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Monday, January 05, 2015

त्रैमासिक पत्रिका "मैथिली लोकमंच"


मलंगिया आर्ट्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित कला, साहित्य, संस्कृति एवं विचारक त्रैमासिक पत्रिका "मैथिली लोकमंच"क सम्पादक ऋषि कुमार झामलंगियाजी सँटटका अंक (अक्टूबर-दिसम्बर,२०१४) हस्तगत प्राप्त भेल । जिज्ञासावश हब्बर-हब्बर समूचा पत्रिका अइ पार सँओइ पार धरि उन्टा कपढ़ब प्रारम्भ केलौं । मधुबनी पेंटिंग सँसजाओल आवरण सज्जा उत्कृष्ट । सम्पादकीय सुकरातसँमोदी धरिस्वच्छ भारतक सपना पर प्रासंगिक लागल ।

महेन्द्र मलंगिया लिखित आठ पन्नाक डाक,घाघ आ भड्डरीक दर्पणमेकृषि, लोक रहस्य, लोक धारणा, लोक व्यवहार, स्वास्थ्य, मौसम, तंत्र-मंत्र, ज्योतिष आदि सँसम्बंधित आलेख ज्ञानवर्धक लागल जेकि कोनो शोधार्थी वास्ते सेहो संग्रहणीय अछि । रमेश रंजन लिखित गाथा आ नाचक आलोकमे सलहेश”, कमल मोहन चुन्नू लिखित पत्र-परम्पराक पटाक्षेप” , डॉ. महेन्द्र नारायण राम लिखित मेहतर जातिक इतिहास आ जन जीवन”, भीमनाथ झा लिखित लोकवृत्त आ लिखित साहित्य”, पंचानन मिश्र लिखित पियाजीकें मैया बड़ कठोर दरद नहि बूझय रे”, डॉ. अयूब राइन लिखित कोसी क्षेत्रक किसानक समस्या : एक अध्ययन”, डॉ. शेफालिका वर्मा लिखित हमर भाषा मैथिली”, अरुणाभ सौरभ लिखित लोक देवता कारु खिरहरिक व्यक्तित्वक अध्ययनकिसलय कृष्ण लिखित सांस्कृतिक अतिक्रमणक शिकार होइत मिथिलाललित नारायण झा लिखित मिथिला विकासक लेल लकवाग्रस्त सोचक त्यजन जरूरी”, गोपेश कुमार चौधरी लिखित हमरा झाँखी नहि चाहीविभाकर झा लिखित नारीक अनंत पीड़ा”, ऋषि मलंगिया संकलित हास्यकथा गोनू झा आ बसुआ”, लोककथा खिच्चड़ि”, कवि रमेश रचित कविता द्वय उत्थान-पतन-नियमक प्रक्रियास्वतंत्रता”, एस. के. विद्रोही रचित दहेज़ प्रथा पर कसगर चोट बाप नहि, बरदबेच्चा छीआदि एक सएक अद्भुत संकलनकें एक गोट पत्रिकामे पाबि आह्लादित भेलौं ।

एहि पत्रिकामे मूर्धन्य कवि/कथाकार/रचनाकार/साहित्यकार लोकनिक मध्य हमर स्वरचित एक गोट कविता आबो चेतहमरा अहाँ समाजक मध्यकें किछु हराशंख मनुक्खक (जेकि कन्या भ्रूण हत्या आ नारी संग व्यभिचार सनक) किरदानीक कारणें सम्पूर्ण पुरुख जातिकें शर्मसार केने अछि पर आधारित अछि, कें यथोचित स्थान पाबि कृतार्थ भेलौं । ई पत्रिका अपन गुणात्मक स्तरकें निमाहि राखमे सक्षम रहए आ अपन उद्देश्यपूर्तिमे सफल होए ताहि शुभकामनाक संग...........

शुभेच्छुक : मनीष झा बौआभाइ

Tuesday, December 30, 2014

नहि लागइ दुज्जन हासा


दिल्लीक प्रेक्षक पर अपन मजगूत पकड़ बनौने मैथिली रंगमंडलक चित-परिचित संस्था मिथिलांगनसमय समय पर प्रयोगात्मक नाटकक तैयारीक संग उपस्थित दर्शककें आकर्षित करबामे प्रारम्भे ससफल रहल अछि. विगत २२ तारीख २०१४ क’ (सोमदिन) मंडी हाउस स्थित कमानी ऑडिटोरियममे मैथिली भोजपुरी साहित्य अकादमी,दिल्ली सरकारक तत्त्वावधानमे आयोजित आ मिथिलांगनकेर प्रस्तुति नहि लागइ दुज्जन हासाकेर मंचन देखबा लेल भाखा आ संस्कृति प्रेमी लोकनि दिल्लीक एहि जुआएल कनकन्नीमे कार्यालय स’ (खासकनोकरीहा लोक सभ) सबेर सकाल निकलि ककार्यक्रमक निर्धारित समय पर पहुँच आँइख आ कान दुन्नू पाथिकमंच दिस टकटक्की लगौने बैसल छलाह आ हुनका लोकनिक मध्य एकटा कुर्सी धेने हमहूँ बैसल रही. नाटक आदि सअंत धरि बेस रोचक, मनोरंजक आ सन्देशपूर्ण रहल. साहित्य,संगीत आ संस्कृतिकर्मी लोकनिकें जछोड़ि देल जाए तविद्यापतिक जीवन आ काव्य रसधाराक सम्मिश्रित प्रवाहकें संग दिशायमान हएब वर्तमान जुगक युवक वास्ते बड्ड कठिनाह काज अछि मने झेलब समान अछि कारण हुनका लोकनिकें बनाबटी प्रेम सम्बन्ध पर करोड़क करोड़ बजटकें बनाओल गेल हिन्दी/अंगरेजी सिनेमा आ पॉप,रॉक,फ्यूजन आदि ससरावोर संगीतक सोझा ई प्रयोग अनसोहाँत जेंकॉ बुझना जाइ छनि. नाटकक लेखक रोहिणी रमण झाओहि समस्त मिथककें तोड़ैत विद्यापतिक जीवनक मूल कथाकें जीवंत राखि समय केर मांगक अनुरूप हास्य,करुण आ व्यंग्यक मसल्ला सभरल संवाद सदर्शककें अनवरत मंच सजोड़ि रखबाक जे साहसिक प्रयास केने छथि ताहि हेतु निश्चितरूपे साधुवादक पात्र छथि. कथाकें रोचक बनेबा लेल नाटकमे नाटकक आयोजन आ ताहिमे सूत्रधार, नटी ,घूरन आ फिरनकें हाव भाव आ प्रस्तुतिकरण दर्शककें थोपरी बजेबा लेल आ लोटपोट करबा लेल बेर-बेर बाध्य करैत छल.

