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Monday, January 16, 2017

घाट पर जातिमे उपरौंझ,मकड़ी,फाँक आ पुरनिवाली मंचित


१४ जनवरी २०१७ ककला-संगीतमे प्रशिक्षण आ प्रदर्शनक सभसपैघ गढ़ संगीत नाटक अकादमी (एन.एस.डी.) दिल्ली केर सम्मुख सभागार मे मैलोरंग रेपर्टरी प्रस्तुत नाटक घाट  पर जातिकेर सफल मंचन भेल. साहित्य अकादमी सपुरस्कृत मैथिलीक प्रसिद्ध लेखक प्रदीप बिहारी केर चारि गोट कथा क्रमशः उपरौंझ,मकड़ी,फाँक आ पुरनिवाली जेकि स्त्री विमर्श पर आधारित छल, केर कथामंचन कएल गेल. ५५ मिनट केर अवधि तक मंचित होइबला ई नाटक एक्कहि दिनमे दू खेप मंचित भेल. नाटकक मंचन हेतु चारू कथाक संग्रह मे मैलोरंग समूहक एक प्रयोग जेकि स्त्रीक विभिन्न परिस्थितिकें उजागर करैत अछि ओ नाटकक विषय-वस्तुकें समकालीन रूपरेखामे प्रस्तुत करबाक एक साहसिक प्रयास सेहो केने अछि. एहि चारू नाटकमे स्त्रीक विभिन्न रूपक चरित्र-चित्रण भेल अछि.

उपरौंझ मे माए-बेटी केर पर-पुरुषक प्रति समान आकर्षण जतएक-दोसराकें प्रति घृणा बोध करबैछ ओत्तहि माए अपन बेटीक भविष्य मे साँप-बिच्छू सन असामाजिक तत्वक हाथ सदूर रखबाक हरसंभव प्रयास माइअक अपन बिताओल भोगविलासी समयक पश्चातापक सेहो बोध करबैछ.

मकड़ी कथामे नायिकाक स्वामिक मृत्योपरांत सिलाइ-कढ़ाइ कअपन जीवनयापन करब आ सामान्य जीवन जीबाक क्रममे ओकर रूप-सौन्दर्य आ जुआनी पर मोहित युवक द्वारा ओकरा संग दाम्पत्य जीवनक पुनर्प्रारंभ एक उमेद जगबैछ मुदा नवस्वामिक अत्यधिक पिआक लक्षण ओकरो जीवनक अंत कदैछ संगहि नवजात शिशुक मृत्यु पुनः ओकरा जीवनकें ओएह पुरान दिन दिस धकेलि देइत अछि जतनवकिरणक आस जागल रहैक. एक बौक आ अनाथ बच्चाकें लालन-पालनमे वात्सल्य्ताक अगाध सीमा अनचोकेमे कामुकतामे परिवर्तित होइत नायिकाकें स्वयं अपराधबोध करबैछ आ स्वयं नजरि उठा तकबाक ग्लानि बौका सदूर करैत चल जाइछ आ एहि बात सबौकाक गृहत्यागब नायिकाकें मथसुन्न बना जीवन भरि कचोटबाक विकल्प मात्र छोड़ि जाइछ.

फाँक कथा प्रेम आ दायित्वक मध्य एकटा एहेन फाँक पर आधरित अछि जकरा केन्द्रमे सारि आ बहिनोइक अवैध सम्बन्ध अछि. अविवाहित सारिक गर्भधारण एक एहेन भयानक विषय बनि जाइछ जे सामाजिक प्रतिष्ठा आ गर्भपलित शिशु केर मध्य असमंजस सन स्थिति ठाढ़ कदैत अछि. प्रेमी-प्रेयसीक मध्य अनेकानेक चिंतन-मंथन केर उपरान्त गर्भपात (भ्रूणहत्या) कराओल जाइत अछि आ एहि ठाम एक अजन्मा शिशु पर सामाजिक प्रतिष्ठा केर विजय स्थापित होइत अछि.

पुरनिवाली कथा पुरुष समाज पर एक पैघ प्रश्न ठाढ़ करैत अछि. कथाक माध्यम सई स्पष्ट होइत अछि जे समाज बाँझ स्त्रीकें उजागर करबामे कोनो संकोच नैं करैछ आ ई शब्द समाजक शब्दकोषमे बेझिझक प्रयोग कएल जाइत रहल अछि मुदा पुरुषक नपुंसकता सामजिक स्तर पर लाजक विषय अछि आ बाँझपन सबेसी नपुंसकताकें दबेबाक प्रयास कएल जाइत अछि. एक दाम्पत्य जीवन जेकि सुखमय अछि मुदा एक बच्चा बिना सुन्न सन. दुनू दम्पतिकें इलाजक क्रममे आर्थिक ओ मानसिक रूप सहताश कदेने अछि. चिकित्सक द्वारा पुरुषक कमी स्पष्ट भेलाक बाद स्त्रीक मोन आर विचलित भजाइछ आ स्त्रीकें बच्चाक ललसा एक अकल्पनीय बाट दिस लजेबा लेल आकर्षित कलैत छैक.

