Tuesday, January 15, 2019

मैथिली फिल्म 'लव यू दुल्हिन' केर ट्रेलर रिलीज

आइ १५ जनवरी,२०१९ क' अवसर छल श्री राम जानकी फिल्म्स द्वारा निर्मित आ कुसहा त्रासदी पर आधारित फिल्म 'लव यू दुल्हिन' केर टीजर आ ट्रेलर रिलीज करबाक। दिल्लीक द्वारका (महिला पार्क)मे आयोजित उक्त कार्यक्रमक अवसर पर विशाल संख्या मे भाषाप्रेमी लोकनिक उपस्थिति देखल गेल। टीजर वा ट्रेलर मे फिल्मक संकेत मात्र द्रष्टव्य होइत अछि सएह देखल गेल। मनोरंजनक दृष्टिए फिल्मक ट्रेलर, टीजर वा गीतक जे किछु अंश देखाओल गेल से बेस आकर्षक छल। फिल्मक बहुतो दृश्य एहेन देखल गेल जे भोजपुरी फिल्मकेँ टक्कर देबाक प्रयास हेतु सेहो प्रयोग कएल गेल अछि।

फिल्मक जे सभसँ मजगूत पक्ष अछि से अछि सर्वहारा वर्गक मैथिली। भाषाक क्षेत्रीय सीमाकरण केँ तोड़ैत व्यापक रूप देबाक जे प्रयास कएल गेल अछि से सराहनीय अछि। एहि फिल्ममे अभिनय केनिहार बहुतो कलाकार केँ विभिन्न माध्यम सँ अभिनय करैत देखलियनि अछि मुदा एहि बेरुक हुनक उपस्थिति देखि एतबा पूर्ण विश्वासक संग कहल जा सकैछ जे ताहि मामिलामे मनोज श्रीपति केर निर्देशकीय पक्ष काबिल-ए-तारीफ अछि कारण कोन कलाकारक गुण केँ कोन रूपे प्रयोग कएल जाय सएह निकालब वास्तवमे निर्देशकीय गुण होइछ।

विकाश झा बतौर गायकक रूपमे जतबे प्रसिद्धि प्राप्त केलनि अछि आगामी भविष्य मे तेहने चर्चित अभिनेताक रूप मे अपनाकेँ उतारबा लेल मेहनति क' रहलाह अछि से एक बेर सम्पूर्ण फिल्म देखलाक बाद सेहो स्पष्ट भ' जायत। सुर संग्राम फेम प्रसिद्ध गायक आलोक कुमारक भूमिका पूरा स्पष्ट नै भ' पाएल मुदा कम्महि मे हुनक भाव-भंगिमा खासक' नृत्य बेस प्रभावित केलक। निःसंदेह शुभनारायण जी एक अलग मिजाज मे देखना गेलाह। अमिय कश्यप खलनायकक भूमिका मे बेस इमानदारी सँ प्रस्तुत भेलाह अछि।

फिल्मक संगीत पक्ष बेस दमदार अछि। सुधीर झाक गीत लेखन सँ साइते केओ मैथिली संगीतानुरागी अपरिचित हेताह से सुधीर झा फिल्मक माँगक हिसाब सँ गीत लेखन मे सफल भेलाह अछि। एकटा हिन्दी (मुजरा) गीत जे कल्पना पटवारीक गाओल भलेही मैथिली फिल्मक दृश्यक हिसाब सँ उपयोग कएल अछि मुदा सुधीर झाक प्रतिभाकेँ हिन्दी फिल्ममे प्रयोग हेतु दस्तक द' रहल अछि। विकाश झाक स्वर होइन्ह वा देवानन्द केर सुमधुर  स्वर होइन्ह वा पारंपरिक गीत हेतु प्रयोग कएल स्वर मे कविता, मधुलता, मोनी आदि होथि निःसंदेह धनञ्जय मिश्रा सन सूक्ष्म आ पारखी संगीतकारकेँ बेगरता छल एहि फिल्मक संगीत हेतु।

प्रसंगवश किसलय कृष्णक ओ वक्तव्य मोन पड़ि रहल अछि जे सही मायने मे देखल जाय त' "मैथिली फ़िल्म एखन संक्रमण काल सँ गुजरि रहल अछि"। वास्तव मे फिल्मक गुणवत्ताक चर्च तखन करब उचित हएत जखन संख्यात्मक वृद्धि होइक। एहेन संक्रमण काल मे जँ कोनो निर्माता एतबा बजट संग मैथिली फिल्म बनेबाक हिम्मत करै छथि त' निःसंदेह साधुवाद आ प्रशंसाक पात्र छथि। विष्णु पाठक आ रजनीकान्त पाठक सन हिम्मती लोक जा धरि एहेन-एहेन काज नै टेकता मैथिली फिल्मकेँ स्थापित हएब त' दूर निर्माणक कल्पनो करब असंभव अछि।

फिल्मक सम्पूर्ण टीमकेँ फिल्मक सफलताक अग्रिम शुभकामना!

Thursday, December 27, 2018

मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’


प्रेमक बसात फिल्मक सन्दर्भमे कोनो टिप्पणी करबासँ पूर्व फिल्म निर्माणक समूचा टीमक संग जे सभसँ पहिल वाह निकलैत अछि ओ निकलैत अछि फिल्मक निर्देशक सह लेखक रूपक शरर आ निर्माता वेदान्त झा केर प्रति जिनक दृढ़संकल्पता, समर्पणता आ लगनशीलता फिल्मकेँ कतेक हिट करौलक ताहिसँ बेसी महत्त्वपूर्ण अछि जे कतेक लोककेँ जोड़लनि, जगौलनि आ एकटा अभियानक रूपमे एकरा विस्तार देलनि । फिल्म पसीन करब नै करब, दर्शक द्वारा हॉल धरि पहुँचब नै पहुँचब दर्शकक मानसिकता आ समय पर निर्भर करैत छनि मुदा मैथिली फिल्मक प्रचार-प्रसार केर सन्दर्भमे जे कोनो मिथ्याडम्बर पसरल छल तकर ई लोकनि खंडन जरूर केलनि । सामाजिक सञ्जाल होइक वा जमीनी स्तर पर उतरि घरे-घर जाक’ लोककेँ जागरूक करबाक परिणाम थिक जे गामसँ ल’ क’ परदेश धरि आइ मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’ सभक ठोर पर चढ़ल अछि आ मैथिली फिल्मक इतिहास मे एक महत्त्वपूर्ण कड़ी जोड़बा लेल तैयार अछि।

