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Sunday, October 15, 2017

नव आस, नव विश्वास नेने आबि रहल अछि फिल्म 'प्रेमक बसात'

मैथिली फिल्म उद्योग एखन धरि प्रयोग मात्र करैत रहल अछि. बेर आबि गेल अछि जे एकरा व्यावसायिक मान्यता भेटै आ एहि उद्योग सप्रत्यक्ष रूपे जूड़ल कलाकार ओ तकनीकी टीम कें रोजगारक अवसर प्राप्त होइन. मैथिली फिल्म ओ रंगमंचक अभिनेता अनिल मिश्रा एहि संदर्भ मे कएक टा मंच सबाजल छथि जे मैथिली फिल्म उद्योग कें भाइ-भतीजावाद समुक्त रखबाक बेगरता छैक आ तखने जा कई व्यावसायिक रूपे स्थापित हएत. हुनक ई अपील एखन शूटिंग भरहल फिल्म प्रेमक बसातपर लागू होइत नजरि आबि रहल अछि.

फिल्मक निर्माता कुणाल ठाकुर सप्राप्त जानकारी अनुसार एहि फिल्मक यूनिट मे कलाकार सतकनीकी टीम पूर्ण व्यावसायिक अछि आ मैथिली फिल्म उद्योगकें स्थापित करबामे एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निमाहत से आश्वस्त छी. दर्शक मध्य जे मैथिली फिल्मक प्रति उदासीनता अछि ओहि तमाम आवश्यकताकें पूर करबाक प्रयास कएल जा रहल अछि.    

फिल्म प्रेमक बसातकेर निर्माता-वेदान्त झा एवं कुणाल ठाकुर, कथा-पटकथा-संवाद-लेखक एवं निर्देशक-रूपक शरर,अभिनय-पियूष कर्ण,रैना बनर्जी,गोविन्द पाठक,मोना रे,एस.सी.मिश्रा,राकेश,प्रज्ञा झा,शैल झा,कल्पना मिश्रा,संजना,आशुतोष सागर,आकाशदीप,राजीव झा,प्रेम झा,शरद सोनू,नेहा,राकेश त्रिपाठी आदि, संगीत-प्रवेश मल्लिक एवं सरोज सुमन, नृत्य निर्देशन-केदार सुब्बा, कला निर्देशन-प्रेम जी, कैमरा-नरेन्द्र पटेल, निर्माण नियंत्रक-अजीत सिंह, निर्माण प्रबंधन-सिंटू झा, प्रवीण पाठक एवं नवीन झा, मेकअप-पंकज झा एवं आइटम गीत पर नृत्य प्रशिक्षण दरहल छथि गौलौरी महन्था.

एहि फिल्मक निर्माणक विशेषता अछि जे तकनीकी टीमक अधिकाधिक सदस्य हिन्दी फिल्म उद्योगक प्रतिष्ठित नाम छथि आ तहिना हिनका लोकनि द्वारा आधुनिक तकनीकी यंत्रक प्रयोग सेहो कएल जा रहल अछि. तहिना मैथिल कलाकार लोकनि सेहो अपन-अपन विधाक प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व छथि. एहि फिल्मक शूटिंगक लोकेशन समस्तीपुर जिलाक करियन एवं ओकर लग-लगीचकक गाम सभ मे भेल अछि.

Friday, September 01, 2017

धूमकेतु रचित चर्चित कथा “अगुरवान”क नाट्य मंचन श्रीराम सेन्टर,मंडी हाउस,दिल्लीमे


३०अगस्त २०१७ (बुधदिन) श्रीराम सेन्टर,मंडी हाउस,दिल्लीमे धूमकेतुनामक रंगमंचीय संस्था केर प्रस्तुति एवं मैथिलीक सुपरिचित कथाकार धूमकेतु रचित कथा संग्रह उदयास्तकेर एक गोट चर्चित कथा अगुरवानक सफलतापूर्वक नाट्य मंचन कएल गेल. एहि कथाक नाट्य रूपांतरण केलनि अछि रंगकर्मी जितेन्द्र कुमार झा ओ निर्देशन केलनि अछि  राजीव कुमार मिश्र. राजीव कुमार मिश्र पेशा सं साउंड इंजीनियरक संग-संग एक रंगकर्मी छथि, मिथिला पेंटिंगक नीक जानकार ओ शोधार्थी छथि (स्कोलरशिप प्राप्त) आ एहि सं पूर्व मैथिली फिल्म छूटत नहि प्रेमक रंगकेर सह-निर्माता एवं डीडी बिहार पर पूर्व-प्रसारित चर्चित मैथिली धारावाहिक पाहुनमे सह-निर्देशक सेहो रहि चुकल छथि.

