भाषा सेवा लेल आंशिक योगदान, अपने लोकनिक अवलोकनार्थ। क्लिक कय पढ़ल/देखल/सुनल जा सकैत अछि :

रिपोर्ट (63) अखबारक पन्ना (33) ऑडियो/वीडियो (21) मैथिली नाटक (19) कथा मैथिली (18) मैलोरंग (16) मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (14) दैनिक जागरण (12) मैसाम (10) मैथिली फिल्म (8) साक्षात्कार (8) मैथिली-भोजपुरी अकादमी (6) आलेख (5) ऑफिसक अवसर विशेष पर (3) झलक मिथिला (3) नवभारत टाइम्स (3) पाठकीय प्रतिक्रिया (3) बारहमासा (3) मैथिली पोथी (3) अखिल भारतीय मिथिला संघ (2) अछिञ्जल (2) अपराजिता (2) कथा मंचन (2) दीपक फाउंडेशन (2) मिथिला स्टूडेंट यूनियन (2) मिथिलांगन (2) मैथिली पत्र-पत्रिका (2) मैथिली लघु फिल्म (2) यात्रा संस्मरण (2) विश्व मैथिल संघ (2) सम्मानक सम्मानमे (2) हिन्दुस्तान टाइम्स (2) अस्मिता आर्ट्स (1) एकेडमी ऑफ़ लिटरेचर आर्ट एंड कल्चर (1) डी डी बिहार (1) देसिल बयना हैदराबाद (1) धूमकेतु आर्ट्स (1) भारती मंडन (1) मिथिला मिरर (1) मिनाप (1) मैथिली एलबम (1) मैथिली कथा (1) मैथिली जिन्दाबाद (1) मैथिली धारावाहिक (1) मैथिली पत्रकार (1) मैथिली लोकमंच (1) मैथिली संबोधन (1) विदेह (1) साझी धुआँ (1) साहित्य अकादेमी (1) साहित्यिक चौपाड़ि (1) स्वरचित (1) हिन्दी नाटक (1)

मुख्य पृष्ठ

Showing posts with label मैथिली नाटक. Show all posts
Showing posts with label मैथिली नाटक. Show all posts

Thursday, September 29, 2022

बोस (सुभाष चन्द्र बोस), मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

रंगसंस्था ‘बारहमासा मैथिली नाटकक संग-संग हिन्दी नाटकक क्षेत्रमे सेहो समय-समय पर उपस्थिति दर्ज करबैत रहल अछि । गोल मार्केट, दिल्लीक नजदीक भाई वीर सिंह मार्ग स्थित ‘मुक्तधारा सभागार मे विश्वम्भर उपाध्याय लिखित नाटक ‘बोस (सुभाष चन्द्र बोस)’क मंचन बारहमासा द्वारा कएल गेल । महात्मा गाँधी सँ मत भिन्नताक पश्चात कांग्रेस अध्यक्ष पदक त्याग करैत, राजसी ठाठ मे पलल-बढ़ल सुभाष चन्द्र बोस जमीनी स्तर सँ संघर्ष करैत ब्रिटिश साम्राज्य सँ स्वतंत्रता प्राप्ति लेल सैन्य विद्रोहक जे रास्ता चुनलनि ताहिमे हुनक तीक्ष्ण बुद्धि, चातुर्य कौशल आ सांगठनिक क्षमताक जे किछु प्रमाण भेटैत अछि से देशक युवा, आम नागरिक आ राजनीतिक लोकनिक वास्ते अनुकरणीय आ बेस प्रेरक अछि । वीर सेनानी सुभाष चन्द्र बोस वास्तवमे नेताजी रहथि से उक्त नाटकक माध्यम सँ हुनक कृत्तित्व आ विराट व्यक्तित्त्वकें दर्शाओल गेल अछि ।

दिल्लीमे नाटकक मंचन निरन्तर होइत रहल अछि जाहिमे अधिकाधिक चयनक विषय सामाजिक असमानता, शोषण, गरीबी आदि रहैत अछि मुदा भारतीय स्वतंत्रता मे अपन सर्वस्व न्यौछावर केनिहार एहेन वीर सेनानी पर केन्द्रित ई नाटक वास्तवमे अपन राष्ट्रनायकक त्याग आ समर्पणक प्रति गौरवबोध करबैत अछि ।

मंच पर सुभाष चन्द्र बोसक भूमिका मे नवोदित मुदा अभिनयक क्षेत्रमे कम्मे समयमे परिपक्व होइत अभिनेता मनु कुमार झाक उपस्थिति दर्शक लोकनिक ध्यानाकर्षण करबामे बेस सफल रहल । सुप्रिया सत्यम (कैप्टन लक्ष्मी), नितीश कुमार झा (हिटलर), मनीषा मिश्रा (सूत्रधार आ लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), मायानन्द झा (उत्तमचंद आ सेठ किरोड़ीमल), अमन गुप्ता (मिर्जा आ शाहनिवाज), रोहित कुमार (महात्मा गाँधी आ कैप्टन मोहन सिंह), टेन्जीन बोध (जवाहर लाल नेहरु),निर्भय कर्त्तव्य (भगतराम आ ढिल्लन), रौशन सिंह (कर्नल हंट), राजेश कुमार बेनी (अफ़गान सिपाही), शुभम (सहगल), पूनम सिंह (लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), वन्दना (लक्ष्मी रेजिमेंटक सिपाही), रवित चावला (बालवीर) एवं सैनिक समूहमे तरुण झा, लालू कुमार, ऋत्विक राज, करन चौहान आदि लोकनिक उपस्थिति छल ।

मंचक पाँछा दीपक ठाकुर (संगीत), राहुल चौहान (प्रकाश), डालचन्द (वस्त्र विन्यास), पूनम सिंह आ मनीषा मिश्रा (वस्त्र सज्जा), नितीश कुमार एवं रोहित कुमार (रूप सज्जा), तरुण झा (प्रस्तुति प्रबंधन), राजेश बेनी (मंच प्रबंधन), अमन गुप्ता (पार्श्व ध्वनि) आ मनु कुमार झा (सह-निर्देशन) केर सहयोग सँ सफलतापूर्वक संपन्न एहि नाटकक निर्देशन केलनि मैथिली एवं हिन्दीक वरिष्ठ रंगकर्मी मुकेश झा ।

Saturday, July 30, 2022

रक्त-सम्बन्ध, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

संगीत नाटक अकादमीक सहयोग सँ अस्मिता आर्ट एंड कल्चरल फाउंडेशन द्वारा भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, दिल्लीक नरेज्यान स्टूडियो मे मैथिली नाटक 'रक्त सम्बन्ध'क मंचन कएल गेल।

श्याम दरिहरे लिखित 'रक्त सम्बन्ध' एक युवा आ युवतीक प्रेम सम्बन्ध पर आधारित अछि जे प्रेम एकतरफा सँ दूतरफा सहमति बनबैत एक-दोसराकेँ मिलबैत अछि। किछु समयक पछाति ओएह प्रेमी युवकक अभिन्न मित्र जकर नजरि युवती पर रहैक, युवककेँ दारूक लत लगा छल सँ ओहि युवतीकेँ अपना चंगुल मे फँसा लैत अछि। बहुतो केस, मोकदमा, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक व्यवस्था संग भावनात्मक सन्दर्भ आदिकेँ एक संग राखि एकर निराकरण पर केंद्रित अछि।