२५ दिसम्बर,२०१८ क’ जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू),दिल्ली केर ‘कला एवं सौंदर्यशास्त्र संस्थान सभागारमे 'जे एम के एंटरटेनमेंट'क बैनरमे बनल मैथिलीक बहुचर्चित फिल्म ‘प्रेमक बसात’ केर स्क्रीनिंग कएल गेल । ज्ञात हो कि एहिसँ पूर्व दिल्ली-एनसीआरक विभिन्न क्षेत्रमे एकर प्रदर्शन सेहो कएल गेल आ तहिना दर्शक दिससँ सेहो फिल्मकेँ नीक रिस्पॉन्स भेटल । जेनाकि अन्यान्य भाषा-भाषी क्षेत्रमे फिल्म निर्माण निरंतरताक संग आगाँ बढि रहल अछि तेहेन सन स्थितिमे स्वाभाविक अछि ओहिसँ सम्बद्ध लोकक वास्ते सुनिश्चित रोजगारक रूपमे एक विकल्प फूजल अछि । मैथिली फिल्म निर्माणक प्रति उदासीनता विभिन्न प्रकारक अवधारणाकेँ जन्म दैत अछि आ तैयो पर ज’ कोनो व्यक्ति एहेन सन दुःसाहस करै छथि त’ हमरा लोकनिकेँ चाही कि ओकरा प्रोत्साहित कएल जाय ।

फिल्मक संदर्भमे किछु महत्त्वपूर्ण बात कहब आवश्यक अछि जेनाकि फिल्मक कथा आ ओकर ताना-बाना बेस प्रभावित केलक । कोनो जाति वा समुदाय विशेष मध्य विभेदीकरणक राजनैतिक दुष्प्रभाव चाहे कतबो होइक मुदा कला आ साहित्य सभदिना एकटा सौहार्द्रपूर्ण वातावरणक निर्माण करैत आबि रहल अछि आ तैं कला आ साहित्यकेँ समाजक दर्पण केर रूपमे सांकेतित कएल जाइत रहल अछि । सामाजिक स्तर पर अस्वीकार्य हिन्नू-मुस्लिम प्रेमक केन्द्रमे नायक-नायिकाकेँ उतारब एकटा चुनौती अछि मुदा से सत्योद्घाटन करैत विषय-वस्तुकेँ सोझा रखैत लेखकक बुधियारी स्पष्ट रूपसँ दृष्टिगोचर होइत अछि ।

रूपक शरर पहिने एक सशक्त अभिनेता छथि तखन लेखक वा निर्देशक तैं कोन कलाकारसँ केहेन काज लेल जेबाक चाही से नीक जेंका जनैत छथि आ एकटा निर्देशकक रूपमे सफल भेल छथि । एकटा लेखकक रूपमे मारिते रास त्रुटि सभ सोझा अबैत अछि मुदा नीक गप्प ई जे ताहिसँ फिल्मक प्रस्तुतिमे कतौ बाधा नै अबैत अछि अपितु आगाँ हिनकासँ असीम संभावनाक प्रति आश्वस्त होइत छी । हिनक शालीनता आ कर्मठताक सभसँ पैघ उदाहरण जे ई प्रत्येक बातकेँ स्वीकारबाक क्षमता रखैत छथि आ भविष्य मे कोनो सुधार हेतु साकांक्ष देखल जाइत छथि तैं एहने सकारात्मक व्यक्तिसँ आशा आ अपेक्षा सेहो कएल जा सकैछ ।

फिल्मक लोकेशन, कैमरा, कोरियोग्राफी, गीत, संगीत, गायन, सम्पादन, वस्त्र विन्यास, साज-सज्जा आ अन्य तकनीकी पक्ष पर सेहो खूब काज कएल गेल अछि । मुख्य अभिनेताक रूपमे पीयूष कर्णक अभिनय सराहनीय अछि ख़ासक’ हिनक दोसर बेरुक उपस्थिति डॉक्टर सलीम केर किरदारमे भाव-भंगिमा बेस प्रभावित केलक । अभिनेत्री रैना बनर्जी (माहिरा) शुरूसँ अंत धरि अपन टोन कायम रखबामे सफल भेलीह अछि । महिरा केर शौहर रहमान केर रूपमे जीतू सम्राट समूचा फिल्ममे एक फराक छविक निर्माण करैत छथि । शरत सोनू माहिरा केर भाइ तस्लीमक किरदारमे एकटा सशक्त,अनुभवी आ परिपक्व अभिनेताक रूपमे देखल गेलाह । तस्लीमक पत्नीक किरदारमे मरियम (आरती शंकर मिश्रा) सेहो कतौ ओवरटोन नै भेल छथि । गोविन्द पाठक (भगत जी)क उपस्थिति मात्र फिल्मक रोचकता बना रखबामे सफल भेल अछि । नायकक तीन गोट लंगोटिया संगी सेहो एक-दोसरा संग ट्यून बनेबामे सफल भेल छथि । आशुतोष सागर कम दृश्यमे नीक काज केने छथि । निःसंदेह सहयोगी मुदा महत्त्वपूर्ण कलाकारक रूपमे मोना रे, एस सी मिश्रा,कल्पना मिश्रा, राजेन्द्र कर्ण, प्रज्ञा झा, शैल झा, प्रेम नाथ झा, राकेश त्रिपाठी , राजीव झा, आकाश दीप, अनुराग कपूर, कुणाल ठाकुर, भारतीश झा, मनीष झा, सुशोभित झा आदिक अभिनय सराहनीय अछि ।