नाटक पंडित भवनाथ मिश्रक अनन्य शिष्य आ विस्फी ग्रामवासी गणेश ठाकुरक बालक विद्यापति ठाकुरक काव्य रचना आ जीवन गाथा पर आधारित छल. कामिनीक रूप वर्णित रचना जखन काने-कान जत्र-तत्र पहुँचलागल तलोक सभ एकरा विद्यापतिक यौवन दोषक संज्ञा देइत हुनक गुरुकें उपराग देनाइ शुरू कदेलनि जखन कि विद्यापतिक कथनानुसार प्रेम रस भावकें काव्यमे समाहित करचल गेल सभटा रचना राधा कृष्णक वास्ते समर्पित छल. गुरूजी विद्यापतिक सद्गुणी चरित्रकें जनितो ओहि समाजक कुचेष्टित अवधारणा सदूर चल जेबाक आदेश देलनि ई सोचि जे हिनक जीवन आ रचनाकर्म कुंठित नैं भजानि (मुदा ई गप्प अपना मोनेमे राखि हृदय समूर्धन्य आ महाकवि बनबाक आशीर्वाद देइत) आश्रम छोड़ि जेबाक आज्ञा देलनि. गुरूजीक आज्ञानुसार हुनका आश्रम सबहराए परलनि. विद्यापति त्रिलोकीनाथ महादेवक अनन्य भक्त छलाह. आश्रम सबहरेलाक पश्चात दिन-राइत महादेवक नचारी, महेशवाणी आदि रचनाकर्ममे तल्लीन रहलगला. विद्यापतिक एहि भक्ति सप्रसन्न भमहादेव स्वयं मनुक्ख (उगना) रूपमे अवतरित भचाकर रखबाक आग्रह केलनि आ हुनक सेवामे लागि गेला. ओना विद्यापतिकें हुनक अद्वितीय क्रियाकलाप सभ सकखनो काल कअसाधारण मनुक्ख हेबाक आभास होमय लगलनि तथापि अन्ठा कअपन काजमे लागि जाइथ. एक दिन जखन राजदरबार जाइत रहथि तबाटमे पियास सबेकल भगेला जतपाइनक एक बूँद पाएब कठिन छल. विद्यापति पियासे मूर्छित भठामहि लटुआ गेला. आब उगना की करत ? उगना (महादेव) तक्रोधे लाल जे एहि निर्जन बोनमे हमरा भक्त पर प्यासक दुष्प्रहार कोन दुष्ट केलक ? मुदा हुनक ई रौद्र रूप देखि स्वयं पार्वती सोझा आबि कर जोड़ि ठाढ़ भगेली, हे स्वामी ! अपनें हिनक सेवामे एत्तेक तल्लीन भगेलौं जे कैलाश नगरी आ बाल-बच्चा संग हमरो बिसरि गेलौं तैं हम हिनका पर पिपासाक प्रयोग केने छलौं जे अहू बहन्ने अहाँकें हमरा सभक ध्यान आओत. हे नाथ ! आब बहुत भेल आबो चलू अपन लोक. महादेव शांत होइत पार्वतीकें आश्वासन देलनि जे हिनका हम असगर एहि अवस्थामे छोड़ि नैं जा पाएब तैं हिनक तृष्णाकें शांत कअबिलम्ब अपन लोक आबि जाएब. उगना महाकविकें उठबैत जल पिऔलनि. महाकविकें जलमे गंगाजलक स्वादक अनुभूति होइत उगना सओ स्थान देखेबाक इच्छा जतौलनि मुदा उगनाकें रंग-बिरंगक बहन्ना आ लटपटाइत बोली सआभास भगेलनि जे ओ स्वयं साक्षात त्रिलोकीनाथ महादेव छथि आ जाबैत ओ हुनका लग जैतथि ताबैत महादेव अंतर्ध्यान.

एहि ठाम एकटा गप स्पष्ट करब आवश्यक जे आइ धरि विद्यापतिक संबंधमे जे किछु किम्वदन्ती अछि ओ ई अछि जे जखन विद्यापति उगनाकें चीन्हि जाइ छथि तउगना ई वचन लैत अछि जे ई गप्प हमरा आ अहाँकें छोड़ि ककरो नैं बुझबाक चाही अन्यथा हम अहाँक संग ओही दिन सछोड़ि देब. स्वामी आ चाकरक ई क्रम अनवरत चलैत रहैत अछि मुदा एक दिन उगनाकें महादेवक पूजा वास्ते फूल आ बेलपात अनबामे बिलम्ब हेबाक कारणें सुधीरा (विद्यापतिक अर्धांगिनी) क्रोधित होइत हुनका पर खोरनाठ (अधजरुआ जारैन) समारबा लेल दौगैत छथि आ से देखिते विद्यापतिक मूँह सहुनक महादेव हेबाक बात बजा जाइत छनि आ तत्क्षण उगना अंतर्ध्यान भजाइछ. सम्पूर्ण नाटक देखलाक पश्चात एहेन बुझना गेल जे उगना-विद्यापति बला प्रसंगकें एत्तहि समेटबाक पाँछा संभवतः नाटकक मंचन अवधिमे  समयाभाव वा विद्यापतिक जीवनकें एहि घटना सआंशिक रूप सजोड़ैत महाकाव्य रचना यात्रामे निरंतरता राखि राजा शिव सिंह आ रानी लखिमाकें केन्द्रित कआगाँ बढ़ेबाक उद्देश्य सेहो भसकैइयै.