अगुरवान कथा एक एहेन युवक (बंगट मिश्र-अमरजी राय) पर आधारित अछि जे आत्मसम्मानक संग जीवन जीबाक अभिलाषी अछि, स्वभाव सं निःश्छल मुदा अपन कुलक मर्यादा आ प्रतिष्ठा हेतु सदिखन साकांक्ष रहैत अछि. माइअक मृत्यु उपरान्त अध-वयसू पिता कल्लर मिश्र (रमानाथ झा) द्वारा एक एहेन नवयौवना कें सतमाय (श्रृष्टि आनंद) बना आनल जाइछ जे लगभग बंगटक सम-वयसू रहैछ. द्वितीय विवाहक एक्कहि-डेढ़ मासक भीतर बंगटक पिता शरीर सलोथ भअसमर्थ भजाइत छैक. पैरुख नहि रहलाक कारणें कोनो प्रकारे अर्थोपार्जन हेतु विवशताक जिनगी जीबैत अछि. बंगट बेरोजगार भेल घुमैत-फिरैत आ लुच्चा-लफंगा सभक संगतिमे रहि चोरि तक करैत अछि. चोरि कअपन आ अपन परिवारक निमेरा करब ओकरा ओत्तेक आत्म-ग्लानि नहि करबैछ जत्तेक कि ओकर सतमायकें जमींदार पाठक (राजीव रंजन)क हवेली पर जाएब अखरैत छैक. हालांकि पाठकक कुकर्मी प्रवृतिक अनुचर दू गोट ग्रामीण (अजीत झा आ संजीव कुमार) द्वारा गाम भरिमे सतमाय आ बंगटक बीच अनैतिक संबंध सनक मनगढ़ंत अफवाह पसारबामे कोनो कोताही नहि कएल गेल छैक मुदा माए-बेटाक संबंध दुन्नू दिस सपवित्र छैक. बंगट अपन सभटा सुख-दुःखक बात साझा कमोन हल्लुक करबाक माध्यम गामक मास्टर साहेब (संतोष कुमार)कें बनौने अछि. बंगटक परिवार दीनताक अंतिम पराकाष्ठा पर पहुँच गेल अछि आ एहेन स्थितिमे घरमे पिता-पुत्र, पति-पत्नी ओ माए-बेटा मध्य बेर-बेर कलह हएब स्वाभाविक सन भगेल अछि. मास्टर साहेबक आज्ञानुसार बंगट शहर जाय किछु रोजगार मे संलग्न हेबाक चेष्टा करैत अछि मुदा मोन नहि लगबाक कारणें एक्कहि-डेढ़ मासमे आपिस आबि जाइत अछि. एम्हर घरक स्थिति अत्यधिक दयनीय हेबाक कारणें अन्न-पानि धरि आफद भजाइत छैक आ से अवसरक लाभ उठबैत जमींदार द्वारा कल्लर मिश्रकें विभिन्न प्रकारक प्रलोभन देइत ओकर पत्नीकें हवेलीमे आबि दुन्नू साँझक भानस बनेबा लए आग्रह करैत छैक. बंगटक सतमायकें ओहि जमींदारक बहिकिरनी हेबाक संग-संग अनैतिक सम्बन्धक सेहो पालन करब अनिवार्य सन भगेल छैक आ परिणामस्वरूप ओकर सतमाय गर्भवती भजाइछ. एक-डेढ़ मास पर घर आपसी भेला उत्तर जखन ओकर सतमाय द्वारा स्वयं गर्भवती हेबाक बात स्वीकारल जाइछ तबंगट आक्रोशित भकोदारि सदू-खण्ड करैत ओकर हत्या कदैत अछि . बंगटक मानसिक स्थिति पर शोध करबा लेल मनोविज्ञान केर प्रोफेसर कमलेश चौधरी (जितेन्द्र कुमार झा) मास्टर साहेब ससम्पर्क करै छथि आ उपरोक्त सभ घटना मास्टर साहेब द्वारा हुनका अक्षरशः सुनाओल जाइत अछि.

एहि नाटकक माध्यम सएक ब्राह्मण परिवारक दीनताकें देखाओल गेल अछि, बेमेल विवाह ओ शोषित नारीक दबल आवाज, छद्म पुरुषार्थक दंभ पर प्रहार, ओ तत्कालीन समाजक बीच एकटा नहि कएकटा राम-रहीमक पाखण्डकें उजागर करैत लेखकक दूरदर्शिताक अनुमान लगाओल जा सकैत अछि.

नटराज स्तुतिक संग प्रारम्भ भेल नाटक अंत धरि प्रेक्षककें मंच दिस टकटकी लगौने रहबा लेल बाध्य करैत रहल. नाटकक विभिन्न पक्ष पर विश्लेषण केर आवश्यकता छैक जेकि रंगमंच ओ नाटक विशेषज्ञ करथि से उपयुक्त हैत मुदा प्रेक्षकीय दृष्टिए नाटकक प्रस्तुति सफल रहल. दिल्लीक विभिन्न संस्था मध्य वर्तमानमे युवा रंगकर्मीक रूपमे दर्शकक पहिल पसीन अमरजी राय फेर सहृदय जितबामे सफल रहलाह. रमानाथ झा द्वारा चरित्रकें जीवंत करैत जे इमानदारी सअभिनय कएल गेल अछि से निश्चित रूप समंच पर हुनक सक्रिय उपस्थिति मंगैत अछि. एकमात्र महिला पात्र सृष्टि आनंदक संवाद सीमित छल मुदा ततबेमे जे दम देखबामे आएल से भविष्यमे मैथिली रंगमंच वास्ते एक नीक अभिनेत्रीक सम्भावना जगबैत अछि. राजीव रंजन मैथिली मंच पर विभिन्न चरित्र निमाहबा लै तैयार छथि आ निरंतर प्रगतिक पर छथि. संतोष कुमार मैथिली मंचक आब वरिष्ठ श्रेणीमे (वर्तमानक युवाक तुलनामे) प्रवेश कगेल छथि से स्वीकारबामे कोनो हर्ज नहि. जितेन्द्र झा, संजीव कुमार, अजीत झा आ पाठकक दू गोट सेवकक भूमिकामे अंकित ओ राहुलक उपस्थिति कथाक पूरक मात्र कहक चाही. पार्श्व संगीत सांकेतिक मात्र छल जाहिमे किसलय कृष्णक लिखल गीतकें सुमधुर स्वर देने छलाह देवानन्द झा एवं राजीव रंजन जकरा संगीतबद्ध केलनि दीपक ठाकुर. नाटकक पार्श्व संगीत राजीव रंजनक छल. प्रकाश व्यवस्था छलनि संतोष राणा केर. प्रकाश व्यवस्थाकें आर बढियाँ करबाक गुँजाइश छल. समूचा नाटकमे रतुके दृश्यक आभास होइत रहल जखनकि मास्टर साहेब आ प्रोफेसर साहेबक मध्यक वार्तालापक बीच-बीचमे (फ़्लैश बैकमे चलैत) कहानीक अधिकांश भाग दिनक छल. वस्त्र-सज्जा हेतु उपयुक्त सामग्रीक चयन अमरजी राय द्वारा कएल गेल छल. रूप-सज्जा दीपक ठाकुरक छल. प्रोडक्शन तरूण झा, एसोसिएट निर्देशन संतोष कुमार, सहायक निर्देशन अजय शर्मा आ बैनर-पोस्टर एवं ब्रोशर डिजाइन कएल छल संजीव कुमार बिट्टू केर. राजीव कुमार मिश्रक निर्देशन मे मंचित पहिल नाटक अनेकानेक दृष्टिकोण ससफल रहल.

अगुरवान नाटक मंचन सपूर्व नीलम कला केन्द्र द्वारा एक सम्मान समारोहक सेहो आयोजन कएल गेल छल (पृथक रिपोर्ट) जाहिमे बॉलीवुडक स्थापित अभिनेता ओ मैथिल सपूत नरेन्द्र झा, विराटनगर सआएल सक्रिय ओ समर्पित मिथिला अभियानी प्रवीण नारायण चौधरी, मधुबनी सआएल धूमकेतुक लेखक सुपुत्र अंशुमान सत्यकेतु, नीलम कैसेट केर संस्थापक कृष्ण कुमार चौधरी एवं नीलम चौधरी, मुम्बइ फिल्म उद्योग जगतमे एड फिल्म्स फ्रीलान्सर ओ मैथिल सेनानी कुणाल ठाकुर, पटना सआएल डीडी बिहारक निदेशक पी.एन.सिंह आदिक गरिमामय उपस्थिति ओ प्रशंसा सेहो नाटकक सफलताकें चिन्हित केलक.      