फिल्मक संगीत पक्ष बेस मजगूत अछि जकर आनन्द डॉल्बी डिजिटल हॉलमे बैसिक’ लेल जा सकैछ । जेनाकि तोची रैना केर स्वरमे गाओल गीत “आस पुरा दिय’ मौला” आ आदित्य नारायण केर गाओल गीत “अहाँ जे एलौं त” मैथिली फ़िल्ममे पहिल बेर प्रयोग कएल गेल अछि त’ एतबा गप आत्मविश्वासक संग कहल जा सकैछ जे सावनी मुद्गल केर स्वरमे “नयन अटकल अहींक नयनमे”, प्रवेश मल्लिक आ नेहा प्रियदर्शिनी केर स्वरमे “ललमुनियाँ के ताड़ी”, सुनील मल्लिकक स्वरमे “ई झूठक दुनियाँ” सेहो ओहि गीत सभसँ कतौ उन्नैस नै भेल अछि । निःसंदेह गीतकेँ कर्णप्रिय बनेबामे सरोज सुमन, प्रवेश मल्लिक आ एस कुमार केर संगीत संग सरल,सहज आ सुन्दर शब्दक प्रयोग करैत सारिका कुमार, अयोध्यानाथ चौधरी, शेखर अस्तित्व, प्रवेश मल्लिक आदिक गीत लेखन सेहो ततबे प्रशंसनीय अछि ।     

एकटा सामान्य दर्शकक रूपमे ई फिल्म बेस पसीन पड़ल । जे कोनो कमजोर पक्ष सोझा आएल अछि ताहि लेल आगाँ सुधारात्मक प्रयास कएल जा सकैछ मुदा फिल्म प्रभावित नै भेल अछि आ निर्माणक प्रसंशा मुक्त कंठसँ कएल जा सकैछ । समीक्षक लोकनिक विचार फराक भ’ सकैत छनि । मैथिली फिल्मक गुणवत्ता वा तुलनात्मक दृष्टिकोण आएब आवश्यक मुदा एखन से बेर नै आएल अछि कारण जा धरि संख्यात्मक वृद्धि नै हएत तुलना करब मोसकिल हएत । फिल्मक गुणवत्ता हेतु सभसँ आवश्यक आ महत्त्वपूर्ण अछि प्रोफेशनल कलाकारक चयन , तकनीकी टीम, संगीत, लेखन, निर्देशन आदि जेकि गानल-गूथल फिल्म मात्रमे देखल जा सकैछ अन्यथा यू-ट्यूब हिट करेबा लेल मारिते रास फिल्म उपलब्ध अछि जकर स्तरहीनता केर आधार पर मैथिली फिल्म उद्योग स्थापित करबाक सपना साकार हएब असम्भव अछि । ई फिल्म ओहि तमाम अवधारणा केँ खंडित करैत ताहि सभसँ कएक डेग आगाँ बढि प्रोफेशनल ढ़ंगसँ काज करबामे सफल भेल अछि आ मैथिली फिल्मक दशा-दिशा निर्धारण मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निमाहत ततबा आश्वस्त छी ।

Wednesday, December 05, 2018

दिल्लीमे बहत प्रेमक बसात


मैथिली फिल्म 'प्रेमक बसात' केर प्रोमोशन आ प्रदर्शन हेतु फिल्मक लेखक सह निर्देशक श्री रूपक शरर किछु दिन सँ एखन दिल्ली प्रवास मे छथि। कोनो निर्देशक मे एहि प्रकारक जुनून विरले देखल जाइत अछि। भारत होअए वा नेपालीय मिथिला क्षेत्र, दुन्नू ठाम किछु हॉलक उपलब्धता अनुसार फिल्मक यथासंभव प्रदर्शन सेहो भेल। ई लोकनि एत्तेक जल्दी नहि त' हारि मानता आ ने हड़बड़ा क' नोकसानक कोनो रोदन करताह। तखन करताह की? करताह ओएह जे हमरा लोकनि देखि रहल छी आ से थिक हिनका लोकनिक सद्प्रयास। प्रयास की क' रहलाह अछि से सामाजिक सञ्जाल पर सभक सोझा अछि। महानगर मे बसल मैथिल लोकनि धरि फिल्म कोना पहुँचय एखन ताहि लेल मुम्बई आ दिल्ली मे सकारात्मक डेग बढ़ा चुकलाह अछि। रूपक भाइ, वेदांत भाइ आ फिल्मक समस्त टीम अहाँ लोकनिक समर्पणता सँ मैथिली फिल्मक भविष्य एक ने एक दिन अवश्य निर्धारित हेतैक, कारण मेहनति बेकार नै जाइत छैक। सम्भव छैक जे अहाँक मेहनतिक लाभ आगाँ जा क' दोसर लोककेँ भेटनि।

जे मूल बात कहबाक छल अबै छी ताहि पर मने फिल्म प्रदर्शन सम्बन्धी विषय पर। दिनांक ०८ आ ०९ दिसम्बर,२०१८ क' संध्या ०६:०० सँ ०९:०० बजे निम्नलिखित स्थान पर एकर प्रदर्शन हएब सुनिश्चित भेल अछि। जेनाकि दिल्लीमे ई पहिल प्रदर्शन अछि ताहि हिसाबे बेसी सँ बेसी दर्शककेँ एकत्रित हएब आवश्यक अछि। मुख्य उद्देश्य मैथिली फिल्म देखबा लेल लोककेँ जागरूक करबाक अछि। जागरूकताक क्रममे रूपक भाइ दिल्लीक विभिन्न क्षेत्र मे जा-जाक' जन-जन सँ जुड़बाक जे प्रयास क रहलाह अछि से कतौ ने कतौ एकटा सार्थक उमेद सन बुझना जा रहल अछि।

ओना दिल्ली मे एखन मैथिलीक विभिन्न कार्यक्रमक सीजन चरम परम अछि आ अहू दू दिन दिल्ली आ लगीचक किछु क्षेत्र मे विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक आयोजन संग-संग दू-दिवसीय विशुद्ध साहित्यिक/सांस्कृतिक कार्यक्रम मलंगिया महोत्सव केर आयोजन सुनिश्चित अछि, तैं सम्भव अछि जे हम व्यक्तिगत स्तर पर शो देखबा सँ वंचित रहब। ओना निर्देशक साहेब गछलनि अछि जे ई दू दिन जँ नीक सहयोग/उपस्थिति रहल त' पुनः शीघ्रहि आर अधिक शो केर प्रदर्शन हएत कारण हमर लक्ष्य अछि जे प्रवासी मैथिल लोकनि उपलब्धताक एहि अवसरक लाभ उठाबथि ताकि हमरो लोकनि आगाँ फेर सँ सिनेमा बनेबाक साहस क' पाबी।