चारू नाटककें जएक-दोसरा सजोड़ि कदेखल जाए तनारीक चरित्रमे घृणा,सहानुभूति,विवशता,वात्सल्यता आदिक सामंजस्य भेटैत अछि. एहि नाटकमे नेपाल आ भारतक मध्य बेटी-रोटी सनक प्राकृतिक सम्बन्धकें सामंजस बना सहजता सप्रस्तुत कएल गेल अछि. लेखकक कलम एहि बातकें सेहो अंकित करैत अछि जे आमजनक वास्ते भारत-नेपाल कोनो दृष्टिकोण सफराक देश हेबाक प्रश्नें नैं ठाढ़ करैछ. मंच पर अपन निस्सन ओ दमदार उपस्थित दजे रंगकर्मी एकरा सफल बनौलनि ओ लोकनि छथि-ज्योति झा, अमरजीत राय, मुकेश झा, पूजा प्रियदर्शनी,ऋतुराज, रमण कुमार आ नितीश कुमार. निर्देशन- प्रो. देवेन्द्र राज अंकुर, सह-निर्देशन- डॉ. प्रकाश झा. पार्श्व मंच पर संगीत-दीपक ठाकुर, प्रकाश-श्याम सहनी आदि.

उक्त कार्यक्रममे धीरेन्द्र प्रेमर्षि, प्रदीप बिहारी, सविता झा खान आ देवेन्द्र राज अंकुरक आतिथ्य आ मैलोरंग प्रस्तुत ई नाटक एन.एस.डी केर सम्मुख सभागारमे चारि चान लगबैत मैथिलीक झंडा एक बेर फेर से फहरेबामे सफल रहल.

Sunday, January 08, 2017

वर्तमान मैथिली गीत-संगीत हमरा नजरिसँ


साहित्यमे अन्यान्य विधा जेंका गीत-संगीतक सेहो अपन वैशिष्ट्यता अछि. विदेह संपादन समूह द्वारा मैथिली गीत-संगीत केन्द्रित विषय पर आलेख हेतु विशेषांक निर्धारित करब एहि विधाक प्रति गंभीरताक द्योतक अछि. उक्त विषय पर विस्तृत आलेख शोधक विषय-वस्तु थिक, तैं एहि सभस फराक अपन व्यक्तिगत अनुभव सकिछु लिखबाक चेष्टा मात्र करहल छी.

वर्तमान समयमे पारम्परिक गीतक अपेक्षा आधुनिक लोकगीत बेस प्रचलनमे अछि. कारण स्पष्ट अछि व्यावसायिक दृष्टिकोण. नव तूरक लोककें लटक झटक बेस रुचै छन्हि आ तदनुरूप गवैया ओ गीतकार सेहो ओहिमे रमबाक प्रयासमे वा कही जे फरमाइशकें यथासंभव पूर करबाक चेष्टा करैत छथि. पारम्परिक गीतक श्रोता वा कही जे खाँटी संस्कृति प्रेमी छथि तमुदा सीमित संख्यामे. आधुनिकतामे रमल नव पीढ़ीक नहि तगवैया लोकगीत कें गंभीरता सलैत छथि आ नें श्रोता. मैथिली गीत-संगीतक क्षेत्र वर्तमानमे कत्तेको कलाकारकें जीविकोपार्जन केर साधन बनल अछि. संगीत चाहे पारंपरिक होउ वा शास्त्रीय होउ वा आधुनिक होउ मैथिलीक सेवा कअर्थोपार्जन कजीवनयापन करब जतबे आह्लादक विषय अछि ततबे साहसिक डेग सेहो. साहसिक डेग सअभिप्राय ई जे वर्तमान जुगक अवधारणा अछि जे अहाँकें जाहि कोनो प्रतिभामे आत्मविश्वास अछि ओकरा आगाँ लव्यावसायिक बनाउ आ अपन अभिरुचिक अनुसारे ओहिमे समर्पण भाव सयोगदान देल जाउ, मुदा मैथिली गीत-संगीतक प्रति एकर विपरीत अवधारणा अछि जकर मुख्य कारण अछि अर्थोपार्जनमे अनिश्चितता. पूर्वक पीढ़ीमे अपवादस्वरूप किछुए लोक मुदा वर्तमान समयक बेसी-स-बेसी युवा एहि मिथककें तोड़बाक प्रयास केलनि अछि आ अपन जीविकोपार्जन केर साधन बनौलनि अछि.