कामकाजी दिवसमे भेल एहि आयोजनक सफलताक अंदाज अही बात सलगाओल जा सकैत अछि जे श्रीराम सेंटरक दूतल्ला प्रेक्षागृह प्रेक्षक सखचाखच भरल छल. किछु लोककें एखनहु नाटकक प्रेक्षक बनब सीखय पड़तनि जेनाकि मोबाइलक स्विच ऑफ वा थरथरी मुद्रा (वाइव्रेशन मोड) मे राखथि, घाना पसारै बला छोट बेदराकें संग नहि आनथि वा जआनथि तशांत भंग होइत स्थितिमे हॉल सबाहर लघुमा देथुन, थोपड़ी बजबथु (प्रसंग देखि) मुदा पिहकारी (सीटी) सपरहेज राखथु आदि किछु तथ्य सभ छैक जेकि हॉल ओ नाटकक मर्यादा छैक आ आनन्दो तखने भेटैत छैक जखन एकर पालन हम सभ मीलि करैत छी.

कला,साहित्य,संस्कृति,भाषा संरक्षण ओ संवर्धनक अनेकानेक गतिविधि मध्य वर्तमानमे मैथिली नाटक सेहो बेस सराहनीय जोगदान दरहल अछि. भारतक राजधानी दिल्लीमे विभिन्न रंगमंचीय संस्था द्वारा समय-समय पर मैथिली नाटकक मंचन होइत रहला सं मैथिली भाषी लोकनिक निरंतर जागरूकता बनल रहब स्वाभाविक अछि. दिल्लीमे कला मंडीक रूपमे प्रसिद्ध केन्द्र मंडी हाउस सेहो आब अन्यान्य भाषा मध्य मैथिलीक विभिन्न नाटकक प्रदर्शन, भारत रंग महोत्सवमे मैथिली नाटकक मंचन सन किछु श्रेयस्कर काज एक ऐतिहासिक साक्ष्यक रूपमे सोझा ठाढ़ अछि जकर श्रेय निःसंदेह मैलोरंग,प्रकाश झा आ हुनक टीमकें जाइत छनि. बाट बनि गेल छैक आवश्यकता छैक दृष्टिवान पथिककें.

Thursday, July 20, 2017

मैलोरंगक मंचन जट-जटिन ओ ललका पाग


१९ जुलाइ २०१७ कमैथिलो लोक रंग (मैलोरंग),दिल्ली द्वारा क्रमशः दू गोट नाटक जट-जटिनललका पागक सफलतापूर्वक नाट्य मंचन भेल. मैलोरंग पहिल बेर युवा निर्देशक रमण कुमार ओ ज्योति झाकें निर्देशनक जिम्मा दैत ई नव प्रयोग केने छल जे सफल रहल. सफलताक प्रत्यक्षदर्शी मंडी हाउस दिल्लीक श्रीराम सेंटरमे कामकाजी दिन (वर्किंग डे) होइतो प्रेक्षक सभरल प्रेक्षागृह थोपड़ीक निरंतर गरगारहैट सस्वयं प्रमाणित करैत रहल.

जट-जटिन/रमण कुमार
जट-जटिन मिथिलाक लोक परम्परा आधारित एक एहेन मान्यता अछि जाहिमे बर्खा नहि हेबा सन विकराल परिस्थितिमे अन्न-पानि बिना हाक्रोश करैत स्थानीय समाजक किछु वर्ग विशेषक महिला द्वारा जट-जटिन खेलाएल जाइछ. एहि क्रममे इन्द्रदेवक आह्वान, जट-जटिनक प्रेम ओ बेंग मारबाक प्रसंग आदिक प्रस्तुति होइछ. 

ऋतुराज कर्ण लिखित नाटक प्रारम्भ भेल बालक्रीड़ाक संग जकर नायक जटाधर (जट-राज नारायण साह) ओ नायिका जितिया (जटिन-निशा झा) जे संगहि खेलैत-कूदैत,टोना-मानी करैत रूसबा ओ बौंसबाक प्रक्रम निमाहैत बच्चा ससियान भजाइछ. दुन्नूक मनमे प्रेमांकुरित होइत समय एला पर पल्लवित ओ पुष्पित भजाइछ. मान-प्रतिष्ठाक दंभ रखनिहार जटाधरक पिता ठाकुर (जमींदार-रमण कुमार) अपन बेटी (रानी-सृष्टि कुमारी)क प्रेम-प्रसंग पर अंकुश लगबैत ओकर प्राण तक हरि लैत अछि आ ठाकुरक एहेन कठोर निर्णय ससमूचा समाज भयभीत रहैछ. एहेन मे जटाधर (ऋतुराज) अपन प्रेमक बात गुप्त राखि जितिया (प्रियदर्शिनी पूजा) सविवाह ककोनो आन गाममे जा बैस जाइछ. एम्हर गाममे अकाल पड़ि जाइछ, लोक सभ सभटा टोना-टापर कथाकि जाइछ मुदा स्थिति आर विकराले होइत जा रहल अछि. गाममे एक ज्योतिषीक (संजीव कुमार बिट्टू) आगमन होइछ जे अन्य भाषी रहैत छथि मुदा अनुवादक (मनोज पाण्डे) स्थानीय लोक धरि मैथिलीमे संप्रेषित करैत छथि. ज्योतिषीक कहब छलनि जे एहि गाममे कोनो एहेन कुकर्म भेल अछि जकर प्रकोप अछि. जितिया सजबरदस्ती विवाहक इच्छुक मुदा असफल युवक बबन (दीप आनंद) अही अवसरक खोजमे छल आ जटाधरक आन जातिक जितियाक संग विवाह करबकें कुकर्म कहि समाजक ध्यानाकर्षण कएल. छल सठाकुर द्वारा बबनकें पठा ओकरा दुन्नू बेकतीकें बजबाय आ अंतमे अपन फुसियाही स्वाभिमानक रक्षार्थ जटाधरक हत्या करबा देल जाइत छैक. जितियाक पति वियोग ओ विलाप तत्क्षण हृदयविदारक परिस्थिति उत्पन्न कदैछ आ समाजक आडम्बरी लोकक प्रति एक दीर्घ ओ अनुत्तरित प्रश्न ठाढ़ कजाइत अछि. प्रियदर्शिनी पूजा (जितिया)क अभिनय प्रेक्षागृहमे बैसल एकहक प्रेक्षककें भावुक हेबा लेल बाध्य कदेने छल.