हमर मानब अछि जे बहुतो एहेन लोक छथि जिनका वास्ते उक्त आयोजन सँ बेसी महत्त्वपूर्ण सिनेमा देखब होइत अछि आ सम्भवतः बेसी गोटे सपरिवार कोनो हिन्दी-अंग्रेजी सिनेमा देखबा लेल जाइते रहैत छथि, खासक' हुनका लेल जे एहि बेर अपने सपरिवार निम्नलिखित स्थान आ समय पर पहुँची आ एकटा दर्शकक रूपमे अपन सम्पर्कक लोककेँ सेहो प्रेरित करी। फिल्म निर्माणक बाद दर्शकक रूपमे हमरा लोकनिक सेहो किछु जिम्मेवारी बनैत अछि तकर निर्वहन करी आ तदनुकूल सहयोग करी।

सिनेमा-प्रेमक बसात
राजा राममोहन रॉय मेमोरियल हॉल
(गंधर्व महाविद्यालय केर ठीक सोझा)
विष्णु दिगम्बर मार्ग, आई टी ओ (मेट्रो गेट संख्या-२)

नोट : अग्रिम बुकिंग करेबा लेल अपने लोकनि अभि आनन्द/विपिन झा सँ 8447883467 वा 7532871208 पर संपर्क सेहो क' सकैत छी वा सहूलियतक अनुसार काउंटर पर लेल जा सकैत अछि।

Friday, November 16, 2018

अंतर्राष्ट्रीय रामायण महोत्सव,दिल्ली मे मिनाप


३० अक्टूबर,२०१८ क' दिल्लीक कमानी सभागार मे आयोजित ४म अंतर्राष्ट्रीय रामायण महोत्सव मे भारत सहित छः गोट देशक सहभागिता छल। पड़ोसी देश नेपाल दिस सँ वा ई कही जे मिथिला दिससँ एहि महोत्सव मे हमरा लोकनिक प्रतिनिधित्व कएल एकमात्र संस्था मिनाप,जनकपुरधाम,नेपाल।
सांस्कृतिक चेतनाक अग्रदूतक रूपमे मिनाप जतबे ख्यातिप्राप्त नाम अछि ततबे सार्थकताक संग राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपन उपस्थिति दर्ज करेबामे सफल रहल अछि। मैथिली भाषा, कला आ संस्कृतिक उन्नयनार्थ समर्पित संस्था मिनापक नाम सुनला मात्र सँ मैथिलीक बाँचल ओहि तमाम अस्तित्वक बोध होइत अछि जे आजुक समयमे बँचा राखब परमावश्यक सन बुझना जाइछ।

उक्त अवसर पर मिनापक कलाकार द्वारा जानकी लीला केर प्रस्तुति बेस उत्तम आ प्रशंसनीय रहल। जँ मंच पर उपस्थित चरित्रक अभिनय आ नृत्य पक्षक बात करी त' जानकी, राम, लक्ष्मण, जनक, दशरथ, पमरिया, सखी-सहेली आ अन्य सहयोगी लोकनिक प्रस्तुति उत्तम कहल जा सकैछ।
जेनाकि मिनाप कोनो मंच पर अपन अनुशासन हेतु जानल जाइत अछि आ तकर पालन करैत अहू ठाम देखल गेल आ निष्कर्षतः कहल जा सकैछ जे मैथिली भाषा संरक्षण-संवर्धन हेतु एहेन-एहेन किछु संस्थाक सक्रियता बनल अछि जकरा पर विश्वास कय मैथिलीक वर्तमान आ भविष्यक प्रति आश्वस्त भेल जा सकैछ।

जँ संगीत पक्षक बात करी त' सांस्कृतिक मंच पर सुनील मल्लिकक उपस्थिति मात्र सँ मिथिला माँटिक सुच्चा गीत-संगीत सँ वातावरण सुवासित हएब सुनिश्चित अछि। हिनक गीतक चयन आ प्रस्तुति मे तान संग तार मिला चलबा मे सक्षम ललित कामत, संगीता देव आ कम वयस सँ अपन मधुर स्वर लेल बेस चर्चित गायिका नेहा प्रियदर्शिनी केर तालमेल मैथिलीक किछु पारंपरिक आ किछु मौलिक स्वर-शब्द-संगीतक मिश्रण सँ दर्शक लोकनि बेस आत्म विभोर देखल गेलाह। सांगीतिक समूह मे ढ़ोलक पर संगत करैत देखल गेलाह हास्य अभिनेता राम नारायण ठाकुर आ अन्य वादक लोकनि जे दक्षतापूर्वक एहि मे संग पुरलनि।

संगीत प्रधान प्रस्तुति हेबाक कारणे अभिनय सांकेतिक छल जकरा संग मे नृत्यक समावेश सेहो अद्भुत छल। सोहर सँ ल क समदाउन धरिक गीतक मध्य स्वागत गीत, मिथिला वर्णन, पमरिया गीत आदिक संग अभिनय सेहो ततबे विलक्षणताक संग प्रस्तुत कएल गेल। जानकी जन्म सँ ल' ' जानकी परिणय धरिक जे परिकल्पना अछि ओकर एकटा साकार रूप देबाक प्रयास मे मिनापक वर्तमान अध्यक्ष परमेश झाक दिशा निर्देशन मे प्रत्येक कलाकारक बीच तालमेल देखिते बनैत छल। किछु दृश्य जेना जनक जीक हर मे जोतल बड़दाकार दू गोट मनुख (कलाकार)क प्रयोग, कोहबरक प्रवेश द्वार पर दू गोट कलाकार द्वारा हाथ जोड़ि प्रवेश द्वारक आकृति बनेबा सन प्रयोग दर्शककेँ बेस पसीन पड़लनि। पुष्प वाटिका मे राम-जानकीक भेँटक क्रममे सजाओल गेल पुष्प-वाटिका, सीता स्वयंवर हेतु सजल जनकक दरबार कमानी ऑडिटोरियमक मंचकेँ आर बेसी शोभायमान क' रहल छल।

