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Monday, August 17, 2015

मैथिली-भोजपुरी अकादमी कवि सम्मलेन

रविदिन, 16 अगस्त, संध्या ५ बजे स’ स्वतन्त्रता दिवसक उपलक्ष्य मे कला,संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली सरकारक तत्त्वाधान मे मैथिली-भोजपुरी साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा आइ.टी.ओ. स्थित आइ.सी.सी.आर. आज़ाद भवन केर सभागार मे कवि सम्मलेनक आयोजन कएल गेल. कार्यक्रम मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री राम बहादुर राय ओ कला एवं संस्कृति विभाग दिल्ली सरकारक मंत्री कपिल मिश्राक करकमल स’ दीप प्रज्ज्वलनक संग राष्ट्रगान स’ प्रारम्भ भेल.

राष्ट्रगानक पश्चात भोजपुरी मे देशभक्ति गीतक सामूहिक प्रस्तुति सेहो कएल गेल आ चटपट मे कार्यक्रम कें आगाँ बढ़ेबाक घोषणा क’ देल गेल मुदा दर्शक दीर्घा मे बैसल मोंटामोंटी २० प्रतिशत मैथिल श्रोताक एक आवाज जे हमरा लोकनिक गोसाओंनिक गीत “जय जय भैरवि” केर सेहो प्रस्तुति हेबाक चाही आ एहि बात कें अकादमीक सचिव राजेश सचदेवा ई कहि टारबाक चेष्टा केलनि जे बाद मे प्रस्तुत कएल जाएत मुदा खाँटी मैथिल दर्शक आ मिथिला अभियानी लोकनिक हस्तक्षेप स’ ई प्रस्तुति संभव भेल अन्यथा अन्ठेबाक प्रयास छल.

अकादमीक पदाधिकारी लोकनिक दूनेती केर कतेको साक्ष्य समय समय पर देखार भ’ चुकल अछि आ तकरे पुनरावृति आजुक दिन सेहो सार्वजनिक रूपे सोझा आएल आ एहि बेर ई जिम्मा लेलनि अकादमीक नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष कुमार संजॉय सिंह. हुनका मैथिली प्रस्तुति केर वास्ते उठल सामूहिक स्वर कने बेसी अखैर गेलनि आ भावुकतावश बजाइओ गेलनि जे हमरा ई अप्रिय लागल. भाषाई विस्तार के चौहद्दी सेहो गनौलनि मुदा मैथिलीक अस्मिता के संगे अंगिका, बज्जिका आ मगही केर कौआ-मैना बला कूड़ी मे बाँटिक’........ खैर हमरा लोकनिक भाषा प्रतिनिधि सेहो नगण्ये जेंकां छथि, ज’ गोट-आध हेबो करता त’ ओ अपन खानापूर्ति क’ क’ निमहि रहलाह अछि आ कहुना भोजपुरिये बहन्ने मैथिलियो घुसकल जा रहल अछि आ ज’ से नैं त’ “जय जय भैरवि”क महत्त्व अकादमीक एक-एक पदाधिकारीकें बुझल रहितनि आ मंच संचालन मे भोजपुरी के संग-संग मैथिलीक सहभागिता सेहो रहबाक चाही.

ओना मंच संचालक भोजपुरीक प्रसिद्ध कवि गुरचरण सिंह अपन प्रस्तुति मे कोनो कोताही नैं केलनि मुदा पाइन-बुन्नी में भागैत-भीजैत एकत्रित भेल भाखाप्रेमी के रसास्वादन मे कने कोताही त’ जरूरे भेलै.