राजा शिव सिंह महाकवि विद्यापतिक बालसखा छलाह तैं हुनका दुनू गोटेक मध्य विदु (विद्यापति) आ शिवू (शिव सिंह) केर संबोधन सवार्तालाप होइत छल आ महाकवि हुनक दरबारक मुख्य रत्नमे सएक कविकोकिलक उपाधि सनियुक्त कएल गेलाह. समूचा देशमे मुगलकें साम्राज्य छल आ तदनुरूप ओ किसान वर्गादिकें जबर्दस्ती मलगुजारी देबा लेल बाध्य करैत छल असूलीकें क्रममे कत्तेको बेर हिंसात्मक प्रवृतिक उपयोग करैत छल. राजा शिव सिंहकें मिथिला क्षेत्रक प्रजा पर भरहल अत्यचारक जखन जानकारी भेटलनि तविचलित भओकरा लोकनि सजुद्ध करबाक घोषणा कदेलनि. राजा शिव सिंह अपन बालसखा विद्यापतिकें रानी लखिमाकें सुरक्षित स्थान पर लजेबाक आदेश दमुगल सैनिक सभसजुद्ध पर निकलि गेला आ वीरगतिकें प्राप्त केलनि. रानी लखिमा एहि सभ बात सअनभिज्ञ विद्यापतिक संग रोने-बोने बौआइत रहली आ भिन्न-भिन्न समाजक लोक सभ हुनका लोकनिक सम्बन्धमे अनाप-सनाप चर्चा करैत लांछना लगबलगलनि. अनायास एक राइत स्वप्नमे लखिमा देखली जे महाराज मुगल सैनिकक हाथे मारल गेला आ हुनका वीरगतिकें प्राप्त भगेलनि. स्वप्नक वियोगमे रानी लखिमा सेहो अपन प्राण तजि देली आ चिरकालकें वास्ते शांत भगेली. विद्यापति एहि सभ घटना सआहत भमहाप्रयाण लेल प्रस्थान कलेलनि.

उपरोक्त समस्त ऐतिहासिक घटनाक्रमकें आँखिक सोझा प्रस्तुत करबाक जे अद्भुत प्रयास केलनि अछि से श्रेय निश्चितरूपे रंगमंडल प्रमुख आ एहि नाटकक निर्देशक संजय चौधरीकें जाइ छनि आ हुनक डेगमे डेग मिला कअप्पन सए प्रतिशत समर्पित आ लगनशील अभिनय क्षमता सइतिहासकें जियाकरखबामे जाहि कलाकारक उल्लेखनीय आ प्रशंसनीय योगदान रहल अछि हुनका बिसरब बेइमानी हएत. सूत्रधारकें रूपमे मैथिली फिल्म आ रंगमंचक वरिष्ठ अभिनेता शुभ नारायण झाकें मंच पर बेर-बेर उपस्थित होइत देखि कखनो काल कजेना कुमार शैलेन्द्र जीक आभास होइत छल कारण हुनका ओही वस्त्र परिधानमे बरख २०११मे मिथिलांगनक प्रस्तुति छुतहा घैलमे नटक भूमिकामे देखने रही. शुभ नारायण जीक अप्पन अभिनय छवि छनि जेकि बेस रोचक आ प्रभावी रहल कारण ध्यान भंग होइत दर्शककें कोना मंच दिस ध्यानाकर्षण होए से खोराक नीक जेंकां जनै छथि. मैथिली फिल्म आ रंगमंचक चर्चित युवा अभिनेता अनिल मिश्राराजा शिव सिंहक पात्र लेल सटीक चयन छल कारण हुनक कद-काठी आ अभिनयमे ओ सभटा गुण समाहित छल जेकि एकटा जमींदार वा राजाकें प्रवृतिमे देखबामे अबैछ. मुकेश दत्ततीन रूपमे देखेला गुड़कुन/घूरन आ उगना तीनू रूपमे बेजोर अभिनय. संजीव बिट्टूसेहो फिरनकें भूमिकामे सूत्रधार आ घूरन संग फिट छलाह आ बेस हास्य विनोद करौलनि आ तहिना ई तीनू गोटे थोपरी हंसोथि-हंसोथि घर लजेबामे सफल रहला. नटीकें रूपमे अंजली झा”, विद्यापतिकें रूपमे राजेश कर्ण”, लखिमाकें रूपमे साक्षी मिश्रा”, पार्वतीकें रूपमे पूजा श्री”, वृद्ध ग्रामीणक रूपमे रोहिणी रमण झा”, पंडित भवनाथ मिश्रक रूपमे रोहित झा”, सैनिकक रूपमे पीयूष खंडूरीभारत भूषण”, भट्ट/ग्रामीणक रूपमे प्रशांत कुमार”, पक्षधर/ग्रामीणक रूपमे अखिल विनयआदिकें अभिनय अद्भुत, प्रशंसनीय आ सराहनीय रहल. मंचक पाँछा- वस्त्र विन्यास अभय चौधरी”, नृत्य वर्षा दासईशा दास”, प्रकाश परिकल्पना सुबोध सोलंकी”, रूप सज्जा दुष्यन्त”, मंच सज्जा सरिता दास”. संगीत सुन्दरम”, पार्श्व स्वर सुन्दरम” , “प्रियंका दासरूपम मिश्रा”, ढोलक टुनटुनआदि.

विद्यापतिक जीवन पर आधारित नाटक आ ताहिमे हुनक गीतक भावकें स्वर  देब आ संगीतबद्ध करब सभसबेसी कठिनाह काज अछि मुदा ज’ “सुन्दरमसन मिथिलापूत संगीत साधक भजाए तबुझू जे विद्यापतिक गीतकें मौलिकताक संग सहजरूपे प्रस्तुत कएल जा सकैछ. जत्तेक बेर आ जत्तेक गीत हुनक पार्श्व गायनमे सुनैत छलौं बुझू जे रोइंयाँ ठाढ़ भजाइत छल आ लगैत छल जे विद्यापतिक गीतकें यथोचित सम्मान भेट रहल छनि.

कार्यक्रमक समापनमे मिथिलाक दू गोट सपूत जेकि रंगजगतमे सिद्धहस्त कलाकारक रूपमे जानल जाइत रहलाह अछि स्व. लक्ष्मी रमण मिश्रा (अलार्म नाम सप्रसिद्ध) आ स्व. कुमार शैलेन्द्र जिनक अतुल्य योगदानकें मिथिलाक इतिहासमे कहियो नैं बिसरल जा सकैछ केर असामयिक निधन सदुखी मैथिली भोजपुरी साहित्य अकादमीकें पदाधिकारीगण, “मिथिलांगनपरिवारक सदस्य सहित उपस्थित दर्शक लोकनि हुनका दुन्नू गोटेकें स्मरण करैत ठाढ़ भदू मिनटक मौन राखि श्रद्धांजलि देलनि.

Sunday, December 21, 2014

"रोमियो-जूलियट" बनाम "चान-चकोर"


दिल्ली आ लगीचक क्षेत्रक प्रेक्षक लोकनिकें समय समय पर नाटकक खोराक परसबा लए तत्पर मैथिली रंग मंचक नामी संस्था मैलोरंगद्वारा १५ दिसम्बर २०१४ (सोमदिन) मैथिली नाटक चान-चकोरकेर सफलतापूर्वक मंचन कएल गेल .