आलेख हेतु देल गेल विषयमे किछु महत्त्वपूर्ण बिन्दु सभ पर अनुभव साझा करबाक प्रयास मात्र करहल छी. गीत-संगीतक भाव पक्ष केर संदर्भमे एतबा जरूर देखल जाइछ जे, गीतकार जे कोनो गीत लिखैत छथि ओ सर्वबोधगम्य हेबाक चाही, जिनक शब्द लेखन आम जनक बोलचाल वा दैनिकीय भाषा मे नियमित प्रयोग मे अबैत होइक आ जकरा संगीतकार लोकनि कर्णप्रिय बना सुन्दर गवैयाक माध्यम सजन-जन धरि पहुँचेबाक प्रयास करथि. गीतमे क्लिष्ठता ओ साहित्यिक शब्दक चयन एक वर्ग विशेष धरि सीमित रहैत अछि जे अमूमन एक सामान्य श्रोता द्वारा स्वीकार्य नहि होइत अछि. मूलतः देखल जाए तसंगीतक प्रारंभिक रूप गीतक शब्द होइछ तैं गीतकारकें शब्द चयन हेतु विभिन्न अभिरुचिक श्रोताकें ध्यान मे राखि मर्यादित गीत लिखक चाहियनि.

वर्तमान मे मैथिली गीत संगीत मे देखौंसक प्रक्रिया बेस हाबी भरहल स्थिति मे विकृतता आएब स्वाभाविक अछि. संगीत जहिना मनोरंजन हेतु आवश्यक विधा अछि तहिना भाषा-संस्कृति केर रूपमे वाहकक श्रेणीमे सेहो अबैछ तैं गीतकार-संगीतकार आ गायक लोकनिकें एहि बातक समुचित धेआन रखबाक चाही. तकनीकी पक्षक जततक प्रश्न अछि गीतक शब्दक अनुरूपे संगीत वा संगीतक अनुरूपे गीतक शब्दक तालमेल परम आवश्यक होइछ, कोन गायकक कंठ मे कोन गीत बेसी रोचक लगैछ एहि सभ विषय पर सेहो ध्यान देल जाए तगीत आर बेसी अपन सुन्नर रूपमे निखरि कसोझा आबि सकैत अछि. प्रस्तुतिक दू गोट रूप वा तमंच वा स्टूडियो रेकॉर्डिंग जाहिमे वाद्य-वादन सेहो गीतकें तकनीकी रूप समजगूती प्रदान करैत अछि.

आइ-काल्हि स्टूडियो रेकॉर्डिंग के नवका चलन आएल अछि डी-टोन केर. डी-टोन कोनो आवाजक टोन कें अपना स्तर सबदलि देइत अछि जकर प्रभाव मे गायकक मौलिक स्वर केर अंदाज करब सेहो मोसकिल अछि. सुर सभटकैत गवइया लोकनि एखन एकर प्रयोग बेसी सबेसी करैत देखल जाइ छथि आ ई प्रथा हरियाणवी आ भोजपुरी संगीत सबेस प्रभावित अछि. यत्र-तत्र कम सकम लागत मे दिनानुदिन पसरि रहल स्टूडियो,कैसेट कंपनी आदि समैथिली संगीतक कमजोर गुणवत्ता तदेखबामे अबैत अछि मुदा नव-नव कम्पनी के खुजला सनव प्रतिभावान कलाकार लोकनिक वास्ते एकटा नीक माध्यम बनि सोझा अबैत अछि. मार्केटिंग पक्षक दृष्टिकोण जदेखल जाए तमैथिली गीत-संगीतकें व्यावसायिक रूप प्रदान करबा लेल मार्केट एखनो धरि व्यापक स्तर पर सक्रिय नहि भेल अछि.