रोष-आक्रोश-भाषण-वक्तव्यादिक पश्चात कवि सम्मलेनक सत्र प्रारम्भ भेल आ एक भोजपुरी के बाद एक मैथिलीक क्रम मे अपन कविता पाठ केलनि चन्द्रशेखर मिश्र (भोजपुरी), रमण कुमार (मैथिली), गोरख प्रसाद “मस्ताना” (भोजपुरी), योगानन्द हीरा (मैथिली), डॉ. जौहर शाफ़ियावादी (भोजपुरी), रविन्द्र नाथ ठाकुर (मैथिली), अलख अनाड़ी (भोजपुरी), गुरचरण सिंह (भोजपुरी) आ अंत में गंगेश गुंजन (मैथिली). तीन गोट आमंत्रित कवि केर अनुपस्थिति रहल जेना कि : जंग बहादुर सिंह (मैथिली), सुष्मिता पाठक (मैथिली) आ सुभद्रा वीरेन (भोजपुरी). एहि तीन गोट अदृश्य कवि केर बात ज’ छोड़ि देल जाए त’ मंचस्थ नौ गोट कवि लोकनिक उमेर ४०-४५ बर्ख स’ ल’ क’ अस्सी बर्ख धरि छल मने एहि विधा के पारंगत लोकनिक समागम छल. भोजपुरी कवि सभ त’ वास्तव में पारंगत बुझना गेला कारण कविताक पाँति के प्रस्तुति गेय रूप मे सोझा राखि बेर बेर थोपड़ी बजेबा लेल बाध्य करैत छला मुदा मैथिली कवि लोकनिक रचना मार्मिक, साहित्यिक आ लौकिक विषय स’ सम्बंधित रहितो मुक्त छन्दक बाट धेने कने निरस प्रभाव बनौने जा रहल छल जकरा सोझ बाट पर अनलनि मैथिलीक चर्चित कवि/गीतकार रविन्द्र नाथ ठाकुर.

गंगेश गुंजन कविता पाठ स’ पूर्व “जय जय भैरवि”क महत्त्व स’ पदाधिकारी आ श्रोता के अवगत करौलनि आ संगहि अकादमी स’ आग्रह केलनि जे नव-नव कविकें सेहो मंच स’ जोड़ल जाय जाहि स’ एके व्यक्ति के बेर-बेर अवसर देला स’ बाँकी प्रतिभा वंचित नैं रहि जाए आ संगहि अकादमीक संगठन मे सुधारात्मक प्रयास सेहो कएल जाए जाहि स’ भविष्य में मैथिली आ भोजपुरी भाषा-भाषी केर मध्य सौहार्दता बनल रहए. सचिवक धन्यवाद ज्ञापनक संग कार्यक्रम संपन्न भेल.

Monday, August 03, 2015

मिथिलाक नारी, नहि छथि बेचारी


विगत रविदिन मने 2  अगस्त 2015दिल्लीक कॉन्स्टीट्यूशन क्लब, स्पीकर हॉल मे मैथिली साहित्य महासभाद्वारा पहिल विद्यापति स्मृति व्याखानमाला केर आयोजन कएल गेल. एहि आयोजनक अध्यक्षीय मार्गदर्शन देली सुप्रसिद्ध साहित्यकार आ गोवा केर वर्तमान महामहिम राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा. व्याख्यानमालाक विषय राखल गेल छल मिथिलाक नारी, नहि छथि बेचारीजकर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत केली मैथिलीक प्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री डॉ. उषाकिरण खान.

कार्यक्रमक संचालन किसलय कृष्णक ओजपूर्ण शब्द लालित्यक संग प्रारम्भ भेल आ जोगी भेष मे उपस्थित बथनाहा, सीतामढी निवासी श्यामरुद्र पाठकक भाव सुसज्जित स्वर में विद्यापति रचित कुञ्ज भवन सनिकसल रेगीत सकार्यक्रमक शुभारम्भ भेल. मंचासीन हेबा लेल आमंत्रित कएल गेल क्रम सश्रीमती मृदुला सिन्हा, पद्मश्री डॉ. उषाकिरण खान, श्रीमती करुणा झा (नेपाल), अमरनाथ झा आ हेमन्त झा. एहि ठाम एक बातक जानकारी दी जे भारतक पूर्व राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अबुल कलामक निधन केर धेआन में रखैत दीप प्रज्ज्वलन ओ सामूहिक गीत आदि नैं प्रस्तुत कविद्यापतिक स्मृतिचित्र पर सामूहिक पुष्प माल्यार्पण कएल गेल.

संस्थाक संस्थापक सदस्य अमरनाथ झा स्वागत भाषणक क्रम मे मंचासीन तीनू मैथिलानीक प्रति आभार प्रकट करैत मिथिलाक नारी नहि छथि बेचारीक रूप में हिनका तीनू गोटेकें उदाहरणक रूप मे सोझा रखैत बेटा-बेटी में अंतर करबा सन संकीर्ण मानसिकताक परित्याग करबाक आह्वान केलनि. हेमन्त झा संस्थाक आगामी योजनाक सन्दर्भ मे जानकारी देइत कहलनि जे संस्था एकटा एहन प्लेटफॉर्म तैयार करहल अछि जतनवतुरिया साहित्यकर्मीक रचना केर प्रकाशनादि हेतु सार्थक डेग उठेबा लेल तत्पर अछि आ अबिलम्ब एकर परिणाम सेहो सोझा आबि जाएत.

