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कथा : बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट
कॉम
लेखक : श्याम दरिहरे
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन
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कथा : बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट
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लेखक : श्याम दरिहरे
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन
दिवंगत साहित्यकार श्याम दरिहरेक स्मृतिमे नाट्यसंस्था 'बारहमासा'
द्वारा दिनांक १८ जुलाइ, २०२१ क' (रविदिन)
शोकसभा आयोजित कएल गेल । पूर्वी दिल्ली स्थित नरेन्ज्यान स्टूडियो,भारती आर्टिस्ट कॉलोनी,
निर्माण विहार मे उक्त सभाक आयोजन भेल । कोविड संक्रमणक संभावित तेसर लहरिक संदेह ओ
सरकारी निर्देशक अनुपालन करैत व्यवस्था तदनुकूल कएल गेल छल । उपस्थिति अपेक्षानुकूल
सेहो कम्मे कहक चाही । सभा आयोजनक रूपरेखा किछु एहि तरहे छल : दरिहरे जीक साहित्यिक
ओ सामाजिक जीवनक परिचय, श्रद्धादीपक रूपमे दीप प्रज्ज्वलन , श्रद्धा सुमनक रूपमे पुष्पांजलि,
स्मृतिक रूपमे भावांजलि, व्यक्तित्वक रूपमे स्मरणांजलि ओ कृतित्वक रूपमे काव्यांजलि
सह नाट्यांजलि ।
निर्धारित समय सँ आयोजनक शुरुआत बारहमासाक संस्थापक रंगकर्मी मुकेश झा कएलनि आ तदुपरान्त विधिवत सञ्चालन केर जिम्मा मनीष झाकेँ सोंपि देल गेल । उपस्थित जनमानस हेतु ई जानब आवश्यक होइछ जे जाहि व्यक्तिक स्मृति मे ई आयोजन कएल गेल अछि हुनक व्यक्तित्व ओ कृतित्वक विस्तार कतेक अछि, प्रभाव कतेक अछि । एहने सन जिज्ञासा संग उपस्थित लोकक बीच हुनक व्यक्तित्व ओ कृतित्वक परिचय आलेख पाठ कएल गेल । दरिहरे जीकेँ बहुत लगीच सँ जननिहार डॉ. कमल मोहन चुन्नूक एक गोट परिचयात्मक आलेख जेकि दरिहरे जीक देहवसानक किछुए दिनक उपरान्त हिन्दीक एक गोट चर्चित समाचार ब्लॉग पर प्रस्तुत कएल गेल छल तकरहि मैथिली मे त्वरित अनुवाद करैत संचालक द्वारा मंच सँ प्रस्तुत कएल गेल । एहि आलेख मे हिनक जीवनक मूल-मूल बिंदु पर चर्च कएल गेल अछि जेकि प्रेरकताक संग-संग अनुकरणीय सेहो अछि ।
परिचय प्रस्तुतिक पश्चात हुनक छायाचित्रक सोझा दीप जराओल गेल आ उपस्थित एकहक व्यक्ति द्वारा पुष्य अर्पित कएल गेल । बहुत कम समयमे लोकक संग घनिष्ठता बढ़ाएब सन जे हुनक समावेशी गुण छल से शनैः-शनैः प्रत्येक वक्ताक अनुभव सँ गप सोझा अबैत गेल । अनुभव साझा करबाक क्रममे अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्ष विजय चन्द्र झा, अरुण कुमार मिश्र, संस्कृति मिश्र, मायानन्द झा, मनोज श्रीपति, कश्यप कमल आ मुकेश झाक स्मृति वक्तव्यमे हुनक अनुशासित ओ समर्पित जीवनक प्रत्येक गुणकेँ लगीच सँ चिन्हल-जानल सन आभास करबैत छल ।