कार्यक्रमक पहिल सत्रमे मैलोरंग द्वारा दू गोट सम्मान ज्योतिरीश्वर सम्मान आ रंगकर्मी श्रीकांत मंडल पुरस्कार जेकि प्रतिवर्ष रंगकर्मक क्षेत्रमे हुनक अद्भुत प्रतिभा लेल देल जाइत रहल अछि केर आयोजन छल जेकि प्रायोजित छल मिथिलानी आ समाजसेवी डा. ममता ठाकुर द्वारा. ज्योतिरीश्वर सम्मान हेतु चयनित छला पटना रेडियो स्टेशन सप्रसारित होमय बला चौपालनामक नियमित कार्यक्रमक प्रस्तोता आ वरिष्ठ अभिनेता छत्रानन्द सिंह झा उर्फ बटुकभाइ आ रंगकर्मी श्रीकांत मंडल पुरस्कार हेतु युवा अभिनेता आशुतोष अभिज्ञ जेकि पटना स्थित भंगिमाक माध्यम ससमूचा देशमे बेस नाओं करहल छथि.

सम्मान समारोहक पश्चात मैलोरंगक ऑफिशियल वेबसाइट मैलोरंग डॉट कॉमआ प्रसिद्ध नाटककार आ मैलोरंग संस्थाक अध्यक्ष महेन्द्र मलंगियाक नाम सप्रकाशित पुस्तक महेन्द्र मलंगिया : जीवन एवं सृजनकेर विमोचन सेहो कएल गेल.

कार्यक्रमक दोसर सत्रमे प्रारम्भ भेल महीनो पूर्व नियारल आ अभ्यासल नाटक चान-चकोर”. ज्ञात होए कि चान-चकोर आंग्ल भाखाक सुप्रसिद्ध नाटककार विलियम शेक्सपीयर रचित जगजियार ऐतिहासिक नाटक रोमियो-जूलियटकेर मैथिली अनुवाद आ परिकल्पना अछि जेकि स्वयं मैलोरंग केर निदेशक प्रकाश झा केने छथि. मूल रचनामे रोमियो-जूलियटप्रेमक एकटा एहेन उपमा अछि जे ऊँच-नीच, जाति-पाति आ गरीब-धनिक सन रुढ़िवादी बन्हन के मिथ्या साबित करैमे सफल रहल अछि. प्रेमक एहि मूल कथाकें आधार पर कत्तेको सिनेमा आ नाटक रचल गेल. रामेन्द्र (रोमियो) एकटा नीच जातिक युवा जकरा एकटा उच्च खानदानक बेटी जूली (जूलियट) सप्रेम भजाइत छैक आ एम्हर जूलीक विवाह वास्ते सुयोग्य वरकें क्रममे राजकुमार प्रताप केर चयन कैल जाइछ मुदा विधिनाकें लिखल एहेन जे रामेन्द्र आ जूलीकें प्रेम शनैः शनैः दुन्नू दिस एतेक प्रभावी होमय लागल जे गुप्त रूप सगामक एक मंदिरमे भगवान आ पंडितकें साक्षी मानि एक-दोसराकें संग जीयब-मरब के गाँठ बान्हि परिणय सूत्रमे बन्हि जाइत अछि मुदा खिस्सा एत्तहि समाप्त नैं होइ छै . ओकरा दुन्नूकें एहि प्रेमक मध्य जाति-पाति एहेन बाधा भजाइत छैक जे रामेन्द्रकें अपन बालसखा मानेन्द्रक हत्या सजेकि जूली केर मसिऔत भाए राजा बाबूक हाथ सआ तत्पश्चात राजा बाबूक हत्या रामेन्द्रक हाथ समने दू टा हत्याक संग चुकबपरैत छैक. हत्याक सजा रामेन्द्रकें जिला-जयवार सनिर्वासित करबाक आदेशक संग होइछ जेकि रामेन्द्र आ जूली दुन्नू गोटे वास्ते असह्य छल आ एक-एक दिन एक-दोसरा बिन काटब मोस्किल. जूलीकें अन्न-पानि त्यागबाक कारणें कमजोर हएब मृत्यु समान छल आ तहिना रामेन्द्रक वास्ते जूलीक संग नैं हएब मृत्यु समान. समसान घाटमे अचेत परल जूलीकें मृत मानि रामेन्द्र बिख खाए अपन प्राण ददैछ मुदा चेतना अबैत जूली अपन रामेन्द्रक मृत शरीर देखि अपनें हाथे धरगर चक्कू सअपन हत्या कलैत अछि आ एहि तरहें ई अमर प्रेम इतिहासमे अंकित भेल आ होइत आबि रहल अछि.

अंगरेजिया संस्कृतिकें रूढ़िवादी परम्परा पर कुठारघात कशेक्सपीयर जाहि विषय-वस्तुकें समेटने छथि ताहि विषय-वस्तुकें मिथिलाक संस्कृतिमे तदनुसार सन्हिया कओकरा आधुनिक रूपमे प्रस्तुत करब बड्ड बेसी साहसक संग सृजनकारी विषय अछि.निश्चितरूपे एहि प्रयोगमे युवा रंग निर्देशक प्रकाश झा सफल रहलाह अछि आ एहि सफल यात्रामे हुनक संग डेगमे-डेग मिलाकचलनिहार रंगकर्मी लोकनिक योगदानकें कथमपि बिसरल नैं जा सकैछ यथा : मुकेश झा (चान/रामेन्द्र/रोमियो) ,अनिल मिश्रा (जूलीक पिता),सत्या मिश्रा (चकोर/जूली/जूलियट),प्रवीण कश्यप (पंडितजी),संतोष कुमार (राजा बाबू/मसिऔत भाए),अमरजीत राय (रामेन्द्रक बालसखा/बालेन्द्र), अमित कुमार (रामेन्द्रक बालसखा/मानेन्द्र),मनोज पाण्डे (राजकुमार प्रताप),रमण कुमार (जग्गा),ज्योति झा (ककना वाली दाई),नीरा झा (जूलियटकें माए),राजीव रंजन झा (पार्श्व स्वर),राजीव मिश्रा (पार्श्व ध्वनि),अजीत मलंगिया (तबला वादन), अखिलेश कुमार (की-बोर्ड),दीपक ठाकुर (पार्श्व संगीत), गोविन्द जी (प्रकाश परिकल्पना) आदिकें योगदान उल्लेखनीय सह प्रशंसनीय रहल.

