भाषा सेवा लेल आंशिक योगदान, अपने लोकनिक अवलोकनार्थ। क्लिक कय पढ़ल/देखल/सुनल जा सकैत अछि :

रिपोर्ट (63) अखबारक पन्ना (33) ऑडियो/वीडियो (21) मैथिली नाटक (19) कथा मैथिली (18) मैलोरंग (16) मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (14) दैनिक जागरण (12) मैसाम (10) मैथिली फिल्म (8) साक्षात्कार (8) मैथिली-भोजपुरी अकादमी (6) आलेख (5) ऑफिसक अवसर विशेष पर (3) झलक मिथिला (3) नवभारत टाइम्स (3) पाठकीय प्रतिक्रिया (3) बारहमासा (3) मैथिली पोथी (3) अखिल भारतीय मिथिला संघ (2) अछिञ्जल (2) अपराजिता (2) कथा मंचन (2) दीपक फाउंडेशन (2) मिथिला स्टूडेंट यूनियन (2) मिथिलांगन (2) मैथिली पत्र-पत्रिका (2) मैथिली लघु फिल्म (2) यात्रा संस्मरण (2) विश्व मैथिल संघ (2) सम्मानक सम्मानमे (2) हिन्दुस्तान टाइम्स (2) अस्मिता आर्ट्स (1) एकेडमी ऑफ़ लिटरेचर आर्ट एंड कल्चर (1) डी डी बिहार (1) देसिल बयना हैदराबाद (1) धूमकेतु आर्ट्स (1) भारती मंडन (1) मिथिला मिरर (1) मिनाप (1) मैथिली एलबम (1) मैथिली कथा (1) मैथिली जिन्दाबाद (1) मैथिली धारावाहिक (1) मैथिली पत्रकार (1) मैथिली लोकमंच (1) मैथिली संबोधन (1) विदेह (1) साझी धुआँ (1) साहित्य अकादेमी (1) साहित्यिक चौपाड़ि (1) स्वरचित (1) हिन्दी नाटक (1)

मुख्य पृष्ठ

Showing posts with label मैथिली पोथी. Show all posts
Showing posts with label मैथिली पोथी. Show all posts

Monday, October 22, 2018

बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम : ऋषि वशिष्ठ


वर्तमान पीढ़ीक किछु महत्त्वपूर्ण कथाकार मे ऋषि वशिष्ठ जीक कथा लेखन बेस आकर्षित करैत रहल अछि। हिनक दू गोट पोथी जे एक सिटिंग मे बैसि पढ़ि जेबा लेल बाध्य केलक अछि ओ अछि कथा संग्रह 'गाम सँ जाइत रेलगाड़ी' आ तकरा बाद हिनक नव प्रकाशित नाटकक पोथी 'बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम'

हास्य प्रधान नाटक बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम पढ़ैत काल प्रसंगानुकूल बेसी ठाम मूँह दाबि क' हँसबा लेल बाध्य करैछ अन्यथा रेलगाड़ीक सहयात्री लोकनिकेँ ई बुझबा मे कनिको भाँगठ नहि हेतनि जे सोझा बैसल व्यक्ति असामान्य छथि आ से अन्ततः भइए गेल, कएक बेर अपनाकेँ ठहक्का लगेबा सँ नहि रोकि पाओल रही। एकर मंचनक कल्पना मात्र सँ गुदगुदी लागि रहल अछि। नाटकक विषय वर्तमान सँ ल' ' भविष्य धरि पूर्ण रूप सँ समकालीनता बोध कराओत एतबा आश्वस्त छी। अवसर भेटय त' एकर मंचन देखल जा सकैछ आ जँ पढ़बाक मोन होए तँ नवारम्भ प्रकाशन,मधुबनी सँ ८०/- टाका मे कीनि क' अवस्से पढ़ू। ढ़ौआ वसूल हेबाक गारंटी हम्मर।

संजोग एहेन जे हिनक उक्त दुन्नू पोथी गाम दिस जाइत-अबैत रेलगाड़ी जतराक क्रममे पढ़ल अछि। दुन्नू पोथी पढ़लाक बाद जे किछु समानता देखल जाइत अछि ताहि सँ हिनक लेखककीय गुणकेँ सहजहि अकानल जा सकैछ। स्थानीय समाज वा देश मे घटित कोनो नीक-बेजाए घटनाकेँ कथाक केन्द्र मे राखब, यथार्थबोधक परिवेशक निर्माण करब, सरल,सहज आ सर्वबोधगम्य भाषाक प्रयोग, संवाद मे गमैया टोन, शैली मे अनावश्यक आ विशेष पाण्डित्यक प्रयोग नहि करब हिनक मौलिक लेखनक गुण अछि।

उक्त पोथी प्रकाशन मे अनबा लेल लेखक श्री ऋषि वशिष्ठ जीकेँ साधुवाद संग आत्मीय शुभकामना!