'रक्त सम्बन्ध'क परिकल्पना आ निर्देशन छल संतोष कुमारक जाहिमे मंच पर दीपक ठाकुर, ज्योति झा, संतोष कुमार, राजीव रंजन आदिक अभिनयक संग-संग पार्श्व सहयोग मे मुकेश झा, राजीव मिश्र, अमरजी राय, तरुण कुमार, अस्मिता कुमारी, राजेश बेनी, मायानन्द झा, नितीश कुमार आदि कलाकार लोकनिक सहयोग सँ नाटकक सफल मंचन भेल।
 

Saturday, July 23, 2022

मिथिला रंग महोत्सव, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

मैलोरंग द्वारा आयोजित १६म मिथिला रंग महोत्सव जेकि दिनांक १३ जुलाइ,२०२२ (बुधदिन) क' राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक सम्मुख सभागार मे सुप्रसिद्ध नाटककार स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर केँ समर्पित छल। एहि अवसर पर हुनक कृतित्त्व एवं व्यक्तित्व केन्द्रित रचनावली (मैलोरंग प्रकाशन सँ प्रकाशित पोथी) केर लोकार्पण आ तकराबाद हिनक लिखित दू गोट एकांकी ' चन्दा' 'ग्रीनरूम' क्रमशः मैथिली आ हिन्दी मे मंचित भेल।

लोकार्पणक अवसर पर अतिथि मंत्रेश्वर झा (सेवानिवृत्त आईएएस), सी.एम झा (चान्सलर, सीएमजे यूनिवर्सिटी), शेफालिका वर्मा (साहित्यकार), देवशंकर नवीन (साहित्यकार), कुसुम ठाकुर (धर्मपत्नी स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर), ज्वाला प्रसाद (रजिस्ट्रार, एनएसडी) एवं मुकुन्द ठाकुर (आईएएस अधिकारी) आदि लोकनि मंचस्थ रहथि। पुस्तक लोकार्पण सत्रक संचालन केलनि अजित आजाद आ शेष सत्रक संचालन प्रकाश झा।

मैथिली मे मंचित 'चन्दा' जाहिमे सामाजिक वा धार्मिक अनुष्ठानक नाम पर चन्दा उगाहीक विभिन्न तरीका केँ दर्शाओल गेल अछि एतावता जे पोलहा क', प्रसंशा क' ' आ अन्त मे बलपूर्वक देबा लेब बाध्य करबा सन परिस्थिति केँ सेहो देखाओल गेल अछि। हास्य-व्यंग्य-विनोद मिश्रित एहि नाटकक विषय खाहे तत्कालीन समयक परिवेशक बोध करबैत हो मुदा वर्तमानक परिस्थिति मे सेहो जहिनाक तहिना इंगित करैत अछि। मंच पर राजीव रंजन, ज्योति झा, साक्षी, सुरभि, कंचन, स्नेहा, हर्ष राज, ऋत्विक राज, आयुष्मान, अनिमेष, हर्ष मनु, आर्यन पंत, नीरव निशांत, अभिनाश, प्रदीप मंडेल, हर्ष सागर आदिक उपस्थिति आ अभिनय बेस मनोरंजक रहल।

हिन्दी मे मंचित नाटक 'ग्रीन रूम' जेकि कोनो नाटकक पूर्वाभ्यास सँ ल' ' मंचित हेबा धरिक विभिन्न घटनाक्रम केँ बेस रोचक ढ़ंग सँ प्रस्तुत कएल गेल अछि। एक नाटकक निर्देशक केँ अपना-अपना धुन मे मस्त कलाकार लोकनिक संग सामंजस बैसाएब आ इच्छाक प्रतिकूल पात्रक चयन करबा सन परिस्थिति मे नाटकक मंचन करब कतेक चुनौतीक काज थिक तकरा हास्य रूपे प्रस्तुत करबामे अनिमेष, सुरभि, साक्षी, अभिनाश, प्रदीप, नीरव, दिव्यांशी, अभय, संस्कृति, भुवनेश, हर्ष, आर्यन आदि कलाकारक तालमेल उपस्थित प्रेक्षककेँ आदि सँ अन्त धरि गुदगुदबै मे सफल रहल।

मंचक पार्श्व मे अनिल मिश्रा (संगीत), दीपक यात्री (फोटोग्राफी) पिंटू झा प्रेम, हर्ष राज, साक्षी, सुरभि, धर्मवीर, कनुप्रिया आ मार्गदर्शकक रूप मे प्रकाश झा, राजीव रंजन, अंजू अहलूवालिया, रमण कुमार, ज्योति झा आदि। 

Monday, July 11, 2022

एक टुकड़ा पाप, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राग-रंग)

रंगकर्मक प्रसिद्ध संस्था 'बारहमासा' द्वारा मैथिली नाटक 'एक टुकड़ा' पाप केर मंचन नरेज्यान स्टूडियो, भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, पूर्वी दिल्ली मे भेल।

मैथिलीक सुप्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक 'एक टुकड़ा पाप' बाल मनोविज्ञान पर आधारित अछि। प्रौढ़ होइत बच्चाक संवेदनशीलता , स्वाधीनता , चंचलता आ निःश्च्छलता पर अभिभावक द्वारा जे अनावश्यक दबाव बनाओल जाइत अछि , तथाकथित अनुशासनक नाम पर जे भयाक्रांत माहौल मे राखल जाइत अछि तकरहि दुष्परिणाम केँ नाटकक माध्यम सँ देखाओल गेल अछि। समाजक प्रबुद्ध लोक सेहो सीमित अधिकारक संग अभिभावक केँ बुझेबाक प्रयास करैत छथि, मुदा स्वभाववश कठोर एहेन अभिभावकक मानसिक सोच मे कोनो खास परिवर्तन नहि होइत छैक। परिणाम ई होइत अछि जे माता-पिता द्वारा प्रताड़ित हेबाक डर सँ चरेबा लेल ल' गेल पारी केँ रेल दुर्घटना सँ बँचबैत स्वयं दुर्घटनाक शिकार भ' जाइछ आ अल्प वयसहि मे काल कवलित भ' जाइछ।

समाजक पढल-लिखल लोक जिनका संग ओ अपन हरेक सुख-दुख केँ साझा करैत छल अपन वेदना व्यक्त करैत रहैत छल। माता-पिताक स्वभाव सँ तंग आबि हुनका लोकनिक आँखि सँ दूर कतौ जा श्रमक बले आत्मनिर्भर बनि अपन मनोनुकूल जीवन जीबय चाहैत छल जाहि मे हुनक सहयोग चाही छल, मुदा एहि निर्णयक सम्बन्ध मे हठात स्वीकृति देबा मे मौन रहलाह। एहि अनापेक्षित दुर्घटनाक बाद हुनका सँ अनजाने मे भेल मौन प्रतिक्रिया एक पाप समान छल जकर प्रायश्चित करबाक लेल आब किछु नहि बाँचल छल आ यैह 'एक टुकड़ा पाप' छल जे हुनका लेल आजीवन कचोटक विषय बनि गेल।