नाटकक मूल प्रसंग सहटि कने मंच दिस चली, ज्योतिष शास्त्रक ज्ञान रखनिहार ज्ञाताकें ज्योतिषी जीकहल जाइछ मुदा प्रत्येक  पात्र द्वारा ज्योतिष जीकहि संबोधित करबकें भविष्यमे सुधारल जा सकैछ. प्रसंगकें रोचक बनेबा लेल ज्योतिषी जी द्वारा सांकेतिक (अन्य) भाषाक प्रयोग आ तदनुसार ओकर अनुवाद कप्रस्तुत करबाक जे शैली छल से अद्भुत छल आ एहि चरित्रमे दुन्नू अभिनेता (संजीव बिट्टू आ मनोज पाण्डे) बेस प्रशंसा हथोड़िकजेबामे सफल रहलाह. ठाकुरक भूमिकामे स्वयं रमण कुमार वस्त्र,मेकअप,भाव-भंगिमाक दृष्टिकोण सउपयुक्त छलाह मुदा सम्वाद अदायगीमे एहि खन मोन पड़ैत रहलाह एक छल राजाक मुकेश झा ओ अमलीक अमरजी राय. नाटकक मंचन पूर्ण सफल रहल आ नव-निर्देशक रमण कुमार बधाइ केर पात्र छथि.

एहि नाटकमे जे सभ महत्त्वपूर्ण भूमिकामे छलाह/छलीह ताहिमे उपरोक्त पात्रक संग  पाँच गोट लुच्चा प्रवृतिक लड़का सभमे निखिल राज,पुष्कर शर्मा,मनीष गुप्ता,रोशन यादव आ मणिशंकर गुप्ता, तहिना स्त्रीक भूमिकामे ज्योति झा आ सुधा झा, ग्रामीण शिव स्वरुप,ऋषि राज आ सोनू पिलानिया, नोकर प्रभात रंजन ओ बटोहिक भूमिकामे राजीव रंजन झा आ नितीश कुमार झा सेहो अपन-अपन चरित्रक हिसाबे फिट भेलाह. मंच,प्रकाश,ध्वनि,वस्त्र आदि सेहो व्यवस्थित छल मुदा एहि नाटकक पार्श्व गायन ओ संगीत किछु निराश केलक. मंच पर कलाकार लोकनिक गाएब स्पष्ट सूनल गेल जेकि गायनक मौलिक रूपकें प्रस्तुत करैत छल, मुदा जखन जट-जटिन शब्द लोकक कानमे पड़ैत अछि तपहिल कल्पना ओहि गीतक सुन्दरते पर जाइत अछि घ्यूरा फड़लौ गे जटिनियाँ, झुमनी फड़लौ गे  आ ताहि गीतक संग जउपयुक्त वाद्ययंत्रक प्रयोग नहि हो तकने झुझुआन लागब स्वाभाविक. मैलोरंग सई अपेक्षा करब उचित अछि कारण राजीव रंजन आ दीपक ठाकुर संगीत पर बेस मेहनैत करैत रहलाह अछि आ कसकैत छथि. बेजाए कहब अनुचित हएत कारण अपन जीवनोपार्जनमे व्यस्त रहैत एकटा नाटककें तैयार कप्रस्तुत करबामे कत्तेक परेशानी होइत छैक से बूझल जा सकैत अछि मुदा प्रेक्षक कतहु नें कतहु शुभचिंतक होइ छथि तहुनक अपेक्षा स्वाभाविक अछि .

ललका पाग/ज्योति झा
स्व. राजकमल चौधरी रचित ललका पागक कथा/नाट्य मंचन स्त्री-विमर्श पर आधारित अछि. स्व. राजकमल चौधरीक लेखन प्रतिभा समैथिली ओ हिन्दी (दुन्नू भाषी) समाज कृतज्ञ अछि. हिनक लेखनक केन्द्रमे सिसकैत,हिचकैत ओ शोषित नारीक दुर्दशाकें सहजहि अकानल जा सकैत अछि. ललका पाग कथाक नायिका तीरू (प्रियदर्शिनी पूजा) सेहो एहने सन एक मैथिल नारी छथि जिनका स्वभावमे लड़िकअधिकार लेब नहि अपितु सिसकैत-कुहरैत अपन अधिकार सवंचित रहबकें नारी धर्म बुझैत छथि. मात्र चौदह बर्खक उमेरमे सासुर आएल तीरू अपन बालमन पर काबू नहि राखि पेली आ सासुकें गामक पोखरिमे नहेबाक इच्छा व्यक्त कय देलनि. हुनक एहि निर्विकार मनक चंचलता सगरो गाम काने-कान पसरि गेल आ बात हुनक स्वामी राधाकान्त (जितेन्द्र कुमार जीतू”) धरि पहुँच गेल. एहि छोट सन बात पर राधाकान्त हुनक तिरस्कार करब शुरू कय देलनि आ कलकत्ता कॉलेजक महिला संगी कामाख्या (निशा झा)क रूप ओ गुणक स्मरण कहुनका संग परिणय हेतु निश्चय कलेलनि. तीरू ओहि गप्पक लेल तिरस्कृत आ अवहेलित भेली जे गप ओ मात्र बाजिकइच्छा व्यक्त केने छली नहि कि ओ पोखरिमे नहाए गेल छलीह. किछु दिनक बात राधाकान्त गाम अबैत छथि आ अपन दोसर विवाहक निर्णय सुनबै छथि तीरूकें. तीरूकें तएक क्षण लेल बज्रपात भेलनि मुदा अंतर्वेदनाकें कंठ मोंकि स्वीकृति दय देलनि. विवाहक दिन तय भेल राधाकान्त आइ बहुत प्रसन्न छलाह आ इंतजाम पातीमे व्यस्त छलाह आ हुनक एहि इंतजाम-पातीमे संग दरहल छलीह तीरू. कलकत्ता ससंगी सभ आएल छलथिन राधाकान्तकें मूँह पर एक अलग उत्साह. साँझ भेलै राधाकान्त सजि-धजि विदा भेला आ तीरू दिस बिनु तकनहि चल गेला दरबज्जा दिस. तीरू समाद पठौलनि आँगन अबै वास्ते. राधाकान्त आँगन जा जखन तीरूक घर दिस गेला ततीरू पेटी उधेसने किछु ताकि रहल छलीह आ अन्ततः ओ वस्तु भेटि गेलनि. ओ अनुपम वस्तु छल ललका पाग. ललका पाग देखितहि एक क्षणक वास्ते राधाकान्त स्तब्ध भगेला आ क्षुब्ध रहि गेला तीरूक निःश्छ्लता पर. बकार बन्न भगेलनि राधाकान्तकें आ बीच अँगनामे बैसि पश्चातापक कुहेस फटैत तेना दहोबहो नोर बहबलगलनि जेना तीन बर्खक बच्चा होथि. उक्त कथा/नाटक पुरुष वर्ग पर कतेको प्रश्न ठाढ़ करैत अछि आ कमोबेश स्थिति एखनो पूर्ववत अछि.

