पछिला दू दशक सँ दिल्ली रंगमंचक अधिकाधिक
आयोजन मे रंग प्रशंसकक रूप मे सक्रियता बनल अछि आ तहिना रंगकर्मक क्षेत्र मे मैथिलीक
बहुतो रास इतिहास सेहो बनैत देखल अछि आ ताहि इतिहासक उदाहरण केर रूप मे भारत रंग महोत्सव
सन महत्त्वपूर्ण आयोजन मे भारतक अन्यान्य भाषाक समकक्ष मैथिली कें यथोचित स्थान भेटब
आ देखब प्रायः प्रत्येक रंगप्रेमी हेतु गौरवक विषय रहल अछि.
दिल्लीक रंगमंच सँ मात्र अभिनेते टा नहि
बुझू जे दर्शक केँ सेहो ततबे अनुशासन सिखबाक अवसर भेटलनि अछि आ इएह कारण अछि कार्यक्रम
मे बरू कनेक बिलम्बे सही दर्शक अपन स्थान छेकि प्रारम्भ हेबाक उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा
करैत देखल जाइत छथि. ई कहब अतिशयोक्ति नहि हएत जे दिल्ली वा लगीचक क्षेत्र मे मैथिली
साहित्यक जतेक पाठक तैयार नहि भ' सकल ताहि सँ कएक गुना बेसी रंगप्रेक्षक तैयार भेल
आ से प्रेक्षक तैयार करबा मे नाट्यकर्मी आ नाट्यदलक विभिन्न संस्थाक समेकित प्रयास
सँ सम्भव भेल अछि. कोनो सभागार मे बैसि नाटकक आनंद कोना लेल जाय, कतेक धैर्यसँ आ शान्तिपूर्वक
ढ़ंगे लेल जाय ई ओही प्रयासक परिणाम थिक. किछु दर्शकक एहेन वर्ग तैयार छथि जे दिल्लीक
चाहे जाहि कोनो कोन मे आयोजन हो हुनक सहभागिता सुनिश्चित अछि आ इएह नियमित दर्शक मैथिली
रंगमंचक मूल सफलता आ उपलब्धि थिक.
अस्तु ! आब अबै छी अल्प समय मे शीघ्रता
सँ उदित भेल संस्था 'अपराजिता' जकर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय लोक नाट्य महोत्सव 'रंगनायिका'
सन परिकल्पनाकें सेहो ऐतिहासिक रूप मे देखल जा सकैत अछि. प्रायः दू दिन मे सात गोट
नाटकक मंचन आ सातो नाटक मे एकल अभिनय सेहो मात्र और मात्र स्त्री पात्र द्वारा प्रस्तुत
करब रंगकर्मक क्षेत्र मे मंच पर स्त्रीक नगण्यता सन मिथककें नकारबाक उदाहरण थिक. हालांकि
जेना अंतर्राष्ट्रीय लोक नाट्य उत्सवक परिकल्पना छल एहेन मे कम सँ कम नेपालीय मिथिला
दिसि सँ एको गोट संस्था वा कलाकारक सहभागिता अपेक्षित छल तथापि दिल्ली, पटना, मधुबनी,
पूर्णियाँ, दरभंगा आ मुम्बइ सँ आएल समूह आ कलाकारक सहभागिता सँ आयोजन मे प्रायः भिन्न-भिन्न
विषयक प्रस्तुति एक तरहे आयोजनकें पूर्णता देलक .
उक्त आयोजनक तीनदिवसीय महोत्सव 'रंगनायिका'
क्रमशः १४,१५ आ १६ मइ २०२२ क' राष्ट्रीय राजधानी दिल्लीक ‘मुक्तधारा प्रेक्षागृह, गोल
मार्केट’ मे अपराजिता समूहक संस्थापिका सोनी नीलू झाक संयोजनमे आयोजित कएल गेल जाहिमे
पहिल दू दिन एकल नाटकक मंचन आ अंतिम तेसर दिन विमर्श सत्र आ पुरस्कार एवं सम्मान समारोहक
आयोजन कएल गेल.
कार्यक्रमक विधिवत उद्घाटन मंत्रेश्वर झा,
विभा रानी, ललिता झा, राधा माधव भारद्वाज, प्रदीप बिहारी, भैरव लाल दास, विभा झा आदि
लोकनि दीप प्रज्वलित क' कएलनि. कार्यक्रमक प्रारम्भ सोनी चौधरी द्वारा गोसाओनिक गीत,
सुष्मिता झा द्वारा शारदा स्तुति, आकृति झा द्वारा स्वागत गान, अशिति झा द्वारा गणेश
वंदना पर नृत्य प्रस्तुति आ अतिथि सम्मान सँ प्रारम्भ भेल. मंच सञ्चालनक क्रममे पूनम
भारद्वाजक सारगर्भित शब्दक चयन आ प्रस्तुति सेहो बेस आकर्षक रहल.