Wednesday, June 20, 2018

गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानसक सुन्दरकाण्डकें अर्चना भगवान जी मिश्र द्वारा मैथिली भाषा मे रूपांतरण

मैथिली साहित्यक विभिन्न विधा मे मौलिक लेखनक संग-संग समय-समय पर नव-नव प्रयोग सेहो होइत आबि रहल अछि. एहि बेर एहने सन किछु प्रयोग केलनि अछि मैथिली गीत आ फिल्म लेखनमे हस्तक्षेप रखनिहार, पेशा सँ इंजीनियर, मधुबनी जिलान्तर्गत ननौर ग्रामवासी श्री भगवान जी मिश्र एवं पेशा सँ गणित शिक्षिका आ हुनक सहधर्मिणी श्रीमती अर्चना प्रियदर्शिनी जिनक संयुक्त प्रयास सँ गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानसक सुन्दरकाण्डकें मैथिली भाषा मे रूपांतरण एवं पोथी रूपमे प्रकाशित ‘सरल मैथिली सुन्दरकाण्ड’ केर विमोचन दीपक फाउंडेशनक वार्षिकोत्सव समारोह-२०१८ केर अवसर पर भारत सरकारक पूर्व शिक्षामंत्री एवं प्रखर राजनीतिज्ञ श्री मुरली मनोहर जोशी जीक करकमल सँ दिल्लीक मावलंकर सभागार मे भेल छल.

सभागार मे उपस्थित दर्शक लोकनिक मध्य भेंटस्वरूप ‘सरल मैथिली सुन्दरकाण्ड’ आ संग मे एकर ऑडियो सीडी जेकि सुपरिचित गायक श्री दिलीप दरभंगिया केर स्वर ओ संगीत मे निर्मित अछि निःशुल्क वितरित कएल गेल. उक्त पोथी आ सीडीक एक प्रति हमरहु प्राप्त भेल. पोथिक आवरण पृष्ठ आ भीतरी पन्नाक उत्तम गुणवत्ता बेस आकर्षित करैत अछि आ दीर्घसमय धरि ई पोथी यथास्वरूप सुरक्षित राखल जा सकैछ. दीपक फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पहिल संस्करणक एहि पोथिक संपादन केने छथि श्री दीपक झा आ संपादन सहयोग श्री कमल मोहन ठाकुर.

साधारणतया हमरा लोकनि सेहो जखन सुन्दरकाण्ड पाठ करैत छी त’ भाव बुझितो कएक ठाम शब्दक अर्थ बुझबा लेल जिज्ञासु होइत छी. रूपांतरणकर्ताक दू शब्द मे लेखकद्वय द्वारा पाठकक सोझा एहि पोथिक संदर्भमे योजना, क्रियान्वन आ प्रकाशनक उद्देश्य सम्बन्धमे जे अनुभव आ उद्गारकें राखल गेल अछि से सहजहि अकानल जा सकैछ. लेखकीय मंतव्यक आधार पर हिनक मानब छनि मैथिलीमे सरल शब्दक उपयोग करैत लिखबाक मूल उद्देश्य जे आध्यात्मिकताक पालन करैत मानवताक उत्थान हेतु मिथिलाक जन-जन धरि अपन मातृभाषामे एकर प्रचार-प्रसार होय.