करुणा झा अपन वक्तव्य मे ई बात सोझा रखलनि जे वास्तव मे वर्तमान जुग मे मिथिलाक नारी बेचारी नहि छथि ई बात भले ही महानगरीय परिवेश मे नै होइ मुदा ग्रामीण स्तर पर एखनो बदलाव के आवश्यकता छै कारण जतभारती सन विदुषी शंकराचार्य के पराजित केलनि ओहि मिथिला क्षेत्र मे आइयो धरि दहेज़ प्रताड़ना, डाइन-जोगिन, घरेलू हिंसा आदि के शिकार नारी भरहली अछि. कहबाक अभिप्राय छलनि जे मानसिकता में बदलाव होए कारण शिव सेहो शक्ति बिनु अधूरा छथि. उपरोक्त विषय पर अपन व्याख्यान देइत साहित्यकार पद्मश्री डॉ. उषाकिरण खान नारी केर संग बेचारी शब्दक प्रयोग कें तार्किक रूपें सोझा रखलनि जे बेचारी बनब आ बेचारी हएब दुन्नू भिन्न सोचक प्रतीक थिक. माएकें अपन मातृत्वक निर्वाह करब बेचारी बनब नहि अछि मुदा जशिक्षाक प्रति जागरूक नहि कएल जाइत अछि ओ ओकरा बेचारी बनाएब अछि. नारी जागरण हेतु गामे-गाम जा वर्कशॉप केर आयोजन कहुनका जागरूक करबाक चेष्टा जकएल जाए तनारी बेचारी नहि रहि स्वाबलंबी भसकैत छथि.

अध्यक्षीय वक्तव्य में महामहिम राज्यपाल मृदुला सिन्हा जी मैथिली भाखा,संस्कृति,पावैन-तिहार आदिमे मिथिलाक नारीक अद्भुत जोगदानक एक सएक उदाहरण सोझा रखैत बजली जे एखनो जहन कोनो विषय पर शोध करबा लेल बैसै छी आ निदान नैं भेटैत अछि तजहिया गोवा सबिहार जाइत छी मैथिलीक गीत पावनि-तिहार आ ओतुका संस्कृति सओ सभ विषय भेट जाइत अछि जे हमरा चाही, जे संस्कृति आइयो धरि मिथिले के नारी सहेज करखने छथि. उदाहरण देइत  बटगबनी अपन किशोरी जी केआ एहेन कतेको पारंपरिक गीत सस्वर गाबि सुनेली जे सूनि समूचा सभागार में अनवरत थोपड़ी गरगराइत रहल. कार्यक्रम अपन सार्थक दिशामे बढैत रहल आ बीच में किसलय कृष्ण अपन स्वरचित मिथिला वर्णन आ तदुपरांत लोक गायिका आराधना मल्लिकक स्वर में सेहो भगवती गीतक प्रस्तुति भेल. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम साहेबक दिवंगत आत्माक शान्ति हेतु एक मिनटक मौन राखि सामूहिक श्रद्धांजलि सेहो देल गेल.

धन्यावाद ज्ञापन करैत संजीव सिन्हा सभ गोटेकें आभार व्यक्त केलनि आ संगे संस्था दिस समैथिली लेखन मे सक्रिय हेबा लेल एकटा बहुत महत्त्वपूर्ण घोषणा आ आह्वान केलनि जे मैथिल युवा जिनक उमेर चालीस बर्ख सकम होए रचनाकर्मी लोकनिक मध्य चयनित एक गोट रचनाकार कें एक लाख टाकाक पुरस्कार प्रतिवर्ष सेहो देल जाएत.