बारहमासा द्वारा मंचित एहि नाटकमे पात्रक संख्या सीमित अछि (एकटा स्त्री पात्र आ चारिटा पुरुष पात्र) मुदा से प्रत्येक पात्र अपनाआपमे महत्वपूर्ण अछि।

मैथिली रंगमंच मे नियमित उपस्थिति देनिहार संतोष कुमार एक एहेन अनुभवी अभिनेता छथि जिनकर संवाद प्रस्तुति, भाव-भंगिमा आ प्रतिक्रियाक समय देखि दर्शक चकित रहि जाइ छथि। हिनक अभिनयक सीमा अवधि न्यून हो वा अधिक हो, दर्शककेँ अपना पात्र संगे आदि सँ अन्त धरि बान्हि रखबामे सक्षम अभिनेता छथि। नाटक मे पिताक भूमिका मे उत्तम प्रस्तुति देलनि अछि। मनीषा मिश्र जे एकमात्र महिला पात्र छथि मायक भूमिका मे उत्कृष्ट काज केलनि अछि। मैथिली रंगमंच मे एहि नवोदित अभिनेत्रीक प्रवेश कम समय मे दर्शकक ध्यान आकृष्ट करबा मे बेस सफल रहल अछि। आउ गप्प करी हरफनमौला रंगकर्मी मायानंद झाक जे कोनो पात्रकेँ मंच पर उतारबा सँ पहिने स्वयं केँ ओहि रूप मे तैयार करैत छथि आ तैं उत्कृष्ट प्रस्तुति देबा मे सक्षम देखल जाइ छथि। प्रबुद्ध आ जागरूक व्यक्तिक भूमिका मे आन नाटक जेकाँ एहि बेर सेहो अपन अभिनय सँ दर्शक केँ प्रभावित कयलनि अछि।

नाटकक केन्द्रीय पात्रक भूमिका केँ मनु कुमार झा पूर्ण इमानदारी सँ निमाहलनि अछि। मनुक अभिनयक विशेषता ई छल जे मंच पर उत्तम प्रस्तुति देबा लेल ओहेन सभटा अनुशासनक पालन करैत देखल गेलाह जेकि एकटा नवोदित कलाकार वास्ते सभसँ आवश्यक तत्व अछि । एहि नाटकमे मनु झाक उपस्थिति अनेक दृष्टिएँ एकटा आवश्यक अभिनेताक रूप मे देखल गेल। मनु झाक रंगमंचक प्रति अनुराग आ लगन देखि ई आश्वस्त भेल जा सकैए जे भविष्यक एक नीक अभिनेता छथि। अभिषेक आयुष जे कि सहायक पात्र एक सेवकक रूप मे देखल गेलाह नीक अभिनय केलनि तथापि एक अभिनेताक रूप मे आर बेसी संभावना छनि जकरा दर्शकक सोझा राखब आवश्यक बुझना जाइछ।

नाटकक बीचमे प्रयोग सांकेतिक अभिनय मुकेश झाक प्रयोगधर्मी निर्देशन पक्षकेँ उजागर करैत अछि। निश्चित रूपसँ नाटकक सफल सम्पादनक श्रेय एहि नाटकक निर्देशक मुकेश झाक संग बरहमासाक सगर टीमकेँ जाइत अछि।

मंचक पाछाँक सहयोगी दीपक ठाकुर (गीत), प्रसून नारायण श्रीवास्तव (संगीत), मुकेश झा (प्रकाश), पुष्पा झा (मेकअप), पूनम सिंह (वेशभूषा), तरुण कुमार (मंच व्यवस्था), राजेश कुमार बेनी (प्रस्तुति नियंत्रण), दीपक यात्री (छायाचित्र) आदि लोकनिक समवेत प्रयासक परिणाम थिक नाटकक सफल मंचन।

प्रायः 'बकलेल' 'लोंगिया मिरचाइ' नाटक सँ जन-जनकेँ लोकप्रिय नाटककार लल्लन प्रसाद ठाकुर पर केन्द्रित आ समर्पित १६म मिथिला रंग महोत्सवक आयोजन कय मैलोरंग पुनः एक बेर साबित केलक अछि जे मैथिली रंगमंच मे योगदान देनिहार प्रत्येक कलाकार ओ नाटककारक प्रति ई समाज कृतज्ञ अछि आ रहत। 

Sunday, May 22, 2022

अपराजिता द्वारा आयोजित तीनदिवसीय नाट्य महोत्सव 'रंगनायिका'

पछिला दू दशक सँ दिल्ली रंगमंचक अधिकाधिक आयोजन मे रंग प्रशंसकक रूप मे सक्रियता बनल अछि आ तहिना रंगकर्मक क्षेत्र मे मैथिलीक बहुतो रास इतिहास सेहो बनैत देखल अछि आ ताहि इतिहासक उदाहरण केर रूप मे भारत रंग महोत्सव सन महत्त्वपूर्ण आयोजन मे भारतक अन्यान्य भाषाक समकक्ष मैथिली कें यथोचित स्थान भेटब आ देखब प्रायः प्रत्येक रंगप्रेमी हेतु गौरवक विषय रहल अछि.

दिल्लीक रंगमंच सँ मात्र अभिनेते टा नहि बुझू जे दर्शक केँ सेहो ततबे अनुशासन सिखबाक अवसर भेटलनि अछि आ इएह कारण अछि कार्यक्रम मे बरू कनेक बिलम्बे सही दर्शक अपन स्थान छेकि प्रारम्भ हेबाक उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करैत देखल जाइत छथि. ई कहब अतिशयोक्ति नहि हएत जे दिल्ली वा लगीचक क्षेत्र मे मैथिली साहित्यक जतेक पाठक तैयार नहि भ' सकल ताहि सँ कएक गुना बेसी रंगप्रेक्षक तैयार भेल आ से प्रेक्षक तैयार करबा मे नाट्यकर्मी आ नाट्यदलक विभिन्न संस्थाक समेकित प्रयास सँ सम्भव भेल अछि. कोनो सभागार मे बैसि नाटकक आनंद कोना लेल जाय, कतेक धैर्यसँ आ शान्तिपूर्वक ढ़ंगे लेल जाय ई ओही प्रयासक परिणाम थिक. किछु दर्शकक एहेन वर्ग तैयार छथि जे दिल्लीक चाहे जाहि कोनो कोन मे आयोजन हो हुनक सहभागिता सुनिश्चित अछि आ इएह नियमित दर्शक मैथिली रंगमंचक मूल सफलता आ उपलब्धि थिक.