लेखकीय प्रयास आ गुणवत्ताक बाद आबी पोथिक पाठकीय पक्ष पर. मैथिली भाषाक प्रति नव पीढ़ीमे आबि रहल उदासीनता जतय चिंताजनक स्थिति उत्पन्न करैत अछि ओत्तहि वर्तमान पीढ़ीक साहित्य सृजनमे सक्रियता आ मातृभाषा प्रति अनुराग सुरक्षित भविष्य हेतु सेहो ततबे सकारात्मक परिवेश बनबैत आश्वस्त करैत अछि. अपना जनैत प्रत्येक सृजनधर्मी लोकनि किछु ने किछु नव सन करबाक प्रयत्न मे छथि जाहि सँ भाषा विस्तारमे अपेक्षित सहयोग भेटैत रहौक. जन-जनकें कंठ मे बसल सुन्दरकाण्डकें मैथिली रूपांतरण करबाक पाँछा हिनको लोकनिक इएह उद्देश्य निहित छनि. वर्तमान परिप्रेक्ष्य मे देखल जाय त’ उक्त पोथी भाषा संरक्षण आ संवर्धन मे एक योगदानक रूपमे अपन उपस्थिति दर्ज करबैत अछि जे कि सरल,सहज आ सर्वबोधगम्यताक संग पाठकक सोझा प्रस्तुत अछि.

८४ पृष्ठक पोथिक अवलोकन केला उत्तर एहिमे अधिकांश ठाम शब्दानुवाद भेटैत अछि मुदा किछु अंशक भावानुवाद सेहो देखना जाइछ. वर्तनी शुद्धताक मामिलामे बहुत बेसी गंभीरता देखना जाइछ तथापि एक बेर पुनर्संशोधित हएब एहि पोथिक अंतिम प्रकाशन पूर्व आवश्यक छल. टंकण आ मुद्रण केर मामिला मे बेस संतोषजनक काज भेल अछि.

रूपांतरण मे अनेको ठाम क्लिष्ठ शब्दकें सहज बनाएब अचंभित करैत अछि. ई लोकनि किछु शब्दक शोध तत्परतापूर्वक कतेको स्रोत सँ केने छथि तकर दृष्टांत निम्न पाँति सँ देखल जा सकैछ :

मूल : ‘ढ़ोल गँवार शुद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी’

अनुवाद : ‘ढ़ोल गँवार शुद्र पशु नारी, प्रेम सँ बुझबै के अधिकारी’

‘ताड़ना’ शब्दक अर्थ आम प्रचलन मे ‘पिटबा’ सँ लगाओल जाइत अछि आ से प्रसंगवश मोन पड़ैत अछि मैथिली साहित्य महासभा,दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘मिथिलाक नारी, नहि छथि बेचारी’ केर मंच सँ श्रीमती करुणा झा तुलसीदासक प्रति क्षोभ व्यक्त करैत कहने रहथि जे इएह पाँति ज’ कोनो स्त्री द्वारा लिखल जाइत त’ से होइत ‘ढ़ोल गँवार पुरुष और घोड़ा, जितना पीटो उतना थोड़ा’. हिनक आक्षेप आम प्रचलनक आधार पर छलनि नहि कि मनगढ़ंत वा कोनो पूर्वाग्रह भावक आधार पर.

एहि पोथिक लेखक लोकनि एहि ठाम ताड़ना शब्दक अर्थ ‘बुझाएब’ सँ स्पष्ट करै छथि, एकर मतलब विभिन्न शब्दकोश वा आन-आन संदर्भ सँ मदति लैत एकर प्रयोग केने छथि. कहबाक अभिप्राय जे तुलसीदासक विराट सोचक संदर्भमे गहन अध्ययनक पश्चात एहि ठाम उपरोक्त शब्दक विकल्प रूपमे प्रयोग करबाक पाँछा हिनका लोकनिक शोध सोझा अबैत अछि. अपना जनैत रूपांतरणमे ठाम-ठाम बेस साकांक्ष हेबाक प्रयत्न केने छथि. शब्द चयनक क्रममे कतहु सटीक मुदा कतहु रूपांतरण मे हूसल सेहो छथि. तुकबन्दी हेतु मात्रामे छूट लैत किछु पाँतिकें सहज रूपे प्रस्तुत करब सेहो नीक लगैछ.

