना जेनाकि हम सब विद्या उपार्जन के लेल विद्यालय में जाइत छी और जे जेहेन मेहनति आ लगन स' पढाइकरैत छथि ओ ओतेक आगू बढ़ैत छथि तहिना संगीत के ज्ञान के लेल जरुरी शिक्षा, लगन और मेहनत के आवश्यकता होइत छैक संगहि कलाकार सबके सेहो अभिनय केर प्रशिक्षण आ पढाइ के जरुरत छनि तहिना निर्देशन आदि सब छेत्रमे अध्ययन आ प्रशिक्षण केर आवश्यकता अछि।

मैथिली फिल्मक संग एक बड्ड पैघ बिडंबना रहल अछि जे शुरुआतीमे निर्माता आ निर्देशक के सम्बन्ध नीक रहैत छनि तत्पश्चात फ़िल्मक अंतिम चरण पहुँचैत पहुँचैत आपसी मतभेद वा सामंजस नँइ बनबाक कारणे निर्देशकक पूर्व घोषित नाम पर निर्माता के नाम सोझा अबैत अछि। अपने अपन अनुभव साझा कएल जाउ आ हाफ मर्डर के निर्देशकक रूप में हमरा लोकनिक सोझा के प्रस्तुत भ' रहल छथि ?
बहुत निक प्रश्न केलौं अछि। हमर व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर हम कहब जे निर्माता और निर्देशक कुनु सिनेमा के पेरेंट्स होइत छथिन आ सिनेमा हुनकर बच्चा। निर्माता फाइनेंस के काज करैत छथि आ निर्देशक ओहि सँ' सिनेमा के पाइल-पोइस क' तैयार करैत छथि। मैथिली फिल्म जगत एखन धरि स्थापित नँइ भेल अछि जाहि कारण स' प्रायः निर्माता और निर्देशक दुनू न'व रहैत छथि आ दुनूकें बीचक संबंध सेहो न'व रहैत छनि। किछु लोक जे दुनू पक्ष के जनैत छथि ओ सब जाने-अनजानेमे या त' ई सोइच जे चलू कहुना एकटा फिल्म त' बनत या फेर अपन निजी स्वार्थके कारणे बहुत किछ वास्तविकता के नुका दैत छथि आ निर्माताके बहुत रास सपना देखा क' तैयार क' लै छथि।जेनाकि बजट कम बता क' वा कमाइ ज्यादा बता क' इत्यादि ढ़ंग स'

दोसर बात निर्माताके कतेक अनुभव छनि वा की सब काज केलैन अछि तकरो बारे में गलत सूचना दैके प्रयास करैत छथि।निर्माता विश्वासके आधार पर काज बढ़बै छथि आ रुपैया खर्च करैत छथि, टीम बनैत अछि आ काज शुरू होइत अछि मने शूटिंग भ' रहल अछि, चूँकि तकनीकी रूपस' निर्माताकें ततेक अनुभव नँइ रहैत छनि हुनका बस ई पता रहैत छनि जे लोकेशन पर शूटिंग भ' रहल अछि। की भ' रहल अछि, कथानक के हिसाब स' ' रहल अछि की नँइ, सिनेमामे एहि सीन के उपयोगिता छै वा नँइ इत्यादि सब ज्ञात नँइ रहैत छनि, मुदा आब निर्माता लोकनि सेहो शूटिंग देखैत छथि। जतेक बजट पर बात भेल रहैत छनि ओतेक पाई खर्च भेलाके बाद पता चलैत छनि जे सिनेमा त' एखन आधा तैयार भेल अछि आ आधा शूटिंग बाँकी अछि तखन निर्माता घबरा क' वस्तुस्थिति के पता करैत छथि आ सच्चाइ ज्ञात भेलाक बाद निर्माता आ निर्देशक के बीच मतान्तर हएब स्वाभाविक अछि। वास्तव में कुनु सिनेमा जखन एडिटिंग पर जाइत छै तखन पता चलैत छै जे सिनेमा की बनबैत छलौं आ की बनल भेटल। मैथिलि सिनेजगतमे किछु फिल्म के छोरि अधिकांशमे इएह होइत रहल अछि जे कथानक किछु और रहैत अछि आ शूटिंग किछु आर भेल। एहि सभस' अनुभवमे कमीके साफ़ पता चलैत अछि। हम इहो कहब जे शूटिंग काल में एकटा एडिटर के जरूर रखबाक चाही जाहि स' ' रहल शूटिंग के नतीजा के अनुमान तत्क्षण लगाओल जा सकैत अछि ।