एहि सफल आयोजन में किछु गणमान्य व्यक्ति, साहित्य ओ समाजसेवी लोकनिक उपस्थित उत्साहवर्धक रहल : गंगेश गुंजन, भुवनेश्वर गुरमैता (नेपाल), सुनीत ठाकुर, भास्कर झा (कोलकाता),अमित आनंद (सहरसा), मनोज श्रीपति, विमल जी मिश्र, अमित चौधरी, प्रकाश झा, मुकेश झा,अन्नी मिश्र (मधुबनी पेंटिंग), कुमकुम झा, अभिमन्यु खाँ, निवेदिता झा मिश्रा, आदित्य मिश्रा, सुधा झा, सुनील पवन, कंत शरण, भवेश नंदन, डॉ. ममता ठाकुर, सुशांत झा, श्रीचंद कामत, संजय झा नागदह, विजय झा, ललित नारायण झा, राहुल राय, कौशल कुमार, विभय कुमार झा, पंकज प्रसून, डॉ. पंकज मिश्र, शिशिर झा, कृपानंद झा, हितेंद्र गुप्ता आदि.

Wednesday, May 27, 2015

राजघाटमे कवि सम्मलेन

कार्यक्रम : मैथिली कवि सम्मलेन
आयोजक : मैथिली साहित्य महासभा
सह-आयोजक : मैथिली जिन्दाबाद
स्थान : राजघाट, नई दिल्ली
दिनांक : २४ मइ २०१५ (रविदिन)

मुख्य अतिथि (अध्यक्षता) : डॉ. पंकज मिश्र (प्रो. संस्कृत,दिल्ली विश्वविद्यालय)
उपस्थित कवि : महेश झा डखरामी”,विमल जी मिश्र,मनीष झा बौआभाइ”,कमलेश किशोर झा,अमिताभ भूषण,संजय झा नागदह”,आदित्य भूषण मिश्र ।

ऑनलाइन पठाओल रचनाक कवि : मित्रेश्वर चौधरी अग्निमित्रआ अमरनाथ झा ।


विशेष उपस्थिति : प्रवीण नारायण चौधरी,अमरनाथ झा,संजीव सिन्हा,कुमुदानन्द झा,सुशान्त झा,सोनू मिश्रा,पंकज प्रसून,कंत जी,विश्वजीत झा,संजीत झा,बृजेश झा आदि ।

Friday, May 08, 2015

की कहियौ गे बहिना...रंग जमल की ओहिना!


मैथिली रंगमंच कला, संस्कृति ओ भाखाक रक्षार्थ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपन पहिचान बनेबा लेल निःसंदेह सकरात्मक ओ इमानदार प्रयाससं दिन-राइत एक क' देने अछि मुदा अपनहि घरमे राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक ओ मानसिक रूपे अपेक्षित अछि, जकर टटका उदाहरण अछि मधुबनीमे भेल मैलोरंग आयोजित त्रिदिवसीय (०१मइ स०३मइ) आयोजन मिथिला रंग महोत्सव”.

देशक राजधानी दिल्ली स्थित मैलोरंगक संदर्भमे कम शब्दमे कहल जाए तएतबा जनाएब अनिवार्य जे संस्था द्वारा आयोजनक घोषणा मात्रसदिल्ली आ एनसीआरमे रहनिहार भाखाप्रेमी लोकनिक मध्य अबिलम्ब प्रस्तुति देखबाक जेना उत्कंठा जोर कदेइत छनि मने ओ हकार तेना पसरि जाइत अछि जेना कि चिरप्रतीक्षित होए आ आयोजनक दिन (ओ चाहे ड्यूटी बला दिन किएक नैं होए) लोकक भीड़ पंचसए सिटा हॉलकें सेहो भाखाभाखी प्रेमी लोकनिक सोजहा कम सीटक जगह सिद्ध करैत आबि रहल अछि.