ओना कएक ठाम इहो देखल जाइत अछि जे मंच पर पर्याप्त जगहक अनुपलब्धताक कारणे कलाकार लोकनिकेँ बाध्य भ' गुंजाइश करय पड़ैत छनि मुदा संख्यात्मक दृष्टिकोण सँ जानकी लीला प्रदर्शन हेतु मिनाप सँ सहभागी कलाकार लोकनिकेँ जतबा आवश्यक मंच (क्षेत्रफल) चाही से कमानी मे पर्याप्त छल आ तदनुसार समूह द्वारा एकर पूर्ण उपयोग सेहो कएल गेल। वस्त्र-विन्यास, साज-सज्जा, मंच परिकल्पना,ध्वनि आदिक बीच नीक सामंजस्य देखल गेल। प्रकाश व्यवस्था एक रत्ती आर नीक हेबाक चाही छल कारण समुचित संसाधन रहितो ओकर परिचालन मे कएक ठाम त्रुटिक आभास भेल।

प्रायः हमरा लोकनि कोनो निजी संस्थाक आयोजन मे छोट-छोट त्रुटि पर ध्यानाकर्षण करबाक क्रममे नीक बातकेँ बिसरा जाइ छी मुदा निजी संस्थाक आयोजन मे किछु व्यवस्था ततेक सुव्यवस्थित होइत अछि जे सरकारी कार्यक्रमक पर्याप्त संसाधन अछैतो हूस सन लगैत रहैत अछि, जेनाकि प्रत्येक रंगकर्मीक मंच पर परिचय ओकर चरित्रक संग हेबाक चाही, कारण कोनो कलाकार वास्ते अर्थ सँ बेसी महत्त्व ओकर नाम होइत छैक,ओकर यश होइत छैक आ तैं आवश्यक छैक जे ओकर व्यक्तिगत पहचान स्थापित हो, जे एहि ठाम नै देखल गेल।

रंगप्रमुखक सम्मान मे सेहो हड़बड़ी देखल गेल, जे कि नाटक सँ पूर्वहि दुन्नू देशक प्रतिनिधि (मलेशिया आ नेपाल)केँ कराओल गेल। कलाकार जखन अपन प्रस्तुति देबा लेल तैयार रहै छथि त' चरित्रक अनुसार मेकअप मे रहै छथि आ हुनक प्रयास रहै छनि जे दर्शक संग हुनक पहिल भेंट एक किरदारक रूप मे होइक आ सएह देखल गेल अहू ठाम। मिनापक वर्तमान अध्यक्ष परमेश झाक घोषणा भेल मुदा ओ मेकअप आ टीम संगठित करबामे व्यस्त रहथि आ तैं उद्घोषकक पुनर्घोषणाक आधार पर मिनापक पूर्व-अध्यक्ष सुनील मल्लिक केँ ई सम्मान ग्रहण करय पड़लनि।

कार्यक्रमक सफलता एहि बातक द्योतक अछि जे कामकाजी दिवस रहितो समूचा सभागार (६००-६५० सीट) खचाखच भरल रहल आ प्रस्तुति ततेक रोचक छल जे निरन्तर करतल ध्वनिक संग कलाकार लोकनिक उत्साहवर्धन होइत रहल। संगीत प्रधान जानकी लीलाक एहि प्रस्तुतिमे नृत्य-अभिनय-संगीतक मध्य समावेश एतेक परिपक्वताक संग सोझा आएल जकर अपेक्षा प्रायः मिनाप सन समूह सँ कएल जाइत अछि।

-मनीष झा बौआभाइ/दिल्ली/१६.११.२०१८

Thursday, November 08, 2018

चारि दिवारी (कविता)


सृजनक चाक पर गढ़ल चौमुखी दिवारी
आ अहाँक उसकाओल टेमी सँ टिमटिमाइत दीप केँ
जोगा क' ' आएल छी गाम सँ महानगर
पूजै छी ततबे आस्था संग
जतबा लक्ष्मी, गणेश आ कुबेर केँ

कोनो प्रवासीक श्रीयुक्त आवास पर
स्वयं शारदा संग गतिमान
काव्य दीपक एहि विकास यात्रामे
सहयात्री बनि संग पुरैत
गुँजन गुंजित अधर गान
कोनो देशक राष्ट्रगान जेँका समयक मर्यादा
आ अनुशासनक निर्वाह करैत
कृतज्ञ पुष्पार्पण क' रहल
जीवकांत, हरेकृष्ण आ नारायण केँ

अन्हार-अनचिन्हारक ओझराहैट सँ भिन्न
इजोत पसारबा लेल दृढसंकल्पित
तीन गोट जरैत दीप मध्य
उद्वेलित करैत अछि एक अदृश्य साधकक धैर्य
जनिक कर्त्तव्यपरायणता सँ होइत अछि गौरवबोध
जिनका सँ बाँचल अछि पुरखाक डीह-डाबर
संगहि निज़ामी शहरमे मैथिली साहित्यक अस्तित्व

© मनीष झा बौआभाइ /दिल्ली/०८.११.२०१८

Tuesday, October 30, 2018

मैथिली फ़िल्म 'प्रेमक बसात'क प्रदर्शन ०२ नवम्बर,२०१८ सँ


मैथिली फीचर फिल्म 'प्रेमक बसात' केर निर्माण टीम द्वारा जतबा श्रम करक चाही से पूर्ण इमानदारीक संग केलनि अछि। एतबा प्रोमोशन आ जन-जागरूकताक बावजूदो जँ हमरा लोकनि एक मैथिल दर्शक बनि समर्थन नहि क' पाएब त' फेर मैथिली फिल्म उद्योग आ रोजगार कोना स्थापित भ' सकत। फिल्मक निर्माण आ तकर प्रदर्शन होइत रहला सँ वैश्विक स्तर पर स्थानीय कला-संस्कृति आ भाषाक प्रति लोकक आकर्षण बढ़ैत छैक आ तदनुरूप विस्तार पबैत छैक।

प्रदर्शनक उपरान्त फिल्मक गुणवत्ता पर प्रतिक्रिया सेहो आएब आवश्यक अछि ताकि आर दोसर कोनो फिल्म पूर्ण तकनीकी आ व्यवसायिकता संग निर्मित भ सोझा अबैत रहए आ सुधारक गुंजाइश बनल रहैक।

जँ एकटा दर्शक मात्र बनला सँ हमर कला-संस्कृति आ भाषा संरक्षित आ संवर्द्धित होइत रहए त सहयोग करबा मे कोनो हर्ज नहि।