आन-आन भाषा के तुलना मे मैथिली गीत-संगीतक बाजार एखनो बड्ड छोट आ सीमित अछि. कीनिकसुनबला मनोवृति एखनो धरि नहि जागल अछि. एकर दुन्नू कारण भसकैइयै, पहिल जे लोककें मनमोताबिक संगीतक उपलब्धता नहि होइ छनि वा दोसर जे विधा सजूड़ल लोक द्वारा फ़ोकट मे बंटबा बला प्रवृति जकर स्थिति कमोवेश साहित्ये बला अछि. हालांकि डिजिटल व्यवस्था भेला सउपलब्धता सहूलियत सरहल अछि आ कलाकार लोकनिकें मंच, एलबम,सिनेमा आदिमे लिखबाक,गेबाक ओ धुन बनेबाक अवसर भेटैत छनि जेकि कएक टा मायनेमे महत्त्व रखैत अछि. एहि डिजिटल जुगमे दर्शक/श्रोताक पसीनकें धेआनमे रखैत प्रायः अधिकाधिक कम्पनी वीडियो बना बजार मे वितरण करै छथि वा सोशल नेटवर्कक विभिन्न श्रोत सजन-जन धरि पहुँचेबाक प्रयास करै छथि. अधिकाधिक संख्या मे देखल जाए तविडियो शूटिंगमे गीतक केन्द्रित विषय सआंशिको रूप सतालमेल नैं खाइत अछि, मने गीतक विषय किछु आर मुदा अभिनय द्वारा किछु आर दर्शाओल जाइत अछि.एहि पक्ष पर गंभीरता लाएब सेहो ओतबे आवश्यक अछि.   

मैथिली गीत-संगीत मे नैं गीतकारक अभाव छै आ नैं गौनिहार कें अभाव छैक मुदा सभसबेसी अभाव संगीतकारक देखबामे अबैछ. बनल-बनाएल धुन (ओ चाहे हिन्दी फिल्म संगीतक तर्ज पर होए वा आन-आन क्षेत्रीय भाषा केर तर्ज पर होए) आखर फिट कगीतकार द्वारा लिखब आ तदनुरूप गायक द्वारा ओकरा गाएल जेबाक प्रथा बेस जोर पकड़ने अछि. ओना संगीत विधा सजूड़ल प्रत्येक व्यक्ति के चाहियनि जे अपन-अपन अभिरुचिक क्षेत्रमे प्रशिक्षित होथु मुदा ताहूमे सभसबेसी खगता धुन बनेनिहारक अछि जेकि वर्तमान समयमे गीतकार ओ गायकक संख्याक तुलनामे बड्ड कम वा कहल जाए जे मात्र गिनल-चुनल लोक छथि. ओना एहि विधामे सभ दिने सगीतकार-संगीतकारक तुलनामे गायकक प्रसिद्धि बेसी रहल अछि, कारण गायक लोकनि अपन एक विशेष प्रकारक स्वरक बले समाजमे चिन्हल जाइ छथि संगहि मंचक सोझा सश्रोता/दर्शक सप्रत्यक्ष संवाद हेतु समय-समय पर उपलब्ध होइत रहैत छथि, एहेन सन स्थितिमे गायक लोकनिक एक इमानदार प्रयास अपेक्षित रहैत अछि जे ओ मंच पर वा कोनो साक्षात्कार मे गीत प्रस्तुति सपूर्व संगीतकार ओ गीतकारक नाओं केर उल्लेख करथि, कारण हुनकर प्रसिद्धिक पाँछा हिनका लोकनिक जोगदानकें नकारल नैं जा सकैत अछि. मैथिली गीत-संगीतमे कतबो विकृति आबि गेल छैक मुदा आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखबा लेल संख्या मे बढ़ोत्तरी अपेक्षित अछि. आलोचना वा तुलना ओतप्रभावी होइत अछि जतसंख्या केर उपलब्धता अधिकाधिक होइछ. मैथिली गीत-संगीतकें अपन कर्मक्षेत्र बना गुजर-बसर केनिहार एक-एक कलाकारकें साधुवाद जे चाहे जाहि कोनो तरहें मुदा अपन मातृभाषाकें सेवैत अर्थोपार्जन करहल छथि, बहुत हिम्मत के काज छैक. निवेदन जे भाषा संरक्षणक संग-संग संस्कृति संरक्षण पर सेहो ध्यान केन्द्रित करैत एहि क्षेत्रमे आगाँ बढैत छथि तसे आर बेसी आह्लादक गप्प हएत.