तुकबन्दी मे मात्राक ध्यान सावधानीपूर्वक लेलनि अछि मुदा कएक ठाम शब्द लेबामे मैथिली शब्दक विकल्प रहितो मूल शब्दक प्रयोग एकरत्ती अखरैत सन लगैछ, यथा कच्छप केर स्थान पर काछु लेल जा सकैत छल आ एहेन-एहेन कतेको शब्द जे पाठ करबा काल बेर-बेर सोझा अबैत अछि. लेखकक मंतव्य छनि सरल शब्द प्रयोगक प्राथमिकता, तें एहि गप्प दिस ध्यानाकर्षण कराएब उचित सन बुझना गेल. जेनाकि एकर ऑडियो सेहो निकलल अछि त’ संभव अछि जे गेयधर्मिताक पालन हेतु मीटर मे नै आएब बाध्यता सेहो एक तर्क भ’ सकैत अछि. आर बहुत रास नीक-बेजाए तथ्य जे पाठ करबाक क्रममे सोझा आएल जकर किछु जिम्मा अपने लोकनिक सेहो जे ई विलक्षण पोथी मंगाबी,पाठ करी आ लेखकद्वयकें यथोचित प्रतिक्रिया सँ अवगत करबियनि जे अगिला संस्करण धरि आर बेसी निखरिक’ सोझा आबय.

सरल मैथिली रूपांतरित सुन्दरकाण्डक सद्प्रयास देखि कहल जा सकैछ जे स्थायी रूप सँ शहरी परिवेश मे रहितो एहि दम्पतिकें अपन भाषा आ संस्कारक प्रति जे चेतना आ कृतज्ञताक बोध छनि से हिनका लोकनिकें विशेष बनबैत छनि. ई कहबा मे कनेको असोकर्ज नहि जे हिनका लोकनिक ई प्रयास सराहनीय अछि.

पोथिक मोल यथासाध्य नियमित पाठ आ पोथी प्राप्ति हेतु दीपक फाउंडेशन वा लेखक सँ सम्पर्क कएल जा सकैछ.

संकटमोचन हनुमान जीक कृपा दृष्टि सँ हिनका लोकनिक यशोगानक चर्च होइत रहनि ताहि आशा अपेक्षाक संग एक सिनेही पाठक दिससँ हार्दिक मंगलकामना !

Sunday, June 10, 2018

स्वरचित कविता संग्रहक पोथी 'नीक-बेजाए' पर भेटल प्रतिक्रया

 फेसबुकक माध्यम स’ हमर प्रकाशित पोथी “नीक-बेजाए” के संदर्भमे जे समीक्षा आ प्रतिक्रिया भेटल से समेटक’ एत’ एक्के ठाम प्रस्तुत क’ रहल छी. अपनेंक प्रतिक्रिया आ समीक्षा हमर बलबुद्धिकें पुष्ट रखबामे सहयोग करैइयै.एहि उपकृत नेह हेतु अपनें लोकनिक सहृदय आभार.  

(पाठकक सहूलियतकें धेआनमे रखैत अंग्रेजी बला अंशकें लिप्यांतर क’ देवनागरीमे क’ देल गेल अछि)
 