नाटकक आरम्भ सूत्रधार (संतोष कुमार आ निशा झा) सहोइत अछि. संतोष कुमार रंगमंचक एक एहेन हस्ताक्षर छथि जिनका मंच पर पदार्पण करिते प्रेक्षकक मूँह पर हँसी आ हुनक पात्र संबंधी जिज्ञासा बढ़ि जाइत छनि. निशा झाक अभिनय आ हुनक मैथिली बजबाक टोन भविष्यक नीक सम्भावना दिस इंगित करहल अछि. नटुआ नाच लमंच पर प्रस्तुत होइत रमण कुमार आ संजीव बिट्टूकें गतिविधि देखि प्रेक्षक लोकनिकें गुदगुदी हएब स्वाभाविक छल. राधाकान्तक पात्रमे जीतू केर पूर्वक नाटक जल डमरू बाजेधूर्तसमागममे देखल अभिनयक हिसाब सएहि बेर किछु हल्लुक सन अभिनय लागल ओना एहिमे कोनो संदेह नहि जे ओ नीक कलाकार छथि आ आगाँ फेरो तहिना भेटता से आश्वस्त छी. तीरूक माइअक भूमिका कम मुदा तइयो अपन प्रभाव बनौने रहली ज्योति झा. चननपुरवालीक भूमिकामे सुधा झाक अभिनय ओ किसनीमायक भूमिकामे सृष्टि आनंद सेहो फिट छलीह. मुंशी पटोरीलालक भूमिकामे मनोज पाण्डे सेहो उपयुक्त छलाह. तीरूक भाइअक भूमिकामे बहुत कम्मे कालक वास्ते मुदा आन नाटकक संबंधमे एतबा जरूर कहल जा सकैत अछि जे देखिते दिनमे अपन अभिनयमे नितीश सेहो निखरल जा रहल छथि. रामसागर आ ज्योतिषीक भूमिकामे सोझा आएल संजीव कुमारमे आर सुन्दर अभिनयक गुँजाइश छनि. एहि नाटकक पार्श्वमे संगीत ओ गायन बेस आकर्षक छल ताहिमे राजीव रंजन पूरा इमानदारी सप्रस्तुत भेलाह. अमरजी राय केर वस्त्र विन्यास सहजहि आकर्षित करैछ आ श्याम सहनीक प्रकाश परिकल्पना सभ दिने सनीक रहल अछि.

मंच सञ्चालन केलनि मैलोरंगक निदेशक प्रकाश झा. आजुक निर्देशक ज्योति झाकें पुष्पगुच्छ दय सम्मानित केलनि जेएनयू केर प्रोफेसर डॉ. देवशंकर नवीन आ रमण कुमारकें मैलोरंग रेपर्टरी प्रमुख मुकेश झा.

धन्यवाद ज्ञापनमे रमण कुमार दर्शक आ मैलोरंगक प्रति अपन उद्गार व्यक्त केलनि ओत्तहि ज्योति झा एहेन सुअवसर हेतु दर्शक,रेपर्टरी,वरिष्ठ रंगकर्मीक संग-संग प्रकाश झाक प्रति सेहो अपन कृतज्ञता प्रकट केलनि.

उपरोक्त दुन्नू नाटक देखला उत्तर प्रेक्षागृह ससोशल नेटवर्क धरि लोकक मूँह सवाह निकलब नाटकक सफलताकें सद्यः प्रमाण अछि. संभवतः बहुत गूढ़ विषय दिस हमर ध्यान केन्द्रित नहि भपाएल होएअ से संभव अछि आ स्व-विवेक सलिखल ई रिपोर्ट सूचनार्थ अपनें धरि पहुंचाएब अपन कर्त्तव्य बुझै छी. जयतु मैथिली.

Monday, June 26, 2017

मैलोरंग द्वारा धूर्तसमागम केर मंचन, ज्योतिरीश्वर ओ श्रीकान्त मंडल सम्मान


२५ जून २०१७ (रविदिन) दिल्लीक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालयक सम्मुख सभागारमे संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित एवं मैलोरंग रेपर्टरी द्वारा प्रस्तुत नाटक धूर्तसमागम सफलतापूर्वक संपन्न भेल. तेरहम शताब्दीमे लिखल गेल एहि नाटक (प्रहसन) केर मूल रचनाकार कवि शेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुर छलाह जे तत्कालीन मिथिलाक कर्नाटवंशीय राजा हरदेव सिंहक शासनकालमे एहि नाटकक रचना केने छलाह . भारतीय साहित्यक इतिहासमे ई पहिल एहेन नाटक अछि जे लिखित साक्ष्यकें रूपमे प्राप्त होइत अछि . एहि तरहें गद्य विधाक प्रथम सर्जकक रूपमे कवि ज्योतिरीश्वरक मैथिल हएब हमरा लोकनिकें गर्वानुभूति करबैछ. एहि नाटकक कथावस्तुक केन्द्रमे एहेन विषय राखल गेल अछि जकर मंचन देखला उत्तर आजुक वर्तमान परिस्थितिमे सेहो समसामयिकताक बोध करबैछ. धूर्तक प्रवेश समाजमे सभदिना व्याप्त रहल अछि आ ओएह प्रसंगकें एहि नाटकक माध्यमें देखाओल गेल अछि. कामपिपासु ओ पाखंडी गुरु-शिष्यक कामवासनाकें उजागर करैत एहि कथामे एक वेश्याक प्रति हिनका लोकनिक कामान्धता ओ ओकर प्राप्ति हेतु गुरु-शिष्य मध्य भेल कलह केर निपटारा हेतु न्याय केनिहार न्यायाधीश द्वारा स्वयं धूर्तइ कहिनका लोकनि सछीनि ओतय सबैलाए देल जाइ छनि. एहि तरहें सभसपैघ धूर्त न्याय देनिहारे साबित होइत अछि. एहिमे डेग-डेग पर समाजक धूर्त लोकक प्रभावक चर्चा ओ प्रसंग अछि आ इएह मूल कारण अछि जे एकर नाम धूर्तसमागम अछि.