Monday, October 20, 2014

अभिनेता आलोक सिंह

खगड़िया जिलाक बेलदौर थानान्तर्गत बलैठा गामक निवासी श्री आलोक सिंह जेकि अपन अभिनय जीवनकें शुरुआत ग्रामीण स्तरकें नाटक स’ केलनि आ वर्तमानमे मुंबई फिल्म उद्योग जगतमे कएक टा टीवी सीरियल आ बड़का पर्दाकें फिल्म धरि अपन अभिनय क्षमता स’ प्रतिष्ठित बैनर केर प्रोडक्शन सभमे नीक काज क’ रहलाह अछि । कोनो हिन्दी सीरियल निर्माणक क्रममे दिल्ली आएल रहथि हुनका संग संपर्क भेल बातचीत भेल आ मैथिलीमे हुनक बाजब आ भाषा प्रति अनुराग देखि रहल नञि गेल हुनक अभिनय यात्रा केर संदर्भमे किछु गूढ़-गूढ़ गपसप स’ अवगत भेलौं । दिल्लीमे हुनका संग भेल भेंटवार्ताक किछु अंश :

नमस्कार आलोक जी ! भेंट-घाँटक क्रममे अपनेंक स्वागत अछि ।

नमस्कार मनीष जी ! बहुत बहुत धन्यवाद ।

आलोक जीहमरा लोकनि अपनेंक शैक्षिक आ अभिनय पृष्ठभूमि स’ अवगत होमय चाहै छी ।

हमर पढ़ाई-लिखाई खगड़ियाक पी.डब्ल्यू. हाई स्कूल स’ मैट्रिक आ तकरा बाद कोशी कॉलेज स’ बी.ए. (इतिहास प्रतिष्ठा) तक भेल अछि । पढ़ाई करिते रही तही समयमे गामक नाटक सभमे भाग लैत छलौं । ब्लॉक स्तर पर हमरा गामक दुर्गापूजा बड्ड प्रसिद्ध रहै जाहिमे दू राति नाटक होइत छलैक । शुरुआतमे त’ हमरा सहयोगी कलाकारक भूमिका भेटै मुदा ओ मुख्य नायक स’ बेसी प्रभावी भ’ जाइ तखन पूरा गौंआ निर्णय ल’ हमरा मुख्य नायकक भूमिका लेल प्रस्ताव रखलनि आ तकर निर्वाह हम संभवतः केलियनि । ओही क्रममे कएल गेल किछु ऐतिहासिक  नाटक स्मरण अछि जेनाकि- सिकन्दर पोरसजालियाँवाला बागमे जनरल डायररावणवधमे रामचन्द्रजयद्रथवधमे अभिमन्युपृथ्वीराज चौहानअमरसिंह राठौरनादिरशाह आदि । ई क्रम बरख १९९८ धरि चलल आ गामक नाटकमे जखन खूब प्रशंसा होमय लागल त’ मनोबल बढ़’ लागल आ एकटा प्रोफेशनल कलाकार बनबाक इच्छा तीव्र होमय लागल आ बरख १९९९मे पटना दूरदर्शन स’ जुड़बाक अवसर भेटल ।

पटना दूरदर्शनक कोन-कोन कार्यक्रममे आ केहेन-केहेन पात्रक भूमिका सभ भेटैत छल ?

शुरुआतमे त’ छोट-छोट रोल सभ भेटैत छल जेनाकि ३१ दिसम्बरनव वर्षहोलीवैसाखीदिवाली आदिकें अवसर पर आयोजित स्पेशल एपिसोडमे कार्यक्रमक प्रस्तोता वा कोनो सीनमे कॉमेडी करबाक अवसर भेट जाइत छल । बरख २००१मे एकटा सीरियल कब तक सहेंगे हम” जाहिमे किछु नामी कलाकारक संग अभिनय के मौका भेटल ओहिमे मुख्य नायक इंस्पेक्टर आदेश सिन्हा के रोल भेटल छल आ सहयोगी कलाकारमे जेठ भाइकें भूमिकामे छलाह ऋषभ शुक्ला (महाभारतक शान्तनु)भाभी के भूमिकामे कंचन जी (सहायक अभिनेत्री,सनम बेवफ़ा)गीत लिखने रहथि प्रसिद्ध गीतकार विनय बिहारी (वर्तमानमे सम्प्रति-कला आ संस्कृति मंत्री,बिहार सरकार) पार्श्व स्वर देने रहथि महेन्द्र कपूर ।

प्रायः अपना सभ दिसक लोकके संग एकटा आर समस्या रहल अछि (ओना वर्तमानमे एहि मानसिकतामे किछु परिवर्तन जरूर भेलैइयै) जे अभिभावक एहि कर्ममे उतरबाक वास्ते स्वीकृति नञि देइत छलाहअपनेंक केहेन अनुभव रहल अछि ?

एहि मामिलामे हम बहुत खुशनसीब छी जे हमर माता-पिताभाई-बहिनगौंआ-समाजकर-कुटुम सभ कियो बहुत प्रोत्साहित करैत रहलाह अछि । हमर पिताजी स्वयं रंगमंचक बहुत नीक अभिनेता रहल छथि तैं ओ एहि वास्तविकता स’ नीक जेंकाँ परिचित छलाह आ ततेबा नहि हम प्रारम्भमे कएकटा सीरियलमे निर्माता सेहो रहल छी जाहिमे आर्थिक सहयोग घरे स’ भेटल रहय । ओना हमरा घरमे फिल्मी कलियाँफिल्मी दुनियाँमायाइंडिया टूडे आदि पत्रिका नियमित रूप स’ लेल जाइत रहैक आ हम सभ छोटे स’ कलाकार सभक जीवनी पढ़ियै जे कियो कंडक्टर रहैकियो मजदूर रहैकियो ड्राइवर रहैकियो स्पोर्ट्स ब्वॉय रहै आ संघर्ष करैत-करैत आइ बॉलीवुड के प्रतिष्ठित कलाकारमे गानल जाइत छथि तैं हमरा घरमे सभ गोटे एहि सच्चाई स’ अवगत रहथि । अढ़ाइ बरख धरि काजक वास्ते बौआइत बौआइत हम स्वयं विचलित भ’ गेलौं मुदा घरक लोक तहियो मनोबल बढ़बैत रहल तैं एहि स’ नीक अनुभव आर की भ’ सकइयै हमरा वास्ते ।

पटना स’ मुंबई धरिक यात्राक सम्बन्धमे किछु कहल जाउ आ ओत’ स्थापित हेबामे किनक सहयोगकें स्मरण राख’ चाहब ?