27 जनवरी, 2015/हम स्वयं पोस्ट केने रही:
प्रकाशक "विद्यापति मैथिल युवा मंच" केर आभार व्यक्त करबा लेल हम निःशब्द छी संगहि आह्लादित छी ई सम्मान पाबि.
५६ पन्नामे प्रकाशित २५ गोट कविता संग्रहक ई पोथी "नीक-बेजाए" बसंत पंचमी आ संस्था द्वारा आयोजित सरस्वती पूजा महोत्सव (२५ जनवरी २०१५) केर शुभ पावन अवसर पर माननीय श्री एस. एन. झा (रिटायर्ड आइ.ए.एस.,रजिस्ट्रार,आइ.जी.डी.टी.यूनिवर्सिटी फॉर वूमेन)डॉ. सतीश चन्द्र झा (प्रोफ़ेसर,सनातन धर्म कॉलेज)डॉ. नारायण जी झा (बाबूजीहमर मार्गदर्शक/पथप्रदर्शक)श्री एस.एन.मिश्रा (हमर पहिल रचना के स्थान दिऔनिहार) ,श्री मणिन्द्र कुमार झा (सी.ए.रचनाकर्म वास्ते सदिखन प्रोत्साहित केनिहार)श्री संजय कुमार झा (गायकरचनाकर्ममे निरंतरता हेतु प्रेरित केनिहार),पंडित हृदय नारायण झा (सदति दीर्घायु आ स्नेह सिंचित शुभकामना देनिहार) आदि द्वारा विमोचित ई पोथी अबिलम्ब अहाँ लोकनिक हाथमे सेहो उपलब्ध हएत. छिटपुट प्रकाशित रचनाक संग्रह हमर पहिल प्रकाशित पोथी अपनें लोकनि सहर्ष स्वीकारब ताहि आशाक संग............अपनेक सिनेह आ आशिर्वचनक आकांक्षी :
मनीष झा बौआभाइ
प्रतिक्रिया :
मणिन्द्र कुमार झा : माँ सरस्वती अपन कृपा सदिखन अहिना बनौने रहथि अपना सब पर
मोहनपुर दुर्गा पूजा : जय माँ सरस्वती
मणिन्द्र कुमार झा : नीक शुरुआत अछि
सुनील पवन अशेष शुभकमाना !!
संजय कुमार झा ढेरों शुभकामना
गोपी झा : बहुत सुन्दर बुक अछि
विभय कुमार झा : बहुत सुन्दर
कुन्दन पाण्डेय : जय मिथिला जय मैथिली
मनीष झा : बहुत खु:शी के बात भाई
रंजीत झा : मेनी कॉन्ग्रेचुलेशंस टू यू मनीष भाइ एंड आइ डू बिलीव दैट वी विल सी लॉट मोर लाइक दिस फ्रॉम यू इन फ्यूचर.......जय मिथिला
मनोज पाण्डेय : बहुत बहुत बधाई.....
संदीप शांडिल्य : अद्भुत आ गौरान्वित करय बला क्षण। जय मिथिला जय मैथिल
आर.के.मिश्रा : कवि मनीष झा “बौआभाइ” जी के ऐ कविता संग्रह प्रकाश मे लाब’ लेल नमन
अजय कुमार : ग्रेट..कीप इट गोइंग..
मुकेश झा : वाह देख क’ मोन खुश भ’ गेल,एकटा प्रति के अपेक्षा अछि .............बधाई मनीष बाबू
दयाकान्त मिश्र : बहुत बहुत बधाई मनीष जी
अमृता झा : बहुत बधाई मनीष जी
राजीव कुमार झा : बौआभाइ अहाँके धन्यवाद, आशा अछि अहिना हमरा सभ के मनोरंजन करबैत रहब January 28 at 9:30pm ·
संजीव झा : बहुत नीक अछि अहाँके किताब. संजीव कुमार झा,बाबूबरही
मणिन्द्र कुमार झा : कॉन्ग्रेचुलेशन मनीष जी
मणिन्द्र कुमार झा : वीएमवाइएम केर मेम्बर आ सभ मित्रगण स’आग्रह अछि ई बुक नीक-बेजाए अवश्य पढू आ एहि बुक के अपन बुक शेल्फी मे जगह प्रदान करू शोभा बढ़ायत
बद्रीनाथ मिश्र : कॉन्ग्रेचुलेशन मनीष जी अपनेंक लिखल पुस्तक के अध्ययन केलौं मोन गदगद भ’ गेल
22 फरवरी, 2015/संजय झा”नागदह”कें फेसबुक देबालस : · 
चिरंजिवी मनीष झा "बौआ भाई " के द्वारा लिखल "नीक - बजाय " (मैथिली कविता संग्रह) पुस्तक काल्हि मैथिली साहित्य महासभा स्थापना समारोह में भेंट स्वरुप भेटल . संगहि एकटा स्मारिका (सरस्वती पूजा महोत्सव -२०१५) विद्यापति मैथिल युवा मंच (पंजी) सेहओ भेटल जाहि में हमरो द्वारा लिखल "मिथिला में पोखरिक इतिहास " के स्थान भेटल अछि. चिरंचिवी "बौआ भाई " के सस्नेह आशीर्वाद जे हुनक कृति सेहो चिरंजीव होइन्ह एहि हेतु अनेकानेक शुभकामना. संगहि आगामी स्मारिका लेल सेहो आग्रह केलाह . हमर पूर्ण प्रयास रहत जे हम किछु लिख जरूर पठाबी एहि लेल हमहुँ अपन अग्रज आ बुजुर्ग साहित्यकार लोकनि सँ आशीर्वादक आकांछी छी -सहर्ष धन्यवाद
