भाषा सेवा लेल आंशिक योगदान, अपने लोकनिक अवलोकनार्थ। क्लिक कय पढ़ल/देखल/सुनल जा सकैत अछि :

रिपोर्ट (63) अखबारक पन्ना (33) ऑडियो/वीडियो (21) मैथिली नाटक (19) कथा मैथिली (18) मैलोरंग (16) मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (14) दैनिक जागरण (12) मैसाम (10) मैथिली फिल्म (8) साक्षात्कार (8) मैथिली-भोजपुरी अकादमी (6) आलेख (5) ऑफिसक अवसर विशेष पर (3) झलक मिथिला (3) नवभारत टाइम्स (3) पाठकीय प्रतिक्रिया (3) बारहमासा (3) मैथिली पोथी (3) अखिल भारतीय मिथिला संघ (2) अछिञ्जल (2) अपराजिता (2) कथा मंचन (2) दीपक फाउंडेशन (2) मिथिला स्टूडेंट यूनियन (2) मिथिलांगन (2) मैथिली पत्र-पत्रिका (2) मैथिली लघु फिल्म (2) यात्रा संस्मरण (2) विश्व मैथिल संघ (2) सम्मानक सम्मानमे (2) हिन्दुस्तान टाइम्स (2) अस्मिता आर्ट्स (1) एकेडमी ऑफ़ लिटरेचर आर्ट एंड कल्चर (1) डी डी बिहार (1) देसिल बयना हैदराबाद (1) धूमकेतु आर्ट्स (1) भारती मंडन (1) मिथिला मिरर (1) मिनाप (1) मैथिली एलबम (1) मैथिली कथा (1) मैथिली जिन्दाबाद (1) मैथिली धारावाहिक (1) मैथिली पत्रकार (1) मैथिली लोकमंच (1) मैथिली संबोधन (1) विदेह (1) साझी धुआँ (1) साहित्य अकादेमी (1) साहित्यिक चौपाड़ि (1) स्वरचित (1) हिन्दी नाटक (1)

मुख्य पृष्ठ

Saturday, May 08, 2021

मैथिली कथा वाचन श्रृंखला, नवभारत टाइम्स

मैथिली साहित्य एवं संगीत में विगत डेढ़ दशक से सक्रिय युवा मनीष झा बौआभाइ इन दिनों मैथिली कथा को एक अलग रूप देने में जुटे हुए हैं ।

मनीष का मानना है कि आए दिन सहित्य सृजन में युवाओं की सहभगिता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है । समाज को हमेशा से उचित मार्गदर्शन के लिए साहित्य एक अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण विधा है । साहित्य में नई सृजन के साथ-साथ यह आवश्यक है कि हमारे पूर्वज सहित्यकार के योगदान से समाज को समय दर समय रू-ब-रू करवाना पड़ेगा और उनके प्रति कृतज्ञ भाव को सहेज कर रखना होगा । इन्हीं उद्देश्य के साथ इन्होंने 'कथा मैथिली : उत्कृष्ट कथाक वाचन श्रृंखला' नाम से यू-ट्यूब, फेसबुक एवं साउंडवेव्ज एफएम जैसे सोशल मीडिया से इसकी शुरुआत की है । 

मनीष बताते हैं कि यह उनकी एक दीर्घ एवं बहुउद्देशीय परिकल्पना है कि मैथिली साहित्यिक संपदा के विस्तार में एक कथाकार के रूप में जिन रचनाकारों ने योगदान दिया है, उन सभी के कथा को एक सुनिश्चित एवं वृहत टीम के साथ रेडियो नाटक के रूप में कथानुरूप शैलीगत वाचन कर इंटरनेट आर्काइव के रूप में सुरक्षित रखा जाए । मैथिली को संवैधानिक मान्यता मिलने के बाद इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है । मैथिली भाषा को लेकर अकादमिक तौर पर यूपीएससी, बीपीएससी, यूजीसी नेट और पीएचडी करनेवालों को लाभ मिलेगा ।

इनकी परिकल्पनाओं को साकार करने में मित्र राजीव मिश्र भरपूर सहयोग कर रहे हैं । सहयोगी वाचक के रूप में सोनी नीलू, रूपा मिश्रा एवं अमरजी राय भी योगदान कर रहे हैं । उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-2020 को कथा मैथिली की शुरुआत की और अब तक एक दर्जन से अधिक रचनाकारों के कथा वाचन प्रसारित कर चुके हैं । कथा मैथिली की तरह अन्य विधाओं पर भी युवा को इस तरह आगे आने के लिए आह्वान करते हैं । 

Friday, April 16, 2021

कथा संख्या-१५ : छत्ता मे भूड़ (वैद्यनाथ झा)

पोस्टर पर क्लिक क सुनल जाउ :

कथा : छत्ता मे भूड़  
लेखक : वैद्यनाथ झा
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन



Thursday, April 08, 2021

कथा संख्या-१४ : अर्थयुग (शेफालिका वर्मा)

पोस्टर पर क्लिक क सुनल जाउ :

कथा : अर्थयुग  
लेखिका : शेफालिका वर्मा
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन



Wednesday, March 24, 2021

कथा संख्या-१३ : इहो मनोरथ पूर भेल (ऋषि वशिष्ठ)

 पोस्टर पर क्लिक क सुनल जाउ :

कथा : इहो मनोरथ पूर भेल  
लेखक : ऋषि वशिष्ठ
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन



Saturday, January 30, 2021

मैथिली बाल साहित्योत्सव (एकेडमी ऑफ़ लिटरेचर, आर्ट एंड कल्चर)

अकैडमी ऑफ लिटरेचर, आर्ट एंड कल्चर के द्वारा आयोजित मैथिली बाल सहित्येत्सव में वच्चों का उत्साह देखते ही वनता था। 24 जनवरी को निर्माण विहार स्थित नरेज्यान स्टूडियो में आयोजित इस कार्यक्रम में 50 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया। दिल्‍ली में पहली बार बच्चों के लिए मुख्य रूप से मैथिली में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने साहित्य की विधा कविता और कहानी का पाठ तो किया ही, अपने गीत, नृत्य और अभिनय प्रतिभा से भी प्रभावित किया।

शालिनी ठाकुर की गोसाओनि गीत 'जय-जय भैरवी' से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद आकृति झा ने मंगलगान की प्रस्तुति दी। उद्घाटन सत्र के समापन के पश्चात बाल नृत्य (झिझिरकोना) का आयोजन हुआ जिसमें अदिति झा ने भगवती गीत पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। मैथिली लोकगीत पर नृत्य की प्रस्तुति अशिति झा एवं अक्षिता झा ने दी, जिसमें दर्शक निरंतर तालियों से दोनों बच्चियों का उत्साहवर्धन 'करते रहे।

'अलिया गे मलिया गे' सत्र में स्वरित उत्कर्ष झा, सलिल कुमार झा, आन्या झा, साक्षी झा, आयुष पाठक, शुभ्रांगी झा, परिधि झा, निशा झा, शाम्भवी दत्त झा, अदिति झा, अक्षित झा, लावण्या झा, प्रत्यूषा झा, धीरज झा सहित लगभग दो दर्जन से अधिक बच्चों ने भाग लिया और अपने काव्य वाचन की कला से लोगों को प्रभावित किया।

सोनी झा लिखित एवं निर्देशित एकल नाटक 'मां' का मंचन धीरज झा ने किया, जिसने सभागार में उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया । ‘कालक पहरा' सामूहिक नाट्य प्रस्तुति में निखिल झा, लोकमान्य झा, नीरज झा ने अभिनय का लोहा मनवाया।