ज्ञात हो कि मैलोरंग द्वारा मधुबनीमे भेल एहि आयोजनक व्यवस्था हेतु कतेको मास पूर्व सनियार-भास आ तदनुरूप दौरबरहा कजेना तेना शहरक मध्य स्थित टाउन हॉल के सुरक्षित करौलनि आ तैयारीमे लागि गेला. कतेको मीडिया, स्थानीय लोक, संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, व्यवसायी वर्ग, राजनैतिक छवि आदिकें जोड़बाक सफल प्रयास केलनि आ निर्धारित तिथिक पूर्व संध्या पर २४ सदस्यीय टीमक संग पहुँचै गेला.
मधुबनीमे बेस उत्साहक संग प्रवेश केलनि तमुदा चयनित स्थान पर पहुँचैत अनायास स्थान परिवर्तन (टाउन हॉल सटाउन क्लब मैदान)क सूचना पाबि जेना इन्होर पाइन ढाइर देल गेल हो सन मनोस्थित भगेलनि मुदा बाध्यता छलनि रंगकर्मी आ रंगमंडलक प्रतिष्ठा बचाएब. हमर संजोग एहेन अपन किछु व्यक्तिगत (उपनयन, विवाह, मूड़नादिक) काजसगाम आएल रही मुदा दोसर दिन (०२ मइ २०१५)क आयोजन दिन फुरसैतमे रही आ गाम सकरीब पैंतीस किलोमीटर दूर मधुबनी रहितो मित्र अभिनेता मुकेश झा निर्देशित आ महेन्द्र मलंगिया लिखित नाटक देह पर कोठी खसा दियआ प्रसिद्ध रंगकर्म निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर निर्देशित आ राजकमल चौधरी लिखित नाटक मैथिली नारी : चारि रंगकेर प्रत्यक्षदर्शी बनबा लेल जखन टाउन हॉल पहुँचलौं तअनायास स्थान परिवर्तनक सूचना पाबि कने अचंभित भेलौं मुदा परिवर्तित स्थान कनिके दूर हेबाक कारणें स्थान पर पहुँचलौं.

स्थान परिवर्तन ओतेक नैं अखरल मुदा अखरल छल हॉल सबदलिकफूजल अकास तरक व्यवस्था कारण हॉलमे ध्वनिक संतुलन आ प्रकाश व्यवस्था नाटकक मूल रूप संग तालमेल बना सुन्नर भाव प्रस्तुति सह आकर्षक लगैछ. जहमरा सन सामान्य प्रेक्षककें ई बात अखरल हेतैक तओहि रंगकर्मी लोकनिकें मनोदशाकें संबंधमे सोचबाक बेगरता देखबैछ जे लोकनि मंचक कोने-कोन कांटी ठोकि पर्दा टांगब सदर्शककें बैसलेल कुर्सी पसारबा सन व्यवस्था स्वयं केने हेता. दिनमे बरखा हेबाक कारणें थाल-कीच आ डाउंस सन-सन मच्छरक दंश झेलैत दर्शकक दुर्गतिकें सेहो अंदाजा लागाओल जा सकैछ.

ओतुक्का वस्तु-स्थित देखला पर हृदय एतेक व्यथित भगेल जे पहिल बेर एहेन भेल अछि जे नाटक देखलाक बाद समीक्षा वा रिपोर्ट लिखबा सबेसी आवश्यकता बूझि परल मिथिला मैथिलीक प्रति निकृष्ट मानसिकताकें उजागर करबाक. किछु सूत्र सज्ञात भेल जे टाउन हॉल मधुबनी सदरक बड़का-बड़का हाकिम लोकनिक टेनिस कोर्ट बनल अछि आ समूचा भारतमे ई एकमात्र नगर भवन होएत जतप्रेक्षक लोकनिकें बैसबा लेल आयोजककें कुर्सीकें व्यवस्था बाहर सकरय परैत छनि. एहिमे राजनीति वा मानसिक संकीर्णताकें कोन रूपे हस्तक्षेप छल से नैं जानि मुदा एतबा निश्चितरूपे आभास भेल जे मैलोरंग अपन दक्ष आ अनुसाशित टीमक संग परिपक्व अभिनय, निर्देशन, प्रकाश, ध्वनि, गायनादिकें सामंजस बैसबैत एकरा सुव्यवस्थित ढ़ंग ससंपन्न करैत संस्कृति आ रंगधर्मकें निमाहलनि. हिनका लोकनिक अदम्य साहस आ समर्पणताकें नमन करैत सदैत अग्रसर होइत रहबाक शुभकामना.