अस्तु ! आब अबै छी अल्प समय मे शीघ्रता सँ उदित भेल संस्था 'अपराजिता' जकर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय लोक नाट्य महोत्सव 'रंगनायिका' सन परिकल्पनाकें सेहो ऐतिहासिक रूप मे देखल जा सकैत अछि. प्रायः दू दिन मे सात गोट नाटकक मंचन आ सातो नाटक मे एकल अभिनय सेहो मात्र और मात्र स्त्री पात्र द्वारा प्रस्तुत करब रंगकर्मक क्षेत्र मे मंच पर स्त्रीक नगण्यता सन मिथककें नकारबाक उदाहरण थिक. हालांकि जेना अंतर्राष्ट्रीय लोक नाट्य उत्सवक परिकल्पना छल एहेन मे कम सँ कम नेपालीय मिथिला दिसि सँ एको गोट संस्था वा कलाकारक सहभागिता अपेक्षित छल तथापि दिल्ली, पटना, मधुबनी, पूर्णियाँ, दरभंगा आ मुम्बइ सँ आएल समूह आ कलाकारक सहभागिता सँ आयोजन मे प्रायः भिन्न-भिन्न विषयक प्रस्तुति एक तरहे आयोजनकें पूर्णता देलक .

उक्त आयोजनक तीनदिवसीय महोत्सव 'रंगनायिका' क्रमशः १४,१५ आ १६ मइ २०२२ क' राष्ट्रीय राजधानी दिल्लीक ‘मुक्तधारा प्रेक्षागृह, गोल मार्केट’ मे अपराजिता समूहक संस्थापिका सोनी नीलू झाक संयोजनमे आयोजित कएल गेल जाहिमे पहिल दू दिन एकल नाटकक मंचन आ अंतिम तेसर दिन विमर्श सत्र आ पुरस्कार एवं सम्मान समारोहक आयोजन कएल गेल.

कार्यक्रमक विधिवत उद्घाटन मंत्रेश्वर झा, विभा रानी, ललिता झा, राधा माधव भारद्वाज, प्रदीप बिहारी, भैरव लाल दास, विभा झा आदि लोकनि दीप प्रज्वलित क' कएलनि. कार्यक्रमक प्रारम्भ सोनी चौधरी द्वारा गोसाओनिक गीत, सुष्मिता झा द्वारा शारदा स्तुति, आकृति झा द्वारा स्वागत गान, अशिति झा द्वारा गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुति आ अतिथि सम्मान सँ प्रारम्भ भेल. मंच सञ्चालनक क्रममे पूनम भारद्वाजक सारगर्भित शब्दक चयन आ प्रस्तुति सेहो बेस आकर्षक रहल.

पहिल दिनक पहिल नाटक ‘बारहमासा, दिल्ली’क प्रस्तुति ‘श्याम दरिहरे’क कथा ‘फाटल बियहुती नुआ’क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह मनीषा मिश्रा आ निर्देशन केलनि मुकेश झा. रंगमंच पर उपस्थितिक हिसाबे मनीषा नव अभिनेत्री छथि मुदा हिनक लगन आ आत्मविश्वासक संग प्रस्तुत हएब दर्शकक ध्यान केन्द्रित करबामे सफल रहल. दोसर नाटक ‘भंगिमा, पटना’क प्रस्तुति ‘कुणाल ’ लिखित ‘बुलबुल आ रखबार’क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह प्रतिभा मिश्रा आ निर्देशन केलनि निखिल रंजन. कीर्तनियाँ शैलीक एहि नाटक मे मंच पर उपस्थित संगीत समूह मे श्यामा झाक पार्श्व गायन सेहो प्रस्तुतिक एक मजगूत पक्ष रहल. तेसर आ अन्तिम नाटक 'सुधांशु 'शेखर चौधरी'क लिखल 'लेटाइत आंचर' आयोजक संस्था ‘अपराजिता, दिल्ली’क प्रस्तुति छल जाहि मे संस्थाक संस्थापिका सोनी नीलू झा स्वयं अभिनय आ निर्देशन केलनि.

दोसर दिनक पहिल नाटक 'द स्पॉटलाइट थियेटर, दरभंगा’क प्रस्तुति ‘यात्री जी सहित अन्यान्य कवि/कवयित्री' रचित विभिन्न कविताक समावेश सँ तैयार कएल नाटक 'निन्नक उत्तरार्द्ध आ स्वप्नक पूर्वार्द्ध'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह पल्लवी कुमारी आ निर्देशन केलनि सागर सिंह. दोसर नाटक 'इप्टा, मधुबनी’क प्रस्तुति प्रसिद्ध लोककथा 'साम-चक'क नाट्य रूपांतरण ‘अविनाश चन्द्र मिश्र'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह पूजा कुमारी आ निर्देशन केलनि रंजीत राय. तेसर नाटक 'भरत नाट्य कला केन्द्र, पूर्णियाँ’क प्रस्तुति 'स्त्री उपेक्षिता'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह रंजना शर्मा आ निर्देशन केलनि मिथिलेश राय . ‘उमेश आदित्य'क आलेखक मैथिली नाट्य रूपांतरण सेहो मिथिलेश रायक छलनि आ अभिनेत्री भोजपुरी भाषी रहितो मैथिली नाटक प्रस्तुत करबामे बेस सफल रहलीह. चारिम आ अन्तिम नाटक 'अवितोको, मुम्बइ'क प्रस्तुति एवं ‘विभा रानी' लिखित, निर्देशित आ अभिनीत नाटक 'साध रोए के'क मंचन कएक दृष्टिकोण सँ एकल नाटकक एहि महोत्सवकेँ महत्त्वपूर्ण बनौलक.

विभा रानी द्वारा प्रस्तुतिक क्रममे नहि मात्र अभिनय दक्षता देखबा लेल भेटैत अछि अपितु प्रेक्षककेँ मंच सँ निरन्तर ध्यानाकृष्ट क' रखबाक अद्भुत कला सँ परिचय भेटैछ. ई जतबे नवागन्तुक कलाकार लोकनिक वास्ते प्रेरणा छथि ततबे मैथिली रंगमंचकें चिरजीवी हेबाक स्वप्नद्रष्टाक रूपमे समाज कें प्रेरित केनिहारि रंगकर्मी सेहो. मैथिली रंगकर्मक क्षेत्र मे मंचन, प्रेक्षक आ कलाकारक निरन्तर वृद्धि सँ भविष्यक प्रति आश्वस्त होइत एकर नियमित प्रदर्शन आ विस्तार वास्ते एक स्थायी भवनक निर्माण हेतु आँचर पसारि स्वैच्छिक सेवादान लेल प्रेरित करैत धनराशि जुटेबाक हिनक शैली उपस्थित दर्शकक बीच सेहो चर्चाक विषय रहल.

विगत दू दिन मे सात गोट मंचनक संग दू-दिवसीय एकल नाटकक बाद तेसर दिन मने अन्तिम दिन विमर्श सत्र, सम्मान आ प्रोत्साहन पुरस्कारक आयोजन परिवर्तित स्थान 'राजा राममोहन राय मेमोरियल'क सभागारमे आयोजित छल. विमर्श सत्र मे विभा रानी, प्रकाश बंधु, संतोषी कुमार, अरुणाभ सौरभ, नीलेश दीपक, अमित आनन्द आदि विमर्शकर्ता लोकनिक सहभागिता रहल आ एहि सत्रक सफल संचालन केलनि ऋषि बशिष्ठ.