फिल्मक प्रोमोशन हेतु लेखक सह निर्देशक रूपक शरर, निर्माता वेदांत झा, अभिनेता पीयूष कर्ण, अभिनेत्री रैना बनर्जी ,सह-अभिनेता राजेन्द्र कर्ण आदि केँ जमीनी स्तर पर गाम सँ ल' ' शहर धरिक मेहनति जे सामाजिक सञ्जालक माध्यम सँ सोझा आएल अछि से निःसंदेह हिनका लोकनिक विश्वासक प्रति आश्वस्त करैत अछि।

हिनका लोकनिक एहि विश्वासमे संबलता प्रदान करबा लेल भारत आ नेपालक मैथिल दर्शकगण २ नवम्बर,२०१८ क' पहुँचू अपन निकटस्थ सिनेमा हॉल आ लिय' आनंद एहि चिर प्रतीक्षित फ़िल्मक जकर नाम अछि 'प्रेमक बसात'

दिल्ली वा दिल्ली एनसीआर मे प्रदर्शन हेतु प्रतीक्षारत एक दर्शक फिल्मक अपार सफलताक अगाते शुभकामना प्रेषित करै छी!

Tuesday, October 23, 2018

ग्रामीण रंगमंच पर कथा ‘सुबहा’ आ 'मुक्ति प्रसंग' केर मंचन एकल अभिनय

मधुबनी जिलाक रामनगर (परजुआरि) गाम मे चारिदिवसीय नाट्य मंचनक पहिल राति १५ अक्टूबर,२०१८ क' दू गोट मंचन क्रमशः 'सुबहा' जे कि ऋषि वशिष्ठ द्वारा लिखित-निर्देशित एवं प्रभाती कमलिनी द्वारा अभिनीत कथा मंचन छल आ दोसर सुप्रसिद्ध लेखक राजकमल चौधरी लिखित कविता 'मुक्ति प्रसंग' आधारित काव्य मंचन छल जाहि मे निर्देशन आ अभिनेताक रूप मे प्रस्तुत भेलाह किसलय कृष्ण।


'सुबहा' एक गोट मुसलमान पात्रकेँ केन्द्र मे राखि लिखल गेल कथा अछि। अज्ञात चोर द्वारा गामक मन्दिर सँ मूर्ति चोरि कएल गेल मुदा ग्रामीण द्वारा अनावश्यक तर्कक आधार पर ताहि अपराधक सजा पटिया बेचि गुजर केनिहार फूलहसन नामक एक निर्दोष व्यक्ति केँ आरोपित कय ओकरा जेल पठबा देल गेल। जेल सँ बहरेलाक बाद समाज द्वारा उपेक्षित फूलहसन केँ एकमात्र विश्वास छल ओहि अबोध बालिका नरेनी पर जकरा ओ अपन निर्दोष हेबाक सबूत देमय चाहैत छल से नरेनी जखन ओकरा गला मे लिपटि जाइत छै, फूलहसन केँ विश्वास भ' जाइत छैक जे जगदम्बा स्वरुप नरेनी ओकरा माफ़ क' देलकै। फूलहसन केर आस्था मे लेखक जाहि तरहे अल्लाह आ ईश्वरक प्रति समानता देखै छथि से निश्चित रूप सँ जाति-धर्म सँ ऊपर उठि मानवता केँ चिन्हित करैत अछि।

कथा जहिना अपन विशिष्टता संग छाप छोड़बा मे सफल भेल अछि तहिना प्रभाती कमलिनी केर अभिनय। एकल अभिनय मे एकटा पैघ चुनौती होइत अछि जे मंच आ प्रॉपर्टीक पूर्ण उपयोग केना करी कारण एक्कहि अभिनेता केँ विभिन्न चरित्र आ चरित्रक अनुरूप कॉस्ट्यूम संग क्षणहि मे सोझा आएब बड्ड दुष्कर काज अछि आ ताहिमे प्रभाती केर आत्मविश्वास देखबा जोग छल। लेखक,निर्देशक ऋषि वशिष्ठ संग अभिनयक माध्यम सँ प्रभाती निस्सन उपस्थिति दर्ज करौलनि। सभसँ बड़का बात जे ग्रामीण रंगमंच पर जतय महिला उपस्थिति नगण्य अछि तेहेन सन चिन्ताजनक स्थिति मे ऋषि वशिष्ठ सन पिता प्रशंसाक हक़दार छथि जे अपन सुपुत्री केँ रंगमंच हेतु तैयार क' रहलाह अछि।

दोसर मंचन छल राजकमल चौधरी लिखित 'मुक्ति प्रसंग'क आ एहि बेर फ़िल्म समीक्षक/निर्देशक/उद्घोषक किसलय कृष्ण देखल गेलाह एक अभिनेताक रूप मे। राजकमल चौधरी द्वारा अन्तिम समय मे लिखल गेल पटनाक राजेन्द्र सर्जिकल वार्ड सँ मृत्यु आधारित एहि कविताक मंचन करब अपनाआप मे एक चुनौती अछि जकरा स्वीकारब सहज नहि मुदा से साहस केलनि किसलय कृष्ण। जँ अभिनय मे नियमितताक संग उपस्थित होथि त' नीक संभावना देखना जाइछ। शहरी मंच जतय समुचित संसाधन उपलब्ध रहैछ तेहेन ठाम एकर मंचन एक बेर देखलाक बाद अभिनय सम्बन्धी किछु कहब उचित हएत।

ग्रामीण रंगमंच पर प्रकाश,ध्वनि आदिक समुचित व्यवस्था करब एखनो कठिनाह काज अछि। तमाम मार्गदर्शन केर बावजूदो साउंड आ लाइट ऑपरेटर अपन अज्ञानता देखा गेल जकर नोकसान सोझे कलाकारक मनोबल पर पड़ैछ। दुन्नू मंचन मे एकल अभिनय छल आ दुन्नू कलाकार अपना भरि सीमित संसाधनक संग तालमेल बैसेबाक चेष्टा करैत उम्दा प्रस्तुति देलनि।

सम्मानक सम्मानमे (रामनगर,परजुआरि,मधुबनी)