पाँच गोट कोरस एवं सहयोगी अभिनेता (नितीश कुमार झा,निखिल कुमार,विवेक कुमार,केशव कुमार,रौशन कुमार) क प्रवेशक संग प्रारम्भ भेल नाटकमे हिनका लोकनिक मूक एवं सांकेतिक अभिनय समाजक धूर्त वर्ग आ ओकर छल-छलावा बला स्वभावकें उद्घाटित करैत अछि. नाटकक सूत्रधार नट (रमण कुमार) एवं नटी (पूजा प्रियदर्शनी) द्वारा नाटकक रचनाकार,रचनाकाल,प्रदर्शनकाल ओ समाजक तत्कालीन स्थितिक चरित्र चित्रण कें रेखांकित करबाक क्रममे एक दोसराक संग तालमेल बैसेबामे फिट छलाह आ ई दुन्नू गोटे अपना-अपना चरित्र संग न्याय करैत बूझि परलाह. मंचनक प्रारम्भ ओ मध्यमे गीत-नृत्यक सेहो अद्भुत सामंजस देखबामे आएल. संवाद प्रस्तुतिमे  बाबा विश्वनाथ (मुकेश झा) ओ हुनक शिष्य बंगट लाल (जितेन्द्र कुमार) प्रेक्षककें कखनो पेट पकड़ि ककखनो ठहक्का लगा-लगा हँसबा लेल निरंतर बाध्य करैत रहलाह आ नाटकक पूर्ण रोचकता बना रखलनि.

जितेन्द्र कुमार एहि सं पूर्व मैलोरंग द्वारा आयोजित नाटक जल डमरू बाजयमे भुखला के चरित्रमे अपन दमदार अभिनय सप्रेक्षक लोकनिक पसीनक अभिनेता बनि गेल रहथि मुदा वर्तमानमे मुम्बई प्रवासक कारणें दीर्घ अन्तरालक पश्चात दिल्ली ओ मैलोरंगक एहि मंच पर एक बेर फेर सआर बेसी निस्सन अभिनयक संग प्रस्तुत भेलाह अछि. मुकेश झा (मैलोरंग रंगमंडल प्रमुख) विभिन्न नाटकमे मुख्य अभिनेताकें रूपमे निरंतर सोझा अबैत रहलाह अछि तैं स्वाभाविक अछि जे हिनका सआब बेसीक अपेक्षा कएल जाइत अछि. अमली,देह पर कोठी खसा दिय’,एकादशी आदि नाटकक माध्यमें एक मांजल निर्देशकक रूपमे सेहो सफल रहलाह अछि मुदा एक अभिनेता केर रूपमे महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक ओरिजनल काममे कम्पनी केर चरित्र अभिनयक बहुत दिनक बाद हिनक मूल अभिनय प्रतिभा एहि नाटकक माध्यमे सोझा आएल जाहिमे ई पूर्ण समर्पित नजरि एलाह कारण हिनक जे चरित्र छल से एक कामुक ओ पाखंडीक छल आ से चरित्र समूचा नाटकमे परिलक्षित होइत रहल. एक कंजूस धन्नासेठ ठाकुर (संतोष कुमार) हिनको एक धूर्तक रूपमे देखाओल गेल जे नाना प्रकारक बहन्नाबाजी कएको आना खर्च हेबा सकन्नी कटैत रहैत छथि. साधु-सन्यासी होथि वा दास-सेवक कोनो दान पुण्य सअपनाकें बंचेबाक जोगारमे लागल रहैत छथि. संतोष कुमार अपन अभिनय वैशिष्ट्यता हेतु जानल जाइत छथि. एक छोटे सन भूमिका रहितो अपन भाव-भंगिमा ओ संवाद अदायगी सप्रेक्षकक प्रसंशा बटोरबामे अहू बेर सफल रहला.

एहि नाटकमे दू गोट महिलाक मुख्य भूमिका अछि जाहिमे सुरतप्रिया (मनीषा झा) मास-मास भरिक व्रत रखैत ब्राह्मण भोजन करा जतय पुण्य अर्जित करय चाहैत छथि ओत्तहि हुनक कामातुर पिपासा कामदेवक आलिंगन हेतु आतुर सेहो देखल जाइत अछि. एहि ठाम रचनाकारक एक साहस तस्पष्ट रूप सदेखल जा सकैत अछि जे सुरतप्रिया जाहि प्रकारे कामातुर छथि ओ धर्मक अढमे पाखंडकें सेहो उजागर करैत अछि. मनीषाक संवाद ओ मुद्रा मध्य कने आर सामंजस बैसेबाक गुँजाइश देखना जाइत छल, तथापि अपन चरित्रमे उतरबाक सफल प्रयास केली. दोसर महिला पात्रक रूपमे अनंगसेना (सोनिया झा) अपन रूप सौन्दर्य सकामसम्मोहित पुरुष वर्गक उपभोगक वस्तु बनल नगर भरि चर्चित छथि. सोनिया अपन चरित्र संग न्याय केली हिनक भाव-भंगिमा ओ नृत्य नीक छल मुदा संवाद प्रस्तुतिमे कने आर आत्मविश्वासक आवश्यकता बुझना जाइत छल. प्रसंग छल असज्जाति मिश्रक शिष्य बन्धुवंचक द्वारा जोर-जबर्दस्तीक क्रममे ओकरा झटकबाक संग जे प्रतिक्रिया छल से ताहि ठाम हुनक ओ क्रोध एवं संवादक प्रवाह खुलिकसोझा एबामे असमर्थ रहल. सोनिया आब मैथिली रंगमंच,धारावाहिक ओ सिनेमाक एक सक्रिय महिला रंगकर्मी छथि तैं हुनका सएतबा अपेक्षित.

गुरु-शिष्य दुन्नूक मध्य फसाद अनंगसेनाक प्राप्तिक लेल होइत अछि आ मामिला ओझराइत देखि स्वयं अनंगसेनाक सलाह पर असज्जाति मिश्र (ऋतुराज) ओ हुनक शिष्य बन्धुवंचक (मनोज पाण्डेय) केर सोझा न्याय हेतु प्रस्तुत होइत छथि. एहि ठाम गुरु-शिष्य दुन्नू पर न्यायदाता ओ हुनक शिष्यक धूर्तइ भारी पड़ि जाइत अछि आ अनंगसेना पर कब्जा कहिनका लोकनिकें ओतय सबैला देल जाइत छनि. मनोज पाण्डेय अपन चरित्र निमाहमाक एक नीक प्रयास केलनि आ पूर्वक अभिनय सबड्ड बेसी सुधार देखबामे आएल अछि. ऋतुराजक अभिनयमे आर सुधारक गुँजाइश जेनाकि प्रेक्षक संग कने तालमेल बैसेबाक प्रयास कएल जा सकैत छल. प्रेक्षक संग तालमेल बैसेबामे मुकेश झा,जितेन्द्र कुमार,संतोष कुमार,सोनिया झा आ मनोज पाण्डेयक भूमिका नीक रहल जकर अनुसरण ऋतुराज द्वारा कएल जा सकैत छल,तथापि देल गेल भूमिकाक निर्वाह नीक सकएलनि. ओना मैलोरंगमे प्रवेश केनिहार नव कलाकार लोकनिकें एहि सम्बन्धमे कतेको बेर टोकलियनि अछि आ से अपेक्षानुसार आगाँ सुधार देखबामे आएल अछि मुदा इएह अपेक्षा प्रदर्शित होमय बला नाटकक मुख्य निर्देशक ओ सहायक निर्देशक लोकनि ससेहो अछि.       