प्रतिक्रिया :
विभय कुमार झा : बौआभाई बहुमुखी प्रतिभाके धनी छैथ
विभय कुमार झा :  आशीर्वाद
February 22 at 2:51pm
विमल जी मिश्र : बौउवा भाए ! अपनो नीक छथिकिताबो नीक अछि ! बेजाय किछु नहि । जय हो
February 22 at 3:56pm
संजय झा : ओना बेजाए हटा देबाक चाहियनि  
February 22  at 3:56pm
शेफालिका वर्मा : बहुत नीक पोथी..मनीष झा “बौआभाइ....कौआ कुचरय अँगना मे आ पाहुन ठाढ़ दलान पर...सब कविता अपन अलग रंग रूप नेने..
February 25  at 1:27pm
शेफालिका वर्मा : माँ मैथिलीक भंडार सतत श्रृंगारमय रहत..आब ई विश्वास भ’ गेल....
February 25  at 1:45pm
11 मार्च, 2015/किशुन भारद्वाजक फेसबुक देबालस’ : · 
हमर अजीज मित्र मनीष झा “बौआभाइ” केर लिखल बहुतो गीत सुनलौं जे बजार में उपलब्ध अछि मुदा १ बेर फेर स’ बौआभाइ मैथिली कविता संग्रह “नीक-बेजाए” ल’ उपस्थित छथि.एहि पुस्तिका में बौआभाइ केर जीवनी स’ ल’ क’ अनेको प्रकारक पद्य साहित्य संलग्न अछि हम चित्र के माध्यम स’ हुनक लिखल “नीक-बेजाए” के संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत क’ रहल छी, पुस्तिका “नीक-बेजाए” पढ़ला के बाद मोन हरखित भ’ जाएत. सब मैथिल प्रेमी भाइ बन्धु स’ आग्रह जे १ बेर अवस्से पढ़ी.
जय मिथिला.जय मैथिली.
प्रतिक्रिया :
रंजीत झा : मैथिली साहित्य के प्रोत्साहन जरुर भेटक चाही
पवन नारायण : बौआभाइ हमर लाजवाब छथि किछु करबामे बिलकुल सही और बड्ड नीक छथि
मनोरंजन मिश्र : कॉन्ग्रेचुलेशन
27 मार्च, 2015/आदित्य भूषण मिश्रक फेसबुक देबालस’ : 
मनीष झा बौआ भाई अपनहि हमर डेरा पर आबि हमरा अपन पोथी भेंट कयलनि. ई हिनक पहिल प्रकाशित पोथी थीक. एहिठाम इहो कहब आवश्यक जे कहलो उत्तर प्रेमवश एकर मूल्य सेहो स्वीकार नहि केलनि। ई कहब आवश्यक एही लेल लागल जे मैथिली साहित्यकार के निशुल्क पोथी बटबाक आदति जेकाँ भ जाइत छन्हि से उचित नही. खैरपचीस गोट कविता छैक. भिन्न-भिन्न विषय पर लिखल कविता में विभिन्न रस भेटत.
ओना त मैथिली गीत सुननिहार आब हिनकर नाम सं अपरिचित नहि होयताह मुदा ई कहब आवश्यक जे मृदुभाषी बौआ भाई बहुत मिलनसार व्यक्तित्वक धनी छथि. ई एहिना लिखति रहथु से कामना.
प्रतिक्रिया :
राहुल झा : हमरो शुभकामना 
मनीष झा बौआभाइ मित्रडेरा पर जा पोथी भेंट करब अहाँक प्रेम छल.....मोल नञि स्वीकारबाक कारण अपनें स्पष्ट क'ए देल आ रहल बात व्यक्तित्वक तअपनें सन मृदुभाषी आ सृजनकारी व्यक्तित्वक ई प्रभाव अछि जे हुनका मिलनसार बनै परतनि । हृदयसँआभार व्यक्त करै छी ।
30 मइ2015/गुँजन श्रीक फेसबुक देबालस’ :
'पाहून ठाढ़ दलान पर'
आई जखन की बेसी कवि छंद आ लय सइतर अपन कविता मे गढ़ैत छथि ओहि समय मे बौआभाई के 'नीक-बेजाएमें संकलित कविता सब अपन गेयधर्मिता के गुण के कारण बेस प्रभावित करैत अछि। पढ़वा काल बेस मनलग्गू लगैत अछि संग्रह। 25 गोट कविता पढ़वा मे समय चाहे जे लगय मुदा ई संग्रह विवश करैत छैक एक्कहि बेर में आद्योपांत पढ़वा हेतु। लेल।