दुर्गापूजा मे गाम जा सकब वा नै सन द्वन्द मे पड़ल अन्ततः पहुँच जाइ छी गाम आ अपन गाम सँ पहिने पहुँचै छी रामनगर (परजुआरि)। गामक नाम सुनने मात्र रही से जेना पहिल-पहिल जेबाक अवसर भेटल ओ कोनो कुटुमैती मे नोत-हकार पूरय नै बल्कि ग्रामीण रंगमंच केँ पुनर्स्थापित करबाक संकल्प ल' ठाढ़ ग्रामीण, ओहि गामक संस्कृतिकर्मी आ लगातार चारिदिवसीय नाट्य मंचनक पहिल रातुक मंचनक साक्ष्य बनबा लेल।

निर्धारित समय सँ प्रारम्भ होइत कार्यक्रमक पहिल सत्र उद्घाटन सत्र सँ होइत अछि। मैथिलीक सुप्रसिद्ध नाटककार श्री महेन्द्र मलंगिया, ख्यातिप्राप्त लेखक श्री रामलोचन ठाकुर, युवा लेखक/प्रकाशक अजित आजाद मंचस्थ होइ छथि आ सञ्चालनक क्रममे डॉ. कमल मोहन चुन्नू द्वारा बेर-बेर मंच पर मनीष झा बौआभाइ केँ एबाक उद्घोषणा कएल जा रहल छल। हिनका लोकनिक संग मंच पर आसीन होयब कठाइन सन लगैत छल आ इशारा सँ मना केलाक बावजूदो चुन्नू जीक आग्रह आ धाख मंच धरि घीचि अनलक।

अतिथि सम्मानक क्रममे गामक प्रतिष्ठित व्यक्ति श्री घनश्याम ठाकुर द्वारा मिथिला पेंटिंग काढ़ल पाग, खादी केर आकर्षक गमछा आ विद्यापति नाट्य मंच,रामनगर केर स्मृति चिन्ह पाबि अपनाकेँ भाग्यशाली हेबाक अनुभूति होइत रहल। अतिथि वक्ता लोकनिक मध्य ग्रामीण रंगमंच पर अपन अल्पज्ञतानुरूप किछु अनुभव साझा करबाक अवसर सेहो हमरा किछु साहस देलक।

गाम-गाम ऑर्केस्ट्राक दूषित रूप अपन अस्तित्व पसारि लेने अछि। जँ किछु भाषायी अस्तित्व बाँचल अछि त' किछु मैथिली गायक लोकनिक प्रयास मात्र सँ अन्यथा मैथिली कार्यक्रमक कोनो तेहेन विकल्प बँचलो नहि छल। एहेन सन विकराल परिस्थिति मे रामनगर मे जँ मैथिली नाटकक प्रति समाज जागरूक होइत छथि त' स्वाभाविक रूप सँ दर्शकक प्रति श्रद्धा भाव जगैत अछि। एतेक चित्त-पित्त मारिक' शांतिपूर्वक बिना कोनो हो-हल्ला आ पिहकारी केँ उद्घाटन सत्र सँ ल' ' धन्यवाद ज्ञापन धरिक सहयोग कोनो गामक लोक वास्ते अनुकरणीय भ' सकैछ।

आदरणीय डॉ. कमल मोहन चुन्नू जी सन अभिभावकक अनुशासनमे गामक युवा तूर द्वारा आतिथ्य सत्कार आ ताहि क्रममे अनुज अभि आनन्द, रणधीर झा सहित गामक अन्य युवा लोकनिक जतबा प्रशंसा करी से कम हएत।

अही आयोजनक बहन्ने आदरणीय श्री महेन्द्र मलंगिया, श्री रामलोचन ठाकुर, डॉ. कमल मोहन चुन्नू, श्री किसलय कृष्ण, श्री अजित आजाद, श्री सतीश साजन, श्री ऋषि वशिष्ठ, श्री प्रणव नार्मदेय आदि केर सान्निध्यता सँ मोन प्रफुल्लित छल मुदा युवा साहित्यकार मित्र गुँजन श्रीक गाममे हुनकहि सँ भेँट नै हेबा सँ मोन एकरत्ती झूस सेहो छल। किछु लाचारी हमरो किछु लाचारी हुनकहु।

पाँचदिवसीय गामक यात्राक क्रममे सभसँ महत्त्वपूर्ण उपलब्धिक रूप मे एहि बेरुक ई कार्यक्रम रहल।

Monday, October 22, 2018

बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम : ऋषि वशिष्ठ


वर्तमान पीढ़ीक किछु महत्त्वपूर्ण कथाकार मे ऋषि वशिष्ठ जीक कथा लेखन बेस आकर्षित करैत रहल अछि। हिनक दू गोट पोथी जे एक सिटिंग मे बैसि पढ़ि जेबा लेल बाध्य केलक अछि ओ अछि कथा संग्रह 'गाम सँ जाइत रेलगाड़ी' आ तकरा बाद हिनक नव प्रकाशित नाटकक पोथी 'बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम'

हास्य प्रधान नाटक बाबा दंडोत बच्चा जय सियाराम पढ़ैत काल प्रसंगानुकूल बेसी ठाम मूँह दाबि क' हँसबा लेल बाध्य करैछ अन्यथा रेलगाड़ीक सहयात्री लोकनिकेँ ई बुझबा मे कनिको भाँगठ नहि हेतनि जे सोझा बैसल व्यक्ति असामान्य छथि आ से अन्ततः भइए गेल, कएक बेर अपनाकेँ ठहक्का लगेबा सँ नहि रोकि पाओल रही। एकर मंचनक कल्पना मात्र सँ गुदगुदी लागि रहल अछि। नाटकक विषय वर्तमान सँ ल' ' भविष्य धरि पूर्ण रूप सँ समकालीनता बोध कराओत एतबा आश्वस्त छी। अवसर भेटय त' एकर मंचन देखल जा सकैछ आ जँ पढ़बाक मोन होए तँ नवारम्भ प्रकाशन,मधुबनी सँ ८०/- टाका मे कीनि क' अवस्से पढ़ू। ढ़ौआ वसूल हेबाक गारंटी हम्मर।

संजोग एहेन जे हिनक उक्त दुन्नू पोथी गाम दिस जाइत-अबैत रेलगाड़ी जतराक क्रममे पढ़ल अछि। दुन्नू पोथी पढ़लाक बाद जे किछु समानता देखल जाइत अछि ताहि सँ हिनक लेखककीय गुणकेँ सहजहि अकानल जा सकैछ। स्थानीय समाज वा देश मे घटित कोनो नीक-बेजाए घटनाकेँ कथाक केन्द्र मे राखब, यथार्थबोधक परिवेशक निर्माण करब, सरल,सहज आ सर्वबोधगम्य भाषाक प्रयोग, संवाद मे गमैया टोन, शैली मे अनावश्यक आ विशेष पाण्डित्यक प्रयोग नहि करब हिनक मौलिक लेखनक गुण अछि।

उक्त पोथी प्रकाशन मे अनबा लेल लेखक श्री ऋषि वशिष्ठ जीकेँ साधुवाद संग आत्मीय शुभकामना!