स्मृति वक्तव्यक उपरान्त दरिहरे जी रचित एक गोट चर्चित 'फाटल बिहौती नूआ' कथाक पाठ (संवाद आधारित नाट्यांजलि) आ दू गोट कविता क्रमशः 'बेटी-१' एवं 'आत्मबोध' (संगीतबद्ध काव्यांजलि) प्रस्तुत कएल गेल । सहभागी कलाकार मे मुकेश झा, पूनम सिंह, मनीषा मिश्रा, संतोष कुमार, मनु झा, संगीत संयोजन दीपक ठाकुर, वादन- प्रसून नारायण, गायन-संतोष कुमार, मुकेश झा, मनु झा, पूनम सिंह, मनीषा मिश्रा,दीपक ठाकुर, प्रसून नारायण एवं राजेश कुमार आदि लोकनिक छल । सहयोगी संस्थाक रूपमे अछिञ्जल, अस्मिता आर्ट एंड कल्चरल फाउंडेशनक संग-संग उपस्थित दर्शक लोकनि द्वारा स्व. श्याम दरिहरे केँ कृतज्ञ श्रद्धांजलि अर्पित कएल गेल ।
मैथिली साहित्य एवं संगीत में विगत डेढ़ दशक से सक्रिय
युवा मनीष झा बौआभाइ इन दिनों मैथिली कथा को एक अलग रूप देने में जुटे हुए हैं ।
मनीष का मानना है कि आए दिन सहित्य सृजन में युवाओं की सहभगिता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है । समाज को हमेशा से उचित मार्गदर्शन के लिए साहित्य एक अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण विधा है । साहित्य में नई सृजन के साथ-साथ यह आवश्यक है कि हमारे पूर्वज सहित्यकार के योगदान से समाज को समय दर समय रू-ब-रू करवाना पड़ेगा और उनके प्रति कृतज्ञ भाव को सहेज कर रखना होगा । इन्हीं उद्देश्य के साथ इन्होंने 'कथा मैथिली : उत्कृष्ट कथाक वाचन श्रृंखला' नाम से यू-ट्यूब, फेसबुक एवं साउंडवेव्ज एफएम जैसे सोशल मीडिया से इसकी शुरुआत की है ।
मनीष बताते हैं कि यह उनकी एक दीर्घ
एवं बहुउद्देशीय परिकल्पना है कि मैथिली साहित्यिक संपदा के विस्तार में एक कथाकार
के रूप में जिन रचनाकारों ने योगदान दिया है, उन सभी के कथा को एक सुनिश्चित एवं वृहत
टीम के साथ रेडियो नाटक के रूप में कथानुरूप शैलीगत वाचन कर इंटरनेट आर्काइव के रूप
में सुरक्षित रखा जाए । मैथिली को संवैधानिक मान्यता मिलने के बाद इसकी महत्ता और भी
बढ़ गई है । मैथिली भाषा को लेकर अकादमिक तौर पर यूपीएससी, बीपीएससी, यूजीसी नेट और
पीएचडी करनेवालों को लाभ मिलेगा ।
इनकी परिकल्पनाओं को साकार करने में मित्र राजीव मिश्र
भरपूर सहयोग कर रहे हैं । सहयोगी वाचक के रूप में सोनी नीलू, रूपा मिश्रा एवं अमरजी
राय भी योगदान कर रहे हैं । उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-2020 को कथा मैथिली
की शुरुआत की और अब तक एक दर्जन से अधिक रचनाकारों के कथा वाचन प्रसारित कर चुके हैं
। कथा मैथिली की तरह अन्य विधाओं पर भी युवा को इस तरह आगे आने के लिए आह्वान करते
हैं ।
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कथा : छत्ता मे भूड़
लेखक : वैद्यनाथ झा
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन
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कथा : अर्थयुग
लेखिका : शेफालिका वर्मा
वाचन : मनीष झा 'बौआभाइ'
प्रायोजक : साउंडवेब्ज प्रोडक्शन