रंगकर्मक क्षेत्र मे विशेष योगदान देनिहार उत्कृष्ट कलाकारकें प्रत्येक वर्ष दू गोट पुरस्कार क्रमशः ‘डॉ. ललिता झा रंग प्रोत्साहन पुरस्कार' आ 'रुद्र नारायण ठाकुर स्मृति रंग पुरस्कार' देल जेबाक घोषणा भेल अछि जाहिमे एकावन सए टाका आ प्रशस्ति-पत्र प्रदान कएल जाएत. वर्ष २०२२ हेतु 'डॉ. ललिता झा रंग प्रोत्साहन पुरस्कार' मनीषा मिश्राकें आ 'रुद्र नारायण ठाकुर स्मृति रंग पुरस्कार' विभा रानीकें प्रदान कएल गेलनि. एहि तरहे तीन दिवसीय ई आयोजन अनेकानेक दृष्टिए सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल. आयोजन समिति 'अपराजिता' समूहक प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप सँ जूड़ल प्रत्येक सदस्य सहित सोनी नीलू झाकें बधाइ आ मैथिली रंगमंचक इतिहासमे नव-नव कीर्ति स्थापित करबाक सुमंगलकामना.

Friday, September 01, 2017

धूमकेतु रचित चर्चित कथा “अगुरवान”क नाट्य मंचन श्रीराम सेन्टर,मंडी हाउस,दिल्लीमे


३०अगस्त २०१७ (बुधदिन) श्रीराम सेन्टर,मंडी हाउस,दिल्लीमे धूमकेतुनामक रंगमंचीय संस्था केर प्रस्तुति एवं मैथिलीक सुपरिचित कथाकार धूमकेतु रचित कथा संग्रह उदयास्तकेर एक गोट चर्चित कथा अगुरवानक सफलतापूर्वक नाट्य मंचन कएल गेल. एहि कथाक नाट्य रूपांतरण केलनि अछि रंगकर्मी जितेन्द्र कुमार झा ओ निर्देशन केलनि अछि  राजीव कुमार मिश्र. राजीव कुमार मिश्र पेशा सं साउंड इंजीनियरक संग-संग एक रंगकर्मी छथि, मिथिला पेंटिंगक नीक जानकार ओ शोधार्थी छथि (स्कोलरशिप प्राप्त) आ एहि सं पूर्व मैथिली फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंगकेर सह-निर्माता एवं डीडी बिहार पर पूर्व-प्रसारित चर्चित मैथिली धारावाहिक पाहुनमे सह-निर्देशक सेहो रहि चुकल छथि.

अगुरवान कथा एक एहेन युवक (बंगट मिश्र-अमरजी राय) पर आधारित अछि जे आत्मसम्मानक संग जीवन जीबाक अभिलाषी अछि, स्वभाव सं निःश्छल मुदा अपन कुलक मर्यादा आ प्रतिष्ठा हेतु सदिखन साकांक्ष रहैत अछि. माइअक मृत्यु उपरान्त अध-वयसू पिता कल्लर मिश्र (रमानाथ झा) द्वारा एक एहेन नवयौवना कें सतमाय (श्रृष्टि आनंद) बना आनल जाइछ जे लगभग बंगटक सम-वयसू रहैछ. द्वितीय विवाहक एक्कहि-डेढ़ मासक भीतर बंगटक पिता शरीर सलोथ भअसमर्थ भजाइत छैक. पैरुख नहि रहलाक कारणें कोनो प्रकारे अर्थोपार्जन हेतु विवशताक जिनगी जीबैत अछि. बंगट बेरोजगार भेल घुमैत-फिरैत आ लुच्चा-लफंगा सभक संगतिमे रहि चोरि तक करैत अछि. चोरि कअपन आ अपन परिवारक निमेरा करब ओकरा ओत्तेक आत्म-ग्लानि नहि करबैछ जत्तेक कि ओकर सतमायकें जमींदार पाठक (राजीव रंजन)क हवेली पर जाएब अखरैत छैक. हालांकि पाठकक कुकर्मी प्रवृतिक अनुचर दू गोट ग्रामीण (अजीत झा आ संजीव कुमार) द्वारा गाम भरिमे सतमाय आ बंगटक बीच अनैतिक संबंध सनक मनगढ़ंत अफवाह पसारबामे कोनो कोताही नहि कएल गेल छैक मुदा माए-बेटाक संबंध दुन्नू दिस सपवित्र छैक. बंगट अपन सभटा सुख-दुःखक बात साझा कमोन हल्लुक करबाक माध्यम गामक मास्टर साहेब (संतोष कुमार)कें बनौने अछि. बंगटक परिवार दीनताक अंतिम पराकाष्ठा पर पहुँच गेल अछि आ एहेन स्थितिमे घरमे पिता-पुत्र, पति-पत्नी ओ माए-बेटा मध्य बेर-बेर कलह हएब स्वाभाविक सन भगेल अछि. मास्टर साहेबक आज्ञानुसार बंगट शहर जाय किछु रोजगार मे संलग्न हेबाक चेष्टा करैत अछि मुदा मोन नहि लगबाक कारणें एक्कहि-डेढ़ मासमे आपिस आबि जाइत अछि. एम्हर घरक स्थिति अत्यधिक दयनीय हेबाक कारणें अन्न-पानि धरि आफद भजाइत छैक आ से अवसरक लाभ उठबैत जमींदार द्वारा कल्लर मिश्रकें विभिन्न प्रकारक प्रलोभन देइत ओकर पत्नीकें हवेलीमे आबि दुन्नू साँझक भानस बनेबा लए आग्रह करैत छैक. बंगटक सतमायकें ओहि जमींदारक बहिकिरनी हेबाक संग-संग अनैतिक सम्बन्धक सेहो पालन करब अनिवार्य सन भगेल छैक आ परिणामस्वरूप ओकर सतमाय गर्भवती भजाइछ. एक-डेढ़ मास पर घर आपसी भेला उत्तर जखन ओकर सतमाय द्वारा स्वयं गर्भवती हेबाक बात स्वीकारल जाइछ तबंगट आक्रोशित भकोदारि सदू-खण्ड करैत ओकर हत्या कदैत अछि . बंगटक मानसिक स्थिति पर शोध करबा लेल मनोविज्ञान केर प्रोफेसर कमलेश चौधरी (जितेन्द्र कुमार झा) मास्टर साहेब ससम्पर्क करै छथि आ उपरोक्त सभ घटना मास्टर साहेब द्वारा हुनका अक्षरशः सुनाओल जाइत अछि.

एहि नाटकक माध्यम सएक ब्राह्मण परिवारक दीनताकें देखाओल गेल अछि, बेमेल विवाह ओ शोषित नारीक दबल आवाज, छद्म पुरुषार्थक दंभ पर प्रहार, ओ तत्कालीन समाजक बीच एकटा नहि कएकटा राम-रहीमक पाखण्डकें उजागर करैत लेखकक दूरदर्शिताक अनुमान लगाओल जा सकैत अछि.