'सरगमबोहनि करैत संग्रह 'बसंत'क बाद आचरण पर अबैत अछि। आचरण शीर्षक में बौआभाई जीवन के सारगर्भित आ सम्यक बनेबाक लुतुक लगबैत छथि जे ठीके अनुकरणीय लगैत अछि। ठीक तुरत बाद मिथिलाक पताका फहरबैत मिथिलाक मान-मर्यादाक गुणगान बेस सहज आ ह्रदयस्पर्शी शब्दक माध्यम सकरैत छथि। एही कविताक अंत में शुभेक्षा प्रेषित करैत सब के संगोर करैत आगू बढ़वाक कामना नीक लगैत छैक। समाजक प्रेरणामायमाय-बाप के बखराआबो चेतशीर्षक कविता में सूक्ष्म मानवीय संवेदना छलकैत अछि जे 'भाईके सह्रदय हेबाक सहजे प्रमाण देत अछि। अंग्रेजीक एकटा नमहर कवि एलिन गिन्सबर्ग कहैत छथिन जे कविता ओकरे नीक भसकैत अछि जे की अपने नीक व्यक्तित्वक मालिक हो। ई बात सहजहिं बौआभाई पर लागु होइत अछि। कुमार भैंसुरअफरल पेट,चाही हमरा ढौआ,मधुरगर टोनक्रमशः निजी जीवनक अनुभव आ दहेज सझमारल स्थितिक गप्प चोटगर रुपे सोझाँ अनैत अछि। संग्रह में जे हमरा सब सबेसी नीक लगैत अछि कविता ओ थिक "पाहून ठाढ़ दलान पर"। बेजोड़ लगैत अछि ई आ बेर-बेर पढ़वा लेल बाध्य करैत अछि। भेल एहन अवतार छलदुन्नु बापुत,नीक-बेजाए,अप्पन-आन,नेताजीकें हाल,केदैन पुछैयै,सत्ताकें शिकारकविताक सब में व्यंगात्मक शैली में कुव्यवस्था पर सोझेसोझ प्रहार करैत छथि। हम ऋणी छि आ पढ़खातिर में अप्पन ककहरा गुरुजन आ पिताक प्रति आभार व्यक्त करब कविक आभारी ह्रदय के परिचायक लगैत अछि। आई जखन की नेन्ना सब एक्को साल नहीं मोन रखैत छथि अप्पना गुरुजन के ताहि समय में अप्पन आदिगुरु सबहक प्रति आभारी रहब बेस नीक लगैत छैक। छी मानव अलबत्ते हमसमयक अश्रुपातश्रधांजलिक बाटे कखन संग्रह शेष भजाइत अछि बुझेबे नहीं करैत अछि। एकटा नीक आ सत्यानुभव आधारित संग्रह लिखिबाक लेल 'बौआभाईके बहुत बहुत धन्यवाद् आ शुभकामना।
एकटा बात जे हमरा बुझमें नहीं अबैत अछि जे कवि अप्पन परिचय में विवाहक कुंडली कियैक ददैत छथिन आ एही कुंडली-सम्प्रेषण के शिकार बौआभाई के संग्रह सेहो भेल छनि।
औखन ऐतबहि।
प्रतिक्रिया :
रुपेश त्योंथ : मनीष झा “बौआभाइ” केर नीक-बेजाए...गुंजनश्रीकें नीक आ बेजाए दुनू एक्के संग लगलनि. समीक्षा पढू आ फेर मोन भजाए तपोथी मंगाकपढू.
चंचल मिश्र :  पाहून अयला लेला मिठाईविदाई मैं लय गेला ढ़ेर पाई। 
मनीष झा “बौआभाइ : प्रिय गुंजन भाइजाहि उद्गारक संग हमर ई अदना आ हल्लुक सन-सन रचनाक संग्रहीत पोथी नीक-बेजाए” केर अपनें सहृदय स्वीकारल ओ समीक्षात्मक तथ्य आ तर्क स’ स्पष्ट भ’ रहल अछि कारण व्यस्ततम समयमे स’ एतबा समय निकालि एक-एक टा कविताक शीर्षकक नाओं केर उल्लेख करैत तदनुरूप अपन भावनात्मक मोइस स’ एहि मुखपोथी पर सार्वजनिक रूपे सोझा राखब अपनेक गूढ़ अध्ययन आ विशेष प्रतिभाक द्योतक अछि आह्लादित त’ छीहे आ आभारीओ ताहि स’ कम नैं !
अहाँके कवि-परिचयक जे अंश अखरल तकर अन्देशा हमरा अपनों छल मुदा ई गप्प अहाँ छोड़ि आइ धरि केओ नैं कहला वा नैं लिखला तैं अपनेकें पुनः साधुवाद ! देखाओंसक त्रुटि कही वा हमर अप्पन तर्क कही वा एकरा सार्वजनिक रूपे हमर अपरिपक्वता मानल जाए......खैरजे ! से ! आगाँ स’ एहिमे सुधारात्मक प्रयास सेहो हएत ततबा आश्वस्त करै छी.
एक नीक मित्र आ शुभचिंतकक दृष्टिकोणे अपनेंक लिखल एक-एक आखर हमरा नीक लागल मने बेजाए अंश सेहो नीक लागल कारण एहि सभस’ ज्ञानबोध होइ छै जेकि ककरो स’ ’ सकै छै ताहिमे अहाँ हमर हृदय जीतल. एक बेर पुनः धन्यवाद ! साधुवाद ! आभार ! मंगलकामना !