उक्त नाटकक जतबा चरित्रक चयन ओ प्रस्तुति छल से उपयुक्त छल जेकि प्रकाश झाक निर्देशन ओ श्याम सहनीक सहायक निर्देशनकें स्वप्रमाणित करैत छल. मूल सम्वादमे प्रयुक्त क्लिष्ट शब्दकें वर्तमान प्रेक्षकक अनुसारे किछु हल्लुक शब्दमे परिवर्तित कओकरा बोधगम्य बनेबाक प्रयास सेहो नाटकक एक रोचक बिन्दु छल. आलेख प्रस्तुति एवं निर्देशन हेतु बधाइ केर पात्र छथि मैलोरंगक निदेशक ओ वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. प्रकाश झा. संगीत परिकल्पना ओ वाद्य-वादनमे राजेश पाठक,अनिल मिश्रा ओ दीपक ठाकुर उपयोगी सिद्ध भेलाह. मैलोरंग प्रस्तुत अन्यान्य नाटकक गायनमे राजीव रंजन (रॉकस्टार) केर सुनैत रहला सहुनक रंगमंचीय पार्श्व गायनक सुगंध पुनः ओहिना भेटल जे अपेक्षित छल. एहि बेर मैलोरंगक मंच सएक अद्भुत गायकी प्रतिभाकें लगीच सदेखबाक ओ चिन्हबाक अवसर भेटल,पहिने तविश्वास करब मोसकिल छल जे ई स्वर लाइव गायकीक अछि,मुदा हुनका जखन मंच पर परिचय हेतु आमंत्रित कएल गेल तअवाक रहि गेल रही. गायनमे पूर्ण शास्त्रीय पुट ओ मृदु स्वरक मलिकाइन सुष्मिता झा केर पार्श्व गायकी ससमस्त प्रेक्षक मुग्ध भगेल रहथि. मैलोरंगे केर बहन्ने सही मैथिली मंच पर अपनेंक स्वागत अछि सुष्मिता जी. एहिठाम एक बात स्पष्ट करब आवश्यक अछि जे मैथिली कला- संगीतमे स्वर साधना वा अभिनय साधना समंच पर मैथिलानी केर भूमिका सभ दिने सपुरुषक अपेक्षामे कम रहल अछि आ ताहि मिथककें तोड़बाक प्रयास करैत मैलोरंग एत्तेक महिला रंगकर्मीकें सक्रिय कलेने अछि जे रंगमंच वास्ते सदति अपन समर्पणताक परिचय देइत रहलीह अछि आ एहिमे सआब तकिछु निर्देशन केर जिम्मा सेहो सम्हारबा लए सोझा एलीह अछि. वस्त्र विन्यास,ध्वनि,साज-सज्जा,प्रकाश,मंच परिकल्पना आदि सेहो ततबे सुन्नर. द्विदिवसीय आयोजनक क्रमशः चारि शोमे उपस्थित प्रेक्षक ओ रंगप्रसंशकक प्रमाण इएह छल जे बहुत गोटेकें ठाढ़ भवा निच्चामे बैसि देखबा लेल बाध्य होमय पड़लनि. अनेकानेक दृष्टिकोण सऐतिहासिक महत्त्वक एहि नाटकक मंचन सफल रहल. मंचक प्रारंभिक सञ्चालन ओ समापनक घोषणा दीपक यात्री केलनि.

मैलोरंग द्वारा रंगकर्ममे सक्रिय युवा रंगकर्मीकें प्रोत्साहन हेतु श्रीकान्त मंडल पुरस्कार आ वरिष्ठ साहित्य-संस्कृतिकर्मी कें जीवन भरिक उपलब्धि हेतु ज्योतिरीश्वर सम्मान ससम्मानित कएल जाइत रहल अछि. बर्ख २०१६ केर श्रीकान्त मंडल पुरस्कार प्रसिद्ध युवा रंगकर्मी अमरजीत रायकें प्रदान कएल गेल आ ज्योतिरीश्वर सम्मान हेतु पं. गोविन्द झाक नामक घोषणा कएल गेल अछि. पं. गोविन्द झा ९६ बरखक उमेरमे लेखनीमे सक्रिय छथि मुदा अतिवृद्ध हेबाक कारणें पटना सएबामे शारीरिक रूपे असमर्थ छथि आ मैलोरंगक समूह ई निर्णय लेलक अछि जे एक शिष्ट मंडल द्वारा हुनका ई सम्मान हुनक पटना आवास पर जाय हस्तगत कएल जाएत. ज्योतिरीश्वर कृत धूर्तसमागम ओ ज्योतिरीश्वर सम्मान-२०१६ केर घोषणाक संग कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न भेल.

Sunday, April 30, 2017

प्रवासी मैथिलक शक्ति आ चुनौती

दिनांक २९ अप्रैल२०१७,शनिदिन मैथिलि भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रवासी मैथिलक शक्ति आ चुनौती विषयक संगोष्ठी केर आयोजन कएल गेल. कार्यक्रमक शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन स’ भेल. स्वागत वक्तव्य देलनि अकादमिक सचिव हरिसुमन विष्ट. कार्यक्रमक सञ्चालन हेतु आमंत्रित छलाह डॉ. राजेश झा मुदा हुनक अनुपस्थितिमे डॉ. सविता खान संतुलित आ धैर्यपूर्वक सञ्चालन केलनि. वक्तव्य हेतु आमंत्रित अतिथिमे गौरीनाथ जी प्रवासी बिहारी (मैथिल आ भोजपुरी समाज) कें वोट बैंकक स्रोत कें रूपमे प्रयोग कएल जा रहल स्थिति पर चिन्ता व्यक्त करैत मैथिलक प्रति सम्मानपूर्वक व्यवहार हेतु सरकारक मनोस्थितिमे बदलाव सन मुद्दा पर ध्यान केन्द्रित करौलनि आ अन्यान्य संस्था द्वारा समय-समय पर विभिन्न वस्तु बचाउ अभियानकें मार्केटिंग मुदा कहैत मुख्य रूप स’ अपन पहिचान बनेबाक आ बचेबाक सन स्थिति पर ध्यानाकर्षण करौलनि.