प्रकाशित : विदेहक २१७म अंक ०१ जनवरी २०१७

Sunday, November 27, 2016

विश्व मैथिल संघ,बुरारी,दिल्ली द्वारा छठम विद्यापति स्मृति पर्व समारोह


२६ नवम्बर २०१६ कविश्व मैथिल संघ,बुरारी,दिल्ली द्वारा छठम विद्यापति स्मृति पर्व समारोह बेस धूमधाम समनाओल गेल. मैथिलीक प्रसिद्ध गीतकार आदरणीय रविन्द्र ठाकुरक करकमल सदीप प्रज्ज्वलनक उपरान्त मंच पर स्थापित महाकवि बाबा विद्यापतिक चित्र पर पुष्प माल्यार्पणक उपरान्त संस्थाक सदस्य लोकनि ओ उपस्थित दर्शक द्वारा महाकवि रचित गोसाओनिक गीत जय-जय भैरविकसामूहिक गान केर संग सांस्कृतिक कार्यक्रमक शुभारम्भ कएल गेल. संस्था द्वारा विधिवत औपचारिकताक पश्चात कार्यक्रमक मंच सञ्चालन हेतु प्रसिद्ध उद्घोषक अद्भुतानंद जी मैथिलक सुच्चा परिधान धोती-कुर्ता,पाग-डोपटा धारण केने हाथमे अगरबत्ती नेने मंच पर प्रवेश करैत सर्वप्रथम बाबा विद्यापतिक प्रतिमा पर नमन करैत श्रद्धांजलि देइत अपन उद्घोषणा प्रारम्भ केलनि.अद्भुतानंद जी हास्य-व्यंग्य ओ समसायिक विषय वस्तु पर स्वरचित काव्यक छोट-छोट पाँतिक अद्भुत शैलीमे प्रस्तुति देइत थोपड़ी समेटबामे बेस सफल रहलाह.

गायन हेतु प्रथम आमंत्रण छल युवा गायक देवानन्द केर जेकि काली वंदनाप्रारम्भ करैत बाबा विद्यापति रचित चानन भेल विषम सर रेगीतक प्रस्तुति देइत दर्शककें अनथक थोपड़ी बजेबा लेल बाध्य करैत रहलाह आ श्रोताकें मंच सदीर्घकाल धरि बान्हि रखबा लेल अपन उत्तम प्रस्तुति देलनि. कुमकुम मिश्रा द्वारा भगवती गीत जगदम्ब दया करू हेगौरी लए केहेन बर अनलौं नाकेर सुन्दर प्रस्तुति. कविश्रेष्ठ रविन्द्र नाथ ठाकुरक सम्मानक उपरान्त हुनक मुखारविंद सस्वरचित काव्य पाठ जखन ई समय होइत अछि बामआ सोहर जनक भेलाह जनक जीकेर गायन ओ हुनक उपस्थिति सश्रोतागण कृतार्थ भेलाह. कवि/गीतकार/गायक चन्द्रमणि जीक लाले-लाल अरहुल के माला बनेलौंअहाँ मैथिल छी बूझू दियमान बढि गेलएहेन वातावरण बनौलक जे दर्शक दीर्घा सआर बेसी गीत सुनबाक आग्रह होमय लागल.

कलाकारक बाहुल्यता देखि पहिल चक्रमे प्रत्येक कलाकारकें मात्र दू गोट गीतक अनुरोध कएल गेल छलनि मुदा चन्द्रमणि जीक प्रसिद्धि ओ कृति तेहेन जगजियार छनि जे लोकक आग्रह सस्पष्ट प्रतीत होइत छल आ तकरे परिणामस्वरूप उपरोक्त दू सतेसर मैथिल जागू-जागूचारिम पिया डांरे पर घैला भसकि गेलै नाआ पांचम तोरे लेल हम आँगी सियेलौंधरिक प्रस्तुति उपरान्त आग्रह निरंतर होइत रहल मुदा समय सीमा कें धेआन रखैत बाध्य भपुनर्प्रस्तुतिक नेहोराक संग विदा लेलनि. दिलीप दरभंगिया द्वारा सिन्दूर पिठार लअरिपन करितौं हे कने अबियौ कालीजोगिया एक हम देखल गे माईकेर सुन्दर प्रस्तुति. रंजना झा द्वारा पिया मोरा बालक हम तरुणी गेमिथिला के नगरिया सकेर सुन्दर प्रस्तुति.

सांसद ओ गायक मनोज तिवारी द्वारा के पतिया लए जायत रे”, “काँचहि बाँस के बहंगिया”, “जिय हो बिहार के लालाआदिक प्रस्तुति. युवा गायक विकास झा द्वारा अछि अधिकार हमर ई मिथिला राज हम लए करहबै”, “नैना कने मिला ले”, “हमर मोनक गाममेएवं अन्य आधुनिक गीत पर श्रोताकें खूब झुमौलनि.

पुनः दोसर चक्रमे कुमकुम मिश्रा द्वारा बिहारी नौजवान रेआदि किछु आधुनिक गीत लउपस्थित भेली. दिलीप दरभंगिया द्वारा दोसर बेरक चक्रमे नैं झारखंडी नैं भोजपुरिया, हम छी सौ परसेंट दरभंगियाआदि आधुनिक गीतक क्रममे किछु एहनो गीत गाओल गेल जकरा पसीन केनिहार मात्र पाँच प्रतिशत मनुख सभ कार्यक्रममे मनोरंजन हेतु पहुँचैत अछि. अंतमे रंजना झा द्वारा समदाउन आ नचारीक प्रस्तुतिक संग कार्यक्रमक समापन भेल.