नटराज स्तुतिक संग प्रारम्भ भेल नाटक अंत धरि प्रेक्षककें मंच दिस टकटकी लगौने रहबा लेल बाध्य करैत रहल. नाटकक विभिन्न पक्ष पर विश्लेषण केर आवश्यकता छैक जेकि रंगमंच ओ नाटक विशेषज्ञ करथि से उपयुक्त हैत मुदा प्रेक्षकीय दृष्टिए नाटकक प्रस्तुति सफल रहल. दिल्लीक विभिन्न संस्था मध्य वर्तमानमे युवा रंगकर्मीक रूपमे दर्शकक पहिल पसीन अमरजी राय फेर सहृदय जितबामे सफल रहलाह. रमानाथ झा द्वारा चरित्रकें जीवंत करैत जे इमानदारी सअभिनय कएल गेल अछि से निश्चित रूप समंच पर हुनक सक्रिय उपस्थिति मंगैत अछि. एकमात्र महिला पात्र सृष्टि आनंदक संवाद सीमित छल मुदा ततबेमे जे दम देखबामे आएल से भविष्यमे मैथिली रंगमंच वास्ते एक नीक अभिनेत्रीक सम्भावना जगबैत अछि. राजीव रंजन मैथिली मंच पर विभिन्न चरित्र निमाहबा लै तैयार छथि आ निरंतर प्रगतिक पर छथि. संतोष कुमार मैथिली मंचक आब वरिष्ठ श्रेणीमे (वर्तमानक युवाक तुलनामे) प्रवेश कगेल छथि से स्वीकारबामे कोनो हर्ज नहि. जितेन्द्र झा, संजीव कुमार, अजीत झा आ पाठकक दू गोट सेवकक भूमिकामे अंकित ओ राहुलक उपस्थिति कथाक पूरक मात्र कहक चाही. पार्श्व संगीत सांकेतिक मात्र छल जाहिमे किसलय कृष्णक लिखल गीतकें सुमधुर स्वर देने छलाह देवानन्द झा एवं राजीव रंजन जकरा संगीतबद्ध केलनि दीपक ठाकुर. नाटकक पार्श्व संगीत राजीव रंजनक छल. प्रकाश व्यवस्था छलनि संतोष राणा केर. प्रकाश व्यवस्थाकें आर बढियाँ करबाक गुँजाइश छल. समूचा नाटकमे रतुके दृश्यक आभास होइत रहल जखनकि मास्टर साहेब आ प्रोफेसर साहेबक मध्यक वार्तालापक बीच-बीचमे (फ़्लैश बैकमे चलैत) कहानीक अधिकांश भाग दिनक छल. वस्त्र-सज्जा हेतु उपयुक्त सामग्रीक चयन अमरजी राय द्वारा कएल गेल छल. रूप-सज्जा दीपक ठाकुरक छल. प्रोडक्शन तरूण झा, एसोसिएट निर्देशन संतोष कुमार, सहायक निर्देशन अजय शर्मा आ बैनर-पोस्टर एवं ब्रोशर डिजाइन कएल छल संजीव कुमार बिट्टू केर. राजीव कुमार मिश्रक निर्देशन मे मंचित पहिल नाटक अनेकानेक दृष्टिकोण ससफल रहल.

अगुरवान नाटक मंचन सपूर्व नीलम कला केन्द्र द्वारा एक सम्मान समारोहक सेहो आयोजन कएल गेल छल (पृथक रिपोर्ट) जाहिमे बॉलीवुडक स्थापित अभिनेता ओ मैथिल सपूत नरेन्द्र झा, विराटनगर सआएल सक्रिय ओ समर्पित मिथिला अभियानी प्रवीण नारायण चौधरी, मधुबनी सआएल धूमकेतुक लेखक सुपुत्र अंशुमान सत्यकेतु, नीलम कैसेट केर संस्थापक कृष्ण कुमार चौधरी एवं नीलम चौधरी, मुम्बइ फिल्म उद्योग जगतमे एड फिल्म्स फ्रीलान्सर ओ मैथिल सेनानी कुणाल ठाकुर, पटना सआएल डीडी बिहारक निदेशक पी.एन.सिंह आदिक गरिमामय उपस्थिति ओ प्रशंसा सेहो नाटकक सफलताकें चिन्हित केलक.      

कामकाजी दिवसमे भेल एहि आयोजनक सफलताक अंदाज अही बात सलगाओल जा सकैत अछि जे श्रीराम सेंटरक दूतल्ला प्रेक्षागृह प्रेक्षक सखचाखच भरल छल. किछु लोककें एखनहु नाटकक प्रेक्षक बनब सीखय पड़तनि जेनाकि मोबाइलक स्विच ऑफ वा थरथरी मुद्रा (वाइव्रेशन मोड) मे राखथि, घाना पसारै बला छोट बेदराकें संग नहि आनथि वा जआनथि तशांत भंग होइत स्थितिमे हॉल सबाहर लघुमा देथुन, थोपड़ी बजबथु (प्रसंग देखि) मुदा पिहकारी (सीटी) सपरहेज राखथु आदि किछु तथ्य सभ छैक जेकि हॉल ओ नाटकक मर्यादा छैक आ आनन्दो तखने भेटैत छैक जखन एकर पालन हम सभ मीलि करैत छी.

कला,साहित्य,संस्कृति,भाषा संरक्षण ओ संवर्धनक अनेकानेक गतिविधि मध्य वर्तमानमे मैथिली नाटक सेहो बेस सराहनीय जोगदान दरहल अछि. भारतक राजधानी दिल्लीमे विभिन्न रंगमंचीय संस्था द्वारा समय-समय पर मैथिली नाटकक मंचन होइत रहला सं मैथिली भाषी लोकनिक निरंतर जागरूकता बनल रहब स्वाभाविक अछि. दिल्लीमे कला मंडीक रूपमे प्रसिद्ध केन्द्र मंडी हाउस सेहो आब अन्यान्य भाषा मध्य मैथिलीक विभिन्न नाटकक प्रदर्शन, भारत रंग महोत्सवमे मैथिली नाटकक मंचन सन किछु श्रेयस्कर काज एक ऐतिहासिक साक्ष्यक रूपमे सोझा ठाढ़ अछि जकर श्रेय निःसंदेह मैलोरंग,प्रकाश झा आ हुनक टीमकें जाइत छनि. बाट बनि गेल छैक आवश्यकता छैक दृष्टिवान पथिककें.

Thursday, July 20, 2017

मैलोरंगक मंचन जट-जटिन ओ ललका पाग


१९ जुलाइ २०१७ कमैथिलो लोक रंग (मैलोरंग),दिल्ली द्वारा क्रमशः दू गोट नाटक जट-जटिनललका पागक सफलतापूर्वक नाट्य मंचन भेल. मैलोरंग पहिल बेर युवा निर्देशक रमण कुमार ओ ज्योति झाकें निर्देशनक जिम्मा दैत ई नव प्रयोग केने छल जे सफल रहल. सफलताक प्रत्यक्षदर्शी मंडी हाउस दिल्लीक श्रीराम सेंटरमे कामकाजी दिन (वर्किंग डे) होइतो प्रेक्षक सभरल प्रेक्षागृह थोपड़ीक निरंतर गरगारहैट सस्वयं प्रमाणित करैत रहल.