दोसर वक्ताकें रूपमे डॉ. मोहम्मद काज़िम मैथिली भाषाक मिठास, घर-घर स’ विलुप्त होइत संस्कार ओ भाषा पर बेस चिंतित देखेलाह. मैथिलक एकेडमी,कल्चर,भाषा समृद्धि, खान पान, माँछ-पान-मखान,मिथिला पेंटिंग आदिक योगदान केर सेहो भूरि-भूरि प्रसंशा केलनि. मुदा दर्शकक अनुनय-विनयकें नजरअंदाज करैत अपन वक्तव्यकें हिन्दीए मे निरंतरता देइत रहला. अपन भाषा आ अगिला पीढ़ी पर हिनक चिन्ता कने अन्सोंहांत सन लगैत छल, जहन की मैथिली स’ शुरुआत केने वक्तव्य स’ आस बढ़ल छल.

तेसर वक्तव्य छल संचालिका सह वक्ता डॉ. सविता खान केर जेकि प्रवासी जीवनक विभिन्न अवयव पर प्रकाश देइत मैथिलक एक विशिष्ट परिचय देली जे स्वाभिमान कएम रखैत जे न्यूनतम सुख-सुविधामे गुजर-बसर करैत हो से चाहे खुद्दी खाक' कियैक नें जीवन व्यतीत करैत हो. उदाहरणमे अयाची मिश्रक नामक उल्लेख केलनि. मिथिलाक व्यवहार मे सेहो धर्म निहित हेबाक सांकेतिक उदहारण देलनि. नॉस्टेलजिया पर विस्तृत उल्लेख करैत कहलनि जे की पहिले एकरा नकारात्मक रूपे लेल जाइत छल कारण एकर अभिप्राय छल परफॉर्म करबा सँ रोकबाक प्रवृत्ति मुदा आजुक समयमे एकरा सकारात्मक रूपे देखल जा रहल अछि आ ओएह कारण अछि जे हमरा लोकनि अपन गाम-घर स’ जूड़ल छी आ से जुड़ाव रहबाक चाही । बर्ख भरिमे विद्यापति पर्व समारोह पर करोड़ों खर्च पर ध्यान केन्द्रित करबैत कहलनि जे एहि खर्चकें ग्रामीण कृषि वा अन्यान्य समस्या पर खर्च क’ ओकरा सार्थकता प्रदान कएल जा सकैत अछि . हम प्रवासी तखने सफल हएब जखन हमरा लोकनि ग्रामीण समस्याकें अपन समस्या बूझि ओकर निराकरण करबै. सोशल मीडिया पर पसरल जानकी नवमी केर अवसर पर बाइकर्स द्वारा जानकी प्राकट्योत्सव केर प्रदर्शन बला घोषणा किछु हैरान सेहो केलकनि.सविता खान एहेन-एहेन बहुत रास सटीक आ शोधल प्रसंग सोझा रखली जे समसामयिक आ प्रासंगिक छल.

अंतिम वक्ता केर रूपमे कार्यक्रमक अध्यक्ष छलाह डॉ. कैलाश कुमार मिश्र जेकि बाबा नागार्जुनक कविता स’ प्रारम्भ करैत पलायनक विभिन्न कारण सभ पर प्रकाश देलनि जेनाकि पुश एंड पुल फ़ैक्टर अर्थात जमींदारी प्रथामे दबल मजदूर आदि कर्जक दबावमे नोकरी पेशा क’ कर्ज सधेबाक वास्ते पलायन करैत रहल, छात्रजीवनमे पढ़ाइ-लिखाइ वास्ते बाहर आएल आ ओत्तहि बसि गेल आदि-आदि कारण. हिनका नजरिमे प्रवासीक जे सभस’ पैघ कमी रहल अछि ओ अछि गाम-घर स’ माने-मतलब त्यागि परिवार के ल’क’ ओत्तहिकें भ’ क’ रहि जाएब. हिनक मानब छनि जे संस्कृतिकें  धर्मक आधार पर मान्यता स’ बेसी महत्त्व रखैत अछि जे माए सँ जोड़िके राखय अर्थात् भाषा स’ जोड़िक’ राखय आ सएह मूल कारण छैक जे मिथिलाक हिन्नू-मुसलमान सभ मैथिल छी आ सीता सभक पहिचान छथि.

सञ्चालनक अंतिम चरणमे सविता खान मैथिली आ भोजपुरी कार्यक्रम हेतु हिंदी भवनक चयन केर बदलाव हेतु अकादमिक उपाध्यक्ष संजॉय सिंह कें प्रस्ताव देलनि जे एक मैथिली भवन सेहो शीघ्र बनय आ एहेन कार्यक्रम ओत्तहि हुअए. अकादमी वर्तमान उपाध्यक्ष संजॉय सिंह द्वारा समय-समय पर उठैत रहल मैथिली-भोजपुरी अकादमी फराक करबाक मुद्दा पर एकजुट हेबाक निवेदन करैत कहलनि जे हम सभ प्रवासी छी कतहु कोनो भेदभाव नहि छैक. हम समान रूपे दुन्नू भाषा वास्ते काज करैत रहब. पछिला परिस्थितिमे बहुत सुधार आएल छैक तें एकरा किओ गोटे विवादक मुद्दा नहि बनाबी से आग्रह.

उपस्थिति के मामिलामे एक दिन पूर्व भेल भोजपुरी कार्यक्रम सँ बेसी आजुक कार्यक्रममे मैथिलक उपस्थितिकें संतोषजनक कहैत सभकें धन्यवाद ज्ञापित केलनि । समापनमे सचिव विभिन्न विषय पर वैचारिक मंतव्य रखैत आश्वस्त केलनि जे एखन धरि जाहि कोनो भाषायी अकादमिक भवन छै से सरकारी नैं अछि सभटा निजी भवन अछि मुदा सरकार लग सभ भाषाक एक संयुक्त भवन केर प्रस्ताव गेल अछि जाहि पर विचार भ’ रहल अछि. छोट बच्चामे सभमे अपन भाषा ओ संस्कृतिक प्रति लगाव कें ध्यान मे रखैत आगामी ५ मई सँ ९ मई धरि मैथिली ओ भोजपुरी भाषी बच्चा केर प्रतियोगिताक आयोजन कएल जाएत जकर औपचारिक घोषणा अकादमी दिसस’ आधिकारिक रूपे शीघ्रहि कएल जाएत.