सीरियल कब तक सहेंगे हम” हमरा वास्ते संजीवनी बूटीकें काज केलक कारण अही बहन्ने नीक नीक कलाकार लोकनि स’ सम्पर्क बढैत चल गेल आ फेर दोसर सीरियल पायलट” केर पार्श्व गायन लेल हमरा लोकनि महेन्द्र कपूर जी लग गेलौं जकर रेकॉर्डिंग जुहू चपाटी स्थित नेपोलियन स्टूडियोमे भेल छल आ लगातार मुंबईकें आवागमनकें क्रममे बरख २००३मे महेन्द्र कपूरजीक बालक रोहन कपूर जी स’ परिचय भेल । रोहन कपूर जी बहुतो सूत्र सभ देलनि मुदा अपन किस्मत कहियौ वा संघर्षक दिन कहियौ कोनो तेहेन काज सभ नञि भेटैत छल बादमे ओहो बेसी काल विदेशेमे रहैत छलाह आ तै ल’ ’ सम्पर्को कम होमय लागल । किछु आर लोक सभ जिनका संग भेंट-घाँट रहय पुनः मिल’ गेलियनि त’ पता चलल जे ओहिमे स’ किनको ऑफिस शिफ्ट भ’ गेलनि त’ केयो कमरा बदैल लेलनि आ ओहि समयमे मोबाइलक सेहो एते चला-चलती नञि रहै केयो-केयो पेजर नं. देने रहथि मुदा तै स’ तालमेल नञि बैस पाबय । ओही दरम्यान धीरे-धीरे पूरा फिल्म इन्डस्ट्री के चक्कर लगेलौं आ तकरीबन अढ़ाइ बरख धरि कैमरा फेस करैके मौका तक नञि भेटल मुदा हमहूँ ठनने रही जे खाली हाथ आब घर नञि जाएब । ओहि ठाम टिकबा वास्ते पाइ सेहो आवश्यक छल तैं रतुका शिफ्टमे नौकरी करी मुदा रतुका जगरना के बाद दिनमे हिम्मत काज नञि करै आ दिल बेर बेर एतबे कचोटय जे कलाकार बन’ आयल रही आ ई कोन नोकरी कर’ लगलौं । गाम-घरक वा जान- पहचानक किछु लोक सभ रहबो करथि मुदा हुनका लोकनिकें कला क्षेत्रमे नञि त’ कोनो सम्पर्क रहनि आ नें कोनो अभिरुचि ।

एहेन समयमे विचलित नञि भ’ ’ संघर्षकें जारी रखबाक पाँछा कोन एहेन अपेक्षा छल ?

उम्मीद कहियौ वा संजोग कहियौ बरख २००६मे एक गोट भोजपुरी फिल्म देवरजीमे अभिनेता कृष्णा अभिषेक आ संगीता तिवारी जीकें संग काज करबाक अवसर भेटल आ ओही दरम्यान एहि फिल्मक चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर अब्बास स’ मुलाकात भेल जेकि नदीम रिज्वीक  फिल्म अभिनेता राजपाल यादव के संग अंडरट्रायल” बनबैत रहथि ओहिमे एकटा सहयोगी कलाकारकें रोल देलनि जाहिमे हमर आठ-नौ टा सीन रहय । किस्मत एहेन जे जखन काज भेटब शुरू भेल त’ पता चलल जे हमर छोट भाईकें ब्रेन ट्यूमर भ’ गेलनि तुरंत बोरिया-बिस्तर समेटि घर चल गेलौं आ हुनक इलाज वास्ते दिल्लीमुंबईहरिद्वारवैद्यनीम-हकीम लोक जत्त’ कहय से संभवतः सभ ठाम ल’ गेलियनि आ करीब एक बरखक इलाजकें बाद जखन ओ सुधारावस्थामे एला त’ पुनः २००८के अंतमे मुंबई आबि शून्य स्तर स’ काज ताकब शुरू केलौं । एकटा प्रोडक्शन हाउसमे नोकरी पकड़लौं आ जखन धीरे-धीरे कास्ट डायरेक्शनकें अनुभव होमय लागल तखन आब अपन स्वतंत्र काज सेहो कर’ लगलौं जाहि क्रममे ढेरी विज्ञापन सभ भेट’ लागल । २००९मे एकटा बहुत पैघ प्रोडक्शन हाउस सिनेविस्टाकें कास्टिंग डायरेक्टर स’ परिचय भेल हुनका सभ बात कहलियनि ओ हमरा बी.ए.जी. फिल्म्स के ऑफिस (वर्तमानमे एकता कपूर के बालाजी टेलीफिल्म्स) ऑडिशन लेल पठेला संजोगवश हमर चयन भेल शाहवाज खान अभिनीत सीरियल मितवा” आ ओ शूटिंगक चारि दिनक बाद स्टार प्लस पर प्रसारित भेल । ज’ देखल जाए त’ ई सीरियल हमरा लेल बड्ड लक्की छल कारण जे तकरा बाद लगातार काज भेट’ लागल आ ओत्तहि स’ हमर उम्मीद जागब शुरू भेल ।

जखन फेर श्रीगणेश भेल त’ कोन-कोन चैनल वा प्रोडक्शन कम्पनी सभ लेल काज करबाक अवसर भेटल ’ स्मरण होए त’ किछु सीरियल आ फिल्मक नाओं सेहो जनाओल जाउ ।