जट-जटिन/रमण कुमार
जट-जटिन मिथिलाक लोक परम्परा आधारित एक एहेन मान्यता अछि जाहिमे बर्खा नहि हेबा सन विकराल परिस्थितिमे अन्न-पानि बिना हाक्रोश करैत स्थानीय समाजक किछु वर्ग विशेषक महिला द्वारा जट-जटिन खेलाएल जाइछ. एहि क्रममे इन्द्रदेवक आह्वान, जट-जटिनक प्रेम ओ बेंग मारबाक प्रसंग आदिक प्रस्तुति होइछ. 

ऋतुराज कर्ण लिखित नाटक प्रारम्भ भेल बालक्रीड़ाक संग जकर नायक जटाधर (जट-राज नारायण साह) ओ नायिका जितिया (जटिन-निशा झा) जे संगहि खेलैत-कूदैत,टोना-मानी करैत रूसबा ओ बौंसबाक प्रक्रम निमाहैत बच्चा ससियान भजाइछ. दुन्नूक मनमे प्रेमांकुरित होइत समय एला पर पल्लवित ओ पुष्पित भजाइछ. मान-प्रतिष्ठाक दंभ रखनिहार जटाधरक पिता ठाकुर (जमींदार-रमण कुमार) अपन बेटी (रानी-सृष्टि कुमारी)क प्रेम-प्रसंग पर अंकुश लगबैत ओकर प्राण तक हरि लैत अछि आ ठाकुरक एहेन कठोर निर्णय ससमूचा समाज भयभीत रहैछ. एहेन मे जटाधर (ऋतुराज) अपन प्रेमक बात गुप्त राखि जितिया (प्रियदर्शिनी पूजा) सविवाह ककोनो आन गाममे जा बैस जाइछ. एम्हर गाममे अकाल पड़ि जाइछ, लोक सभ सभटा टोना-टापर कथाकि जाइछ मुदा स्थिति आर विकराले होइत जा रहल अछि. गाममे एक ज्योतिषीक (संजीव कुमार बिट्टू) आगमन होइछ जे अन्य भाषी रहैत छथि मुदा अनुवादक (मनोज पाण्डे) स्थानीय लोक धरि मैथिलीमे संप्रेषित करैत छथि. ज्योतिषीक कहब छलनि जे एहि गाममे कोनो एहेन कुकर्म भेल अछि जकर प्रकोप अछि. जितिया सजबरदस्ती विवाहक इच्छुक मुदा असफल युवक बबन (दीप आनंद) अही अवसरक खोजमे छल आ जटाधरक आन जातिक जितियाक संग विवाह करबकें कुकर्म कहि समाजक ध्यानाकर्षण कएल. छल सठाकुर द्वारा बबनकें पठा ओकरा दुन्नू बेकतीकें बजबाय आ अंतमे अपन फुसियाही स्वाभिमानक रक्षार्थ जटाधरक हत्या करबा देल जाइत छैक. जितियाक पति वियोग ओ विलाप तत्क्षण हृदयविदारक परिस्थिति उत्पन्न कदैछ आ समाजक आडम्बरी लोकक प्रति एक दीर्घ ओ अनुत्तरित प्रश्न ठाढ़ कजाइत अछि. प्रियदर्शिनी पूजा (जितिया)क अभिनय प्रेक्षागृहमे बैसल एकहक प्रेक्षककें भावुक हेबा लेल बाध्य कदेने छल.

नाटकक मूल प्रसंग सहटि कने मंच दिस चली, ज्योतिष शास्त्रक ज्ञान रखनिहार ज्ञाताकें ज्योतिषी जीकहल जाइछ मुदा प्रत्येक  पात्र द्वारा ज्योतिष जीकहि संबोधित करबकें भविष्यमे सुधारल जा सकैछ. प्रसंगकें रोचक बनेबा लेल ज्योतिषी जी द्वारा सांकेतिक (अन्य) भाषाक प्रयोग आ तदनुसार ओकर अनुवाद कप्रस्तुत करबाक जे शैली छल से अद्भुत छल आ एहि चरित्रमे दुन्नू अभिनेता (संजीव बिट्टू आ मनोज पाण्डे) बेस प्रशंसा हथोड़िकजेबामे सफल रहलाह. ठाकुरक भूमिकामे स्वयं रमण कुमार वस्त्र,मेकअप,भाव-भंगिमाक दृष्टिकोण सउपयुक्त छलाह मुदा सम्वाद अदायगीमे एहि खन मोन पड़ैत रहलाह एक छल राजाक मुकेश झा ओ अमलीक अमरजी राय. नाटकक मंचन पूर्ण सफल रहल आ नव-निर्देशक रमण कुमार बधाइ केर पात्र छथि.

एहि नाटकमे जे सभ महत्त्वपूर्ण भूमिकामे छलाह/छलीह ताहिमे उपरोक्त पात्रक संग  पाँच गोट लुच्चा प्रवृतिक लड़का सभमे निखिल राज,पुष्कर शर्मा,मनीष गुप्ता,रोशन यादव आ मणिशंकर गुप्ता, तहिना स्त्रीक भूमिकामे ज्योति झा आ सुधा झा, ग्रामीण शिव स्वरुप,ऋषि राज आ सोनू पिलानिया, नोकर प्रभात रंजन ओ बटोहिक भूमिकामे राजीव रंजन झा आ नितीश कुमार झा सेहो अपन-अपन चरित्रक हिसाबे फिट भेलाह. मंच,प्रकाश,ध्वनि,वस्त्र आदि सेहो व्यवस्थित छल मुदा एहि नाटकक पार्श्व गायन ओ संगीत किछु निराश केलक. मंच पर कलाकार लोकनिक गाएब स्पष्ट सूनल गेल जेकि गायनक मौलिक रूपकें प्रस्तुत करैत छल, मुदा जखन जट-जटिन शब्द लोकक कानमे पड़ैत अछि तपहिल कल्पना ओहि गीतक सुन्दरते पर जाइत अछि घ्यूरा फड़लौ गे जटिनियाँ, झुमनी फड़लौ गे  आ ताहि गीतक संग जउपयुक्त वाद्ययंत्रक प्रयोग नहि हो तकने झुझुआन लागब स्वाभाविक. मैलोरंग सई अपेक्षा करब उचित अछि कारण राजीव रंजन आ दीपक ठाकुर संगीत पर बेस मेहनैत करैत रहलाह अछि आ कसकैत छथि. बेजाए कहब अनुचित हएत कारण अपन जीवनोपार्जनमे व्यस्त रहैत एकटा नाटककें तैयार कप्रस्तुत करबामे कत्तेक परेशानी होइत छैक से बूझल जा सकैत अछि मुदा प्रेक्षक कतहु नें कतहु शुभचिंतक होइ छथि तहुनक अपेक्षा स्वाभाविक अछि .