कार्यक्रमक बीच-बीचमे मैथिली फिल्म अभिनेता विनोद साजन एंड ग्रुप द्वारा लोकगीत पर नृत्य सेहो दर्शकक संतुलन बना रखलक. ध्वनि एवं प्रकाशक सुन्दर व्यवस्था. प्रसिद्ध तबला वादक भोला वर्माक संग सुन्नर तालमेल मे संगीत वाद्ययंत्रक अन्यान्य वादक लोकनि सेहो ततबे माहिर. समयाभावमे किछु आमंत्रित कलाकार बिना गओने सेहो चल गेलाह मुदा बिना कोनो अन्यथा विचारधारा बला संघर्षशील युवा गायक धीरज मिश्र बिनु साज-बाजकें संस्थाक उपस्थित सीमित सदस्यक बीच एहेन सुन्दर मिथिला धाम, पायब दोसर कोन ठाम”, “रीझि गेली भवानी भवानी भंगिया मेआदि गीत गाबि बेस आनंदित वातावरण बनौलनि. 

अतिथिक रूपमे सांसद मनोज तिवारी, सांसद पप्पू यादव, विधायक संजीव झा, पूर्व विधायक प्रत्याशी गोपाल झा, पूर्व मुख्य न्यायाधीश ज्ञान सुधा मिश्र, अखिल भारतीय मिथिला संघक अध्यक्ष विजय चन्द्र झा, मिथिलालोक सह ब्रिटिश लिंगुआ अंग्रेजी संस्थानक चेयरमैन डॉ. बीरबल झा आदिक उपस्थिति, मिथिला स्टूडेंट यूनियन, मिथिला राज्य निर्माण सेना आदिक उपस्थिति बेस आकर्षक रहल. संस्था द्वारा स्थानीय मैथिल समाजक बच्चाक बीच कराओल गेल प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता प्रसंशनीय डेग. एमएसयू केर कैनेपी, मिथिला गृह उद्योग केर स्टॉल,माँछ-भात आ अन्यान्य मिथिलाक व्यंजनक स्टॉल पंडालक बाहर बेस आकर्षण. एहि बेरुक मंच सज्जा एल.ई.डी एवं रंग-बिरंगा प्रकाश युक्त व्यवस्था बेर-बेर आकर्षित करैत छल. एहि अवसर पर एक स्मारिकाक सेहो प्रकाशन कएल गेल.

उक्त संस्था द्वारा एहि विशाल आयोजन एवं सफलतापूर्वक संपादन हेतु मिथिली मैथिलीक प्रखर सेनानी संस्थापक अध्यक्ष हेमन्त झा, अध्यक्ष अनिल झा, दीपक फाउंडेशन केर संस्थापक दीपक झा सहित समूचा विश्व मैथिल संघक सदस्य साधुवाद ओ शुभकामना केर पात्र छथि.

Saturday, October 01, 2016

मंच स’ बेसी मनोबल चाही


सोशल नेटवर्कक समुचित उपयोग करैत मैथिली साहित्यकार लोकनि बिना कोनो ताम-झाम कें एक दोसराक रचनाधर्मिता सअवगत हेबा लेल कोनो मंच, ऑडिटोरियम वा संस्था विशेष द्वारा नोत-हकारक प्रतीक्षा नैं अपितु मुक्ताकाशक चयन करब प्रारम्भ कदेने छथि. एहि सार्थक दिशामे युवा लोकनिक डेग आगाँ बढिते श्रेष्ठजनक अपेक्षित सहयोग भेटब सेहो ततबे आह्लादकारी अछि. संख्यामे बेसी नवतुरहा युवा लोकनि जतय अपन संस्कृति ओ भाखा सविमुख भेल जा रहल छथि ओत्तहि पुरखा साहित्यकारक कीर्ति ओ जोगदान सअनभिज्ञ रहब सर्वथा चिंतनीय ओ हीनभावना के देखार करैत अछि. वैश्विक स्तरक भोगविलासी जीवन व्यतीत करबा लेल रंग-बिरंगक व्यावसायिक कोर्स कव्यक्तिगत लाइफ सेटलमेंट सन सीमित सोचक संग सिमटल जा रहल स्थिति अपन संस्कृतिक प्रति उदासीनता ओ असामाजिकताकें प्रमाणित करैत अछि. संख्यामे कम्मे मुदा व्यक्तिगत लाइफ सेटलमेंट केर संग-संग व्यस्ततम समयमे सथोड़-बेस समय निकालि संस्कृति  संरक्षण-संवर्धनक पक्षधर ओ उदारवादी विचारधारा नेने निस्सन सोच ओ आत्मविश्वासक संग बढ़ि रहल साहित्यिक क्रियाकलापक गतिशील डेग भविष्यमे फलित हेबाक स्पष्ट संकेत दरहल अछि.