कल्पना झा :
★★★ अनुभूति ★★★

किछु पाँति नीक बेजाय सँ ....

चंचल मन छी समटि कें रखने
तँञ बुझा रहल छी अति गम्भीर
मूँह अछैते बौक बनल छी
बिनु गुज्जी कें कान बहीर
हमर व्यथा के आबि क पूछत
जे हम कियेक भेलहुँ निःशब्द.........

अद्भुत !!!!!
आभार मनीष झा " बौआभाई "
सरिपों बड्ड विशेषक रचल ,
मैथिली कविता संग्रह
" नीक -बेजाय
कखन हमर नैना भुटका सभ सियान भए गेलाह आ माँ मैथिली के
अलंकृत करय लगलाह सरिपों भाने नहि भेल ।


दिलीप कुमार झा 'नीक -बजायकवि छथि मनीष झा 'बौआ भाई25 गोट कविता एहि पोथी मे संग्रहित अछि।मानिषजी पहिलेससँ गीत लिख रहलाह अछि।हिनक ई पहिल संग्रह अछि।ई कहि सकैत छी ,हिनक मैथिली कविता मे प्रवेश भेल अछि।मैथिली केँ हिनका सँ बहुत उम्मीद छैक,साहित्य मे आ भाषा आंदोलन मे सेहो।कविता मे अनावश्यक तुकबंदी सँ बचथि से आग्रह।पहिल संग्रह मे खाँटी शब्दक प्रयोग प्रभावित केलक अछि। लिखैत रहु मानिषजी ।
October 21, 2017


अक्षय आनन्द सन्नी : नीकक यात्रामे बेजाए कतए
आश बहुत अछि बाँचल एखनहु
मैथिल मिथिला पूत सॅऽ
गरिमा नहि धूमिल होयत कहियो
एहि शांति किरण केर दूत सॅऽ
ठीकेजाधरि अहां सन सुच्चा मैथिल नीक-बेजाएक बहन्ने अपन मनोभाव मातृभाषामे परसति रहताह ताधरि अपन संस्कार-संस्कृतिक गरिमा मटियामेट नै हेतैक से आसे नै पूर्ण विश्वास अछि.
एहि बेरूक दिल्ली यात्राक पहिने दिन मैथिल कवि आ आत्मीय भाइ मनीष झा बौआभाइ सपरिवार सभेंटघांटक सुखदगर संयोग भेटल छल. ताहि क्रममे हुनक कविता संग्रह "नीक-बेजाए" सहित मोटरी भरि साहित्यिक सनेश सेहो भेटल छल. गाम अबितहिं सभ सपहिने नीक-बेजाए सअवगत भेलौ. नीकक एहि यात्रामे बेजाए तकतौ नै भेटल. मुदाएकटा रूचिगर कविता संग्रह अद्योपांत पढ़ि जरूर गेलौ. आब कहैमे कनियो असोकर्य नै जे सभ सुआदक लयबद्ध कविताक ई संग्रह मोन-मोहि लेलक. हमरा जनैत एहि पोथीमे जतबहि सहजता सबौआभाइ हास्य परोसने छथि ओतबहि नीक सओ गंभीर बात सभ राखैमे सेहो सफल भेला अछि. एकठ्ठे कही तएकदम कम दामक एहि पोथीकें एकबेर अवश्य धांगल जा सकैए.