ललका पाग/ज्योति झा
स्व. राजकमल चौधरी रचित ललका पागक कथा/नाट्य मंचन स्त्री-विमर्श पर आधारित अछि. स्व. राजकमल चौधरीक लेखन प्रतिभा समैथिली ओ हिन्दी (दुन्नू भाषी) समाज कृतज्ञ अछि. हिनक लेखनक केन्द्रमे सिसकैत,हिचकैत ओ शोषित नारीक दुर्दशाकें सहजहि अकानल जा सकैत अछि. ललका पाग कथाक नायिका तीरू (प्रियदर्शिनी पूजा) सेहो एहने सन एक मैथिल नारी छथि जिनका स्वभावमे लड़िकअधिकार लेब नहि अपितु सिसकैत-कुहरैत अपन अधिकार सवंचित रहबकें नारी धर्म बुझैत छथि. मात्र चौदह बर्खक उमेरमे सासुर आएल तीरू अपन बालमन पर काबू नहि राखि पेली आ सासुकें गामक पोखरिमे नहेबाक इच्छा व्यक्त कय देलनि. हुनक एहि निर्विकार मनक चंचलता सगरो गाम काने-कान पसरि गेल आ बात हुनक स्वामी राधाकान्त (जितेन्द्र कुमार जीतू”) धरि पहुँच गेल. एहि छोट सन बात पर राधाकान्त हुनक तिरस्कार करब शुरू कय देलनि आ कलकत्ता कॉलेजक महिला संगी कामाख्या (निशा झा)क रूप ओ गुणक स्मरण कहुनका संग परिणय हेतु निश्चय कलेलनि. तीरू ओहि गप्पक लेल तिरस्कृत आ अवहेलित भेली जे गप ओ मात्र बाजिकइच्छा व्यक्त केने छली नहि कि ओ पोखरिमे नहाए गेल छलीह. किछु दिनक बात राधाकान्त गाम अबैत छथि आ अपन दोसर विवाहक निर्णय सुनबै छथि तीरूकें. तीरूकें तएक क्षण लेल बज्रपात भेलनि मुदा अंतर्वेदनाकें कंठ मोंकि स्वीकृति दय देलनि. विवाहक दिन तय भेल राधाकान्त आइ बहुत प्रसन्न छलाह आ इंतजाम पातीमे व्यस्त छलाह आ हुनक एहि इंतजाम-पातीमे संग दरहल छलीह तीरू. कलकत्ता ससंगी सभ आएल छलथिन राधाकान्तकें मूँह पर एक अलग उत्साह. साँझ भेलै राधाकान्त सजि-धजि विदा भेला आ तीरू दिस बिनु तकनहि चल गेला दरबज्जा दिस. तीरू समाद पठौलनि आँगन अबै वास्ते. राधाकान्त आँगन जा जखन तीरूक घर दिस गेला ततीरू पेटी उधेसने किछु ताकि रहल छलीह आ अन्ततः ओ वस्तु भेटि गेलनि. ओ अनुपम वस्तु छल ललका पाग. ललका पाग देखितहि एक क्षणक वास्ते राधाकान्त स्तब्ध भगेला आ क्षुब्ध रहि गेला तीरूक निःश्छ्लता पर. बकार बन्न भगेलनि राधाकान्तकें आ बीच अँगनामे बैसि पश्चातापक कुहेस फटैत तेना दहोबहो नोर बहबलगलनि जेना तीन बर्खक बच्चा होथि. उक्त कथा/नाटक पुरुष वर्ग पर कतेको प्रश्न ठाढ़ करैत अछि आ कमोबेश स्थिति एखनो पूर्ववत अछि.

नाटकक आरम्भ सूत्रधार (संतोष कुमार आ निशा झा) सहोइत अछि. संतोष कुमार रंगमंचक एक एहेन हस्ताक्षर छथि जिनका मंच पर पदार्पण करिते प्रेक्षकक मूँह पर हँसी आ हुनक पात्र संबंधी जिज्ञासा बढ़ि जाइत छनि. निशा झाक अभिनय आ हुनक मैथिली बजबाक टोन भविष्यक नीक सम्भावना दिस इंगित करहल अछि. नटुआ नाच लमंच पर प्रस्तुत होइत रमण कुमार आ संजीव बिट्टूकें गतिविधि देखि प्रेक्षक लोकनिकें गुदगुदी हएब स्वाभाविक छल. राधाकान्तक पात्रमे जीतू केर पूर्वक नाटक जल डमरू बाजेधूर्तसमागममे देखल अभिनयक हिसाब सएहि बेर किछु हल्लुक सन अभिनय लागल ओना एहिमे कोनो संदेह नहि जे ओ नीक कलाकार छथि आ आगाँ फेरो तहिना भेटता से आश्वस्त छी. तीरूक माइअक भूमिका कम मुदा तइयो अपन प्रभाव बनौने रहली ज्योति झा. चननपुरवालीक भूमिकामे सुधा झाक अभिनय ओ किसनीमायक भूमिकामे सृष्टि आनंद सेहो फिट छलीह. मुंशी पटोरीलालक भूमिकामे मनोज पाण्डे सेहो उपयुक्त छलाह. तीरूक भाइअक भूमिकामे बहुत कम्मे कालक वास्ते मुदा आन नाटकक संबंधमे एतबा जरूर कहल जा सकैत अछि जे देखिते दिनमे अपन अभिनयमे नितीश सेहो निखरल जा रहल छथि. रामसागर आ ज्योतिषीक भूमिकामे सोझा आएल संजीव कुमारमे आर सुन्दर अभिनयक गुँजाइश छनि. एहि नाटकक पार्श्वमे संगीत ओ गायन बेस आकर्षक छल ताहिमे राजीव रंजन पूरा इमानदारी सप्रस्तुत भेलाह. अमरजी राय केर वस्त्र विन्यास सहजहि आकर्षित करैछ आ श्याम सहनीक प्रकाश परिकल्पना सभ दिने सनीक रहल अछि.

मंच सञ्चालन केलनि मैलोरंगक निदेशक प्रकाश झा. आजुक निर्देशक ज्योति झाकें पुष्पगुच्छ दय सम्मानित केलनि जेएनयू केर प्रोफेसर डॉ. देवशंकर नवीन आ रमण कुमारकें मैलोरंग रेपर्टरी प्रमुख मुकेश झा.

धन्यवाद ज्ञापनमे रमण कुमार दर्शक आ मैलोरंगक प्रति अपन उद्गार व्यक्त केलनि ओत्तहि ज्योति झा एहेन सुअवसर हेतु दर्शक,रेपर्टरी,वरिष्ठ रंगकर्मीक संग-संग प्रकाश झाक प्रति सेहो अपन कृतज्ञता प्रकट केलनि.

उपरोक्त दुन्नू नाटक देखला उत्तर प्रेक्षागृह ससोशल नेटवर्क धरि लोकक मूँह सवाह निकलब नाटकक सफलताकें सद्यः प्रमाण अछि. संभवतः बहुत गूढ़ विषय दिस हमर ध्यान केन्द्रित नहि भपाएल होएअ से संभव अछि आ स्व-विवेक सलिखल ई रिपोर्ट सूचनार्थ अपनें धरि पहुंचाएब अपन कर्त्तव्य बुझै छी. जयतु मैथिली.