युवा साहित्यकार लोकनि द्वारा उठाओल गेल साहित्यिक डेग यथा- अकासतर बैसकी”, “साहित्यिक चौपाड़ि”, “काव्य बैसार”, “साहित्यिक बैसार”, “साँझक चौपारिआदि कएक नाम सभारत,नेपाल,दोहा समेत कत्तेको देश आ ओकर प्रान्तमे पसरल जा रहल स्थिति संतोषजनक भविष्यक अनुभूति करबैत अछि. युवा लोकनिक उठाओल ई डेग एत्तेक तीव्रताक संग आगाँ बढ़लागल अछि जे वरिष्ठ साहित्यकार लोकनि सेहो समय-समय पर अपन बहुमूल्य उपस्थित दस्नेहसिंचित मार्गदर्शन दयुवा लोकनिक मनोबल बढ़ा रहलनि अछि. उपरोक्त आयोजनमे ककरो अपन कएदा-कानून आ औपचारिकता अछि तकोनो आयोजनक स्वतंत्र ओ अनौपचारिक प्रक्रिया. एकर विस्तार भेला ससमय-समय पर दिवंगत साहित्यकार लोकनिक जयन्ती ओ पुण्यतिथि मनेबाक आ हुनक साहित्यिक, राजनितिक, सामाजिक, सांस्कृतिक जोगदानकें संदर्भमे एक-दोसरा सजनबाक चेष्टा ओ स्मरण करब हुनक उचित श्रद्धांजलि कहल जा सकैछ.

आब ई एकटा एहेन पारम्परिक मंच भगेल अछि जतय उपस्थित हेबा लेल नैं तनोत-पता पठाओल जाइत अछि आ नें तकर अपेक्षा कएल जाइत अछि. आयोजनक सूचना जाहि कोनो माध्यमें भेटय ओ चाहे टेलीफोनिक होए, सोशल नेटवर्कक माध्यमें होए, मौखिक कहल गेल होए वा कतहु सुनल गेल होए उक्त तिथि ओ स्थान पर सहर्ष पहुँचला उत्तर स्वागत अछि. उपरोक्त आयोजनमे विधा विशेष निपुणताक आधार पर उपस्थित रचनाकारकें समान रूपे मुक्त कंठ सरचना परसबाक अवसर भेटैत छनि संगहि त्रुटि सुधारार्थ तत्क्षण मार्गदर्शन आ उत्तम रचना प्रस्तुति हेतु ततबे प्रशंसा सेहो. नवोदित रचनाकार हेतु ई एकटा एहेन मंच अछि जतहुनक आत्मविश्वास बढ़ाओल जाइत अछि आ शनैः-शनैः परिपक्वता दिस अग्रसर कएल जाइत अछि. पटना प्रवासी युवा साहित्यकार लोकनि द्वारा प्रारम्भ कएल साहित्यिक चौपाड़िअपन एक बर्ख पूर करबाक उपलक्ष्यमे एकटा महत्त्वपूर्ण आ अभिनव प्रयोग केलक अछि जे विगत एक बर्ख मे आयोजित चौपाड़िमे पठित रचनाकें संकलित कप्रकाशनमे अनलक अछि आ उमेद अछि जे प्रकाशनक ई प्रयोग उर्ध्वगामी होइत रहत. युवा पीढ़ीक ई सार्थक सोच आ जोगदान भविष्यक इतिहासमे सेहो अंकित हएत आ स्मरणीय रहत ताहि आशा आ विश्वासक संग समर्पित सेनानीक उज्जवल भविष्य ओ दीर्घायुकें कामना !

Thursday, September 15, 2016

मैसाम युवा सम्मान ओ व्याख्यानमाला-२०१६


राष्ट्रीय राजधानी दिल्लीमे २१ फरवरी २०१४ कमैथिली साहित्य संरक्षण ओ उत्थान वास्ते स्थापित संस्था मैथिली साहित्य महासभाअपन दू बर्खक यात्रामे कएक गोट कार्यक्रमक सफल आयोजन केलक अछि. एहि कार्यक्रमकें निरंतरता देइत ११ सितम्बर २०१६ कदोसर विद्यापति स्मृति व्याख्यानमाला केर अन्तर्गत वैश्विक परिदृश्यमे मैथिली नाटक आ जनसरोकारविषय पर मैथिली नाटकक प्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगियाक वक्तव्यक संग राखल गेल. कार्यक्रमक विधिवत प्रारम्भ महाकवि विद्यापतिक स्मृति पर माल्यार्पण ओ दीप प्रज्ज्वलनक उपरान्त सामूहिक गान जय-जय भैरविभेल. स्वागत भाषणमे संस्थाक अध्यक्ष अमरनाथ झा अतिथि ओ दर्शकक प्रति आभार प्रकट केलनि. 