Wednesday, April 22, 2015

पत्र-पत्रिकाक उपलब्धता लेल उठल डेग


मिथिला मैथिलीक प्रति समर्पित जे जोगरक लोक सभ छथि ओ सोशल मीडियाक बेस सदुपयोग करहला अछि आ जुनूनी लोक सभकें एक-दोसरा सजुइट कअपन मन मोताबिक काज करबामे सेहो सहूलियत भरहलनि अछि । देसक राजधानी दिल्लीमे विगत २१ फरवरी, २०१५कअंतर्राष्ट्रीय मातृभाखा दिवस पर स्थापित संस्था मैथिली साहित्य महासभाभव्य आयोजनक संग एकर स्थापना केने छल आ एकरा एकटा मूर्त रूप देबा लेल अपन कटिबद्धताकें सार्वजनिक घोषणा केने छल । एहि घोषणाक निर्वहन करैत विगत १६ अप्रैल,२०१५ (वृहस्पति दिन)कजागरूक आ समर्पित युवा सदस्य हितेन्द्र गुप्ता, अमरनाथ झा, संजीव सिन्हा, रमानाथ झा, प्रकाश झा, संजय झा नागदह”, हेमन्त झा, अमित चौधरी,मनीष झा बौआभाइ”, सतीश वर्मा आदि लोकनिक मध्य एक बैसार भेल, एहि बैसारक आयोजन छल पूर्वी दिल्लीक शकरपुर स्थित एल.एन.मीडियाक कार्यालयमे जकर अध्यक्षताकें जिम्मा सौंपल गेल वरिष्ठ पत्रकार हितेन्द्र गुप्ताकें ।

मैथिली साहित्यक भूत,भविष्य आ वर्तमानक स्थितिक चर्च-बर्च करैत पत्र-पत्रिकाक उपलब्धता हेतु एक सुनिश्चित केंद्र निर्धारित करबाक क्रममे हितेन्द्र गुप्ता संचालित एल.एन.मीडिया नेटवर्क स्वयं आगाँ बढि कार्यालयक उपयोग हेतु सहमति देलक । स्थानक समस्याक समाधान भगेल जेकी सभसबेसी आवश्यक छल आ तदुपरांत पोथी रखबाक वास्ते अनबारी सेहो चाही जे उपलब्ध करेबाक जिम्मा लेलनि अमित चौधरी । कहबाक अभिप्राय जे उद्देश्य सार्थक हो तअर्थ वा व्यवस्था कखनो बाधक नैं भसकैत अछि । अर्थोपार्जनमे व्यस्त सभ गोटे जेना-तेना तालमेल बैसबैत निर्धारित समय पर पहुँचला आ अपन-अपन सहभागिता संग मंतव्य रखैत एकरा निष्पादित केलनि आ नियमित रूपससभ मासक अंतिम वृहस्पति दिन संध्या काल पाँच ससात बजे धरि बैसार करबाक सहमति रखैत आह्वान केलनि जे समस्त प्रकाशक आ लेखक लोकनि अपन-अपन प्रकाशित किछु पोथी साधारण डाक/रजिस्ट्री/हस्तगत वा कुरियर आदिकें माध्यमें पठाबथि आ इच्छुक मैथिल कीनकपढ़बा लेल सेहो संपर्क करथु ।

पत्राचारक पता अछि : एल.एन.मीडिया नेटवर्क, एम.बी.५७ बी,गली सं.-२,नजदीक-निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन,शकरपुर,दिल्ली-९२ ।

मैथिली साहित्य महासभा आगामी ३१ मई,२०१५ (रविदिन)कमैथिलीक नवोदित ओ नव कविक कविता शैलीमे अपेक्षित निखार आ चमक अनबा लेल अनुभवी आ लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार लोकनिक मार्गदर्शनमे एकदीना कार्यशाला (वर्कशॉप)कें आयोजनक नियार सेहो केलक आ एहि संयोजन सह सञ्चालन समितिक सदस्यक रूपमे जिम्मा सौंपल गेल युवा कवि/लेखक विनीत उत्पल,मनीष झा बौआभाइ”,विजय झा आ संजय झा नागदहकें । ओना समय,स्थान आदिकें निश्चय प्रशिक्षक साहित्यकार आ हॉल आदिक उपलब्धता पर निर्भर करैत अछि जेकि प्रक्रियामे अछि आ जल्दिए एकर अंतिम रूपरेखाकें घोषणा सार्वजनिक कएल जाएत ।

कहबाक अभिप्राय जे मिथिला-मैथिलीक प्रति भारत-नेपाल समेत आनो-आनो देसमे रहनिहार मैथिलजन अपन क्रिया कलाप समिथिलाक अस्तित्व बचेबा लेल बिना कोनो मीन-मेखकें जी-जान सलागल छथि आ तदनुरूप स्वप्न साकार होइत देखा रहल अछि ।