पहिल दिनक पहिल नाटक ‘बारहमासा, दिल्ली’क
प्रस्तुति ‘श्याम दरिहरे’क कथा ‘फाटल बियहुती नुआ’क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह मनीषा
मिश्रा आ निर्देशन केलनि मुकेश झा. रंगमंच पर उपस्थितिक हिसाबे मनीषा नव अभिनेत्री
छथि मुदा हिनक लगन आ आत्मविश्वासक संग प्रस्तुत हएब दर्शकक ध्यान केन्द्रित करबामे
सफल रहल. दोसर नाटक ‘भंगिमा, पटना’क प्रस्तुति ‘कुणाल ’ लिखित ‘बुलबुल आ रखबार’क छल
जाहि मे एकल अभिनय केलीह प्रतिभा मिश्रा आ निर्देशन केलनि निखिल रंजन. कीर्तनियाँ शैलीक
एहि नाटक मे मंच पर उपस्थित संगीत समूह मे श्यामा झाक पार्श्व गायन सेहो प्रस्तुतिक
एक मजगूत पक्ष रहल. तेसर आ अन्तिम नाटक 'सुधांशु 'शेखर चौधरी'क लिखल 'लेटाइत आंचर'
आयोजक संस्था ‘अपराजिता, दिल्ली’क प्रस्तुति छल जाहि मे संस्थाक संस्थापिका सोनी नीलू
झा स्वयं अभिनय आ निर्देशन केलनि.
दोसर दिनक पहिल नाटक 'द स्पॉटलाइट थियेटर,
दरभंगा’क प्रस्तुति ‘यात्री जी सहित अन्यान्य कवि/कवयित्री' रचित विभिन्न कविताक समावेश
सँ तैयार कएल नाटक 'निन्नक उत्तरार्द्ध आ स्वप्नक पूर्वार्द्ध'क छल जाहि मे एकल अभिनय
केलीह पल्लवी कुमारी आ निर्देशन केलनि सागर सिंह. दोसर नाटक 'इप्टा, मधुबनी’क प्रस्तुति
प्रसिद्ध लोककथा 'साम-चक'क नाट्य रूपांतरण ‘अविनाश चन्द्र मिश्र'क छल जाहि मे एकल अभिनय
केलीह पूजा कुमारी आ निर्देशन केलनि रंजीत राय. तेसर नाटक 'भरत नाट्य कला केन्द्र,
पूर्णियाँ’क प्रस्तुति 'स्त्री उपेक्षिता'क छल जाहि मे एकल अभिनय केलीह रंजना शर्मा
आ निर्देशन केलनि मिथिलेश राय . ‘उमेश आदित्य'क आलेखक मैथिली नाट्य रूपांतरण सेहो मिथिलेश
रायक छलनि आ अभिनेत्री भोजपुरी भाषी रहितो मैथिली नाटक प्रस्तुत करबामे बेस सफल रहलीह.
चारिम आ अन्तिम नाटक 'अवितोको, मुम्बइ'क प्रस्तुति एवं ‘विभा रानी' लिखित, निर्देशित
आ अभिनीत नाटक 'साध रोए के'क मंचन कएक दृष्टिकोण सँ एकल नाटकक एहि महोत्सवकेँ महत्त्वपूर्ण
बनौलक.
विभा रानी द्वारा प्रस्तुतिक क्रममे नहि
मात्र अभिनय दक्षता देखबा लेल भेटैत अछि अपितु प्रेक्षककेँ मंच सँ निरन्तर ध्यानाकृष्ट
क' रखबाक अद्भुत कला सँ परिचय भेटैछ. ई जतबे नवागन्तुक कलाकार लोकनिक वास्ते प्रेरणा
छथि ततबे मैथिली रंगमंचकें चिरजीवी हेबाक स्वप्नद्रष्टाक रूपमे समाज कें प्रेरित केनिहारि
रंगकर्मी सेहो. मैथिली रंगकर्मक क्षेत्र मे मंचन, प्रेक्षक आ कलाकारक निरन्तर वृद्धि
सँ भविष्यक प्रति आश्वस्त होइत एकर नियमित प्रदर्शन आ विस्तार वास्ते एक स्थायी भवनक
निर्माण हेतु आँचर पसारि स्वैच्छिक सेवादान लेल प्रेरित करैत धनराशि जुटेबाक हिनक शैली
उपस्थित दर्शकक बीच सेहो चर्चाक विषय रहल.
विगत दू दिन मे सात गोट मंचनक संग दू-दिवसीय
एकल नाटकक बाद तेसर दिन मने अन्तिम दिन विमर्श सत्र, सम्मान आ प्रोत्साहन पुरस्कारक
आयोजन परिवर्तित स्थान 'राजा राममोहन राय मेमोरियल'क सभागारमे आयोजित छल. विमर्श सत्र
मे विभा रानी, प्रकाश बंधु, संतोषी कुमार, अरुणाभ सौरभ, नीलेश दीपक, अमित आनन्द आदि
विमर्शकर्ता लोकनिक सहभागिता रहल आ एहि सत्रक सफल संचालन केलनि ऋषि बशिष्ठ.
रंगकर्मक क्षेत्र मे विशेष योगदान देनिहार उत्कृष्ट कलाकारकें प्रत्येक वर्ष दू गोट पुरस्कार क्रमशः ‘डॉ. ललिता झा रंग प्रोत्साहन पुरस्कार' आ 'रुद्र नारायण ठाकुर स्मृति रंग पुरस्कार' देल जेबाक घोषणा भेल अछि जाहिमे एकावन सए टाका आ प्रशस्ति-पत्र प्रदान कएल जाएत. वर्ष २०२२ हेतु 'डॉ. ललिता झा रंग प्रोत्साहन पुरस्कार' मनीषा मिश्राकें आ 'रुद्र नारायण ठाकुर स्मृति रंग पुरस्कार' विभा रानीकें प्रदान कएल गेलनि. एहि तरहे तीन दिवसीय ई आयोजन अनेकानेक दृष्टिए सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल. आयोजन समिति 'अपराजिता' समूहक प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप सँ जूड़ल प्रत्येक सदस्य सहित सोनी नीलू झाकें बधाइ आ मैथिली रंगमंचक इतिहासमे नव-नव कीर्ति स्थापित करबाक सुमंगलकामना.