सिनेविस्टा कम्पनीकें कास्टिंग डायरेक्टर जेकि हमरा ऑडिशन लेल पठौने छलाह मितवामे अभिनय देखि ओ सेहो अपन सीरियल अजनबी” लेल ऑफर केलनि जेकि स्टार वन (आब लाइफ ओके) पर प्रसारित भेल छल । बरख २०१०कें सितम्बर महिनामे स्टार प्लस के एकटा बहुत बढियाँ सीरियल कालीमे आशुतोष राणाजीक संग बहुत रास एपिसोडमे अभिनय करबाक अवसर भेटल तकरा बाद त’ सोनीस्टार प्लसदूरदर्शनलाइफ ओकेकलर्सजी टीवीसब टीवीएम टीवीएनडीटीवी इमेजिनन्यूज चैनल आदिकें माध्यम स’ सीरियलकें लाइन लागि गेल जाहिमे लागी तुझसे लगन”, “बड़े अच्छे लगते हैं”, “गीता”, “भाग्य विधाता”, “अफसर बिटिया” “धर्मपत्नी”, “पापड़पोल”, “आर.के. लक्ष्मण की दुनियाँ”, “सी. आई. डी.”, “सावधान इंडिया”, “क्राइम पेट्रोल”, “हिटलर दीदी”, “ये रिश्ता क्या कहलाता है”, “साथिया साथ निभाना”, “ये हैं मोहब्बतें”, “पुनर्विवाह”, “हंटेड नाईट”, “महाराणा प्रताप”, “झाँसी की रानी”, “फीयर फाइल”, “पवित्र बंधन”, “मर्यादा”, “प्रतिज्ञा”, “अर्जुन”, “सरवीन दुग्गल”, “दी बॉडी प्रोजेक्ट”, “लव दोस्ती डांस”, “प्रधानमंत्री”, “वन्दे मातरम्”, “एक बूँद इश्क”, “शपथ”, “कैसा ये रिस्क हैअजब सा इश्क है”, “पुलिस फाइल”, “शैतान”, “जुगनी चली जलंधर” आदि तकरीबन ५०टा स’ बेसी सीरियलमे काज करबाक अवसर भेटल आ वर्तमानमे बहुतमे क’ रहल छी । बड़का पर्दाकें फिल्ममे हिन्दी अंडरट्रायलमे राजपाल यादवकें संग, “सिंघम रिटर्न्समे अमोल गुप्तेकें संग भोजपुरी देवरजीमे कृष्णा अभिषेककें संग, “सैंया के साथ मड़इया में” पवन सिंहकें संग, “ससुरारी जिन्दाबाद” रविकिशनकें संग, “भोजपुरिया डॉन” मनोज तिवारीकें संग, “एलाने जंग” “नेहिया लगवली सैंया से” आदि करीब एक दर्जन स’ बेसी । मैथिलीमे नवीन मिश्राजीक फिल्म दीवाना अहाँक प्यार में” खलनायक मंटू झाक संग अभिनय करबाक अवसर सेहो भेटल अछि । विज्ञापनमे अशोक त्रेहानकें संग टी वी एस मोटरसाइकिल”, महक जैनकें संग फेयर एंड लवली”, “एक्सिस बैंक”, “साईकिल छाप अगरबत्ती” सन-सन करीब दर्जन भरि स’ बेसी ब्रांडकें विज्ञापन ।

एत्तेक रास फिल्मसीरियल आ विज्ञापन स’ जाहिर होइत अछि जे अपनें अभिनयमे खूब नीक मँजा गेल छी । एखन धरि सहयोगी कलाकारक रूपमे विभिन्न सीरियलमे देखलौं अछि मुदा नियमित रूप स’ नञि । दर्शक स’ नियमित रूपे जुड़बा लेल कोनो तेहेन सीरियल केलौं अछि त’ कहल जाउ ।

कोनो भी क्षेत्रमे संघर्ष जीवन भरि संग रहै छै खासक’ कला सनक कैरियर बला क्षेत्रमे किछु बेसिए । हँ’ एतबा त’ जरूर अछि जे जीविकोपार्जनमे कोनो दिक्कत नञि होइत अछि आ संपर्क व्यावसायिक लोक सभ स’ बेसी अछि तैं काज सेहो लगातार भेट रहल अछिमुदा एखन धरि कोनो तेहेन सीरियल नञि आएल अछि जाहिमे नियमित रूप स’ उपस्थित होइत रही मने दू-चारि वा दस टा एपिसोडमे काज भेटल फेर दोसर सीरियल के तलाश जारी । हमरा आइ धरि अहू बात लेल मोन मलीन नञि भेल जे लीड रोल नञि भेटिक’ सहयोगी कलाकारक रोल भेटैत कारण हमरा जे रोल भेटैत अछि ओकरे समर्पित भाव स’ निर्वहन करै छी आ संतुष्ट रहै छी आ लीड रोल तक पहुँचबा लेल प्रयास जारी अछि । ओना एपिक” नामक चैनल पर शीघ्र प्रसारित होमय बला सीरियल टाइम मशीनमे पुलिस इंस्पेक्टरकें रूपमे श्रृंखलाबद्ध काज करबाक अवसर भेटल अछि । किछु आर नीक-नीक चैनल दिस स’ सेहो ऑफर अछि जकर शूटिंग एखन शुरू नञि भेल अछि जकर जानकारी सेहो अबिलम्ब देब । आशा अछि जे अही बहन्ने दर्शक लोकनिक सोझा नियमित रूप स’ अबैत रहब आ हुनका लोकनिक नेहसिनेह आ दुलार पबैत रहब । 

अपनेंके त’ आब टेलीविजन स’ ’ ’ बड़का पर्दा धरिक कैमरा फेस करबाक बेस अनुभव अछि । एहि दुन्नू ठाम अपना आपकें प्रस्तुत करबामे कोन बात सभक ध्यान राख’ परैइयै ?

निश्चितरूपे ई दुन्नू जगह अपना आपमे एकटा महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत अछि मुदा दुनुमे अंतर ई छैक जे कैमराकें सोजहा अहाँ कोन रूपे प्रस्तुत होइत छी । बड़का पर्दाकें फिल्मक शूटिंग वास्ते जे कैमराकें फ्रेम होइ छै तैमे अभिनय करबा लेल शारीरिक स्वतंत्रता रहै छै जे हाथ पैर कने बेसियो फरकि गेल त’ ओकर गुंजाइश भ’ जाइ छै आ ततेबा नञि कोनो गलती भ’ गेला पर बेर-बेर री-टेक वास्ते मौका सेहो भेटै छै आ समय पर्याप्त रहै छैएकर ठीक विपरीत सीरियलकें शूटिंग वास्ते कैमराकें फ्रेम सीमित दायरा तक निर्धारित रहैत छैक तैं ओतबेमे अपना आपकें सेट क’ ’ लाइन बाइ लाइन डायलॉग आ एक्स्प्रेशन दुन्नूकें धियानमे राखि अभिनय कर’ परै छै जत’ बहुत बेर री-टेककें अवसर नञि भेटै छै कारण आधा घंटाकें सीरियलक टेलीकास्टमे साढ़े सात मिनटकें विज्ञापन आ साढ़े बाइस मिनटकें कहानी मात्र देखाओल जाइत छैक । प्रायः शूटिंग टटके रहै छै मने रनिंग बला सीरियलकें बेसी स’ बेसी एक सप्ताह पहिलुक शूटिंग आ कत्तेककें मात्र दूइए-तीन दिन पहिलेक शूटिंग रहै छै त’ स्वाभाविक छै जे अपना आपकें नीक जेंकाँ प्रस्तुत करबा लेल कम समयमे सभ बातक धियान राखब आवश्यक होइत छैक । 

अपनें १९९८-९९ स’ व्यावसायिक रूपें अभिनय क्षेत्रमे आबि चुकल छी । राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न चैनलकें माध्यम स’ प्रसारित धारावाहिकमे नियमित रूप स’ अवसर सेहो भेट रहल अछि मुदा मैथिली वा भोजपुरी फिल्ममे सक्रिय रूप स’ नञि भेटबाक की कारण ?