Friday, October 12, 2018

अहाँ जँ जन्म देने छी (स्वरचित गीत)


डीटीसी बस मे पाँजर बला सीट पर बैसल एक अनजान यात्री फोन पर बात करैत।
- साब जी! चिन्ता करन दी कोई लोड नी है ,एक-अदे दिन विच कम हो जेगा!
(बात पूरा होइत-होइत बॉसक फोन इन वेटिंग)
- सॉरी सर! अरोड़ा साब वाज टॉकिंग आफ्टर अ लौंग डे, सो दी फोन वाज बीजी।
(बगए सँ दक्षिण भारतीय,मुदा क्षेत्रीय भाषा सँ पंजाबी, बीच-बीचमे अंग्रेजी सेहो। कने आश्चर्य भेल मुदा अनजान व्यक्ति सँ ई सभ पुछबाक कोनो प्रयोजन नहि, से जानि अपन नोटपैड निकालि किछु लिखबाक यत्न करैत रही)
- अपने मैथिल छियै?
(ई त' आर बेसी आश्चर्यजनक, एक्के व्यक्तिक एत्तेक रूप)
- जी सर! हम मैथिल छियै। अपनेक शुभ नाम आ घर?
- हमर नाम भेल वेणुगुंजन आ भागलपुर मे भ्रमरपुर नामक गाम छै, ओएह हमर गाम भेल। पेशा सँ वकील छी। एत्तहि मंडावली मे एकटा छोटछिन घर अछि।अपनेक नाम ?
- सर हमर नाम मनीष । संजोग सँ हमहूँ मंडावली मे रहै छी आ ऑफिस ओखला मे अछि।
- देखियौ इहो एक संजोगे, हमरो ऑफिस ओखला मे अछि आ एकटा कंपनी मे लीगल एडवाइजर केर रूप मे कार्यरत छी।
- अपने लेखक छियै?
- लेखक त' नहि, मुदा हँ मैथिली मे किछु-किछु लिखैत-पढ़ैत नीक लगैत अछि। मुदा सर अपने एत्तेक भाषा कोना जनैत छियै से जानि हम आश्चर्यचकित छी।
- (भभाक' हँसैत) जत्त' जेहेन परिवेश मे रहलियै से आत्मसात करैत गेलियै। बस ततबे......
(बाद मे जानकारी भेटल जे बंगाली भाषा सेहो नीक सँ जनैत छथि। संगीतक सेहो नीक जानकार छथि । एतेक सहजतापूर्वक कोनो बातकेँ कहि जाएब निःसंदेह कोनो गुणी लोकक लक्षण थिक। आकर्षित होइत गेलौं सम्पर्क मे अबैत गेलौं)
- मनीष जी ! अहाँ जखन पहिने सँ गीत लिखैत रहियै त' आब कियैक ने गीत लिखै छी?
- सर! गीत त' नव शब्द गढ़ि लीखि दै छियै। गायक नव स्वर मे गाबि दै छथिन मुदा संगीत फिल्मी धुन पर हमरा नै पसीन अछि। जा ज्ञान नहि छल ता हमहूँ कएल मुदा आब इच्छा अछि जे गीत मे नव धुनक प्रयोग होइक।
- हमरा देखाउ किछु गीत, हम नव धुन तैयार करबाक प्रयास करै छी।
पाँच बर्ख बीति गेल नै ओ हड़बड़ेला आ ने हम। आब ओ बेर आबि गेल अछि हिनक प्रतिभा संग सोझा एबाक। भगवती गीत तैयार अछि एक नव रूप रंग नेने।

नव सृजनक एक नव प्रयास

"हृदयमे कुञ्ज करुणाकेँ,महामाया बसेने छी
सम्हारू पुत्र केर नैया, अहाँ जँ जन्म देने छी"
..........................सुमधुर स्वर देलनि अछि श्री संजय झा, संगीत तैयार केलनि अछि श्री वेणुगुंजन झा आ गीत लिखबाक प्रयास कएल अछि हम मनीष झा बौआभाइ।
मनोरंजनक दृष्टिएँ ई गीत डीजे पर नहि बजाओल जा सकैछ आ हमरा लोकनिक कोनो एहेन उद्देश्यो नहि अछि। किछु गम्भीर श्रोता मात्र चाही जे संगीतकार एवं गायकक मौलिकताक प्रति आश्वस्त होथि। भगवती गीत कहुना लिखल जेतै आ किनको द्वारा लिखल जेतै त' नीके हेतै तँए गीतक शब्दक सम्बन्ध मे हम कोनो विशेष काज नहि एक सामान्य गीतकारक भूमिका मे भेटब।

संजय जीक कला-कौशल समय-समय पर बेस प्रभावित करैत रहल अछि तैं वेणु जी संग संयुक्त निर्णयक आधार पर आ विगत दू दिनमे संजय जीक प्रयास सँ रेकॉर्डिंग ओ मिक्सिंगक पश्चात अन्तिम रूप सँ वीजे एंटरटेनमेंट केर माध्यम सँ अपने लोकनिक सोझा अछि।

वीजे एंटरटेनमेंट निःसंदेह कम समय मे यू-ट्यूब चैनल केर माध्यम सँ खूब रास नव कलाकार केँ सेहो अवसर देलनि अछि। ई चैनल गायक/अभिनेता विकाश झा केर ऑफिशियल यू-ट्यूब चैनल थिक आ हिनक उदारता जे एतेक शीघ्रताक संग एकरा अपन चैनल सँ रिलीज केलनि। आभार विकाश झा एवं हुनक टीमकेँ !

सुनिक' प्रतिक्रिया अवस्स दी ताकि आगाँ आर किछु करबाक बल भेटय। सादर!