उपरोक्त विषय पर महेन्द्र मलंगिया द्वारा ज्योतिरीश्वर ठाकुर रचित धूर्तसमागम,उमापति उपाध्याय रचित पारिजातहरण, ईशनाथ झा रचित उगना, चीनीक लड्डू, गोविन्द झा रचित बसात, सुधांशु शेखर चौधरी रचित भफाइत चाहक जिनगी,उदय नारायण सिंह नचिकेता रचित एक छल राजा ससल्हेश, लोरिक, चेंगा, अंकिया नाटक, कीर्तनिया नाटक ओ आधुनिक नाटकक लेखन,मंचन ओ प्रेक्षक धरिक नीक-बेजाए भूमिका पर विस्तृत प्रकाश देल गेल संगहि युवा लोकनिकें नाट्य लेखन हेतु सक्रिय हेबाक आह्वान सेहो केलनि.

सामान्यतया मिथिला-मैथिलीक भाषा,संस्कृति,रोजगार आदिक वास्ते चिंता आ चिंतन मे बेसी संगठन ओ संस्थाक तल्लीनता मात्र देखल जाइत अछि मुदा मैथिली साहित्य महासभा ताहि सोचकें सार्थकता प्रदान करैत एक डेग आगाँ बढि साहित्य संरक्षण वास्ते बड्ड पैघ ओ सराहनीय काज केलक अछि जे साहित्यमे समर्पित ४० बर्ख धरिक सृजनशील युवा रचनाकारकें प्रशस्ति पत्रक संगहि २५,००० रुपैया ससम्मानित कउत्साहवर्धन करब एक अद्भुत सोचक प्रमाण थिक. ओना संस्था द्वारा एकटा आर घोषणा भेल अछि जे मैथिली साहित्यमे जीवन पर्यन्त अपन जोगदान देनिहार वरिष्ठ साहित्यकारकें सेहो एहि मंच सअबिलम्ब सम्म्मानित कएल जाएत.

मैसाम युवा सम्मान-२०१६वास्ते १३ गोट पोथी सम्मिलित कएल गेल छल (निर्णायक छलाह डॉ. देवशंकर नवीन) जाहिमे अंतिम रूप सचयनित पोथी गामक सिमान पर” (नवारम्भ प्रकाशन,पटना सप्रकाशित) हेतु युवा साहित्यकार चन्दन कुमार झा (उमेर-३१ बर्ख, जेकि मूल रूप समधुबनी जिलान्तर्गत सड़रा गामक रहनिहार छथि मुदा वर्तमान प्रवास कोलकातामे छनि) पुरस्कृत ओ सम्मानित भेला. युवा पीढ़ीक साहित्यकारक वास्ते आह्लादक विषय अछि संगहि एहि दिशामे पसरल अनेकों भ्रमकें तोड़बाक एक निस्सन डेग.   

कार्यक्रमक मुख्य अतिथि ओ अध्यक्ष भारतीय सर्वोच्च न्यायालय केर पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्रीमती ज्ञान सुधा मिश्र, अतिथि डॉ. देवशंकर नवीन ओ एकल व्याख्यान हेतु आमंत्रित अतिथि महेन्द्र मलंगिया आदि अपन-अपन वक्तव्यक क्रममे बहुत गूढ़गूढ़ गप्प-सप्प ओ अनुभव सअवगत करौलनि. दर्शक दीर्घामे मिथिला-मैथिलीक प्रति समर्पित लोकक उपस्थिति ओ अन्त धरि चित-पित मारि ध्यानपूर्वक समूचा कार्यक्रमक आनन्द लेब कार्यक्रमक सफलताकें स्वप्रमाणित करैत छल. कार्यक्रमक सफलतामे कन्त शरण केर सञ्चालनकें कथमपि बिसरल नैं जा सकैत अछि मने जेहने अद्भुत वाचाशक्ति तेहने सुन्नर रोचक शैली. कार्यक्रमक समापन संस्थाक महासचिव संजीव सिन्हाक धन्यवाद ज्ञापनक संग पूर्णरूपेण सफल रहल.