ई बात त’ निश्चित छै जे केयो एहेन कलाकार नञि हेताह जे अपन मातृभाषा वा क्षेत्रीय फिल्ममे काज करबाक इच्छुक नञि होइथ कारण जे अपन माटिक ऋण केयो नञि बिसरैत अछि । हमरा जे एखन तक अनुभव भेल अछि क्षेत्रीय फिल्म निर्माणमे पहिल समस्या छै भाई-भतीजावादकें आ दोसर बजटकें । भोजपुरी फिल्मकें एक स’ एक दिग्गज निर्माता सभ काज क’ रहल छथिन हुनका सभ लग मुख्य अभिनेताकें देबा लेलआइटम सॉग बाली हिरोइनकें देबाक लेल पाइ छनि मुदा सहयोगी कलाकारकें देबा लेल बजटकें अभाव भ’ जाइ छनि जखन कि सहयोगी कलाकार सेहो एकटा महत्त्वपूर्ण अंग होइत छैक । किछु निर्माता एहेन छथि जिनकर एकटा टीम तैयार छनि बस ओतबे कलाकारकें संग बेर-बेर फिल्म बना रहल छथि त’ एहेन सन परिस्थितिमे आर कलाकारकें अवसर कोना भेटतनि । हम त’ नामक उल्लेख नञि कर’ चाहै छीबहुत एहेन नामी गिरामी कलाकार सभ ओत’ पहुँचै छथि जेकि मैथिली आ भोजपुरी फिल्ममे स्थापित छथि आ हिन्दी सीरियलमे एक्को-दू टा सीन करबा लेल तैयार रहै छथि मुदा आव-भाव आ अभिनयमे परफेक्शननैं हेबाक कारणें ऑडिशन तकमे पास नञि भ’ पाबै छथि । हम किनको प्रतिभा पर प्रश्नचिन्ह नञि लगा रहल छियनि बस हम एतबे कह’ चाहै छियनि ज’ अभिनय क्षेत्रमे आब’ चाहै छी त’ किछु तैयारी आवश्यक छै आ महत्त्व ई नञि रखै छै जे रोल लीड अछि वा सपोर्टिंग अछि महत्त्व रखै छै एक्सप्रेशन आ प्रेजेंटेशन । निर्माता लोकनि स’ सेहो आग्रह जे अहाँ जखन व्यावसायिक रूपे फिल्म निर्माण क्षेत्रमे आएल छियै त’ फेर व्यावसायिक लोक सभकें संग काज करियौ आ ओकर रोजी रोटी स’ जूड़ल समस्याकें सेहो ध्यान रखैत काज करियौ । हिन्दीक पैघ-पैघ प्रोडक्शनमे काज भेटब कने मोसकिल जरूर छै मुदा काज भेट गेलाक बाद कम स’ कम रोजी रोटीक समस्या त’ नञि छै कारण ओकर पेमेन्ट ऐसोसिएशन द्वारा निर्धारित छै आ सेहो निश्चित समयांतरालमे । नीक विषय वस्तु पर आधारित कहानी वास्ते ज’ कोनो फिल्मक प्रस्ताव आओत आ दमदार रोल भेटत त’ सहर्ष काज करबा लेल तैयार छी ।

आगाँ फिल्म निर्माण वा निर्देशनमे एबाक कोनो एहेन योजना ?

फिलहाल एखन त’ नञि कारण जे शुरुआतमे पटना दूरदर्शन स’ निर्माताकें रूपमे जूड़ल रही और बड्ड बेसी खराब अनुभव रहल । घरक पैसा स’ ’ ’ अपनों जे किछु कमेने रही सभटा गमेलौं । भविष्यमे निर्माण क्षेत्रमे उतरबाक संभावना अछि । निर्देशनमे हमर कोनो खास अभिरुचि नञि अछि मुदा समय एला पर सेहो विचार कएल जेतै ।

मुंबईमे नवआगन्तुक कलाकरकें अपनें कोन रूपें सहयोग क’ सकै छियनि आ हुनका कैरियर बनेबा संबंधी की मार्गदर्शन वा सनेश देब’ चाहबनि ?

हम की मार्गदर्शन आ सनेश देबनि कारण हम त’ स्वयं संघर्षशील छी मुदा एहि स्तर पर हमरा स’ यथासंभव प्रयास भ’ सकैत अछि मदैत करै छियनि । अपना सभ दिसका बहुत लोक एलथि परिचय भेल पता चलल जे कियो खगड़िया स’ छथिकियो पटना स’ छथिकियो दरभंगा स’ छथिकियो भागलपुर स’ छथि हुनका लोकनिकें कास्टिंग डायरेक्टर सभक पता द’ ’ पठा दै छियनि जिनका अन्दर प्रतिभा छनि ओ टिकि जाइ छथि अन्यथा ट्रेन पकड़ि वापिस चलि जाइ छथि । धैर्य त’ चाहबे करी कारण बहुत जल्दी नेम फेम ओकरे लेल संभव छै जकरा अन्दर स्वयंकें प्रतिभा होइन आ कियो गॉडफादर मदैत केनहार बैसल होइन अन्यथा अपना आपकें स्थापित करबा लेल शून्य स’ आरम्भ कर’ परतनि ।

ई एकटा सुखद क्षण छल अपनें संग भेंट-घाँटकें । अपनें जे किछु समय देल हमरा वास्ते ताहि लेल धन्यवादक संग अपनेक उज्जवल भविष्यक कामना करैत छी ।

मनीष जी ! ई मात्र अहीं लेल नैं हमरो लेल सुखद क्षण अछि जे अहाँ लोकनि सन समर्पित मिथिलापूतक संग बैसि अपन अभिनय यात्राक संदर्भमे नीक-अधलाह अनुभव साझा करबाक अवसर भेटल । हृदय स’ धन्यवाद देइत छी आ अपनहुँकें उज्जवल भविष्यक कामना करैत छी ।