जखन निर्माता के निर्देशक के काज स' सन्तुष्टि नँइ होइत छनि चाहे ओ अनुभव के कमी स' हो वा बजट स' बेसी खर्च भेलाक कारणे हो या फेर अनाप सनाप सीन के शूटिंग स' हो आदि कतेको तरहक कारणे निर्माता निर्देशक के बीच मनमुटाव भ' जाइत छनि। जखन निर्माता पाइ लगबैत छथि त' हुनकर जिम्मेदारी होइत छनि जे फिल्म नीक ढंग स' बनि सिनेमा हॉल तक पहुँच जाइ चाहे ओहि के लेल जतेक फेर बदल करय पड़ै। दोसर दिस निर्देशक सिनेमा के छोइर अपन निजी स्वार्थ दिस अग्रसर भ' जाइत छथि जेनाकि सिनेमा जेहने बनल से बनल , नँइ बनल त' नँइ बनल, बक्सा में बंद करय के अछि त' ' दियौ आदि मानसिकताक संग निर्देशकके ओहि सबस' माने मतलब खत्म भ' जाइत छनि बस अपन चिंता रहैत छनि जे हमर नाम रहए आ हमरा आरो पाई भेटै। कतेक बेर त' निर्माता लोकनि ब्लैकमेलिंग सेहो होइत छथि मुदा जे जेहेन अनुभव के छथि ओ अपना अपना हिसाब स' मामलाके हैंडल करैत छथि। इएह सब किछु कारण अछि जे अंतमे बाध्यतावश निर्माता के निर्देशक में अपन नाम देबै पड़ैत छनि किएक त' जखन कुनु निर्देशक फिल्म के आधा रस्ता पर छोड़ि दैत छथिन तखन निर्माता ओकर ड्राइवर बनि सिनेमा हाल तक पहुँचाबै छथि । तइयो निर्माता लोकनि निर्देशक के पद के सम्मान करैत छथि आ ओहनो स्थितिमे कुनु एसोसिएट निर्देशक के नाम प्रत्यक्ष निर्देशकके रूपमे नँइ दैत छथि जखन कि सच्चाइ ई रहैत छै की समस्त एसोसिएट सब मिलके निर्माता के सहयोग करैत छथि ।

इहो बात बिल्कुल सत्य छै की अगर कुनु प्रोजेक्ट में अगर किछु व्यक्ति ख़राब आ अनुभवहीन रहैत छथि त' संगहि किछु नीक आ अनुभवी व्यक्ति सेहो रहैत छथि आ तखने कुनु प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक संपन्न होइत अछि मुदा जँ' ईमानदारी स' देखल जाय त' जे एक-दूटा एसोसिएट डायरेक्टर होइत छथि निर्देशकक पदके असली हक़दार ओएह होइत छथि। हमर फिल्ममे असली निर्देशक कहल जाय त' ओ छथि श्री अरमान हैदर काज़मी जेकि शुरु स' एखन धरि जी जान स' एहि सिनेमाके नीक स' नीक बनेबा लेल दिन-राइत एक केने छथि आ बहुत बेसी मेहनैत क' रहल छथि मुदा ओ तकनीकी निर्देशक छथि आ निर्देशक पद के सम्मान करैत हम अपन नाम द' रहल छी निर्देशक के लेल।

बहुतो एहेन उद्योगपति छथि जिनका लग ढ़ौआ पुष्ट छनि, मैथिली भाखाक प्रति प्रेम सेहो छनिहुनका लोकनिकेँ मैथिली फिल्म उद्योगक बढ़ैत डेगमे सहायक हेबा लेल आ निधोख भ' ' एहिमे आगाँ एबा लेल की आवाहन करबैन ?
हम सब गोटे स' आग्रह करबनि जे एखन मैथिलि फिल्म के आगू बढ़ाबय के लेल सुनहरा अवसर अछि तँए व्यावसायिक आ अनुभवी टीमके संग नीक विषयवस्तु पर जँ' सिनेमा बनाओल जाय त' मैथिली फिल्म उद्योग के सुन्दर दिशा भेटबाक बड्ड बेसी संभावना छैक।

फिल्मक निर्माणमे अत्यधिक व्यस्तता रहितो हमरा संग अपन व्यक्तिगत जीवन आ फ़िल्मक सन्दर्भमे जे किछु गूढ़ गप्प-सप्प साझा कएल ताहि लेल आभार आ आगामी फ़िल्म "हाफ मर्डर" के सफलता हेतु अपने आ अपनेक समस्त टीमकें हमर अग्रिम शुभकामना !
मनीष जी अपनहुकें बहुत बहुत धन्यवाद ! आशा करै छी जे मैथिली दर्शक फ़िल्मक प्रति जे सकारात्मक उम्मीद रखने छथि तकरा पूर करबाक प्रयास हमर पूरा टीम केलनि अछि।